मुंबईकरों के लिए सुरक्षित लोकल यात्रा की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही स्वचालित बंद दरवाजों वाली नॉन-एसी लोकल ट्रेन को लेकर नई तकनीकी अड़चन सामने आई है। सुरक्षा परीक्षण के दौरान तकनीकी और यांत्रिक समस्याएं मिलने के कारण इस सेवा की शुरुआत फिलहाल टल गई है।
सुरक्षा परीक्षण में मिली तकनीकी खामियां
मध्य रेलवे की इस नई लोकल के सुरक्षा परीक्षण के दौरान ट्रेन के संचालन और तकनीकी मानकों से जुड़ी कुछ समस्याएं सामने आईं। परीक्षण में कंपन, गति, स्थिरता और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की गई। इन कमियों को दूर करना जरूरी बताया गया है।
रेक को ICF भेजने की तैयारी
तकनीकी सुधार के लिए परीक्षण में इस्तेमाल की गई एक रेक को चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) वापस भेजने की तैयारी है। कुर्ला कारशेड में मौजूद दूसरी रेक की भी जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसे भी ICF भेजा जा सकता है।
यात्रियों की सुरक्षा है मुख्य उद्देश्य
यह 12 डिब्बों वाली नॉन-एसी लोकल स्वचालित दरवाजों से लैस है। इसका उद्देश्य चलती ट्रेन के दरवाजों पर लटककर यात्रा करने और यात्रियों के गिरने जैसी दुर्घटनाओं को कम करना है। रेलवे ने पहले भी ऐसी ऑटोमैटिक-डोर वाली नॉन-एसी लोकल विकसित करने की जानकारी दी थी।
मुंबईकरों को करना होगा और इंतजार
तकनीकी खामियों को दूर करने और सभी जरूरी सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद ही इस लोकल को नियमित यात्री सेवा में शामिल किया जाएगा। इसलिए मुंबईकरों को बंद दरवाजे वाली सुरक्षित नॉन-एसी लोकल के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।
