मुंबई महानगरपालिका के इतिहास में पहली बार भाजपा ने सत्ता हासिल करते हुए अपना महापौर बनाया है। बुधवार को भाजपा की रितू तावडे को आधिकारिक रूप से मुंबई का महापौर चुना गया। इसके साथ ही महानगरपालिका में लंबे समय से लागू प्रशासक राज समाप्त हो गया और सत्ता एक बार फिर जनप्रतिनिधियों के हाथों में आ गई।
हालांकि सत्ता संभालने के पहले ही दिन पालिका सभागृह में भाजपा और ठाकरे गुट के नगरसेवकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भाजपा के नगरसेवकों ने हुतात्मा चौक जाकर संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उसके बाद महायुति के सभी नगरसेवक मुंबई महानगरपालिका पहुंचे। सभागृह में प्रवेश करते ही शंखनाद किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति से भाजपा नगरसेवकों में खासा उत्साह देखा गया।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा नगरसेवकों ने “जय श्रीराम” और “मोदी-मोदी” के नारे लगाए, जिससे सभागृह गूंज उठा। इसके जवाब में ठाकरे गुट के नगरसेवकों ने अचानक “चोर है, चोर है” के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर कुछ देर के लिए माहौल और गर्म हो गया। बाद में भाजपा नगरसेवकों ने “देवाभाऊ-देवाभाऊ” के नारे लगाए, जबकि ठाकरे गुट ने “ठाकरे-ठाकरे” का जयघोष किया। इस पूरे घटनाक्रम को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा मुंबई प्रदेशाध्यक्ष अमित साटम गैलरी में बैठकर शांतिपूर्वक देखते रहे। पहले ही दिन दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से आने वाले समय में भी राजनीतिक टकराव के संकेत मिल रहे हैं।
इसके बाद रितू तावडे ने महापौर पद की शपथ ली, जबकि शिवसेना के संजय घाडी ने उपमहापौर पद की शपथ ग्रहण की। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी इस मौके पर मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रितू तावडे को बधाई देते हुए कहा कि महायुति ने मुंबईकरों से लोकाभिमुख और पारदर्शी प्रशासन देने का वादा किया था और जनता ने उस पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि रितू तावडे एक अनुभवी और सशक्त मराठी चेहरा हैं, जिन्होंने पहले भी मुंबई के मुद्दों पर आक्रामक भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में मुंबई के विकास कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
