चंद्रपुर महानगरपालिका के महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने वह कर दिखाया जिसकी उम्मीद कांग्रेस ने शायद ही की थी। कांग्रेस की आपसी कलह और गुटबाजी का फायदा उठाते हुए भाजपा की संगीता खांडेकर ने चंद्रपुर की महापौर की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है।
सांसद प्रतिभा धानोरकर और विधायक विजय वड्डेटिवार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी, लेकिन मुनगंटीवार की बिछाई बिसात ने दोनों दिग्गजों को चित कर दिया।1 वोट ने पलटी बाजी: कांटे की टक्कर में केवल एक वोट के अंतर ने सत्ता का पूरा समीकरण बदल दिया और भाजपा की जीत तय की।
उबाठा का मिला साथ: राजनीति के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उबाठा (शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के समर्थन की है। उबाठा ने भाजपा को वोट देकर सबको चौंका दिया।
कांग्रेस की अंदुरुनी कलह: सत्ता हाथ से फिसलने की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस के भीतर की फूट रही। दिग्गज नेता एकजुट होने में नाकाम रहे, जिसका खामियाजा सत्ता खोकर भुगतना पड़ा।
मुनगंटीवार की भविष्यवाणी सच: “महापौर भाजपा का ही बनेगा” — सुधीर मुनगंटीवार का यह दावा पत्थर की लकीर साबित हुआ। उन्होंने अपनी रणनीतिक कुशलता से कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है।
चंद्रपुर की राजनीति में ‘ऑपरेशन लोटस’ सफल!इसे सुधीर मुनगंटीवार की राजनीतिक घेराबंदी कहें या कांग्रेस की नाकामी, लेकिन परिणाम ने यह साफ कर दिया है कि चंद्रपुर मनपा पर अब भाजपा का राज है। जहाँ एक तरफ सांसद प्रतिभा धानोरकर और विजय वड्डेटिवार अपनी ताकत झोंक रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मुनगंटीवार ने चुपचाप गेम प्लान तैयार कर लिया।जब चुनाव हुआ, तो उबाठा गुट ने भाजपा से हाथ मिलाकर सबको हैरान कर दिया। कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान इस कदर हावी थी कि वह अपना बहुमत सुरक्षित नहीं रख पाई। 1 वोट से जीत हासिल कर संगीता खांडेकर महापौर बनीं और उपमहापौर प्रशांत दानव बने इसी के साथ मुनगंटीवार ने कांग्रेस को आईना दिखाते हुए अपनी ताकत का अहसास करा दिया।
