मनोज जरांगे का आंदोलन जारी, मराठा आरक्षण की मांग पर अड़े; 12 सितंबर को आगे की रणनीति का ऐलान

जालना: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक रूप से चर्चा के केंद्र में है। मनोज जरांगे पाटील का अंतरवाली सराटी में आमरण अनशन जारी है। 11 सितंबर 2026 को उनके आंदोलन का 14वां दिन है। जरांगे मराठा समुदाय की विभिन्न मांगों, खासकर पात्र मराठों को कुणबी प्रमाणपत्र देने और संबंधित सरकारी प्रक्रिया को लागू करने की मांग पर कायम हैं।

12 सितंबर को आगे की रणनीति होगी तय

मनोज जरांगे ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा है कि 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में समर्थकों की बैठक के बाद मुंबई मार्च की तारीख घोषित की जाएगी। इससे राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।

कुणबी प्रमाणपत्र की मांग प्रमुख

जरांगे की प्रमुख मांगों में पात्र मराठा समुदाय के लोगों को ऐतिहासिक कुणबी रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है। इसके अलावा हैदराबाद गजट और सातारा-कोल्हापुर गजट से संबंधित मांगों, आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने तथा मराठा समुदाय से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं को लागू करने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।

सरकार की ओर से कहा गया है कि शिंदे समिति ने अब तक 58 लाख से अधिक कुणबी रिकॉर्ड खोजे हैं और संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार के प्रतिनिधियों ने आंदोलन खत्म करने की अपील भी की है।

सरकार और जरांगे के बीच गतिरोध

राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने जरांगे से बातचीत कर आंदोलन समाप्त करने की अपील की, लेकिन जरांगे अपनी मांगों के पूर्ण कार्यान्वयन पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं और मांगों पर ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।

आंदोलन से प्रशासन की चिंता बढ़ी

अंतरवाली सराटी में बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने के कारण स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जालना की जिलाधिकारी ने आंदोलन के कारण गांव में सामान्य जनजीवन और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने का मुद्दा उठाते हुए जरांगे से अनशन समाप्त करने की अपील की है।

महाराष्ट्र की राजनीति में मुद्दा गरमाया

मराठा आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है। जरांगे के मौजूदा आंदोलन और मुंबई मार्च की संभावित घोषणा के कारण सरकार तथा विभिन्न राजनीतिक दलों पर भी दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजर है।

फिलहाल मनोज जरांगे का अंतरवाली सराटी में आंदोलन जारी है, जबकि 12 सितंबर की बैठक को आंदोलन की अगली दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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