मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में इंजीनियरों के तबादलों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। BMC ने Junior Engineer (JE), Sub-Engineer और Assistant Engineer (AE) के तबादलों के लिए ऑनलाइन रैंडमाइजेशन आधारित प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य तबादला प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करना और पारदर्शिता बढ़ाना है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब BMC के इंजीनियरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर राजनीतिक सिफारिशों, पक्षपात और कथित ‘ट्रांसफर मार्केट’ जैसे आरोप सामने आते रहे हैं। हाल ही में RTI से मिली जानकारी में BMC के 225 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले या पदोन्नति के लिए राजनीतिक नेताओं की सिफारिशों का उल्लेख सामने आया था।
तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही विभाग में काम करने वालों पर लागू
BMC आयुक्त अश्विनी भिडे की ओर से 2 सितंबर को जारी सर्कुलर के अनुसार, जिन इंजीनियरों ने किसी एक विभाग या सेक्शन में तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा कर लिया है, उन्हें तबादले के लिए ऑनलाइन अपनी पसंद दर्ज करनी होगी। आवेदन प्रक्रिया 5 सितंबर से 20 सितंबर 2026 तक चलेगी।
इस प्रक्रिया में कर्मचारियों को अपनी पसंद के स्थान या विभाग के लिए कम से कम एक और अधिकतम पांच विकल्प देने की सुविधा होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि पसंद दर्ज करने की प्रक्रिया ऑफलाइन नहीं होगी और प्राथमिकताएं कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से दर्ज की जाएंगी।
कंप्यूटर तय करेगा तबादले का विकल्प
नई व्यवस्था में उपलब्ध रिक्त पदों, कर्मचारियों की संख्या और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंप्यूटर प्रणाली तबादले से संबंधित निर्णय लेने में मदद करेगी। यदि कोई पात्र कर्मचारी अपनी पसंद ऑनलाइन दर्ज नहीं करता है, तो उपलब्ध पदों और मानवबल की स्थिति के आधार पर सिस्टम स्वतः तबादले की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
हालांकि, कर्मचारी द्वारा दिए गए विकल्पों में से किसी एक स्थान पर तबादला होना अनिवार्य नहीं है। अंतिम निर्णय उपलब्ध रिक्तियों, प्रशासनिक आवश्यकता और लागू नियमों के आधार पर किया जाएगा।
राजनीतिक हस्तक्षेप कम करने की कोशिश
BMC की इस पहल को इंजीनियरों के तबादलों में कथित राजनीतिक या बाहरी दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पहले इंजीनियरों की पसंदीदा पोस्टिंग को लेकर प्रभाव और सिफारिश के आरोप लगते रहे हैं।
अगस्त में भी BMC ने संकेत दिया था कि इंजीनियरों के तबादलों को सॉफ्टवेयर आधारित रैंडमाइजेशन प्रणाली से करने की तैयारी है। उस समय प्रस्तावित प्रणाली में रिक्तियों और ट्रांसफर की जरूरत का डेटा डालकर पोस्टिंग तय करने की बात कही गई थी।
अब इस व्यवस्था को लागू करने के बाद BMC प्रशासन का लक्ष्य तबादला प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और कम विवेकाधीन बनाना है।
225 तबादलों की सिफारिशों से बढ़ा था विवाद
नई व्यवस्था की पृष्ठभूमि में BMC में सामने आया हालिया RTI खुलासा भी महत्वपूर्ण है। RTI के जवाब में सामने आया कि पिछले एक वर्ष में 225 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले या पदोन्नति के संबंध में विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तर के राजनीतिक नेताओं की सिफारिशों का उल्लेख किया गया था। सूची में Assistant Engineer, Sub-Engineer, Executive Engineer और Junior Engineer जैसे पद शामिल थे।
RTI कार्यकर्ता अनिल गलगली ने इस मामले में पारदर्शी प्रक्रिया और जांच की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि महानगरपालिका में तबादले प्रशासनिक आवश्यकता और निर्धारित मानदंडों के आधार पर होने चाहिए।
इंजीनियरों की विशेषज्ञता भी बनी रहे, इस पर जोर
ऑनलाइन और रैंडमाइजेशन आधारित व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन इंजीनियरों की विशेषज्ञता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
BMC के इंजीनियर अलग-अलग विभागों में लंबे समय तक काम करते हुए विशेष तकनीकी अनुभव हासिल करते हैं। उदाहरण के तौर पर जल विभाग, सड़क, भवन, ड्रेनेज या अन्य तकनीकी विभागों में काम करने वाले इंजीनियरों की विशेषज्ञता अलग होती है। इसलिए केवल रैंडमाइजेशन के आधार पर पोस्टिंग करते समय विभागीय अनुभव को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता बताई गई है।
इंजीनियर्स एसोसिएशन ने भी पारदर्शिता की मांग की
पहले प्रस्तावित सॉफ्टवेयर प्रणाली पर Municipal Engineers’ Association ने भी पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए थे। एसोसिएशन ने रिक्त पदों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने, प्राथमिकता विकल्प देने और तबादले के अंतिम परिणाम को सार्वजनिक करने जैसी मांगें रखी थीं।
एसोसिएशन की मांग थी कि तबादला प्रक्रिया में वरिष्ठता, कार्यकाल, अनुभव, प्रदर्शन और प्रशासनिक जरूरत जैसे पहलुओं को भी उचित महत्व दिया जाए।
पुरानी विवादित प्रक्रिया से अलग होगा नया मॉडल
BMC में इंजीनियरों के तबादलों को लेकर विवाद नया नहीं है। अक्टूबर 2025 में 160 से अधिक इंजीनियरों के तबादले रोक दिए गए थे, जिसके बाद तबादलों में कथित अनियमितताओं और पसंदीदा पोस्टिंग को लेकर सवाल उठे थे। मई 2026 में भी इसी मुद्दे को लेकर नए आरोप सामने आए थे।
ऐसे में नई ऑनलाइन प्रणाली को BMC प्रशासन की ओर से पुराने विवादों का समाधान करने और पूरी प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा?
5 सितंबर से पात्र इंजीनियर ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से अपनी पसंद दर्ज कर सकेंगे और 20 सितंबर तक यह प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद उपलब्ध रिक्तियों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया के जरिए तबादलों की दिशा तय की जाएगी।
नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसमें रिक्तियों का डेटा कितना सटीक रखा जाता है, विशेषज्ञता को कितना महत्व मिलता है और अंतिम तबादला सूची कितनी पारदर्शिता के साथ जारी की जाती है।
कुल मिलाकर, BMC का यह कदम इंजीनियरों के तबादलों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप और मनमानी को कम करने की कोशिश के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी और ऑडिट योग्य तरीके से लागू होता है, तो इससे BMC की ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था में भरोसा बढ़ सकता है।
