मुंबई में ड्रग निर्माण गिरोह पर बड़ी कार्रवाई, UP में कथित यूनिट का पर्दाफाश; करीब 70 किलो मेफेड्रोन जब्त

मुंबई: मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में मीरा-भायंदर–वसई-विरार (MBVV) क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिलने की खबर सामने आई है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के मांडा इलाके में कथित मेफेड्रोन (MD) निर्माण इकाई का पता लगाकर कार्रवाई की है। इस मामले में अब तक करीब 69.8 किलोग्राम मेफेड्रोन, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹139 करोड़ बताई गई है, जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई मुंबई और आसपास के इलाकों में सक्रिय एक बड़े ड्रग नेटवर्क की जांच के दौरान सामने आई। जांच में कथित तौर पर महाराष्ट्र के अलावा गुजरात और उत्तर प्रदेश तक फैले नेटवर्क के संकेत मिले। मामले में अब तक 21 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।

नालासोपारा से शुरू हुई जांच

रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे मामले की जांच की शुरुआत जून 2026 में तुलिंज पुलिस द्वारा दो लोगों को कथित तौर पर MD बेचने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद हुई। इसके बाद मामला क्राइम ब्रांच यूनिट-4 को सौंपा गया।

सीनियर इंस्पेक्टर प्रमोद बड़ख के नेतृत्व में टीम ने कथित ड्रग सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को ऐसे ठिकानों की जानकारी मिली जहां कथित तौर पर ड्रग का निर्माण और फिर उसकी सप्लाई की जाती थी।

प्रयागराज में मिली कथित निर्माण इकाई

जांच के दौरान पुलिस उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के मांडा तक पहुंची। पुलिस के अनुसार वहां एक कथित मेफेड्रोन निर्माण इकाई संचालित की जा रही थी।

पुलिस का दावा है कि यह इकाई लगभग छह महीने से सक्रिय थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने कितने समय तक काम किया और तैयार मादक पदार्थ की सप्लाई किन-किन क्षेत्रों में की गई।

इस कार्रवाई में लगभग 69.8 किलो मेफेड्रोन जब्त किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹139 करोड़ बताई है। इतनी बड़ी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग की बरामदगी को जांच में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

करीब 300 किलो MD की सप्लाई का दावा

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कथित निर्माण इकाई के सक्रिय रहने के दौरान नेटवर्क ने करीब 300 किलो मेफेड्रोन की बिक्री या सप्लाई की हो सकती है।

हालांकि, यह आंकड़ा पुलिस की जांच में सामने आया प्रारंभिक अनुमान है। वास्तविक मात्रा, खरीदारों और सप्लाई चैन का पता विस्तृत जांच और जब्त सामग्री के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

गुजरात में भी यूनिट होने का दावा

जांच में उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात में भी कथित निर्माण गतिविधि का पता चलने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक गुजरात में मौजूद कथित यूनिट पर कार्रवाई से पहले ही आरोपियों ने उसे हटा दिया था।

इससे जांच का दायरा और बढ़ गया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अलग-अलग राज्यों में मौजूद ठिकानों के बीच किस तरह का संपर्क था और मादक पदार्थों को मुंबई क्षेत्र तक कैसे पहुंचाया जाता था।

21 आरोपी अब तक गिरफ्तार

MBVV पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक के अनुसार, इस मामले में अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें कथित सप्लाई और वितरण नेटवर्क से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में 36 वर्षीय मोहम्मद हसीब सिद्दीकी उर्फ एजाज मर्चेंट का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार वह इंजीनियरिंग में BE डिग्रीधारी है और उस पर मुंबई क्षेत्र में MD की कथित सप्लाई से जुड़े होने का आरोप है।

मुंबई में सप्लाई नेटवर्क पर फोकस

इस कार्रवाई की खास बात यह है कि जांच केवल सड़क स्तर पर ड्रग बेचने वालों तक सीमित नहीं रही। क्राइम ब्रांच ने कथित सप्लाई की जड़ तक पहुंचने की कोशिश की और इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में निर्माण इकाई का पता चला।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि जब्त किए गए मादक पदार्थ का संभावित वितरण नेटवर्क किन शहरों तक फैला था और इसमें अन्य कौन-कौन से लोग शामिल हो सकते हैं।

सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ बड़ी चुनौती

मेफेड्रोन एक सिंथेटिक साइकोट्रॉपिक पदार्थ है और भारत में इसका अवैध उत्पादन, बिक्री और वितरण गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में केवल स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय निर्माण, सप्लाई और वितरण की पूरी श्रृंखला को तोड़ना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होती है।

इस मामले में अलग-अलग राज्यों से जुड़े कथित ठिकानों का सामने आना बताता है कि जांच का दायरा स्थानीय पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंच चुका है।

आगे की जांच में क्या सामने आ सकता है?

अब जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल हैं—कथित निर्माण इकाई के पीछे मुख्य संचालक कौन थे, तैयार ड्रग की सप्लाई किन इलाकों में की जाती थी, नेटवर्क में आर्थिक लेन-देन कैसे होता था और इसमें कितने अन्य लोग शामिल हो सकते हैं।

पुलिस जब्त सामग्री, आरोपियों से पूछताछ और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की आगे की कड़ियों को तलाश रही है। साथ ही कथित रूप से पहले सप्लाई किए गए ड्रग की मात्रा और उसके खरीदारों की भी जांच की जा रही है।

ड्रग नेटवर्क को बड़ा झटका

करीब ₹139 करोड़ मूल्य के 69.8 किलो मेफेड्रोन की जब्ती और 21 गिरफ्तारियां इस कार्रवाई को MBVV क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाइयों में शामिल करती हैं।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ रही है और मामले में अन्य गिरफ्तारियां या नेटवर्क से जुड़े नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही इस कथित अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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