मुंबई: मुंबई में टैक्सी और कैब सेवाओं में यात्रियों से टिप लेने की व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, टिप पूरी तरह वैकल्पिक होगी और यात्री अपनी इच्छा के अनुसार ही टिप दे सकेंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों पर किसी भी तरह से टिप देने का दबाव नहीं बनाया जा सकता। साथ ही, टिप को यात्रा शुरू होने से पहले या बुकिंग के दौरान अनिवार्य शुल्क की तरह नहीं जोड़ा जा सकेगा।
यात्रा पूरी होने के बाद ही दी जा सकेगी टिप
नई व्यवस्था के तहत यात्री को टिप देने का विकल्प यात्रा पूरी होने के बाद उपलब्ध कराया जाएगा। इसका मतलब है कि कैब बुक करते समय या राइड शुरू होने से पहले यात्री से टिप की मांग या उसे टिप के लिए प्रेरित करने वाली अनिवार्य व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
यात्री अपनी सेवा के अनुभव के आधार पर राइड पूरी होने के बाद टिप देना चाहता है तो वह अपनी इच्छा से ऐसा कर सकता है।
टिप नहीं देने पर राइड रद्द नहीं कर सकेगा ड्राइवर
केंद्र सरकार के निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि टिप नहीं देने के कारण ड्राइवर यात्री की राइड रद्द नहीं कर सकता। टिप को सेवा की अनिवार्य शर्त नहीं बनाया जा सकेगा।
इसका उद्देश्य यात्रियों को बिना किसी दबाव के कैब सेवा का उपयोग करने का अधिकार देना है। टिप और यात्रा शुल्क को अलग-अलग रखने पर जोर दिया गया है।
कैब कंपनियों की व्यवस्था पर भी नजर
सरकार के निर्देशों के बाद कैब एग्रीगेटर्स और टैक्सी कंपनियों को अपनी ऐप और भुगतान व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं। टिप का विकल्प ऐसा होना चाहिए जिससे यात्री को स्पष्ट रूप से पता रहे कि यह भुगतान अनिवार्य नहीं है।
इससे यात्रियों को यात्रा की वास्तविक कीमत और वैकल्पिक टिप के बीच अंतर समझने में आसानी होगी।
यात्रियों के अधिकार होंगे और स्पष्ट
टिप को लेकर स्पष्ट नियम लागू होने से यात्रियों को अतिरिक्त भुगतान के संबंध में अधिक पारदर्शिता मिलने की उम्मीद है। यदि यात्री टिप नहीं देना चाहता, तो केवल इसी वजह से उसकी सेवा प्रभावित नहीं की जा सकेगी।
मुंबई जैसे बड़े शहर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग टैक्सी और ऐप-आधारित कैब सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में टिप व्यवस्था को लेकर केंद्र के ये निर्देश यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
