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दीपावली स्पेशल पदार्थों में भी चर्चाओं में रहा कोरोना

भंडारा. कोरोना महामारी के कारण की गई तालाबंदी के कारण एक दूसरों से मिलना-जुलना बंद हो गया. कोरोना महामारी कारण कोई भी पर्व मनाया नहीं गया था, इसलिए यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि प्रकाश पर्व भी नहीं मनाया जाएगा, लेकिन अन्य पर्वो की तुलना में प्रकाश पर्व अच्छी तरह से को मनाया जरूरी गया, पर इस बार दीपावली में उतना उत्साह नहीं देखने को मिला, जितना पिछले साल या उससे पहले मनाया जा चुकी दीपावली में देखने को मिला करती थी. कोरोना के कहर के कारण 25 मार्च से शुरु किया गया लॉकडाउन अभी भी पूरी तरह से उठाया नहीं गया है.पिछले दो माह से यात्रा करने की छूट दिए जाने के कारण रेल यात्रा, बस यात्रा का सिलसिला शुरु हो गया है और जो लोग काफी दिनों से नहीं मिले थे, उन्होंने अपने रिश्तेदारों से मिलने का मूहुर्त दीपावली का निकाला और जब कोई परिवार अपने किसी रिश्तेदार के घर पहुंचता है, तो दीपावली के मिठान्न ग्रहण करने के बीच जिस विषय पर सबसे ज्यादा चर्चा हुए वह कोरोना महामारी ही रही. कोरोना के कारण सात माह से मित्र मंडली, मेहमान तथा गांव में रहने वाले परिजन एक साथ मिलकर कोई भी त्यौहार नहीं मना सके थे. दीपावली हर्ष, आनंद का पर्व है.इस वर्ष कोरोना के कहर के बीच यह कहा जा रहा था कि प्रकाश पर्व कोरोना की भेंट चढ़ जाएगा, लेकिन दीपावली पर्व में इतनी राहत जरूर मिल गई कि लोग अपने घर के बाहर प्रकाश फैलाने वाले पटाखे बजाएं. घरों में कैद लोगों दीपावली पर्व बाहर निकले तथा कोरोना काल की व्यथाओं को आदान-प्रदान किया. दीपावली के मौके पर परिवार के लोग जब एक साथ लोग बैठे तो हर मुद्दे पर बातचीत हुई, किसी ने कोरोना को कोसा तो किसी ने कहा कि इस महामारी ने मानवता की नई परिभाषा गढ़ी है. 

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