गडचिरोली में प्रसव के दौरान मां और नवजात की मौत, 15 दिनों में तीसरी घटना से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

गडचिरोली: महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। जिले में महज 15 दिनों के भीतर मां और नवजात की मौत की यह तीसरी घटना बताई जा रही है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने जिले की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

31 वर्षीय महिला और नवजात की मौत

जानकारी के अनुसार, धानोरा तालुका के मुरुमगांव की 31 वर्षीय दिव्या रामसिंग उसेंडी को 8 सितंबर को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें आगे के इलाज के लिए गडचिरोली स्थित महिला एवं बाल अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में प्रसव के दौरान दिव्या और उनके नवजात बच्चे दोनों की मौत हो गई।

प्रसव की तारीख नजदीक आने पर गांव लौटी थीं

रिपोर्ट के मुताबिक, दिव्या रोजगार के सिलसिले में तमिलनाडु गई थीं। प्रसव की तारीख नजदीक आने के बाद वह कुछ दिन पहले अपने गांव मुरुमगांव वापस लौटी थीं। 8 सितंबर को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिवार उन्हें स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा। बाद में गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें गडचिरोली के महिला एवं बाल अस्पताल में रेफर किया गया।

15 दिनों में तीसरी मातृ-शिशु मृत्यु

इस घटना से पहले भी गडचिरोली के महिला एवं बाल अस्पताल में दो ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 23 अगस्त को चामोर्शी तालुका के जामगिरी की 23 वर्षीय जिजा हंसराज सातर और उनके बच्चे की प्रसव के दौरान मौत हुई थी। इसके बाद 29 अगस्त को चंद्रपुर जिले के नागभीड़ तालुका के कोजबी की 28 वर्षीय नाजुका दिवाकर राऊत की भी प्रसव के दौरान मौत हुई।

लगातार तीसरी घटना सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

समय पर इलाज नहीं मिलने के आरोप

पहले के मामलों में परिजनों की ओर से समय पर उचित उपचार नहीं मिलने और लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। इन मामलों की जांच की जानकारी सामने आई है। हालांकि, तीसरी घटना के बाद भी प्रशासन की ओर से प्रत्येक मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

जिला शल्य चिकित्सक ने अस्पताल का दौरा किया

घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला शल्य चिकित्सक डॉ. वर्षा लहाडे ने महिला एवं बाल अस्पताल का दौरा कर मामले की जानकारी ली। उन्होंने मातृ एवं शिशु मृत्यु को कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण और उचित चिकित्सा उपचार जरूरी बताया।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल

गडचिरोली जैसे बड़े और भौगोलिक रूप से दुर्गम जिले में गर्भवती महिलाओं को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। लेकिन लगातार एक ही अस्पताल में माता और नवजात की मौत की घटनाएं सामने आने से रेफरल व्यवस्था, आपातकालीन उपचार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और प्रसूति सेवाओं की समीक्षा की मांग जोर पकड़ रही है।

उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही की मांग

लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदारी तय करने और स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार की मांग की जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि पहले की घटनाओं के बाद यदि समय रहते कमियां दूर की जातीं, तो क्या तीसरी घटना को टाला जा सकता था।

फिलहाल इस मामले में मौत का सटीक चिकित्सकीय कारण और किसी विशेष व्यक्ति की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। इसलिए लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जानी चाहिए।

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