मुंबई/नवी मुंबई: वाशी स्थित नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) अस्पताल में एक मरीज को कथित तौर पर मियाद खत्म हो चुकी IV सलाइन/फ्लूइड दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। शुरुआत में मरीज की हालत बिगड़ने के बाद उसे निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया था। हालांकि, 3 सितंबर की ताजा रिपोर्टों के अनुसार मरीज गोपीराम खडसे की इलाज के दौरान मौत हो गई है। मामले की जांच जारी है और फिलहाल यह आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुआ है कि मौत का कारण एक्सपायर्ड सलाइन ही थी।
31 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुए थे मरीज
मृतक 50 वर्षीय गोपीराम भिवाजी खडसे को 31 अगस्त को वाशी के NMMC अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार के अनुसार उन्हें बुखार, चक्कर और कमजोरी की शिकायत थी। परिजनों का दावा है कि शुरुआत में उनकी स्थिति स्थिर थी, लेकिन अस्पताल में सलाइन चढ़ाए जाने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
परिवार का आरोप है कि जिस IV सलाइन की बोतल मरीज को दी गई, उसकी expiry जुलाई 2026 में समाप्त हो चुकी थी। परिजनों के मुताबिक बोतल का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा मरीज को दिए जाने के बाद उन्हें इसकी जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों से सवाल उठाए और मामले में कार्रवाई की मांग की।
सलाइन के बाद तबीयत बिगड़ने का परिवार का दावा
मरीज के बेटे अजय खडसे ने आरोप लगाया कि सलाइन दिए जाने के बाद उनके पिता को तेज खुजली, शरीर पर पित्ती और तेज बुखार जैसी समस्या हुई। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से तत्काल चिकित्सा सहायता देने की अपील की, लेकिन उन्हें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
परिवार ने बाद में सलाइन की बोतल की तस्वीरें भी लेने का दावा किया। इसी आधार पर उन्होंने अस्पताल प्रशासन के सामने शिकायत रखी और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल में किया गया रेफर
मरीज की स्थिति गंभीर होने के बाद उन्हें वाशी के Hiranandani Fortis Hospital में स्थानांतरित किया गया, जहां उन्हें ICU में भर्ती किया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया था कि अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी।
हालांकि, 3 सितंबर को सामने आई ताजा जानकारी के अनुसार इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम के बाद परिवार और समर्थकों का गुस्सा और बढ़ गया है तथा अस्पताल प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
NMMC ने जांच समिति बनाई
मामला सामने आने के बाद NMMC प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक जांच में यह देखा जाएगा कि कथित तौर पर एक्सपायर्ड सलाइन मरीज तक कैसे पहुंची और उसे लगाने से पहले उसकी expiry date की जांच क्यों नहीं की गई।
NMMC के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. रवींद्र म्हात्रे के अनुसार, मरीज को 31 अगस्त को भर्ती किया गया था। उन्होंने बताया कि शुरुआत में मरीज की स्थिति स्थिर थी, लेकिन अगले दिन उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
NMMC ने बीमारी को भी बताया महत्वपूर्ण कारण
NMMC अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि मरीज की तबीयत बिगड़ने का कारण केवल कथित एक्सपायर्ड सलाइन को मान लेना जल्दबाजी होगी। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मरीज की जांच में डेंगू और फाल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि हुई थी और वह पहले से मधुमेह तथा हाई ब्लड प्रेशर से भी पीड़ित थे।
NMMC स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष डॉ. जयाजी नाथ ने कहा कि कथित एक्सपायर्ड IV फ्लूइड की भूमिका जांच का विषय है। उनके अनुसार मरीज की गंभीर स्थिति के पीछे उसकी मौजूदा बीमारियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच में केवल दवा या सलाइन के स्टॉक की जांच ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल स्टोर से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। अस्पताल में किसी भी IV फ्लूइड या दवा को मरीज को देने से पहले उसकी expiry date और बैच संबंधी जानकारी जांचना महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
अब जांच समिति यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित एक्सपायर्ड बोतल अस्पताल के स्टॉक में कैसे मौजूद थी और मरीज को दिए जाने से पहले निर्धारित जांच प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।
परिवार ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
घटना के बाद मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया और जिम्मेदार डॉक्टरों तथा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिवार का आरोप है कि अगर समय पर उचित चिकित्सा ध्यान दिया जाता और एक्सपायर्ड सलाइन मरीज को नहीं दी जाती, तो स्थिति अलग हो सकती थी।
परिवार की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
सरकारी अस्पतालों में दवा प्रबंधन पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी और महानगरपालिका अस्पतालों में दवाओं तथा मेडिकल सप्लाई के स्टॉक प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी भी अस्पताल में दवाओं की expiry, स्टोरेज, वितरण और मरीज को देने से पहले सत्यापन की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है।
NMMC ने हाल के महीनों में अपने अस्पतालों में दवाओं, स्टाफ, साफ-सफाई और मरीजों की देखभाल की निगरानी के लिए विशेष अस्पताल निरीक्षकों की नियुक्ति भी की थी। ऐसे में कथित एक्सपायर्ड IV फ्लूइड का मामला प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या एक्सपायर्ड सलाइन और मरीज की हालत बिगड़ने या मौत के बीच कोई सीधा चिकित्सकीय संबंध था? इसका जवाब जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
NMMC प्रशासन ने संकेत दिया है कि जांच समिति की रिपोर्ट में यदि किसी डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टोर कर्मचारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने मरीजों की सुरक्षा, अस्पतालों में दवा प्रबंधन और चिकित्सा कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। फिलहाल एक्सपायर्ड सलाइन दिए जाने का आरोप जांच के अधीन है और इसे मरीज की मौत का स्थापित कारण नहीं माना जा सकता।
