आवास पुनर्विकास को सरकार का बढ़ावा, मुंबई समेत महाराष्ट्र में अटकी परियोजनाओं को मिल सकती है गति

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की ओर से सरकारी जमीन के आवंटन और सहकारी आवास सोसायटियों से जुड़े फैसलों के बाद राज्य में आवास पुनर्विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है। खासकर मुंबई और आसपास के शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से जमीन और स्वामित्व से जुड़े मामलों के कारण अटकी हाउसिंग सोसायटियों के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार ने सहकारी आवास सोसायटियों को सरकारी जमीन आवंटित करने पर लगी रोक हटाने का फैसला किया है। इसके बाद पात्र सोसायटियों से जुड़े जमीन आवंटन प्रस्तावों पर आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इससे पुनर्विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता आसान होने की उम्मीद है।

पुरानी सोसायटियों के लिए अहम फैसला

मुंबई में बड़ी संख्या में पुरानी इमारतें और सहकारी आवास सोसायटियां हैं। कई मामलों में जमीन के स्वामित्व और कन्व्हेअन्स से जुड़े मुद्दों के कारण पुनर्विकास की प्रक्रिया वर्षों तक आगे नहीं बढ़ पाती।

सरकार के फैसले के बाद ऐसी सोसायटियों को अपने जमीन संबंधी अधिकार स्पष्ट कराने और पुनर्विकास की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

डीम्ड कन्व्हेअन्स से मिल सकती है मदद

पुनर्विकास प्रक्रिया में डीम्ड कन्व्हेअन्स को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके जरिए सोसायटी को जमीन और इमारत पर अपने कानूनी अधिकार स्थापित करने में मदद मिलती है।

अगर कन्व्हेअन्स की प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है, तो सोसायटियों के लिए पुनर्विकास परियोजना की योजना बनाना और उसे लागू करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

स्व-पुनर्विकास को भी मिल सकता है बढ़ावा

सरकारी फैसलों से स्व-पुनर्विकास (Self-Redevelopment) की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। इसमें हाउसिंग सोसायटी किसी बाहरी डेवलपर पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय खुद परियोजना को आगे बढ़ा सकती है।

स्व-पुनर्विकास के समर्थकों का मानना है कि इससे सोसायटी के सदस्यों को परियोजना की लागत, डिजाइन, समयसीमा और अन्य महत्वपूर्ण फैसलों पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है।

मुंबई के साथ अन्य शहरों पर भी असर

सरकारी जमीन और सहकारी आवास सोसायटियों से जुड़े फैसलों का असर केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, नासिक और अन्य शहरी क्षेत्रों में भी जमीन और पुनर्विकास से जुड़े मामलों को इससे अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।

हालांकि, प्रत्येक सोसायटी को जमीन आवंटन और पुनर्विकास के लिए निर्धारित नियमों, पात्रता और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार के हालिया फैसलों को आवास क्षेत्र और विशेष रूप से पुरानी सहकारी हाउसिंग सोसायटियों के पुनर्विकास के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कितनी अटकी परियोजनाएं वास्तव में आगे बढ़ पाती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link