नाशिक: वर्ष 2027 में होने वाले नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों के बीच तपोवन क्षेत्र में प्रस्तावित वृक्षतोड़ को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। तपोवन में साधुग्राम और अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्तावित हजारों पेड़ों की कटाई से संबंधित याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने अंतिम सुनवाई 10 दिन बाद रखने का निर्णय लिया है।
तपोवन में वृक्षतोड़ का मामला क्या है?
सिंहस्थ कुंभमेले के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए तपोवन क्षेत्र में साधुग्राम सहित विभिन्न बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके लिए सड़क, आंतरिक मार्ग, पानी, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इसी विकास के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने आपत्ति जताई है।
हाईकोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
तपोवन में प्रस्तावित वृक्षतोड़ के खिलाफ पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में मामला चल रहा था। NGT की ओर से वृक्षतोड़ पर रोक लगाए जाने के बाद इस रोक को हटाने के लिए नाशिक महानगरपालिका ने हाईकोर्ट का रुख किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामला हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आया।
महानगरपालिका का क्या कहना है?
नाशिक महानगरपालिका का कहना है कि सिंहस्थ कुंभमेले के लिए आवश्यक विकास कार्यों के लिए कुछ स्थानों पर पेड़ों को हटाना जरूरी है। महानगरपालिका के अनुसार, संबंधित प्राधिकरणों से अनुमति लेने के बाद ही वृक्षतोड़ की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का तर्क है कि कुंभमेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए सड़क और अन्य सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं की आपत्ति
दूसरी ओर, पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक तपोवन जैसे धार्मिक एवं पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुंभमेले की तैयारियों के नाम पर प्राकृतिक विरासत को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। कार्यकर्ताओं ने पारदर्शिता और विकास योजनाओं की दोबारा समीक्षा की मांग की है।
साधुग्राम का विस्तार भी प्रस्तावित
सिंहस्थ कुंभमेले के लिए तपोवन और आसपास के क्षेत्र में बड़े स्तर पर साधुग्राम विकसित करने की योजना है। हालिया जानकारी के अनुसार, नाशिक महानगरपालिका करीब 1,150 एकड़ क्षेत्र में साधुग्राम विकसित करने की तैयारी कर रही है। यहां अखाड़ों और साधु-संतों के ठहरने के साथ-साथ पानी, स्वच्छता और आंतरिक सड़कों जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं।
इसके अलावा, महानगरपालिका ने तपोवन में साधुग्राम के लिए 191 एकड़ जमीन के स्थायी अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की है। इसके लिए राज्य सरकार ने ₹2,200 करोड़ की राशि मंजूर की है।
अब 10 दिन बाद होगी अंतिम सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। इसके बाद करीब 10 दिन बाद मामले की अंतिम सुनवाई होगी। इस सुनवाई में तपोवन में प्रस्तावित वृक्षतोड़ और कुंभमेले से जुड़े विकास कार्यों को लेकर अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विकास बनाम पर्यावरण पर नजर
सिंहस्थ कुंभमेले के लिए नाशिक में बड़े पैमाने पर सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचे के काम चल रहे हैं। सरकार और प्रशासन इसे लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी बता रहे हैं, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता विकास के साथ पेड़ों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
अब सभी की नजर हाईकोर्ट की आगामी अंतिम सुनवाई पर है। कोर्ट के फैसले से तपोवन में प्रस्तावित वृक्षतोड़ और उससे जुड़े कुंभ विकास कार्यों की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
