पुणे के भोर में बिजली परियोजना का किसानों ने किया विरोध, मुख्यमंत्री ने बातचीत से समाधान का दिया आश्वासन

पुणे/भोर: पुणे जिले के भोर तालुका में प्रस्तावित बड़ी बिजली परियोजना को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच विवाद सामने आया है। भोंगावली में प्रस्तावित GIS सबस्टेशन और 765 kV ग्रीन कॉरिडोर से प्रभावित किसानों ने परियोजना का विरोध करते हुए अपनी आपत्तियां प्रशासन के सामने रखी हैं। किसानों का कहना है कि परियोजना के लिए जमीन और कृषि क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।

प्रस्तावित परियोजना को महाराष्ट्र में बिजली पारेषण व्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, परियोजना के लिए आवश्यक जमीन और बिजली की हाई-वोल्टेज लाइनों के मार्ग को लेकर स्थानीय किसानों में चिंता है।

भोंगावली में परियोजना का विरोध

भोर तालुका के भोंगावली क्षेत्र में प्रस्तावित GIS सबस्टेशन और 765 kV क्षमता वाले ग्रीन कॉरिडोर को लेकर प्रभावित किसानों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। किसानों का कहना है कि बिजली परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण या बिजली लाइनों के निर्माण से उनकी खेती प्रभावित हो सकती है।

कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। इसलिए किसान चाहते हैं कि परियोजना से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले उनकी आपत्तियों और समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए।

किसानों ने मुख्यमंत्री के सामने रखीं समस्याएं

परियोजना से प्रभावित किसानों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताओं को सरकार के सामने रखा। किसानों ने मांग की कि परियोजना की योजना बनाते समय स्थानीय परिस्थितियों और कृषि भूमि को ध्यान में रखा जाए। इसके अलावा, जिन किसानों की जमीन या खेती प्रभावित होती है, उनके हितों की पर्याप्त सुरक्षा की जाए।

किसानों की ओर से मुआवजे, जमीन के इस्तेमाल, बिजली लाइनों के मार्ग और भविष्य में होने वाले संभावित नुकसान जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं का विरोध करना उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन किसानों के हितों की अनदेखी करके कोई भी परियोजना आगे नहीं बढ़नी चाहिए।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने दिया बातचीत का भरोसा

विरोध के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि किसानों की समस्याओं को समझने और उनके साथ चर्चा के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद किसानों को उम्मीद है कि परियोजना से जुड़े भूमि और अन्य मुद्दों पर प्रशासन उनकी बात सुनेगा। बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा जिससे बिजली परियोजना का विकास भी जारी रहे और किसानों को अनावश्यक नुकसान भी न उठाना पड़े।

765 kV ग्रीन कॉरिडोर क्यों महत्वपूर्ण?

765 kV ग्रीन कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं का उद्देश्य बड़े पैमाने पर बिजली के पारेषण के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार करना होता है। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली को विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन नेटवर्क की आवश्यकता होती है।

महाराष्ट्र में भविष्य की बिजली मांग बढ़ने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार को देखते हुए ऐसे पारेषण प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण माने जाते हैं। GIS यानी Gas Insulated Substation तकनीक का इस्तेमाल कम जगह में उच्च क्षमता वाले विद्युत उपकरण स्थापित करने के लिए किया जाता है।

हालांकि, बड़े बिजली प्रोजेक्टों के लिए जमीन और ट्रांसमिशन लाइन का मार्ग तय करते समय स्थानीय लोगों की चिंताओं को दूर करना भी उतना ही जरूरी है।

समाधान पर टिकी नजर

भोंगावली के किसानों के विरोध के बाद अब सबकी नजर सरकार और प्रभावित किसानों के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो परियोजना से जुड़े काम को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है।

फिलहाल मुख्यमंत्री के आश्वासन से किसानों को उम्मीद जगी है कि उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाएगा। आने वाले दिनों में भूमि, मुआवजे और परियोजना के प्रभाव से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा यह तय करेगी कि भोंगावली में प्रस्तावित GIS सबस्टेशन और 765 kV ग्रीन कॉरिडोर को लेकर आगे की स्थिति क्या रहती है।

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