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प्रियंका गांधी बोलीं- बीजेपी के झंडे लगाने हों तो लगा लें लेकिन बसें चलाने दें, हमने 67 लाख लोगों की मदद की...

नई दिल्ली: प्रवासी मजदूरों को बस मुहैया कराए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार आमने-सामने है. इस बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर योगी सरकार पर कई आरोप लगाए. उन्होंने बसों को लेकर हुए पत्राचार की जानकारी दी. साथ ही कहा कि बीजेपी के झंडे लगाने हों तो लगा लें लेकिन हमारी बसों को चलने दें. इससे 92 हजार लोगों को मदद मिलेगी. हमारी बसें अभी भी खड़ी हैं लेकिन योगी सरकार अनुमति नहीं दे रही है. प्रियंका गांधी ने बताया कि हमने अब तक 67 लाख लोगों की मदद की.

उन्होंने कहा, ''यह कठिन समय है. सभी राजनीतिक दल लोगों की मदद में शामिल हों. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी मदद के लिए आगे आई है. हर जिले में हमने वॉलंटियर्स तैनात किए हैं. हाईवे पर टास्क फोर्स बनाए हैं. ताकि ये लोग जरूरतमंदों को मदद करें, खाना दें. 67 लाख लोगों की मदद की है. सेवा का भाव रहा है.''

गौरतलब है कि बसों को लेकर पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है. दोनों तरफ से एक दूसरे को कई पत्र लिखे गए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि कांग्रेस ने 1000 से अधिक बसों का जो विवरण मुहैया कराया उनमें कुछ दोपहिया वाहन, एंबुलेस और कार के नंबर भी हैं.

प्रियंका ने कहा, ''सेवा भाव से ही यूपी कांग्रेस ने लॉकडाउन के अगले दिन हर जिले में "कांग्रेस के सिपाही" नाम से वॉलंटियर ग्रुप बनाए. हमने हर जिले में हेल्पलाइन नम्बर जारी किए. इसके अलावा हमने "सांझी रसोइयां" खोली, हाइवे टास्क फोर्स बनाए.''

उन्होंने कहा, ''इन कार्यों के जरिए हमने 67 लाख लोगों की मदद की. इनमें से 60 लाख लोग यूपी में और 7 लाख बाहर फंसे हुए थे. हम सेंट्रल हेल्पलाइन के जरिए भी लगातार सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं.''

इस पर कांग्रेस ने कहा कि उसकी ओर से मुहैया कराई गई सूची में उत्तर प्रदेश सरकार ने खुद 879 बसों के सही होने की पुष्टि की है और उसे अब इन बसों को चलाने की अनुमति प्रदान करनी चाहिए.

प्रियंका गांधी ने भी आज कहा कि अगर लिस्ट में कुछ गड़बड़ी है तो हम मानते हैं लेकिन जो बसें हैं उन्हें चलने दें. इससे राह चलते लोगों को मदद मिलेगी. हम बसों की दूसरी लिस्ट देने के लिए तैयार हैं.

प्रियंका गांधी ने कहा, ''काफी समय से प्रवासी भाई-बहन विषम परिस्थितियों में, कड़ी धूप में, बगैर खाए पैदल अपने गाँव की ओर चल रहे हैं. ये लोग देशभर से आ रहे हैं. कई बहनें गर्भवती होने के बावजूद पैदल चल रही हैं. कई लोग बच्चों को गोद में लेकर जा रहे हैं.''

प्रियंका गांधी ने कहा कि ऐसे समय में हम सबको अपनी जिम्मेदारी समझनी पड़ेगी. ये भारत के वो लोग हैं, जो इस देश की रीढ़ हैं. जिनके खून-पसीने से ये देश चलता है. इनके प्रति हम सबकी जिम्मेदारी है.

बसें बॉर्डर पर खड़ी हैं लेकिन प्रवासी मजदूरों का पैदल संघर्ष जारी है. प्रियंका गांधी और योगी सरकार के बीच बसों को लेकर नाक की लड़ाई जारी है. सवाल है कि आखिर मजदूर के लिए बस क्यों नहीं चल रही है. अब प्रियंका गांधी ने योगी सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है. या तो बसें चला लें या मैं बसें वापस भेजती हूं. लॉकडाउन में हजारों हजार प्रवासियों की रोजी-रोटी छिन गई. मुंबई से लेकर दिल्ली तक प्रवासियों पर मार पड़ी.

सरकारों ने भूखे को भोजन और कामगारों को काम देने के वादे तो खूब किए हैं लेकिन चिलचिलाती गर्मियों में सुनसान सड़कों पर घिसट-घिसट कर बच्चों और बुजुर्गों को लेकर चलते प्रवासियों को देखकर कैसे मान लें कि वादे और दावे सच हैं. पिछले चार दिन से प्रियंका गांधी और योगी सरकार के बीच रोजी और रोटी का विवाद नहीं चल रहा है. विवाद ये चल रहा है कि प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए बसें देनी है या नहीं. पहले ट्वीट-ट्वीट हुआ. फिर चिट्ठी चिट्ठी हुई. अब FIR-FIR की नौबत आ गई लेकिन बस है कि चलती नहीं. प्रियंका के एक हजार बसें देने के दावे पर योगी सरकार को शक है.

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