नागपुर: डिघोरी के एक गंभीर अपराध मामले की जांच में पुलिस ने डिजिटल सबूतों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। मामले में जब्त किए गए आरोपी के मोबाइल फोन और लैपटॉप का क्लोन तैयार किया जा रहा है, ताकि डिलीट किए गए चैट, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा सके।
पुलिस को आशंका है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मौजूद हो सकते हैं। इसी वजह से मूल डिवाइस के डेटा के साथ छेड़छाड़ किए बिना उसकी डिजिटल कॉपी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
डिलीट चैट और मीडिया की होगी जांच
मोबाइल और लैपटॉप की फोरेंसिक जांच के दौरान डिलीट किए गए मैसेज, चैट, फोटो, वीडियो, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल फाइलों को रिकवर करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
डिलीट किए गए डेटा की जांच से पुलिस को आरोपी की गतिविधियों, संपर्कों और मामले से जुड़े घटनाक्रम को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल सबूतों से जुड़ सकते हैं अहम सुराग
आधुनिक आपराधिक जांच में मोबाइल फोन और लैपटॉप से मिलने वाले डिजिटल सबूत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी घटना से पहले और बाद में हुई बातचीत, लोकेशन संबंधी जानकारी, इंटरनेट गतिविधियां और फाइलों का आदान-प्रदान जांच को नई दिशा दे सकता है।
इसी को देखते हुए पुलिस जब्त किए गए उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। क्लोन तैयार करने के बाद प्राप्त डेटा का फोरेंसिक तरीके से परीक्षण किया जाएगा।
फोरेंसिक जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर
पुलिस का उद्देश्य डिजिटल उपकरणों से उपलब्ध अधिकतम जानकारी को सुरक्षित तरीके से हासिल करना है। क्लोनिंग और फोरेंसिक विश्लेषण पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि डिलीट किए गए डेटा में मामले से संबंधित कोई महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद है या नहीं।
फिलहाल डिघोरी मामले की जांच जारी है और पुलिस डिजिटल सबूतों के साथ अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां तलाश रही है।
