मुंबई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्मार्ट ग्लास, स्मार्ट गॉगल्स और कैमरा वाले पहनने योग्य उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इनके सुरक्षित और नियंत्रित उपयोग के लिए नियम बनाने की पहल शुरू की है। सरकार ने इसके लिए एक सदस्यीय समिति गठित की है, जो इन उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत Standard Operating Procedure (SOP) तैयार करेगी।
चार महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश
सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य साइबर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) करेंगे। समिति को AI स्मार्ट ग्लास और अन्य संबंधित वियरेबल डिवाइस की तकनीकी क्षमताओं और संभावित जोखिमों का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपनी होगी।
रिपोर्ट तैयार करने के लिए समिति को चार महीने का समय दिया गया है।
सुरक्षा और निजता पर रहेगा फोकस
AI स्मार्ट ग्लास में वीडियो रिकॉर्डिंग, लाइव स्ट्रीमिंग, चेहरे की पहचान और डेटा संग्रह जैसी सुविधाएं हो सकती हैं। ऐसे उपकरणों के गलत इस्तेमाल से नागरिकों की निजता, डेटा सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हो सकती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित SOP में इन उपकरणों के इस्तेमाल से जुड़े सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी दिशा-निर्देश शामिल किए जाने की उम्मीद है।
संवेदनशील स्थानों पर इस्तेमाल को लेकर नियम
सरकार विशेष रूप से ऐसे संवेदनशील स्थानों पर AI स्मार्ट ग्लास के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम तैयार करना चाहती है, जहां वीडियो रिकॉर्डिंग या डेटा संग्रह सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
इनमें सरकारी कार्यालय, पुलिस स्टेशन, अदालतें, हवाई अड्डे और रक्षा से जुड़े संवेदनशील स्थान शामिल हो सकते हैं।
AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कदम
महाराष्ट्र सरकार ने 2026 में अपनी AI नीति भी जारी की है, जिसमें राज्य में AI के जिम्मेदार और प्रभावी इस्तेमाल के लिए शासन ढांचे पर जोर दिया गया है। स्मार्ट ग्लास जैसे नए AI उपकरणों के लिए अलग SOP तैयार करने की पहल इसी व्यापक तकनीकी और सुरक्षा ढांचे का हिस्सा मानी जा रही है।
सरकार का उद्देश्य AI आधारित वियरेबल तकनीक के इस्तेमाल को रोकना नहीं, बल्कि सुरक्षा, निजता और जिम्मेदार उपयोग के बीच संतुलन बनाना है। समिति की रिपोर्ट के बाद इन उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर अधिक स्पष्ट नियम सामने आने की उम्मीद है।
