महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर बड़ी चिंता, SIR के बाद 2 करोड़ से ज्यादा नाम प्रारूप सूची में नहीं

मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं होने से चिंता बढ़ गई है। 31 अगस्त को जारी प्रारूप सूची के अनुसार, SIR से पहले राज्य में करीब 9.78 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि प्रारूप सूची में लगभग 7.72 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। यानी करीब 2.07 करोड़ नाम इस चरण में प्रारूप सूची में नहीं हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रारूप सूची से नाम गायब होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटा दिया गया है। पात्र मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने तथा जरूरत पड़ने पर दावा या आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया गया है।

किन कारणों से नाम प्रारूप सूची में नहीं आए?

SIR के दौरान मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया। सत्यापन प्रक्रिया में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे रिकॉर्ड जैसी श्रेणियों में आने वाले नामों को प्रारूप सूची में शामिल नहीं किया गया। पुणे जिले में ही 28.66 लाख नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हो सके, जबकि राज्य के कई अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में नाम प्रभावित हुए हैं।

मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नाम प्रारूप सूची से बाहर रहने के कारण इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में रोजगार और शिक्षा के लिए बड़ी आबादी के स्थानांतरण को देखते हुए मतदाता रिकॉर्ड का सही सत्यापन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मतदाताओं के लिए अब क्या करना जरूरी?

चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम जरूर जांचें। महाराष्ट्र के मतदाता अब अपने नाम की तलाश EPIC नंबर, व्यक्तिगत जानकारी या मोबाइल नंबर जैसी सुविधाओं के माध्यम से कर सकते हैं। राज्य के चुनाव कार्यालय ने नाम खोजने की सुविधा को आसान बनाने के लिए कई विकल्प उपलब्ध कराए हैं।

अगर किसी पात्र मतदाता का नाम प्रारूप सूची में नहीं है, तो उसे निर्धारित अवधि में दावा दाखिल कर नाम शामिल कराने का अवसर मिलेगा। नाम शामिल कराने के लिए Form 6 का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि मतदाता विवरण में सुधार के लिए संबंधित निर्धारित फॉर्म का उपयोग किया जाता है। दावे और आपत्तियां 30 सितंबर 2026 तक दाखिल की जा सकती हैं।

अंतिम सूची से पहले सुधार का मौका

SIR की प्रारूप सूची को अंतिम सूची नहीं माना जाना चाहिए। इस चरण का उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड की जांच और आवश्यक सुधार करना है। जिन लोगों के नाम गलती से छूट गए हैं, वे समय सीमा के भीतर संबंधित दस्तावेजों के साथ दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।

चुनाव अधिकारियों द्वारा प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसलिए मतदाताओं के लिए अभी सबसे जरूरी कदम यही है कि वे अपना नाम, पता और अन्य विवरण प्रारूप सूची में जांच लें।

मतदाताओं से सतर्क रहने की अपील

मतदाता सूची में नाम होना मतदान के अधिकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में नागरिकों को आखिरी समय का इंतजार किए बिना अपना रिकॉर्ड जांच लेना चाहिए। खासकर वे लोग जिन्होंने हाल में अपना घर बदला है, जिनके पते में बदलाव हुआ है या जिनका नाम खोजने में परेशानी आ रही है, उन्हें संबंधित चुनाव कार्यालय या BLO (Booth Level Officer) से संपर्क करना चाहिए।

महाराष्ट्र में SIR के बाद 2 करोड़ से अधिक नामों का प्रारूप सूची में शामिल न होना एक बड़ा आंकड़ा है, लेकिन यह अंतिम स्थिति नहीं है। पात्र मतदाताओं के पास अपने नाम की जांच करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा दाखिल करने का अवसर मौजूद है।

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