नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद महाराष्ट्र के 67 तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के अब तक अनट्रेस्ड होने की खबर से उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र सरकार और संबंधित एजेंसियां इन लोगों का पता लगाने के लिए प्रयास कर रही हैं, लेकिन बाढ़ से प्रभावित दुर्गम इलाकों में संचार व्यवस्था और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण राहत एवं खोज अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये महाराष्ट्रवासी नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में यात्रा पर गए थे। इनमें कुछ लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े थे। बाढ़ आने के समय कई यात्री रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र और सीमा के आसपास मौजूद थे। यही इलाका फ्लैश फ्लड से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने सड़कें, पुल और संपर्क मार्गों को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसके कारण यात्रियों से संपर्क टूट गया।
मुंबई के एक परिवार के सदस्य सीजी रामकृष्णन ने बताया कि उनके रिश्तेदार वेंकट और अन्य परिवारजन कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे। परिवार को आखिरी संदेश तिमुरे क्षेत्र से मिला था, जिसके बाद उनका फोन संपर्क से बाहर हो गया। परिवार लगातार भारतीय, नेपाली और चीनी अधिकारियों से संपर्क कर अपने परिजनों की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है। परिजनों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कई मोबाइल फोन बंद या पहुंच से बाहर हैं और अब तक उनकी स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।
इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाया है। राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र के जरिए नेपाल और चीन में फंसे महाराष्ट्रवासियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे पहले कई नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है। रविवार को सरकार ने जानकारी दी कि 69 महाराष्ट्रवासी चीन के कोदारी इमिग्रेशन सेंटर से नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं और उनके 31 अगस्त को मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। इससे उनके परिवारों को कुछ राहत मिली है।
हालांकि, 67 लोगों का अब भी पता नहीं चलना प्रशासन और परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। शुरुआती रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी। 28 अगस्त को कुछ रिपोर्टों में 60 से अधिक लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी, जबकि ताजा रिपोर्ट में यह संख्या 67 बताई गई है।
नेपाल में प्राकृतिक आपदा का असर बेहद व्यापक रहा है। फ्लैश फ्लड के कारण कई इलाकों में भारी तबाही हुई और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। खराब मौसम, भूस्खलन और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी कठिनाई हो रही है। ऐसे हालात में महाराष्ट्र के लापता नागरिकों की तलाश प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
फिलहाल 67 महाराष्ट्रवासियों के परिवार अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सरकार और बचाव एजेंसियों की कोशिश है कि प्रभावित क्षेत्रों से अधिक से अधिक जानकारी जुटाई जाए और संपर्क से बाहर लोगों का जल्द पता लगाया जाए। अब सभी की नजर राहत एवं खोज अभियान की अगली जानकारी पर है।
