आमगाँव ग्राम पंचायत से नगर परिषद के रुप में तब्दील तो हुई, लेकिन इसके बावजूद नगर परिषद के अनुरुप आमगांव का विकास राजनीति अखाड़े और कानूनी पेचिदगीयों की भेंट चढ़ गया है। जिसकी वजह आमगांव नगर परिषद क्षेत्र के नागरिक अपने आपको अनाथ और असहायत महसुस करने लगे हैं। आमगांन नगर परिषद में चुनाव से पहले लगाई गई रोक के बाद चुनाव ठंडे बस्ते में चले गए, फिर कोरोना काल में फिर उम्मीदों पर विराम लग गया, जिसका परिणाम है कि आमगांव नगर परिषद के अंतर्गत जो अन्य ग्राम भी शामिल हुए हैं, सभी अपने आपको ठगा महसुस कर रहे हैं। जैसे बनगांव, किडगीपार, रिसामा, कुंभारटोली, बिरसी, माली, पदमपुर इन ग्रामो को मिलाकर आमगांव नगर परिषद बनाया गया है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने आमगांव ग्राम पंचायत को वर्ष 2015 में नगर पंचायत के रूप में तब्दली किया, फिर 2 अगस्त 2017 को नागरिकों की मांग के अनुसार, अदालत द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के अनुसार, आठ गांवों को नगर परिषद में शामिल किया गया। इस दौरान नेताओं की ओर से राजनीतिक श्रेय लेने की मानो होड़ सी मच गई, जिसके कारण राजनीति से विकास के मार्गों में बाधाएं उत्पन्न हो गई, जिसके चलते नगर परिषद का संचालन बिना नगर परिषद अध्यक्ष और बिना पार्षदों के हो रहा है, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों की मनमर्जी पर निर्भर होने से नगर परिषद का कबाड़ा हो रहा है, और अन्य विभागों की तरह शहर विकास के लिये सबसे ज्यादा जरुरी माना जाने वाले विभाग की उदासीनता का शिकार आमगांव नगर के लोगों को होना पड़ रहा है। जब से नगर परिषद का मामला न्यायालय में है तब से तहसीलदार प्रशासक के रूप में कार्यान्वित है।
वर्तमान में नगर परिषद अप-टू-डेट है लेकिन नगर परिषद के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत विकास कार्यों, रोजगार, भूमि अधिकार के मुद्दों, सड़कों, गटार नालो का विकास,शौचालय योजना, दलित बस्ती सुधार, जलापूर्ति योजना, आवास के लाभ जनता को मिले इस ओर कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। नगर परिषद प्रशासन ने कई योजनाओं के लिए एक कार्य योजना तैयार की और जिला शहरी विकास विभाग और शहरी विकास मंत्रालय के साथ अनुवर्ती कार्रवाई की, जबकि वहीं आमगाँव सहित आठ गाँवों को अभी तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी गई है क्योंकि उन्हें जनसंख्या-मांग वाले विकास कार्यों की सख्त ज़रूरत है, जिसके कारण माना जा रहा है कि जब तक मुल रुप से नगर परिषद अस्तित्व में नहीं आ जाती, आमगांव नगर के नागरिकों की परेशानियां दूर होने वाली नहीं है।
सभी राजनैतिक दलों के नेता सत्ता हासिल करने लोगो के सामने विकास के लिए प्रयास कर रहे है यह जताते है, किंतु यह जनता के साथ छलावा नजर आता दिख रहा है। नेता नागरिको को बुनियादी सुविधाओं, विकास की लालसा दिखाने के अलावा कुछ प्रयशरथ नही है। नेता विकास कार्यो के लिए आज विफल नजर आरहे हैं, लोगो की समस्या के लिए कोई समाधान योजना तैयार नही की गई है। आज लोगो के पास अपने विकास और मौलिक अधिकारों के लिए लड़ने के अलावा कोई विकल्प नही है। नगर में आज भी कई जगह मोहल्ला बस गया है, पक्के घर बन गए है पर आज भी वहाँ पक्के रोड व नाली नही है।