
बुलढाणा जिले में शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता अंबादास दानवे ने पुरस्कार प्राप्त स्वर्गीय किसान कैलास नागरे के परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि “महाराष्ट्र का यह दुर्भाग्य है कि एक सम्मानित किसान को आत्महत्या करनी पड़ी।”
सिंचाई प्रकल्प केवल कागजों पर
दानवे ने राज्य सरकार की सिंचाई परियोजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1960-70 में शुरू किए गए सिंचाई प्रकल्प आज तक अधूरे हैं। खडकपूर्णा नदी का ओवरफ्लो होने वाला पानी किसानों तक पहुंचाने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को किसानों की आत्महत्या से कोई सरोकार नहीं।
सरकार और प्रशासन पर तंज
दानवे ने जिला प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “जब सरकार ही लापरवाह है तो प्रशासन भी लापरवाह रहेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि “सरकार को इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन जीता है और कौन मरता है।”
कोरटकर मामले में देरी क्यों?
छत्रपति शिवाजी महाराज के अपमान के आरोपी कोरटकर को गिरफ्तार करने में सरकार को सवा महीना लग गया, जबकि एक मंत्री के बेटे को विदेश जाते वक्त तुरंत विमान से उतारकर गिरफ्तार किया जाता है। दानवे ने सवाल किया कि “सरकार के लिए किसे पकड़ना ज्यादा जरूरी है?”
दिशा सालियन मामले पर राजनीति बंद हो
दानवे ने दिशा सालियन मामले पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “इस मामले की CID जांच पूरी हो चुकी है। बार-बार इसे उठाकर राजनीति करने का कोई मतलब नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि “यह सिर्फ लोगों को गुमराह करने और पुराने मामलों को उछालकर ध्यान भटकाने की राजनीति है।”
नितेश राणे पर हमला
अनिल परब के घर के बाहर लगाए गए नितेश राणे के बैनर पर प्रतिक्रिया देते हुए दानवे ने कहा कि “नितेश राणे एक थर्ड क्लास इंसान हैं, उन्हें जवाब देने का कोई मतलब नहीं।”
किसानों की स्थिति पर नाराजगी
दानवे ने कहा कि सरकार किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। उन्होंने मांग की कि “किसानों के लिए योजनाएं कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर लागू होनी चाहिए।”