मुंबई। देशभर के साथ महाराष्ट्र में भी आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्साह देखने को मिल रहा है। 4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर रहे हैं।
जन्माष्टमी के मौके पर महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में मंदिरों और धार्मिक स्थलों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल रूप में झांकियां तैयार की गई हैं। कई स्थानों पर फूलों, रोशनी और रंग-बिरंगी सजावट के जरिए मंदिर परिसर को विशेष रूप दिया गया है।
आधी रात को होगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु रात तक उपवास और पूजा करते हैं तथा मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।
मंदिरों में रात के समय विशेष आरती और पूजा का आयोजन किया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान कराने के बाद नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
मुंबई और पुणे में विशेष आयोजन
मुंबई और पुणे समेत महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। कई मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रीकृष्ण की झांकियां और भजन संध्या आयोजित की जा रही हैं।
मुंबई में कई इलाकों में कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर भक्तिमय कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वहीं पुणे में भी मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं की ओर से पूजा, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम रखे गए हैं।
दही-हांडी की भी रहेगी धूम
महाराष्ट्र में जन्माष्टमी के साथ दही-हांडी उत्सव का भी विशेष महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप और उनकी माखन चोरी की लीलाओं की याद में विभिन्न स्थानों पर दही-हांडी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर बांधी गई हांडी फोड़ने का प्रयास करते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम देखने के लिए एकत्र होते हैं। कई स्थानों पर प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।
घरों में भी दिख रहा उत्साह
जन्माष्टमी को लेकर घरों में भी विशेष तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और उन्हें नए कपड़े पहनाकर झूले में विराजमान करते हैं। कई परिवारों में भगवान कृष्ण के लिए विशेष भोग तैयार किया जाता है।
महिलाएं और बच्चे भी जन्माष्टमी की तैयारियों में उत्साह से हिस्सा लेते हैं। घरों में छोटी-छोटी कृष्ण झांकियां सजाई जाती हैं और रात में परिवार के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।
उपवास और धार्मिक अनुष्ठान
जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं। दिनभर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण, मंत्र जाप और धार्मिक पाठ किया जाता है। कई मंदिरों में भागवत कथा और कृष्ण लीला से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद भक्त आरती करते हैं और प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत पूरा करते हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था पर भी नजर
बड़े मंदिरों और सार्वजनिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आयोजकों की ओर से व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। मंदिर परिसरों में भीड़ प्रबंधन, पार्किंग और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।
कुल मिलाकर, जन्माष्टमी के अवसर पर महाराष्ट्र में आज भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। मंदिरों की आकर्षक सजावट, विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, कृष्ण झांकियां और दही-हांडी जैसे कार्यक्रमों के कारण पूरे राज्य में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उत्साह देखने को मिल रहा है।
