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बहुचर्चित गोल्ड स्मगलिंग केस में केरल सीएमओ के पूर्व प्रमुख सचिव एम शिवशंकर को गिरफ्तार करने के लिए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट (आर्थिक अपराध) ने सीमा शुल्क विभाग को अनुमति दे दी है। फिलहाल वे ईडी द्वारा दर्ज मामले में 26 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले कोच्चि कोर्ट में एम शिवशंकर की पेशी हुई थी, जहां प्रवर्तन निदेशालय की कस्टडी में भेज दिया गया था। एजेंसी ने केरल सोना तस्करी मामले में विस्तार से पूछताछ की है। केरल हाईकोर्ट ने शिवकुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद ईडी अधिकारियों ने उन्हें को हिरासत में ले लिया था।

इस मामले में सीमा शुल्क अधिकारियों ने जांच की थी और शिवशंकर के खिलाफ प्रमुख साक्ष्य के रूप में चार्टर्ड एकाउंटेंट के साथ व्हाट्सएप चैट को न्यायालय में प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने अदालत को बताया था कि चूंकि शिव शंकर पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं, इसलिए उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करनी होगी जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था। 

सीमा सुरक्षा बल को इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि 19 नवंबर के नगरोटा मुठभेड़ में मारे गए चार जैश-ए-मोहम्मद (के आतंकवादी वास्तव में 200 मीटर लंबी सुरंग के जरिए पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में दाखिल हुए थे। बताया गया है कि आंतकवादियों ने पेशवेर रूप से 200 मीटर लंबी और 8-मीटर गहरी पेशेवर सुरंग तैयार की थी जिसके जरिए वो अंतरराष्ट्रीय सीमा से भारत की धरती में घुस आए थे।

सुरंग की जगह , भारतीय छोर पर 12-14 इंच के व्यास की थी, जो अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगभग 160 मीटर लंबा था और ऐसा अनुमान है कि पाकिस्तानी सीमा पर ये  लगभग 40 मीटर लंबा था। बड़े सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार सुरंग को नए सिरे से खोदा गया था और पहली बार चार जैश आत्मघाती हमलावरों ने इसका इस्तेमाल किया गया था। आतंकवाद निरोधक अधिकारी ने कहा कि ऐसा लगता है कि सुरंग के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग का उचित प्रयास किया गया है औरइसमें पेशवरी का हाथ काफी स्पष्ट है।

 आतंकवादियों के पास ताइवान निर्मित हाथ में पकड़ने वाला एक जीपीएस डिवाइस था जिसकी मदद से वो भारत की सीमा में घुसे, भारतीयों एजेंसियों और बीएसएफ ने उस डिवाइस की मदद से आतंकवादियों को ट्रैक किया। आतंकवादी सुरंग पार करके सीमा के 12 किलोमीटर तक अंदर आ गए और एक ट्रक में सवार हुए। आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों द्वारा मारे जाने से पहले जीपीएस डिवाइस के डेटा को नष्ट करने की पूरी कोशिश की लेकिन डेटा बरामद कर लिया गया था। 

भारत ने शनिवार को नई दिल्ली में पाकिस्तान के वरिष्ठतम राजनयिक को तलब किया और आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) द्वारा हाल ही में जम्मू-कश्मीर को लेकर रची गई साजिश के खिलाफ एक मजबूत विरोध दर्ज कराया।विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान उच्चायोग में आफताब हसन खान को तलब किया और मांग की कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र से सक्रिय आतंकवादियों और आतंकी समूहों का समर्थन करने की नीति से दूर रहे और आतंकवादी संगठनों को हमले के लिए आतंकी संगठनों द्वारा संचालित बुनियादी ढांचे को ध्वस्त कर दे। गुरुवार की सुबह, नगरोटा के पास बान टोल प्लाजा पर आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें चार आतंकवादी मारे गए। इधर, दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी को विदेश मंत्रालय ने नगरोटा की घटना पर समन किया है। ये आतंकी बड़ी साजिश को अंजाम देना चाहते थे।

आफताब खान को बताया गया कि भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करने के लिए दृढ़ और संकल्पबद्ध है। इससे पहले, शुक्रवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा बलों ने चार आतंकवादियों की हत्या करके और बड़े पैमाने पर हथियारों और विस्फोटकों को जब्त करके आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद की बड़ी विनाशकारी योजना को नाकाम कर दिया था। बयान में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने नगरोटा में एक "बड़े आतंकी हमले" को नाकाम कर दिया था और शुरुआती रिपोर्टों में संकेत दिया गया था कि हमलावर "पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) के सदस्य थे। संयुक्त राष्ट्र और कई अन्य देशों ने इस आतंकवादी संगठन पर मुकदमा चलाया था।" गुरुवार को सेना ने भारी मात्रा में  हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटकों को जब्त किया जिससे पता चलता है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में शांति भंग करने और अस्थिरता पैदा करने की कोई बड़ी योजना बनाई जा रही थी।

 

अमेरिका की सिलिकॉन वैली में बसे एक भारतीय-अमेरिकी उद्योगपति ने हाल में सम्पन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन और उप राष्ट्रपति कमला हैरिस का प्रचार करने के लिए बॉलीवुड संगीत का इस्तेमाल किया था। इससे पहले इस साल की शुरुआत में, अजय जैन भूटोरिया ने कई भाषाओं में कुछ मशहूर बॉलीवुड गीतों का इस्तेमाल कर एक अभियान भी चलाया था, ताकि भारतीय-अमेरिकी बाइडन से अधिक जुड़ाव महसूस करें। भूटोरिया ने 'पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ''ऐसी शिकायतें थी कि भारतीय-अमेरिकी वोट नहीं करते। लेकिन मैंने पूछा, ' क्या आप ने उनकी भाषा में उन तक पहुंचने की कोशिश की? जब कोई प्रचारक एक मतदाता से उसकी भाषा में बात करता है तो उनके बात सुनने की संभावना अधिक होती है।'' उन्होंने कहा, '' ऐसा जरूरी नहीं है कि सभी भारतीय अंग्रेजी बोलते हों। लोग आपसे तभी जुड़ते हैं, जब आप उनसे उनकी भाषा में बात करें।''

भूटोरिया ने  ''अमेरिका का नेता कैसा हो, जो बाइडन जैसा हो'', ट्रंप हटाओ, अमेरिका बचाओ'', ''बाइडन-हैरिस को जिताओ, अमेरिका को आगे बढ़ाओ'' और ''जागो अमेरिका जागो- बाइडन हैरिस को वोट दो'' जैसे नारे 14 भारतीय भाषाओं में जारी किए थे। भूटोरिया और उनकी पत्नी विनीता ने एक वीडियो, ''चले चलो, चले चलो बाइडन-हैरिस को वोट दो'' भी जारी किया था, जो भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान में पहली बार दक्षिण-एशियाई संगीत का इस्तेमाल किया गया। भूटोरिया ने कहा कि लोग संगीत, भोजन, भाषा और संस्कृति से अधिक जल्दी जुड़ते हैं। भूटोरिया का जन्म राजस्थान में हुआ और वह असम के गुवाहाटी में पले-बढ़े। अपने पिता से प्रेरित भूटोरिया भी अनके प्रवासियों की तरह एक सूटकेस और खाली जेब के साथ असीमित अवसरों की तलाश में अमेरिका पहुंचे।

चीन के साथ लद्दाख में टकराव में कमी नहीं आने और सर्दियों में तापमान में भारी गिरावट को देखते हुए भारतीय सेना ने यहां तैनात हजारों सैनिकों के लिए आधुनिक आवास की व्यवस्था की है। इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के किसी भी दुस्साहस को रोकने के लिए हजारों सैनिक तैनात हैं और मई से ही पोजीशन संभालने हुए हैं। भारतीय सैनिक जिन इलाकों में तैनात हैं उनमें से कुछ जगहों पर तापमान -40 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। इसके अलावा अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में 30 से 40 फीट तक बर्फबारी हो सकती है। एक अधिकारी ने बताया, ''सालों से यहां बनाए जा रहे समुचित व्यवस्थाओं वाले स्मार्ट कैंप्स के अलावा आधुनिक आवासीय प्रबंध भी किए गए हैं, जिनमें बिजली, पानी, हिटिंग फैसिलिटी, हेल्थ और हाइजीन का अच्छा ध्यान रखा गया है। सैनिकों को किसी चीज का अभाव नहीं है और वे किसी भी चुनौती के लिए तैयार हैं।''

बुधवार को एलओसी से कुछ तस्वीरें मिली हैं, जिनमें सेना की ओर से बनाए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर दिख रहे हैं। इन्हें अंग्रिम पंक्ति में तैनात सैनिकों की मदद के लिए बनाए गए हैं। सीमा पर तनाव को कम करने के लिए भारत और चीन में सैन्य कमांडर्स स्तर की कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन जमीन पर अभी कोई बदलाव नहीं आया है। 

आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच 27 सितंबर से जारी युद्ध को रोकने के लिए रूस ने कोशिशें तेज कर दी हैं. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐलान किया है कि रूस के हस्तक्षेप से आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच शांति पर सहमति बन गई है. पुतिन ने यह भी कहा है कि युद्धग्रस्त क्षेत्र नागोर्नो-काराबाख में शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए रूसी शांतिरक्षक बलों को इस इलाके में तैनात किया जाएगा. पुतिन ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इस समझौते से नागोर्नो-काराबाख इलाके में लंबे समय तक स्थायी और पूर्ण संघर्ष विराम की आवश्यक शर्तें स्थापित होंगी. आर्मीनिया और अजरबैजान ने भी इस शांति समझौते की पुष्टि की है. जिसके बाद माना जा रहा है कि 44 दिनों से जारी लड़ाई का अब अंत नजदीक है. आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोलस पशिनयान ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि रूस की मध्यस्थता में उनका अजरबैजान के साथ शांति समझौता हुआ है. जिसके कुछ देर बाद अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने भी इसकी पुष्टि की. नागोर्नो-कारबाख क्षेत्र के नेता अराईक हरुतुयन ने भी ऐलान किया है कि उन्होंने शांति के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

आर्मीनिया के पीएम बोले- हमने नहीं मानी है हार आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोलस ने कहा कि यह निर्णय युद्ध की स्थिति के गहन विश्लेषण और क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों के साथ चर्चा के आधार पर किया गया है. उन्होंने आगे कहा कि यह जीत नहीं है लेकिन हार भी नहीं है, जब तक आप खुद को हारा हुआ नहीं मानते. हम खुद को कभी भी पराजित नहीं मानेंगे और यह हमारी राष्ट्रीय एकता और पुनर्जन्म के युग की एक नई शुरुआत होगी. अजरबैजान की सेना ने तुर्की और इजरायली हथियारों के दम पर आर्मीनिया को भारी नुकसान पहुंचाया है. जानकारी के अनुसार, नागोर्नो-काराबाख की राजधानी स्टेपानाकेर्ट पास बसे शुशी शहर पर अजरबैजानी सेना ने कब्जा कर लिया है. जिसके बाद से आर्मीनिया की सेना में स्टेपानाकेर्ट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार को कहा कि देश के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हाल में सम्पन्न हुए चुनाव में हार स्वीकार ना करना शर्मिंदगी भरा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के हार स्वीकार नहीं करने से सत्ता के हस्तांतरण की उनकी योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उन्होंने विश्व नेताओं से बात करनी शुरू कर दी है।

डेलावेयर के विलमिंगटन में बाइडन ने पत्रकारों से कहा, 'सच कहूं, तो मुझे लगता है कि यह एक शर्मिंदगी भरी हरकत है....इससे राष्ट्रपति की विरासत को कोई मदद नहीं मिलेगी....विश्व के नेताओं के साथ अपनी बातचीत के बाद मुझे इतना पता है कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के लोकतांत्रिक संस्थानों को एक बार फिर मजबूत होता देखा जाएगा।'

पत्रकारों के ट्रंप पर किए एक सवाल के जवाब में बाइडन ने 20 जनवरी को सब सही होने की उम्मीद जतायी। अमेरिका में प्रमुख 'मीडिया नेटवर्क जो बाइडन को तीन नवम्बर को हुए राष्ट्रपति चुनाव का विजेता घोषित कर चुके हैं।

ट्विटर पर लाइव ब्रॉडकास्ट के दौरान लेह को चीन का हिस्सा बताने पर माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ने डेटा प्रॉटेक्शन बिल की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सामने मौखिक तौर पर माफी मांगी है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने यह जानकारी दी है। पैनल ने इस पर नाराजगी जाहिर की और ट्विटर से लिखित में माफी मांगने के साथ ही एफिडेविट जमा करने को कहा है। यह विवाद पिछले सप्ताह उस समय पैदा हुआ जब एक पत्रकार ने लेह स्थित वॉर मेमोरियल से ट्विटर पर लाइव ब्रॉडकास्ट किया और उन्होंने पाया कि लोकशन 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' दिखाया जा रहा है। इसको लेकर मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंफ्रॉर्मेशन टेक्नॉलजी के सचिव ने ट्विटर के सीईओ जैक डोर्जी को लेटर लिखकर सरकार की ओर से नाराजगी जाहिर की थी। 

जेपीसी ने बुधवार को ट्विटर के प्रतिनिधियों के सामने लेह को चीन का हिस्सा दिखाने पर आलोचना की और कहा कि यह देशद्रोह जैसा काम है। इसने डेटा सुरक्षा के साथ-साथ कानूनी मुद्दों को भी उठाया। कमिटी ने पॉलिसी, डेटा ट्रांसफर और लोकेशन डेटा सेंटर को लेकर जवाबदेही और पारदर्शिता में कमी, शैडो बैन और अकाउंट्स को मनमाने तरीके से बंद करने की घटनाओं का मुद्दा भी उठाया। कमिटी की प्रमुख मीनाक्षी लेखी ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा, ''लेह को चीन का हिस्सा दिखाना राजद्रोह माना जाएगा और इसके लिए सात साल तक की जेल हो सकती है। समिति ने इस मुद्दे को उठाने में सर्वसम्मति जताई और अपनी सख्त नाराजगी व्यक्त की।''

जैश-ए-मोहम्मद समेत तमाम आतंकवादी संगठनों को देश में पनाह देने के लिए कुख्यात पाकिस्तान नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इमरान खान की सरकार ने मोबाइल नेटवर्क के कवरेज को जम्मू-कश्मीर तक बढ़ाने का प्लान तैयार किया है। इससे एक तरफ घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानी प्रशिक्षित आतंकियों को मदद मिलेगी, दूसरी तरफ भारत सरकार की ओर से भविष्य में संभावित किसी संचार प्रतिबंध को गच्चा दिया जा सकेगा।

नई दिल्ली में एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, मौजूदा टेलीकॉम टावरों को ठीक करने और नए का निर्माण करने की योजना पर लगभग एक साल से काम चल रहा है। इसकी शुरुआत कश्मीर में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों की मदद करने के लिए मौजूदा नेटवर्क को मजबूत बनाने के इरादे से की गई थी, लेकिन पिछले साल पांच अगस्त के बाद कश्मीर में संचार पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इससे अन्य फायदे उठाने की योजना पर काम किया। पाकिस्तान चाहता है कि कश्मीरी पाकिस्तानी टेलीकॉम सेवाओं का प्रयोग करें, जिसको भारतीय सेना ब्लॉक न कर सके।

पिछले साल, केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को समाप्त कर दिया था। उस दौरान सरकार ने इंटरनेट सेवाओं को भी प्रतिबंधित कर दिया था, ताकि कोई सोशल मीडिया के जरिए से अफवाहें न फैला सके। तब से ज्यादातर प्रतिबंधों को तो हटा दिया गया है, लेकिन स्थानीय सुरक्षा अधिकारी अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए कुछ समय तक फोन लिंक पर ध्यान दिया है। अगर पाकिस्तान अपनी योजना को आगे बढ़ाता है तो यह घाटी में कश्मीरियों को भारतीय फोन कंपनियों के लिए एक विकल्प प्रदान करेगा।

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और यूरोप के विकसित देशों की तर्ज पर भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) के किनारे एकीकृत जन उपयोगी सुरंगें बनाई जाएंगी। इसमें बिजली-टेलीफोन केबल से लेकर पेयजल, सीवर पाइप आदि को एक सुरंग के भीतर बिछाया जाएगा। 

इस तकनीक से आम जनता को बाधारहित आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। सेंसर के माध्यम से इनकी निगरानी व मरम्मत संभव होगी। खास बात यह है कि भविष्य में जन उपयोगी कार्यों में किसी प्रकार के बदलाव को आसानी से अंजाम दिया जा सकेगा। इससे सड़कों को बार-बार तोड़ने से जनता को होने वाली परेशानी का सिलसिला बंद होगा।

राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे एकीकृत जन उपयोगी सुरंगें बनाने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से सितंबर के प्रथम सप्ताह में सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय को भेजा गया है। मंत्रालय ने एनएचएआई के चेयरमैन एसएस संधू को पिछले हफ्ते अवधारणा नोट भेज दिया है। इसमें उल्लेख है इकोनॉमिक जोन व राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे एकीकृत जन उपयोगी सुरंगें बिछाने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी को नियुक्त कर अध्ययन कराया जाए। साथ में हिदायत दी है कि अध्ययन रिपोर्ट दो माह के भीतर मंत्रालय को मिल जानी चाहिए, ताकि उक्त तकनीक पर तेजी से काम किया जा सके।

वॉशिंगटन/ब्रासीलिया: अमेरिका-ब्राजील में कोरोना वायरस के नए मामलों की रफ्तार भारत के मुकाबले आधी है. हर दिन कोरोना के सबसे ज्यादा मामले भारत में सामने आ रहे हैं और मौत का आंकड़ा भी भारत में सबसे तेजी से बढ़ रहा है. अमेरिका और ब्राजील में दुनिया के 36% कोरोना मामले हैं.वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, अमेरिका, भारत और ब्राजील में पिछले 24 घंटे में क्रमश: 33339, 74767 और 8456 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि क्रमश: 330, 902 और 364 मौत हुई हैं. अमेरिका और ब्राजील में 24 घंटे में कुल 41 हजार नए कोरोना केस आए, करीब इससे दोगुने मामले अकेले भारत में आए हैं. वहीं अमेरिका, ब्राजील में 24 घंटे में क्रमश: 28488, 14634 हजार मरीज ठीक हुए.

कुल संक्रमण और मृत्युदर
अमेरिका में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 5 अक्टूबर सुबह तक बढ़कर 76 लाख 36 हजार पहुंच गई, इसमें से 2 लाख 14 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. भारत में 66 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं और इनमें से एक लाख 2 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. वहीं ब्राजील में कुल संक्रमितों की संख्या 49 लाख 15 हजार से ज्यादा है, यहां एक लाख 46 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

एक्टिव केस और रिकवरी रेट: अमेरिका में अबतक 48 लाख लोग ठीक भी हुए हैं. 25 लाख 74 हजार एक्टिव केस हैं यानी कि ये लोग अभी भी वायरस से संक्रमित हैं. भारत में रिकवरी रेट 84 फीसदी हैं, यानी कि कुल संक्रमितों में से 55 लाख लोग ठीक हो चुके हैं. यहां 9 लाख 36 हजार से ज्यादा एक्टिव केस हैं, इनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. वहीं दुनिया के तीसरे सबसे प्रभावित देश ब्राजील में एक्टिव केस 5 लाख 5 हजार हो गए और रिकवर हुए लोगों की संख्या 42 लाख 63 हजार से अधिक है.कोरोना का संक्रमण भले ही तेजी से फैल रहा है, लेकिन अब यह उतना घातक नहीं है. दुनियाभर में दहशत फैलाने वाला कोरोना वायरस जल्द ही खत्म हो जाएगा. कई देशों के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यह वायरस तेजी से कमजोर हो रहा है. महामारी की शुरुआत में इसका संक्रमण जितना घातक था, अब वह वैसा नहीं है.

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव बेहद नजदीक आ चुका है, एक महीने से कम का समय चुनावों में बचा है. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं. ट्रंप इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं और उनके स्वास्थ पर डॉक्टरों की नजरेें टिकी हुई हैं. वहीं अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर भी बनी हुई हैं कि अगर ट्रंप जल्द ठीक नहीं हो सकें, तो क्या चुनाव टाल दिए जाएगें?दरअसल, ट्रंप के कोरोना संक्रमित पाए जाने से चुनावों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए है. क्या चुनाव होंगे या नहीं? एक महीने का भी वक्त नहीं बचा है. चुनावों को लेकर एक प्रेसिडेंशियल डिबेट हो चुकी है. दूसरी डिबेट 15 अक्टूबर को होनी है जिसमें साफतौर पर माना जा सकता है कि ट्रंप शामिल नहीं हो सकेंगे. अटकलें लगाई जा रही हैं कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ट्रंप हिस्सा ले सकते हैं.

मेल-इन वोट के जरिए लोग ले रहें मतदान में भाग: चुनावों के टालने की बात की जाए तो इस वक्त ये संभव होता नहीं दिख रहा है, क्योंकि अमेरिका में मतदान शुरु हो चुका है और लाखों लोग मतदान कर चुकें हैं. कोरोना के संकट को देखते हुए ज्यादातर लोग मेल-इन वोट के जरिए मतदान कर रहें हैं. आपको बता दें कि ट्रंप ने उनके साथ काम कर रहें एक शख्स के कोरोना से संक्रमित होने की बात की थी, जिसके बाद उन्होंने खुद और फर्स्ट लेडी मेलानिया के कोरोना से संक्रमित होने की बात की. बताया जा रहा है कि कोरोना से संक्रमित होने के बाद ट्रंप व्हाइट हाउस में ही रहकर इलाज ले रहे थे, लेकिन उनका बुखार नहीं उतरा तो उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. ट्रंप इस वक्त अमेरिका के सबसे बड़े आर्मी अस्पताल में भर्ती हैं.

अमेरिका में रह रहे 42 लाख भारतीय-अमेरिकियों में से करीब 6.5 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं और कोविड-19 महामारी की वजह से समुदाय में गरीबी बढ़ने की आशंका है. यह तथ्य हाल में हुए एक शोध में सामने आया है.

करीब 20 प्रतिशत लोगों के पास अमेरिकी नागरिकता भी नहीं: जॉन हॉपकिंस स्थित पॉल नीत्ज स्कूल ऑफ एडवांस्ड इटंरनेशनल स्टडीज के देवेश कपूर और जश्न बाजवात द्वारा ‘ भारतीय-अमेरिकी आबादी में गरीबी’ विषय पर किए गए शोध के नतीजों को बृहस्पतिवार को इंडियास्पोरा परोपकार सम्मेलन-2020 में जारी किया गया. कपूर ने कहा कि बंगाली और पंजाबी भाषी भारतीय अमेरिकी लोगों में गरीबी अधिक है. उन्होंने कहा कि इनमें से एक तिहाई श्रम बल का हिस्सा नहीं हैं जबकि करीब 20 प्रतिशत लोगों के पास अमेरिकी नागरिकता भी नहीं हैं.

सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कदम उठाए जाएंगे- इंडियास्पोरा के संस्थापक: इंडियास्पोरा के संस्थापक एमआर रंगास्वामी ने कहा, ‘‘ इस रिपोर्ट के साथ, हम सबसे अधिक वंचित भारतीय अमेरिकियों की अवस्था की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं.’’ रंगास्वामी ने कहा, ‘‘ कोविड-19 के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए यह उचित समय है कि आमतौर पर सम्पन्न मानेजाने वाले हमारे समुदाय में मौजूद गरीबी के प्रति जागरूकता पैदा की जाए और इस मुद्दे को उठाया जाए. हमें उम्मीद है कि इस रिपोर्ट से इस विषय की ओर ध्यान आकर्षित होगा और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कदम उठाए जाएंगे.’’

मॉरिसटाउन: अमेरिकी राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी उम्मीदवार जो बिडेन के साथ बचे दो प्रेसिडेंशियल डिबेट के नियम बदलने का विरोध किया है. लेकिन उनके प्रचार की जिम्मेदारी निभा रहे लोगों ने कहा कि इसके वावजूद वह डिबेट में हिस्सा लेंगे.दरअसल, 30 सितंबर को अमेरिका के क्लीवलैंड में हुई पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट में दोनों उम्मीदवारों के बीच, खासतौर पर ट्रंप द्वारा की गई टोका-टाकी की वजह से अराजक स्थित उत्पन्न हो गई थी. इसके बाद राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए उम्मीदवारों के बीच डिबेट आयोजित करने वाले निकाय कमिशन ऑन प्रेसिडेंशियल डिबेट्स ने कहा था कि उसका इरादा बाकी बची दो डिबेट में व्यवस्थासुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाने का है.

आयोग, ट्रंप और बिडेन के प्रचार प्रतिनिधियों ने दोनों उम्मीदवारों के बीच पहली बहस और संभावित बदलावों पर चर्चा करने के लिए बुधवार की सुबह बैठक की. कुछ संभावित बदलाव जिनपर चर्चा हुई, उनमें शुरुआती और आखिरी बयान और पर चर्चा का समय कम करना शामिल है.

ट्रंप ने कहा- बदलाव का करेंगे विरोध
रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप ने गुरुवार को ट्वीट किया कि वह किसी भी बदलाव का विरोध करेंगे. उन्होंने न्यूजर्सी में चुनाव अभियान शुरू करने से पहले ट्वीट किया, ‘‘क्यों मैं बहस आयोग को दूसरी और तीसरी बहस के नियमों को बदलने की अनुमति दूं जब पिछली बार मैंने आसानी से जीत दर्ज की.’’चुनाव अभियान में रणनीतिकार जैसन मिलर ने कहा, ‘‘हम दूसरी और तीसरी बहस के लिए तैयार हैं. उसमें कोई बदलाव नहीं होना चाहिए. हम बदलाव नहीं चाहते हैं.’’
बता दें, दूसरी प्रेसिडेंशियल डिबेट 15 अक्टूबर को मियामी में होनी है.

वाशिंगटन: हजारों भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पेशेवरों को राहत देते हुए अमेरिका के एक संघीय न्यायाधीश ने लोकप्रिय एच-1बी वीजा सहित अन्य वर्क परमिट को अस्थाई रूप से प्रतिबंधित करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है. अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने संवैधानिक अधिकार से परे जाकर प्रतिबंध लगाया है. नदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया के डिस्ट्रिक्ट जज जेफरी व्हाइट ने गुरूवार को यह आदेश जारी किया. बता दें कि राष्ट्रीय उत्पादक संघ, यूएस चेंबर ऑफ कॉमर्स, राष्ट्रीय खुदरा व्यापार संघ और टेकनेट, सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्रायोजित करने वाली इंट्राक्स इंक के प्रतिनिधियों ने वाणिज्य मंत्रालय और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के खिलाफ वाद दाखिल किया था. उत्पादकों के राष्ट्रीय संघ (एनएएम) ने कहा कि इस फैसले के तुरंत बाद वीजा संबंधी प्रतिबंध स्थगित हो गए हैं जो उत्पादकों को अहम पदों पर भर्ती से रोकते थे और ऐसे में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, विकास और नवोन्मेष में वे संकट का सामना कर रहे थे.

उल्लेखनीय है कि ट्रम्प ने जून में शासकीय अदेश जारी किया था जिससे इस साल के अंत तक प्रमुख अमेरिकी और भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले एच-1बी वीजा, गैर कृषि मौसमी कामगारों को जारी किए जाने वाले एच-2बी वीजा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए जारी किए जाने वाले जे श्रेणी के वीजा और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में प्रबंधक तथा अन्य प्रमुख पदों पर विदेशी कर्मचारियों के लिए जारी होने वाले एल वीजा पर अस्थायी रोक लग गई थी. राष्ट्रपति का तर्क था कि अमेरिका को अपने घरेलू कामगारों की नौकरी बचाने और सुरक्षित रखने की जरूरत है, खास तौर पर तब जब कोविड-19 महामारी की वजह से लाखों नौकरियां चली गई हैं. सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और अन्य अमेरिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वीजा जारी करने पर लगी अस्थाई रोक का विरोध किया था.

अर्मेनिया और अज़रबैजान दुनिया के नक्शे पर दो देश हैं जो इन दिनों आपस में भिड़े हुए हैं. इन दोनों देशों के बीच युद्ध चल रहा है. सोवियत संघ के हिस्सा रहे दो अहम देशों के बीच इस युद्ध के बाद दुनिया भर में लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है कि आखिर ये देश कहां हैं. दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है और अज़रबैजान के राष्ट्रपति ने देश के नाम अपने संबोधन में लोगों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सेना को कुछ ही नुकसान हुआ है. वहीं अर्मेनिया का दावा है कि उन्होंने अपने एक्शन में अज़रबैजान के चार हेलिकॉप्टर, तीन दर्जन टैंक और अन्य सेना के वाहनों को खत्म कर दिया है.

क्यों है दोनों देशों के बीच विवाद: नागरनो-काराबख इलाके को लेकर ये पूरा विवाद है, जो कि अभी अज़रबैजान में पड़ता है लेकिन अभी अर्मेनिया की सेना का यहां पर कब्जा है.करीब चार हजार वर्ग किमी. का ये पूरा इलाका पहाड़ी है, जहां तनाव की स्थिति बनी रहती है. मौजूदा तनाव 2018 में शुरू हुआ था, जब दोनों सेना ने बॉर्डर से सटे इलाके में अपनी सेनाओं को बढ़ा दिया था. अब ये तनाव युद्ध का रूप ले चुका है.

कहां है ये दोनों देश: कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे ये दोनों ही देश एक दूसरे के पड़ोसी हैं. दोनों देश ईरान और तुर्की के बीच में पड़ते हैं. भारत से करीब चार हजार किमी दोनों देश दूर हैं.

Coronavirus: वन्य जीवन विशेषज्ञों ने कहा है कि वैक्सीन उत्पादन के लिए 5 लाख शार्क को मारा जा सकता है. कुछ कोविड-19 की वैक्सीन निर्माण में एक पदार्थ स्क्वैलिन का इस्तेमाल किया जाता है. स्क्वैलिन यानी प्राकृतिक तेल शार्क के लीवर में बनता है.

कोविड वैक्सीन के लिए 5 लाख मार दी जाएंगी शार्क?
वर्तमान में प्राकृतिक तेल का इस्तेमाल दवा में सहायक के तौर पर होता है. ये मजबूत इम्यूनिटी पैदा कर वैक्सीन के असर का बढ़ा देती है. ब्रिटिश फार्मा कंपनीग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (GSK) अभी फ्लू वैक्सीन के निर्माण में शार्क के स्क्वैलिन का इस्तेमाल कर रही है. कंपनी ने बताया कि मई में कोरोना वायरस वैक्सीन में संभावित इस्तेमाल के लिए स्क्वैलिन का एक बिलियन डोज बनाएगी. एक टन स्क्वैलिन निकालने के लिए करीब तीन हजार शार्क की जरूरत होगी.
अमेरिका के कैलिफोर्निया की शार्क अलाइज संस्था का कहना है अगर शार्क के लीवर में तेल से कोविड-19 वैक्सीन का एक डोज दिया जाता है तो करीब ढाई लाख शार्क को मारा जाएगा. ये इस बात निर्भर करेगा कि स्क्वैलिन की कितनी मात्रा इस्तेमाल की जाती है. लेकिन अगर लोगों को दो खुराक की जरूरत पड़ी तो 5 लाख शार्क को मारना पड़ेगा.

शार्क के लीवर में पाया जाता है प्राकृतिक तेल: शार्क की आबादी पर मंडराते खतरे से बचने के लिए वैज्ञानिक स्क्वैलिन का वैकल्पिक परीक्षण कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने खमीर युक्त गन्ने से सिंथेटिक वर्जन तैयार किया है. शार्क अलाइज की संस्थापक स्टीफनी ब्रेन्डिल ने बताया कि जंगली जीव को मारना कभी टिकाऊ साबित नहीं होने जा रहा है. खासकर तब जब शार्क का प्रजनन बड़े पैमाने पर नहीं होता हो. उन्होंने चेताया कि अगर हम शार्क का इस्तेमाल करते रहे तो स्क्वैलिन के लिए हर साल ज्यादा शार्क को मारना पड़ेगा.

बीजिंग: लडाखमधील गलवान खोऱ्यात १५ जून रोजी भारत-चीनच्या सैन्यांमध्ये हिंसक संघर्ष झाला. या संघर्षात भारताचे २० जवान शहीद झाले होते. तर, चीनने अधिकृतपणे त्यांचे किती सैन्य ठार झाले, याची माहिती जाहीर केली नव्हती. तणाव कमी करण्यासाठी सुरू असलेल्या बैठकीत चीनने भारताच्या प्रत्युत्तरात ठार झालेल्या सैनिकांची माहिती दिली आहे.

गलवान खोऱ्यातील संघर्षात चीनचे पाच सैन्य ठार झाले असल्याची बाब चीनने मान्य केली आहे. 'द हिंदू'ने याबाबतचे वृत्त दिले आहे. भारताच्या प्रत्युत्तरात ठार झालेल्या पाच चिनी सैन्यांमध्ये एका कमांडिंग ऑफिसरचाही समावेश आहे. याआधी चीनने फक्त एकच सैनिक ठार झाला असल्याचे मान्य केले होते. चीनकडून फक्त पाच सैनिक ठार झाले असल्याचा दावा करण्यात येत असला तरी भारतीय आणि अमेरिकन गुप्तचर संस्थांच्या दाव्यानुसार, ४० चिनी सैन्य ठार झाले आहेत. देशात असंतोष निर्माण होऊ नये यासाठी चीनकडून सातत्याने माहिती लपवली जात होती.

याआधी चीन सरकारचे वृत्तपत्र असलेल्या 'ग्लोबल टाइम्स'चे संपादक हू झिजिन यांनी सांगितले की, गलवान खोऱ्यात झालेल्या संघर्षात भारताचे २० जवान ठार झाले. मात्र, त्या तुलनेत चीनचे कमी सैनिक मृत्यूमुखी पडले असल्याची माहिती मिळाली असल्याचे त्यांनी सांगितले. त्याशिवाय चीनच्या सैनिकांनी काही भारतीय सैनिकांना ताब्यात घेतले होते. तर, भारताच्या ताब्यात एकही चिनी सैन्य नव्हता असेही त्यांनी म्हटले. गलवान खोऱ्यात भारतीय जवानांनीच चिनी सैन्यावर हल्ला केला असल्याचा आरोप त्यांनी केला होता.

बीजिंग: करोना संसर्गाच्या मुद्यावरून चीनचे राष्ट्रापती शी जिनपिंग यांच्यावर टीका करणे एका उद्योजकाला महागात पडल्याची चर्चा सुरू आहे. एका सरकारी रिअल इस्टेट कंपनीच्या माजी अध्यक्ष आणि उद्योजक रेन झिकियांग यांना १८ वर्षाच्या तुरुंगवासाची शिक्षा ठोठावण्यात आली आहे. त्यांच्यावर भ्रष्टाचाराचे आरोप ठेवण्यात आले होते.

रेन झिकियांग यांनी कोट्यवधी डॉलरची रक्कम लाच म्हणून स्वीकारली असल्याचे त्यांच्यावर आरोप होतो. रेन यांना बीजिंगमधील कोर्टाने १८ वर्षाच्या तुरुंगवासासह सहा लाख २० हजार डॉलरचा दंड ठोठावला. रेन यांनी आपल्या गुन्ह्याची कबुली दिली असल्याचे कोर्टाने म्हटले. रेन यांच्याजवळ बेहिशोबी मालमत्ता आढळली होती.

अमेरिकन वृत्तवाहिनी 'सीएनएन'ने दिलेल्या वृत्तानुसार, चिनी नेतृत्वावर प्रश्न उपस्थित करणाऱ्यांना भ्रष्टाचाराच्या आरोपाखाली तुरुंगात डांबले जाते. त्याशिवाय प्रसारमाध्यमांवरही नियंत्रण ठेवण्यात आले असून अन्य संवेदनशील विषयांवर परखड मत मांडणारा रेन झिकियांग यांचा एक लेख ऑनलाइन प्रकाशित झाला होता. या लेख प्रसिद्ध झाल्यानंतर ते सार्वजनिकरीत्या दिसले नाहीत. या लेखामध्ये रेन यांनी चीनचे राष्ट्रपती शी जिनपिंग यांच्यावर टीका केली होती. डिसेंबरमध्ये सुरू झालेला करोनाचा संसर्ग रोखण्यास त्यांना अपयश आले असल्याची टीका त्यांनी केली होती.

नोव्हेंबर महिन्यात होणाऱ्या राष्ट्राध्यक्षपदाच्या निवडणुकीच्या प्रचाराची रणधुमाळी सुरू झाली आहे. विद्यमान राष्ट्राध्यक्ष आणि रिपब्लिकन पक्षाचे उमेदवार डोनाल्ड ट्रम्प आणि डेमोक्रॅट पक्षाचे उमेदवार जो बायडन यांच्यात सरळ लढत होणार आहे. या निवडणुकीत ट्रम्प यांना पराभवाचा धक्का बसण्याची शक्यता वर्तवण्यात येत आहे. निवडणूकपूर्व सर्वेक्षणात जो बायडन यांना सर्वाधिक मतदारांची पसंती असल्याचे समोर आले आहे.

बायडन यांना ५७ टक्के आणि ट्रम्प यांना ४१ टक्के मतदारांनी पसंती दर्शवली आहे. मिनेसोटामध्ये ही बायडन यांना आघाडी आहे. ट्रम्प यांनी आपल्या निवडणूक प्रचारात मिनेसोटामध्ये आघाडी घेण्यासाठी जोरदार प्रयत्न सुरू केले आहेत. त्यासाठी प्रचारासाठी मोठा निधीही गुंतवला आहे. ट्रम्प यांना या ठिकाणाहून १.५ गुणांनी पराभव स्विकारावा लागला होता.

ट्रम्प यांनी मागील निवडणुकीत विजय मिळवलेल्या काही राज्यामध्ये सध्या बायडन यांची आघाडी आहे. यामध्ये अॅरिजोना, मिशिगन, पेन्सिलवेनिया, विस्कॉन्सिन या राज्यांचा समावेश आहे. मागील निवडणुकीत हिलरी क्लिंटन यांनी विजय मिळवलेल्या राज्यांचा समावेश केल्यास बायडन यांच्याकडे २९० इलेक्टोरल व्होट होतील. फ्लोरीडा आणि उत्तर कॅरिलोना सारख्या राज्यातही बायडन यांना आघाडी आहे. या राज्यांचाही समावेश केल्यास त्यांच्याकडे ३३० इलेक्टोरल व्होट होतील.

कोलंबो: अपवाद वगळता राजकीय नेते भाषण करण्यासाठी कायमच उत्सुक असतात. आपण करत असलेले भाषण लोकांच्या पसंतीस उतरावे यासाठी शाब्दिक कोट्याही करतात. तर, काहीजण विषयाचे गांभीर्य लोकांना समजावे यासाठी भाषणात किचकट मुद्दे सोप करून सांगतात. तर, आणखी काही मार्ग अवलंबतात. श्रीलंकेतील मंत्री भाषण करण्यासाठी चक्क नारळाच्या झाडावर चढले. त्याला कारणही तसेच होते.

श्रीलंकेत सध्या नारळाची मोठी टंचाई आहे. त्यामुळे लोकांमध्ये सरकारबद्दल काहीशी नाराजीदेखील आहे. त्यामुळे या विषयावर बोलण्यासाठी श्रीलंकेचे नारळ खात्याचे राज्यमंत्री अरुंदिका फर्नांडो यांनी नारळाच्या कमतरतेबद्दल लोकांना सांगण्यासाठी नारळाच्या झाडावर चढले. त्यांनी सांगितले, स्थानिक उद्योगांकडून वाढती मागणी आणि घरगुती वापरामुळे श्रीलंकेत सध्या ७०० दशलक्ष नारळाची कमतरता भासत आहे. त्यावर मात करण्यासाठी सरकारचे प्रयत्न सुरू असल्याचे त्यांनी सांगितले.

श्रीलंकेचे राज्यमंत्री अरुंदिका फर्नांडो यांनी म्हटले की, नारळाच्या उत्पादनसाठी उपलब्ध असलेल्या जमिनीचा योग्य वापर होईल आणि नारळ उद्योगाला प्रोत्साहन देण्यासाठी सरकार प्रयत्न करणार आहे. जेणेकरून सरकारला मोठ्या प्रमाणावर परदेशी चलन मिळेल.

भारत-चीन सीमा पर चल रहे तनाव के बीच भारत 'क्वाड चतुर्भुज सुरक्षा संवाद’ सुरक्षा वार्ता की मेजबानी करने जा रहा है। अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान अगले महीने क्वाड सुरक्षा वार्ता के लिए जगह और तारीख तय करने को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसके बाद यहां भारत और अमेरिका के बीच 2 प्लस 2 वार्ता होगी। फिलहाल जापान को अगले महीने के आखिर तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले QUAD संवाद के लिए और 2 प्लस 2 डायलॉग के लिए एक ऑपशन के रूप में ही देखा जा रहा है।

क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच अनौपचारिक रणनीतिक वार्ता मंच है। 'चतुर्भुज सुरक्षा संवाद’ सुरक्षा वार्ता लोकतांत्रिक देशों के बीच होने वाला एक अनौपचारिक टाई-अप है जो मिलिट्री लॉजिस्टिक सपोर्ट, अभ्यास और सूचना के माध्यम से अंतर-संचालन को साझा करता है और भारत-प्रशांत समुद्री लेन को किसी भी कृत्रिम निर्माण और बाधाओं से बचा कर संचार को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। क्वाड वार्ता अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मारिस पायने के बीच आयोजित की जाएगी।

चारों देशों के मंत्रियों के नेतृत्व में इस वार्ता को निर्देशित किया जाएगा। चारों मंत्री शांति के लिए व्यक्तिगत तालमेल और वैश्विक दर्शन साझा करते हैं। तारीख और जगह में देरी की वजह है जापान। जापान में  सरकार बदल गई है और प्रधान मंत्री योशिहिदे सुगा ने बीमार शिंजो आबे से पदभार संभाला है। टू प्लस टू  संवाद के लिए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नई दिल्ली में अमेरिकी रक्षा सचिव मार्क ग्रॉफ के साथ शामिल होंगे।

ये वार्ता किसी देश को टारगेट करते हुए नहीं रखी जा रही है। लेकिन कुछ अनौपचारिक समूह कम्युनिस्ट चीन में पैदा हो रहे भेड़िए योद्धाओं के उदय को, इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर की सुरक्षा पर इसके प्रभाव को करीब से देख रहे हैं।

आरबीआई ने गोल्ड लोन कंपनियों को राहत के संकेत दिए हैं. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि अपनी सुरक्षा और सहूलियत के हिसाब से एनबीएफसी सोने की कीमत का 70 फीसदी तक कर्ज दे सकती हैं. चूंकि उनके कारोबार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी ज्यादा होती है इसलिए उतार-चढ़ाव का असर भी ज्यादा होगा. दूसरी ओर, बैंकों के कारोबार में गोल्ड लोन का मामूली हिस्सा है, जो उनके पोर्टफोलियो पर असर नहीं डालेगा.

मुथुट फाइनेंस ने जताई थी चिंता
दरअसल फिक्की के एक कार्यक्रम में मुथुट फाइनेंस के चेयरमैन एमजी मुथुट ने गोल्ड लोन को लेकर आरबीआई के नए नियमों को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा कि एनबीएफसी के लिए सोने की कीमत के 90 फीसदी के बराबर गोल्ड देना संभव नहीं है क्योंकि इस सेक्टर में आने वाला कोई भी डिफॉल्ट आईएलएंडएफएस की तरह जोखिम बढ़ा सकता है. इस पर गवर्नर दास ने कहा कि आरबीआई 100 बड़ी एनबीएफसी पर नजर बनाए हुए है. अपनी सुरक्षा और सहूलियत के हिसाब से एनबीएफसी सोने की कीमत का 70 फीसदी तक कर्ज दे सकती हैं.

कीमत का 90 फीसदी तक लोन देने का दिया था निर्देश
पिछले दिनों आरबीआई ने कहा था कि गोल्ड लोन कंपनियां सोने की पूरी कीमत की 90 फीसदी तक कर्ज देंगी. यह नया नियम 31 मार्च, 2021 तक प्रभावी रहेगा. इससे पहले गोल्ड की कीमत के 75 फीसदी तक लोन देने का प्रभाव था. लेकिन अब आरबीआई गवर्नर की ओर से अनौपचारिक रूप से यह कहना कि कंपनियां गोल्ड कीमत की 70 फीसदी तक लोन दे सकती है, नियमों को फिर बदल सकता है. हो सकता है कि आने वाले दिनों में मुथुट और मणप्पुरम जैसी गोल्ड लोन कंपनियां गोल्ड कीमत की 70 फीसदी तक ही लोन दें और आरबीआई इस पर अपनी सहमति की मुहर लगा दे.

चीन की इंटरनेशनल जासूसी पर बड़ी खबर सामने आई है. अब अमेरिका ने भी मान लिया है कि चीन ने भारत में जासूसी की है. यही नहीं अमेरिका ने इस मामले में पांच चीनी लोगों को आरोपी भी बनाया है. ये चीन की कंपनी शेनझेन इंफोटेक और झेन्हुआ इंफोटेक पर भारत में जासूसी करने का आरोप लगा है. शेनझेन इंफोटेक कंपनी ये जासूसी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार के लिए कर रही है. इस कंपनी का काम दूसरे देशों पर नजर रखना है. अंग्रेजी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की खबर में कहा गया है कि चीन की सरकार 10,000 से अधिक भारतीय लोगों और संगठनों पर नजर रख रही है.

चीनी जासूसी पर भारत सरकार ने दिए जांच के आदेश
चीन की कंपनी के भारत में डाटा जासूसी मामले पर सरकार ने जांच शुरू कर दी है. इस मामले में नेशनल साइबर सेक्युरिटी कोऑर्डिनेशन की निगरानी में सरकार ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई है. यह कमेटी तीस दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी. विदेश मंत्रालय ने भारत में चीन के राजदूत के सामने चीनी कंपनी शेनहुआ इनफोटेक के जासूसी करने का मामला उठाया.

चीन का कंपनी के साथ संबंध से इनकार
चीन की कंपनियों के भारत के कुछ नेताओं की जासूसी करने की खबरों के बीच सरकार ने बुधवार को इस मुद्दे को चीन के राजदूत के समक्ष उठाया. यह जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल को एक पत्र लिखकर दी है.

डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन ने कहा कि कोरोना वायरस के संभावित टीके को लेकर उन्हें वैज्ञानिकों की बात पर तो विश्वास है, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रपं पर नहीं. अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले इन दिनों टीके का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है.

बिडेन ने कोरोना वायरस के संभावित टीके पर जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद डेलावेयर के विलमिंगटन में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण के वितरण और कोरोना वायरस परीक्षण को लेकर टंर्प की 'अक्षमता और बेईमानी' का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका 'टीके को लेकर उन विफलताओं को दोहरा नहीं सकता.'

बिडेन ने कहा, "मुझे वैक्सीन पर भरोसा है, मुझे वैज्ञानिकों पर भरोसा है लेकिन मुझे डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा नहीं है, और इस समय अमेरिकी लोगों को भी (ट्रंप पर भरोसा) नहीं है."

अमेरिका के बार-बार कोरोना वायरस महामारी का स्रोत वुहान को बताए जाने के बावजूद इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई. हालांकि चीन के वुहान में वायरस के संक्रमण के शुरूआती मामले जरूर सामने आए थे. जैसे-जैसे अमेरिका में महामारी का प्रकोप बढ़ा, वैसे-वैसे चीन पर आरोप लगाने का दौर भी तेज होता गया.

ट्रंप प्रशासन ने वायरस का ठीकरा चीन के सिर फोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इस बीच एक और रिपोर्ट सामने आयी है, जिसमें अमेरिका के यूसीएलए अस्पताल और क्लीनिक के मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर महीने में ही अमेरिका के लॉस एंजिल्स में वायरस के संक्रमण के मामले सामने आ चुके थे. जबकि वुहान में वायरस की शुरूआत इसके बाद होने की खबरें आयी थी.

वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में यूसीएलए और अन्य शोधकतार्ओं ने खांसी के इलाज के लिए आए रोगियों के दस्तावेज का जिक्र किया है. बताया जाता है कि इस तरह की परेशानी से जूझ रहे मरीजों का इलाज के लिए आना 22 दिसंबर से शुरू हुआ और फरवरी के आखिर तक जारी रहा.

दुर्गापूजानिमित्त भारताला बांगलादेशकडून मोठी भेट मिळणार आहे. बांगलादेशच्या या भेटीमुळे पश्चिम बंगालमधील नागरिकांना मोठा दिलासा मिळणार आहे. बांगलादेशकडून सद्भावनाच्या रुपाने यावर्षी दुर्गापूजानिमित्त १४७५ टन हिलसा मासे मिळणार आहे. बांगलादेश सरकारने नऊशे निर्यातदारांना मंजुरी दिली आहे. पुढील आठवड्यांपासून निर्यातीला सुरुवात होणार आहे.

बांगलादेशच्या वाणिज्य मंत्रालयाने १० सप्टेंबर रोजी याबाबतचे आदेश जारी केले आहेत. वाणिज्य मंत्रालयाच्या उपसचिव नर्गिस मुर्शिदा यांनी सांगितले की, भारताच्या नागरिकांसाठी आमच्याकडून ही भेट आहे. मागील वर्षी भारताला फक्त ५०० टन हिलसा मासे पाठवले होते. हिलसा हा बांगलादेशची राष्ट्रीय मासा आहे. भारतात विशेषत: पश्चिम बंगालमधील लोकांमध्ये हे मासे लोकप्रिय आहे. पश्चिम बंगालमध्ये दुर्गापूजाच्या काळात हिलसा माशाला मोठी मागणी असते.

बांगलादेशमध्ये याची किंमत जवळपास ८५० ते ९०० टका असते. हुगळी नदीच्या किनाऱ्यावर वाढते प्रदूषण आणि ठिकठिकाणी असलेल्या जाळ्यांमुळे या माशांनी आपले स्थान बदलण्यास सुरूवात केली. बंगालमधील नदीत हिलसा माशांचे प्रमाण अतिशय कमी झाले आहे. त्याचे कारण प्रदूषण असल्याचे बोलले जात आहे. त्यामुळे रिटेल बाजारात माशांच्या किंमतीवरही परिणाम होत आहे. तज्ञांनुसार, २००२-०३मध्ये हुगळी नदीतून ६२ हजार ६०० टन हिलसा मासे पकडले होते. तर, जवळपास दीड दशकांनंतर (२०१७-१८) मध्ये हे प्रमाण २७ हजार ५३९ टन इतके झाले होते. तर, बांगलादेशमध्ये हिलसा माशांचे प्रमाण वाढले. या काळात १ लाख ९९ टनाहून पाच लाख १७ हजार टन इतक्या प्रमाणावर मासे पकडण्यात आले.

संयुक्त अरब अमिराती, बहरीन या देशांनी इस्रायलसोबतच्या मैत्री करारावर स्वाक्षरी केली आहे. या करारामुळे आता मध्य-पूर्व भागात मैत्री पर्व सुरू झाले असल्याचे बोलले जात आहे. अनेक वर्षांपासूनचे वैर विसरून अरब देशांनी इस्रायलसोबत मैत्री करार केला आहे. अमेरिकेची मध्यस्थी याकामी अतिशय महत्त्वाची ठरली. करारावर स्वाक्षरी होताना इस्रायलचे पंतप्रधान बेंजामिन नेतन्याहू आणि संयुक्त अरब अमिराती आणि बहरीन या देशांचे प्रतिनिधी उपस्थित होते.

अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी या करारामुळे मध्य पूर्व भागात नवी सुरुवात झाली असून यामुळे आता जगातील अतिशय महत्त्वाच्या भागात शांतता प्रस्थापित होणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. अनेक दशकांचा संघर्ष, वादानंतर आता आपण एका नवीन मध्य पूर्व भागाची सुरुवात करत असल्याचे त्यांनी म्हटले. इस्रायल, युएई आणि बहरीन या देशांमध्ये आता दूतावास सुरू करण्यात येणार असून मित्र देश म्हणून एकत्र काम करणार आहेत.

दक्षिण चीन समुद्र पुन्हा एकदा तणावाचे केंद्र तयार झाले आहे. चीनच्या वाढत्या आगळकीला इतर देशांकडूनही उत्तर देण्यास सुरू झाले आहे. इंडोनेशियाने आपल्या हद्दीत घुसलेल्या चीनच्या गस्ती पथकाला पिटाळून लावले आहे. या घटनेनंतर आता दोन्ही देशातील तणाव वाढला आहे. चीनकडून पलटवार होण्याची शक्यता गृहित धरून इंडोनेशियाने युद्धनौकांची गस्त वाढवली आहे. या भागात चिनी युद्धनौकांची हालचाल सुरू असल्याचे समोर आले.

याआधी जपानने आपल्या हद्दीत घुसलेल्या चीनच्या पाणबुडीला पिटाळून लावले होते. इंडोनेशियाने चीनच्या गस्ती पथकाच्या जहाला नातुना बेटाजवळून हुसकावून लावले आहे. हा भाग इंडोनेशियाच्या विशेष आर्थिक भागात येतो. इंडोनेशियाच्या समुद्र सुरक्षा यंत्रणांना चीनचे जहाज आपल्या हद्दीत शिरले असल्याची माहिती शुक्रवारी रात्री समजली. त्यानंतर इडोनेशियाने आपले एक जहाज चीनच्या या गस्ती जहाजाजवळ पाठवले.

इंडोनेशिया आणि चीनच्या जहाजात एक किलोमीटरच्या अंतरावरून चर्चा झाली. त्यानंतर इंडोनेशियाने चीनच्या जहाजाला त्या परिसरातून निघून जाण्यास सांगितले. मात्र, चीनच्या जहाजाने हा भाग आमच्या हद्दीत येत असल्याचे म्हटले. त्यानंतर आक्रमक पवित्रा घेऊन इंडोनेशियाच्या जहाजाने चीनच्या जहाजाला पिटाळून लावले.

ब्रिटनमधील ऑक्सफर्ड विद्यापीठ आणि एस्ट्राजेनका विकसित करत असलेल्या करोना प्रतिबंधक लशीची चाचणी पुन्हा एकदा सुरू करण्यात आली आहे. ब्रिटनमधील औषधे आणि आरोग्य सेवा उत्पादने नियामक प्राधिकरणाने संपूर्ण तपासणी केली. त्यानंतर क्लिनिकल चाचणीला हिरवा झेंडा दाखवण्यात आला. लस टोचलेल्या एका स्वयंसेवकाच्या प्रकृतीत बिघाड झाल्यामुळे चाचणी थांबवण्यात आली होती.

ऑक्सफोर्ड विद्यापीठ आणि एस्ट्राजेनक यांनी सांगितले की, काही सूचनांबाबतची माहिती आताच सार्वजनिक करू शकत नाही. मात्र, स्वतंत्ररीत्या झालेल्या चाचणीत ही लस सुरक्षित आढळली आहे. औषधे आणि आरोग्य सेवा उत्पादने नियामक प्राधिकरणाने केलेल्या तपासणीत लस सुरक्षित आढळल्यामुळे लशीची चाचणी पुन्हा सुरू करण्यात आली आहे.

या लशीचे पहिल्या दोन टप्प्यात चांगले परिणामही दिसून आले होते. भारतातही या लशीच्या तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू आहे. ब्रिटनमध्ये या लशीच्या तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी दरम्यान एका व्यक्तीला ही लस देण्यात आली. मात्र, त्यानंतर ही व्यक्ती आजारी पडली. या व्यक्तीला उपचारासाठी रुग्णालयात दाखल करण्यात आले. त्यानंतर कंपनीने ही लस चाचणी थांबवण्याचा निर्णय घेतला. भारतातही लस चाचणी थांबवण्यात आली. सिरम इन्स्टिट्यूटच्या देखरेखीत ही चाचणी घेण्यात येत आहे.

भारताच्या फाळणीसाठी अनेक तर्क आणि दावे केले जातात. इतकंच नव्हे तर देश स्वतंत्र झाल्यानंतर पहिले पंतप्रधान होण्यासाठी पंडित जवाहरलाल नेहरू हे आग्रही होते आणि त्यासाठी फाळणी झाली तरी चालेल असा तर्क दिला जातो. मात्र, फाळणीसाठी मोहम्मद अली जिना यांचा हट्टीपणा कारणीभूत असल्याचे पाकिस्तानी वंशाचे राज्यशास्त्राचे संशोधक इश्तियाक अहमद यांनी दावा केला आहे.

भारताची फाळणी होऊ नये यासाठी महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू आणि त्यांच्या नेतृत्वातील काँग्रेस पक्ष आग्रही होते. मात्र, मुस्लिम लीगचे नेते मोहम्मद अली जिना हे फाळणीवर अडून बसले होते. जिना यांनी काँग्रेसला हिंदूचा पक्ष, तर महात्मा गांधी यांना 'हुकूमशहा' असल्याचे सिद्ध करण्यासाठी एकही संधी गमावली नाही.

इश्तियाक यांनी सांगितले की, २२ मार्च १९४० मध्ये लाहोरमध्ये मोहम्मद अली जिना यांनी आपले अध्यक्षीय भाषण दिले होते. त्यानंतर २३ मार्च रोजी ठराव मंजूर करण्यात आला. या दिवसानंतर जिना अथवा मुस्लिम लीग यांनी एकदाही अखंड भारताचा स्वीकार करण्याची इच्छा व्यक्त केली नाही. त्यावेळी फेडरल व्यवस्था अतिशय कमकुवत होती आणि मोठ्या प्रमाणावर ताकद ही प्रांतीय सरकारांच्या हाती एकवटलेली होती.

बैरूत: जवळपास एक महिन्याआधी भीषण स्फोटांनी उद्धवस्त झालेल्या बैरूत बंदरावर पुन्हा एकदा आग लागली. गुरुवारी बैरूत बंदरावर आगीचा उंच लोळ दिसल्याने स्थानिकांच्या मनात भीती निर्माण झाली. या आगीच्या वेळी कोणताही स्फोट झाला नसल्याची माहिती आहे. त्याशिवाय कोणतीही जीवितहानी झाली नसल्याची प्राथमिक माहिती आहे.

मागील महिन्यात बैरूत बंदरावर झालेल्या स्फोटात जवळपास १५० जणांचा मृत्यू झाला होता. तर, सहा हजारांहून अधिक जखमी झाले होते. या बंदर परिसरातील अनेक इमारती उद्धवस्त झाल्या होत्या. त्यानंतर गुरुवारी बैरूत बंदराजवळ आगीचे प्रचंड लोळ दिसले. त्यामुळे अनेकांना स्फोटाचीच आठवण झाली. ही आग कशी लागली, याबाबत अधिक स्पष्ट माहिती समोर आली नाही. या ठिकाणी इंधन आणि टायर जाळल्यामुळे हे आगीचे लोळ उठले असावेत अशी शक्यता वर्तवण्यात येत आहे. आगीवर नियंत्रण मिळवण्यासाठी अग्निशमन दलाचे जवान घटनास्थळी दाखल झाले. या स्फोटात कोणीही जखमी झाल्याचे वृत्त नाही.

करोनाच्या संसर्गाने जगभरात थैमान घातले आहे. करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी लस विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. जगभरात सध्या १५० हून अधिक लशींवर संशोधन सुरू आहे. लस विकसित करण्यासाठी वेगवेगळे प्रयत्न सुरू आहेत. याद्वारे मानवी शरीरातील SARS-CoV-2 ओळखण्यासाठी प्रयत्न करण्यात येत आहे. आपल्या शरीरातील पेशींवर ACE-2 रिसेप्टर असतात. जे विषाणूवर असलेल्या स्पाइक प्रोटीनचे लक्ष्य असतात. यांचा प्रतिकार करून विषाणू आपल्या शरीरात प्रवेश करतात. शरीरात दाखल झाल्यानंतर विषाणू आपली संख्या वाढवतो आणि संसर्ग शरीराच्या इतर भागात पोहचतो. या विषाणूंशी लढण्यासाठी आपल्या शरीरात अॅण्टीबॉडी आणि टी-सेल असतात. लशीद्वारे कोणत्याही संसर्गाशिवाय रोगप्रतिकारक शक्ती वाढवण्याचे आव्हान आहे. जवळपास आठ ते दहा लशींची चाचणी अंतिम टप्प्यात आली आहे. रशियाने आपल्या देशात सामान्यांसाठी लस उपलब्ध केली आहे. तर, चीनने लष्करातील जवानांना लस देण्यास सुरुवात केली आहे.

अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांचे 'मिशन पीस डील' सुरू असल्याचे चित्र आहे. इस्रायल आणि संयुक्त अरब अमिरातीमध्ये यशस्वी मध्यस्थी केल्यानंतर आता आणखी एक यशस्वी मध्यस्थी ट्रम्प यांनी केली आहे. इस्रायल आणि बहरीन यांच्यात शांतता करार झाला असून दोन्ही देशांमध्ये राजनयिक संबंध सामान्य होणार आहेत.

एक महिन्यापूर्वी डोनाल्ड ट्रम्प यांनी इस्रायल आणि संयुक्त अरब अमिरातीमध्ये यशस्वी मध्यस्थी करत जवळपास ७२ वर्षांनंतर दोन्ही देशांमध्ये मैत्री संबंध प्रस्थापित केले. त्यानंतर आता बहरीन आणि इस्रायलमध्ये मैत्री करार झाला आहे. संयुक्त अरब अमिरातीनंतर इस्रायलनंतर आता बहरीन या आणखी एका अरब देशाने इस्रायलसोबत मैत्री करार केला आहे. इस्रायलचे पंतप्रधान बेंजामिन नेतन्याहू आणि बहरीनचे किंग हमद बिन इसा अल खलीफा यांच्यासोबत फोनवरून चर्चा केल्यानंतर डोनाल्ड ट्रम्प यांनी या मैत्री कराराची माहिती जाहीर केली.

इस्रायल आणि बहरीनमध्ये आता राजनयिक संबंध निर्माण होणार आहे. दोन्ही देशांमध्ये थेट विमानसेवा सुरू होणार आहे. त्याशिवाय, आरोग्य, व्यवसाय, तंत्रज्ञान, शिक्षण, सुरक्षा आणि कृषी आदी क्षेत्रात सहकार्य केले जाणार आहे. हा एक ऐतिहासिक दिवस असल्याचे ट्रम्प यांनी म्हटले. आतापर्यंत इस्रायलसोबत मैत्री करण्यास अनेक देश टाळाटाळ करत होते. आता या परिस्थितीत बदल होत असून मैत्री संबंध निर्माण होत आहेत. पश्चिम आशिया अधिक स्थिर, सुरक्षित आणि समृद्ध होणार असल्याचा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला.

जगभरात करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी विविध पातळींवर प्रयत्न सुरू आहेत. काही देशांकडून लस विकसित करण्याचे जोरदार प्रयत्न सुरू असून काहींची तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू आहे. ब्रिटनमधील ऑक्सफर्ड विद्यापीठातील भारतीय वंशाच्या प्राध्यापक सुमी विश्वास यांनी करोनाला अटकाव करणारी एक लस विकसित केली आहे. या लशीची चाचणी ऑस्ट्रेलियासह अनेक देशांमध्ये होत आहे.

प्रा. सुमी विश्वास यांनी २०१७ मध्ये ब्रिटनमध्ये स्पाई बायोटेक नावाची कंपनी स्थापन केली. या कंपनीच्या मुख्य कार्यकारी अधिकारी पदावर त्या कार्यरत आहेत. सुमीविश्वास यांनी ऑक्सफर्ड विद्यापीठाच्या जेनर इन्स्टिट्यूटमध्ये एड्रियन हिल आणि सारा गिलबर्ट यांच्यासोबत एकत्र काम केले आहे. या जेनर इन्स्टिट्यूटने एस्ट्राजेनकासोबत करोनावर लस विकसित केली आहे.

प्रा. सुमी विश्वास यांच्या स्पाई बायोटेकने विकसित केलेल्या लशीची मानवी चाचणी सुरू आहे. ऑस्ट्रेलियात या लशीची चाचणी सुरू आहे. सध्या दुसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू आहे. ही चाचणी जगातील सर्वात मोठी लस उत्पादक कंपनी असलेल्या भारतातील सिरम इन्स्टिट्यूट ऑफ इंडियाच्यावतीने संचलित केली जात आहे. सिरम इन्स्टिट्यूटसोबत सुमी विश्वास यांच्या स्पाय बायोटेक कंपनीने लस उत्पादनाबाबतचा करार केला आहे.

दहशतवाद्यांचे आश्रयस्थान असणारा पाकिस्तान हा अमेरिकेच्यालेखी भारतापेक्षा काही प्रमाणात अधिक सुरक्षित आहे. अमेरिकन नागरिकांसाठी जारी करण्यात आलेल्या प्रवास निर्देश यादीत अमेरिकेने पाकिस्तानच्या श्रेणीत सुधारणा केली आहे. याआधी भारत, पाकिस्तान, सीरिया, इराक आदी देशांना अमेरिकेने चार इतके रेटिंग दिले होते. त्यातून आता पाकिस्तानला वगळण्यात आले असून तीन रेटिंग देण्यात आले आहे.

अमेरिकेच्या परराष्ट्र मंत्रालयानुसार, भारतात प्रवास करणे अमेरिकन नागरिकांनी टाळायला हवे. भारतात करोनाचे संकट आहे. त्याशिवाय देशात गु्न्हेगारीच्या घटना आणि दहशतवादी घटनांमध्ये वाढ झाली आहे. त्यामुळे अमेरिकन नागरिकांनी भारतात प्रवास करू नये अशी सूचना देण्यात आली होती. मंगळवारी जारी करण्यात आलेल्या निर्देशांमध्ये भारताबाबत याच सूचना कायम ठेवण्यात आल्या आहेत. तर, पाकिस्तानमधील प्रवासाबाबत पुनर्विचार करण्यात यावा अशी सूचना अमेरिकेने आपल्या नागरिकांना दिली आहे. याआधी १० ऑगस्ट रोजी जाहीर केलेल्या यादीत भारत आणि पाकिस्तान एकाच श्रेणीत होते.

अमेरिकेच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने पाकिस्तानच्या श्रेणीत सुधारणा केली असली तरी दहशतवादी घटना आणि अपहरणाच्या घटनांमुळे बलुचिस्तान, खैबर पख्तुनख्वा आणि प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेजवळ न जाण्याचा सल्ला अमेरिकेने आपल्या नागरिकांना दिला आहे. करोनाबाधितांच्या संख्येत घट आढळून आली आहे. त्याशिवाय २०१४ नंतर पाकिस्तानमध्ये देशांतर्गत सुरक्षितेच्यादृष्टीने मोठी पावले उचलण्यात आली आहेत. पाकिस्तानच्या सुरक्षा दलाने दहशतवाद आणि कट्टरवादाविरोधात मोठी मोहीम सुरू केली होती असेही अधिकाऱ्यांनी म्हटले.

तालिबान आणि पाकिस्तानच्या धोरणाचे कट्टर विरोधक समजले जाणारे अफगाणिस्तानचे उपराष्ट्रपती अमरुल्ला सालेह यांच्या ताफ्यावर काबूलमध्ये दहशतवादी हल्ला झाला. या बॉम्ब हल्ल्यात उपराष्ट्रपती सालेह थोडक्यात बचावले. मात्र, तीन जण ठार झाले असून १२ जण जखमी झाले आहे.

उपराष्ट्रपती सालेह यांच्या मुलाने ट्विट करून म्हटले की, माझे वडील आणि मी सुरक्षित आहोत. आमच्यासोबतची एकही व्यक्ती या हल्ल्यात मृत्यूमुखी पडली नाही. सर्वजण सुरक्षित असल्याचे त्यांनी सांगितले. मागील वर्षीदेखील सालेह यांच्यावर जीवघेणा हल्ला झाला होता. त्यावेळी २० जण ठार झाले होते.

सालेह यांच्या ताफ्यावर झालेला हल्ला इतका भीषण होता की, वाहनांचे मोठे नुकसान झाले. या स्फोटामुळे काही इमारतींचेही नुकसान झाले आहे. आजच्या दिवशी १९ वर्षांपूर्वी तालिबानविरोधी नेता अहमद शाह मसूद यांचीदेखील हत्या करण्यात आली होती. या हल्ल्यामागे तालिबान आणि पाकिस्तानमधील काही दहशतवादी गटांचा हात असल्याची चर्चा आहे.

अफगाणिस्तान सुरक्षा दलाने या परिसराला घेरले असून शोध मोहीम सुरू आहे. तर, जखमींना रुग्णालयात दाखल करण्यात आले आहे. काही जखमींची प्रकृती चिंताजनक आहे. स्फोटामुळे परिसरात आग लागली होती. मात्र, अग्निशमन दलाच्या जवानांनी आगीवर नियंत्रण मिळवले. आतापर्यंत कोणत्याही दहशतवादी गटाने हल्ल्याची जवाबदारी घेतली नाही.

कोरोना वायरस आखिरी महामारी नहीं है, दुनिया को आगे भी इस तरह की किसी दूसरी महामारी का आगे सामना करना पड़ सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम गेब्रेयसस ने कहा कि दुनियाभर के देशों को भविष्य में आने वाली महामारी के लिए लेकर तैयार रहना होगा. साथ ही टेड्रेस ने सभी देशों से महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवा में निवेश करने की सलाह भी दी है.

टेड्रोस अदनोम गेब्रेयसस ने कहा, "ये आखिरी महामारी नहीं है. महामारी जीवन का एक हिस्सा है. लेकिन भविष्य में आने वाली महामारी के लिए हम सबको तैयार रहना होगा."

दुनियाभर में पौने 3 करोड़ लोग कोरोना संक्रमित
दुनियाभर में कोरोना मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन महामारी का प्रकोप काफी देशों में नियंत्रण होता दिख रहा है. पूरी दुनिया में करीब पौने तीन करोड़ लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं और मौत का आंकड़ा 9 लाख के करीब पहुंच गया है. पिछले 24 घंटों में दुनिया में 1 लाख 96 हजार नए मामले सामने आए हैं और 3 हजार 708 लोगों की जान चली गई है.

वर्ल्डोमीटर के अनुसार, दुनियाभर में अबतक 2 करोड़ 75 लाख लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं. इसमें से 8 लाख 96 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई है तो वहीं 1 करोड़ 96 लाख लोग ठीक भी हुए हैं. पूरी दुनिया में 70 लाख एक्टिव केस हैं यानी कि फिलहाल इतने लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी रशियाने विकसित केलेली 'स्पुटनिक व्ही' ही लस भारतात दाखल होणार आहे. याच महिन्यात ही लस भारतात येणार आहे. या लशीची अंतिम टप्प्यातील चाचणी भारतातही होणार आहे. रशियाने करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करणारी विकसित केलेली लस ही प्रभावी आणि सुरक्षित असल्याचे समोर आले आहे. लस चाचणीच्या पहिल्या दोन टप्प्यात ही लस अतिशय सुरक्षित असल्याचे आढळले आहे. लस उत्पादन करण्यासाठी निधी जमवणारी संस्था रशियन डायरेक्ट इनवेस्ट फंडचे सीईओचे किरील दिमित्री यांनी सांगितले की, या लशीची क्लिनिकल चाचणी भारतासह युएई, सौदी अरेबिया, फिलिपीन्स आणि ब्राझीलमध्ये होणार आहे. तिसऱ्या टप्प्यातील लस चाचणीचा प्राथमिक अहवाल ऑक्टोबर-नोव्हेंबरमध्ये जाहीर करण्यात येणार आहे.

रशियाने विकसित केलेली 'स्पुटनिक व्ही' ही करोनावरील लस सर्वसामान्य नागरिकांसाठी उपलब्ध होणार आहे. या आठवड्यांपासून ही लस देण्यात येणार आहे. रशियाचे राष्ट्रपती व्लादिमीर पुतीन यांनी ११ ऑगस्ट रोजी या लशीला मंजुरी दिली असल्याची घोषणा केली होती. या लशीला मॉस्कोच्या गामलेया रिसर्च इन्स्टिट्यूटने संरक्षण मंत्रालयासोबत विकसित केली आहे. मेडिकल वॉचडॉग असणाऱ्या Roszdravnadzor संस्थेमध्ये गुणवत्तेची तपासणी होणार आहे. त्यानंतर या आठवड्यात ही लस सामान्यांसाठी उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे.

करोनाच्या वाढत्या संसर्गाच्या पार्श्वभूमीवर लस विकसित करण्याचे अनेक देश प्रयत्न करत आहेत. तर, दुसरीकडे लस विकसित झाल्यानंतर त्याचे योग्य वितरण झाले पाहिजे यासाठी प्रयत्न सुरू आहेत. जागतिक आरोग्य संघटना आणि भारता दरम्यान करोना लशीबाबत चर्चा सुरू आहे. जागतिक आरोग्य संघटनेचे वरिष्ठ सल्लागार ब्रूस आयलवर्ड यांनी ही माहिती दिली. कोवॅक्स (COVAX)फॅसिलिटीचा हिस्सा बनण्यासाठी भारतदेखील पात्र असल्याचे त्यांनी पत्रकार परिषदेत म्हटले.

जागतिक आरोग्य संघटना आणि 'गावी द वॅक्सीन अलायन्स' (GAVI) या कोवॅक्स फॅसिलिटीचे नेतृत्व करत आहेत. या माध्यमातून जगभरात करोनाला अटकाव करणाऱ्या लस खरेदी करणे आणि त्याच्या लस वितरणात मदत करण्यात येणार आहे. अमेरिकेसह अनेक देशांनी लस विकसित करणाऱ्या अनेक कंपन्यांसोबत थेट लस खरेदीचा करार केला आहे. या देशांनी कराराद्वारे लस पुरवठ्याची खात्री केली आहे.

लशीवर डॉ. हर्षवर्धन यांनी काय म्हटले होते?
भारताचे आरोग्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन यांनी मागील महिन्यात म्हटले की, या वर्षाच्या अखेरपर्यंत भारतात पहिली लस उपलब्ध होऊ शकते. कोविड-१९वरील एक लस क्लिनिकल चाचणीच्या तिसऱ्या टप्प्यात आहे. या वर्षाच्या अखेरीस भारतात लस उपलब्ध होईल असा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला होता.

नोव्हेंबर महिन्यात होणाऱ्या अमेरिकेच्या राष्ट्राध्यक्षपदाच्या निवडणुकीचा प्रचार जोरात सुरू आहे. रिपब्लिकन पक्षाच्यावतीने विद्यमान राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प आणि डेमोक्रॅट पक्षाच्यावतीने माजी उपराष्ट्रपती जो बायडन यांच्यात सरळ निवडणूक होणार आहे. या निवडणुकीच्या विजयासाठी सट्टेबाजांनी डोनाल्ड ट्रम्प यांना पसंती दर्शवली आहे. तर, निवडणूक सर्वेक्षणात बायडन यांनी पसंती मिळाली आहे.

अमेरिकेत राष्ट्रीय अथवा स्थानिक निवडणुकीसाठी सट्टेबाजी अवैध आहे. त्यामुळे सट्टेबाजीशी निगडीत सर्व व्यवहार परदेशी वेबसाइटवर होत आहेत. निवडणूक सट्टेबाजी बेकायदेशीर असल्यामुळे अमेरिकन नागरीक गुप्तपणे सट्टा लावत आहेत. एएफपी या वृत्तसंस्थेने दिलेल्या वृत्तानुसार, सट्टेबाजारानुसार ट्रम्प यांच्यावर पैसे लावणाऱ्यांना ९० टक्के अधिक फायदा होणार असल्याचे चित्र आहे..

एका ब्रिटीश सट्टेबाजाने सांगितले की, ट्रम्प यांना मोठा पाठिंबा मिळत आहे. ट्रम्प यांच्या बाजूने आतापर्यंत सुमारे ९५ कोटींहून अधिक रुपये लावण्यात आले आहेत. तर, आयलँडच्या एका सट्टेबाजानुसार ट्रम्प यांच्यावर मोठ्या प्रमाणावर पैसे लावण्यात आले आहे. त्यामुळे सट्टा बाजारातील मंदी काही प्रमाणात कमी झाली आहे. ट्रम्प यांच्यावर सर्वाधिक पैसे लावले जात असल्याचे ऑस्ट्रेलियन सट्टेबाजाने सांगितले.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देते हुए कहा कि भारत-चीन सीमा पर हालात 'बहुत ही खराब' हैं और चीन अधिक मजबूती के साथ 'इसे बढ़ाने जा रहा है'. वह इस मामले में शामिल होना और मदद करने चाहेंगे. व्हाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने शुक्रवार को कहा, "भारत और चीन के संबंध में, हम मदद करने के लिए तैयार हैं. अगर हम कुछ कर सकते हैं, तो हम उसमें शामिल होना और मदद करना चाहेंगे. इस बारे में हम दोनों देशों से बात कर रहे हैं."

इस संबंध में सवाल करने पर किया कि क्या चीन भारत के साथ दादागिरी करने की कोशिश कर रहा है. इसपर ट्रंप ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि ऐसी बात न हो, साथ ही कहा कि चीन 'निश्चित ही यह करने जा रहा है.' ट्रंप ने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि ऐसा न हो... लेकिन वह (चीन) निश्चित ही यह करने जा रहा है. ज्यादातर लोग जितना समझ रहे हैं, वह उससे वहीं ज्यादा मजबूती से यह करने जा रहा है."

"मेरा बेटा और बेटी मेरी तरह ही भारत के बारे में बहुत सोचते हैं"
डोनाल्ड ट्रंप ने उनके परिवार के भारत के प्रति प्रेम का संकेत देते हुए कहा कि उनकी तरह ही उनकी बेटी इवांका, बेटा डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और उनकी मित्र किम्बर्ली गिलफॉय भारत के बारे में बहुत सोचते हैं. उन्होंने कहा, "मैं भारत को जानता हूं और जिन युवाओं (किम्बर्ली, डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर और इवांका) का आपने जिक्र किया, उन्हें समझता हूं. वे बहुत अच्छे युवा हैं और मुझे पता है कि मेरी तरह ही भारत के साथ उनका संबंध बहुत अच्छा है."

आर्थिक संकटात अडकलेला पाकिस्तान आता चीनच्या जाळ्यात अडकतच चालला आहे. चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडोर प्रकल्पाच्या माध्यमातून पाकिस्तानचा पाय आणखीच खोलात जात आहे. पाकिस्तानने आपला समुद्रही चीनच्या ताब्यात दिल्याचे चित्र आहे. पाकिस्तानने विशेष आर्थिक क्षेत्रात चिनी जहाजांना मासेमारी करण्यास परवानगी दिली आहे. पाकिस्तान सरकारच्या या निर्णयाविरोधात स्थानिक मच्छिमारांनी आंदोलन सुरू केले आहे.

पाकिस्तान सरकारच्या या निर्णयामुळे कराचीतील मच्छिमारांना धक्का बसला आहे. हजारो मच्छिमारांनी चीनविरोधातही आंदोलन सुरू केले. पाकिस्तान सरकारने परवानगी दिल्यामुळे चीनहून खोल समुद्रात मासेमारी करण्यासाठी कराचीत मोठ्या २० ट्रॉलर दाखल झाल्या आहेत. या चिनी जहाजांना सिंध आणि बलुचिस्तानच्या किनाऱ्याजवळ मासेमारी करण्यास परवानगी देण्यात आली आहे. चिनी जहाजांना पाकिस्तानमध्ये मासेमारी करू न देण्याची मागणी स्थानिक पाकिस्तानी मच्छिमारांनी केली आहे.

चिनी मोठ्या प्रमाणावर मासेमारी करू शकतात. त्यामुळे समुद्रातील संतुलन बिघडण्याची भीती असून पाकिस्तानच्या मच्छिमारांना त्याचा मोठा बसणार आहे. पाकिस्तानच्या फिशर फॉल्क फोरमच्या अहवालानुसार पाकिस्तानच्या किनारी भागात माशांची संख्या ७२ टक्क्यांनी कमी झाली आहे. प्रमाणाहून अधिक मासेमारी केल्यामुळे माशांची संख्या कमी झाली आहे.

बीजिंग: भारताने चीनवर पुन्हा एकदा डिजीटल स्ट्राइक करत ११८ अॅपवर बंदी घातली. त्यानंतर चीनने या अॅप बंदीवर नाराजी व्यक्त केली. आता आपल्या बचावासाठी चीनने हास्यास्पद दावा केला आहे. योग आणि रविंद्रनाथ टागोर यांच्या लोकप्रियतेचा हवाला देत चीनने अॅप बंदीवर प्रश्नचिन्ह उभे केले आहे.

भारताने डेटा चोरी आणि राष्ट्रीय सुरक्षितेच्या मुद्यावर चीनच्या अॅपवर बंदी घातली आहे. आतापर्यंत २२४ चिनी कंपन्यांवर बंदी घातली आहे. यामध्ये टिकटॉक, हॅलो, पबजी, कॅम स्कॅनर अशा विविध अॅपचाही समावेश आहे. अॅप बंदीवर चीनने आपली नाराजी व्यक्त केली असून अशी बंदी घालणे गुंतवणूकदारांच्या विरोधात असल्याचे चीनने म्हटले. ही कारवाई भेदभाव करणारी असल्याचेही चीनने म्हटले. चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाच्या प्रवक्त्यांनी सांगतिले की, रविंद्रनाथ टागोर यांच्या कविता चीनमध्ये लोकप्रिय आहेत. भारतीय योग देखील मोठ्या प्रमाणावर लोकप्रिय होत आहे. मात्र, कविता आणि योग हे चिनी संस्कृतीवर आक्रमण आहे, असे आम्ही समजत नसल्याचे त्यांनी सांगितले.

भारताने केलेली अॅप बंदी ही जागतिक व्यापार संघटनेच्या कराराचे उल्लंघन असल्याचे चीनने म्हटले आहे. भारताने निष्पक्ष पद्धतीने कोणत्याही भेदभावाशिवाय व्यवसाय, व्यापारासाठी वातावरण तयार करण्याची आवश्यकता असल्याचे चीनने म्हटले आहे. अॅप बंदीचा मुद्या अतिशय गांभीर्याने घेतला असल्याचे चीनने म्हटले आहे.

लडाखमधील पॅन्गाँग त्सो सरोवराजवळ चीनने घुसखोरीचा प्रयत्न केला. त्यानंतर भारताने सुरक्षितेच्या कारणास्तव चिनी कंपनीच्या ११८ अॅपवर बंदी घातली. यामध्ये पबजी, लिविक, व्हीचॅट वर्क आणि व्हीचॅट रीडिंग, अॅपलॉक, केरम फ्रेंड्स यासारख्या अॅप्सचा समावेश आहे. चीनच्या वाणिज्य खात्याने म्हटले की, भारताने अॅप बंदीचा निर्णय घेणे म्हणजे चिनी गुंतवणूकदार आणि सेवा पुरवठादारांच्या कायदेशीर अधिकारांचे हनन करण्यासारखे आहे. चीन या बंदीच्या निर्णयाला घेऊन गंभीर असून त्याचा पूर्णपणे विरोध करणार असल्याचे त्यांनी सांगितले.

चीनने अणवस्त्रांचा साठा दुप्पट करण्यासाठीचे प्रयत्न सुरू केले आहेत. इतकंच नव्हे तर अमेरिकेवर हल्ला करण्यासाठी इतर देशातही चीन आपले लष्करी तळ उभारत आहे. अमेरिकेच्या संरक्षण विभागाच्या अहवालात ही बाब नमूद करण्यात आली आहे. जागतिक महासत्ता बनण्यासाठी चीनकडून ही पावले उचलली जात असल्याचे म्हटले जात आहे.

चीन सध्या आक्रमक विस्तारवादी भूमिका घेत आहे. दक्षिण चीन समुद्र भागातही अमेरिका आणि चीनचे नौदल एकमेकांसमोर उभे ठाकले आहे. तर, काही दिवसांपूर्वीच लडाखमध्ये प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषा ओलांडून भारताच्या हद्दीत घुसखोरीचा प्रयत्न भारतीय जवानांनी उधळला. या पार्श्वभूमीवर हा अहवाल समोर आला आहे. पेंटागॉनने आपल्या Military and Security Developments Involving The Peoples Republic of China 2020 या वार्षिक अहवालात म्हटले की, भारताच्या शेजारी असलेल्या तीन देशांसह जवळपास १२ देशांमध्ये आपला लष्करी तळ उभारण्याचा प्रयत्न करत आहे. यामुळे चीनला जगभरात दबदबा निर्माण करता येऊ शकतो. या अहवालानुसार, पाकिस्तान, श्रीलंका आणि म्यानमार या देशांसह थायलँड, सिंगापूर, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमिरात, केनिया, सेशल्स, टांझानिया, अंकोला आणि ताजिकिस्तान या देशांमध्ये चीन आपला लष्करी तळ उभारण्याचा प्रयत्न करत आहे.

पेंटागॉनने म्हटले की, या ठिकाणांवरून नौदल, हवाई दल आणि सैन्यांच्या कारवाईला अधिक शक्तिशाली करण्यात येणार आहे. जगभरात पीपल्स लिबरेशन आर्मीच्या सैन्य ठिकाणांचे नेटवर्क हे अमेरिकेच्या लष्करी कारवाईमध्ये हस्तक्षेप करू शकतात. त्याशिवाय चीन अमेरिकेविरोधातील आक्रमक कारवाईचे समर्थन करू शकते.

करोनाच्या थैमानाशी दोन हात करत असलेल्या अमेरिकेतील नागरिकांना मोठा दिलासा मिळणार आहे. राष्ट्राध्यक्षपदाच्या निवडणुकीच्या काही तासांपूर्वी अमोरिकेत लस मिळणार असल्याची चर्चा आहे. लस विकसित करण्याचे प्रयत्न युद्धपातळीवर सुरू असून त्याच्या वितरणाशी संबंधित तयारीदेखील करण्यात आल्या आहेत. अमेरिकेत ३ नोव्हेंबर रोजी राष्ट्राध्यक्षपदाची निवडणूक आहे.

अमेरिकेतील राज्य प्रशासनाला लस वितरणासाठी सज्ज राहण्याचे आदेश देण्यात आले आहेत. अमेरिकेच्या सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल अॅण्ड प्रीव्हेंशनचे ( सीडीसी) संचालक रॉबर्ट रेडफिल्ड यांनी २७ ऑगस्ट रोजी लिहिलेल्या पत्रानुसार, करोना लस वितरण करण्यासाठीचे परमिट मिळवण्यासाठी एका निश्चित वेळेची आवश्यकता आहे. सार्वजनिक आरोग्यविषयक मोहीमेतील हा मुख्य अडथळा आहे. 'सीडीसी'ला करोना लस वितरणाच्या सुविधेसाठी मदतीचे आवाहन त्यांनी राज्यांना पत्राद्वारे केले आहे.

सीडीसी आणि आरोग्य तज्ञांच्या एका सल्लागार समिती एका रँकिंग व्यवस्थेवर काम करत आहे. ज्याच्या आधारे लस देण्यात येणार आहे. सीडीसीने अमेरिकन राज्यांना एक लस रोलआउट करण्याच्या योजनेचा तपशील दिला आहे. त्यानुसार, आपात्कालीन वापरासाठी अथवा सर्वांच्या वापरासाठी लस उपलब्ध होणार असल्याचे संकेत दिले आहेत. या दस्ताऐवजांनुसार, लशीचा डोस दिल्यानंतर काही आठवड्यानंतर 'बुस्टर' डोसची आवश्यकता भासणार आहे. त्याशिवाय ही मोफत उपलब्ध करून देण्यात येण्याचीही माहिती आहे.

करोनाचा वाढता संसर्ग, देशातंर्गत वाढता असंतोष आणि आक्रमक विस्तारवादाविरोधात जगभरातून होत असलेल्या कोंडीत अडकलेल्या चीनला थायलंडनेही धक्का दिला आहे. भारताने ११८ चिनी अॅपसवर बंदी घातली असताना आता थायलंडने चीनसोबत झालेल्या पाणबुडी खरेदीच्या करारावर स्थगिती आणली आहे. इतकंच नव्हे तर या पाणबुडींसाठी देण्यात येणारी आगाऊ रक्कम देण्यास नकार दिला आहे.

थायलंडने चीनसोबत जून २०१५ मध्ये पाणबुडीच्या खरेदीसाठी चर्चा सुरू केली होती. त्यानंतर एका वर्षाच्या आत थायलंडचे पंतप्रधान प्रायुत चान-ओ-चा यांना सत्तेतून हटवून लष्कराने ताबा मिळवला. त्यानंतर चीन आणि थायलंडमधील मैत्री संबंध आणखी सुधारत गेले. त्याच्या परिणामी अमेरिकेने थायलंडवर अनेक निर्बंध लादले.

थायलंडच्या कॅबिनेट मंत्रिमंडळाने पहिल्या पाणबुडीच्या खरेदीसाठी २०१७ मध्ये मंजुरी दिली होती. त्यासाठी चीनला ४३४.१ दशलक्ष डॉलर इतकी रक्कम थायलंड देणार होता. ही पाणबुडी २०२३ च्या सुमारास मिळणार होती. मात्र, दोन युआन वर्गाची एस२६ टी डिझेल इलेक्ट्रिक पाणबुडी खरेदीबाबत चर्चा फिस्कटली. या पाणबुडींसाठी ७२०दशलक्ष डॉलरची मागणी चीनने केली होती. तर, ही रक्क्कम प्रचंड असल्याचे थायलंडने म्हटले.

करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करणारी लस विकसित झाल्यानंतर त्याची खरेदी आणि वितरण योग्य प्रकारे व्हावे यासाठी जगभरातील ७६ देश एकत्र आले आहेत. जागतिक आरोग्य संघटनेच्या सह-नेतृत्वातून जागतिक पातळीवर करोना लशीचे वितरण करण्यात येणार आहे. यामुळे करोना लस वाटपात गरीब देशांसोबत कोणताही भेदभाव होणार नाही.

जगभरातील विविध आजारांच्या लशींच्या समन्वयाचे काम करणाऱ्या 'गावी वॅक्सीन अलायन्स'ने लशीच्या किंमती ठरवण्याबाबतही पुढाकार घेतला आहे. जगभरात लशींचे वितरण योग्य पद्धतीने व्हावे यासाठी कोवॅक्स केंद्राचीही स्थापना करण्यात आली आहे. कोवॅक्स केंद्राचे सहप्रमुख आणि गावी वॅक्सीन अलायन्सचे सीईओ सेथ बर्कले यांनी सांगितले की, जपान, जर्मनी, नॉर्वेसह ७० हून देशांनी कोवॅक्समध्ये सहभागी होण्यासाठी स्वाक्षरी केली आहे. या देशांनी करोना लशीच्या खरेदीसाठी तत्वत: मंजुरी दिली आहे.

बर्कले यांनी रॉयटर्स या वृत्तसंस्थेला दिलेल्या एका मुलाखतीत सांगितले की, आमच्याकडे ७६ देशांनी लस खरेदी करण्यासाठी आणि आपल्या देशातील नागरिकांपर्यंत लस पोहचवण्याची हमी दिली आहे. कोवॅक्समध्ये सहभागी देशांची संख्या आणखी वाढणार असल्याचा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला. कोवॅक्सच्या समन्यवयांकडून चीन सरकारसोबत चर्चा सुरू आहे. कोवॅक्समध्ये चीनदेखील सहभागी होऊ शकतो. चीन सरकारसोबत अद्याप कोवॅक्सबाबतच्या करारवर स्वाक्षरी झाली नाही. मात्र, सरकारकडून सकारात्मक संकेत मिळाले असल्याचे त्यांनी सांगितले.

कोरोना संक्रमण के बीच अब एक और बीमारी ने देश में दस्तक दे दी है। यूरोप और अमेरिका के बाद कोविड-19 ग्रुप की खतरनाक बीमारी MIS-C (मल्टी सिस्टम इंफ्लैमेटरी सिंड्रोम-इन चिल्ड्रन) ने गुजरात के सूरत में बच्चों को चपेट में लेना शुरू कर दिया है। सूरत में इस बीमारी पहला मामला बीती 25 जुलाई को सामने आया था। इसके बाद से अब तक इसके 30 मामले सामने आ चुके हैं। सूरत के पेडियाट्रिक एसोसिएशन ने इस बात की पुष्टि की है कि अब तक 30 बच्चों में इसके लक्षण पाए गए। हालांकि, समय पर ट्रीटमेंट मिलने से अब सभी स्वस्थ हैं।

3 साल से लेकर किशोर अवस्था तक के बच्चों को खतरा
डॉ. अंकित परमार के अनुसार, इस बीमारी के नाम से ही समझा जा सकता हैं कि ये बच्चों में होने वाली खतरनाक बीमारी है। यह 3 साल से लेकर किशोर अवस्था तक को बच्चों को हो सकती है। यदि बच्चे को बुखार, उल्टी, लूज मोशन के अलावा आंखें और होठ लाल होती दिखे तो तुरंत मेडिकल चेकअप करवाएं, क्योंकि समय पर ट्रीटमेंट शुरू होने से इसे आगे बढ़ने से रोका जा सकता है और बच्चे को गंभीर खतरे से बचाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने इस बीमारी को गंभीर माना है। हालांकि उनका कहना है कि इस बीमारी की समय पर जांच और इलाज करवाकर इसे काबू में किया जा सकता है। 

MIS-C के लक्षण 
-सीने में दर्द और धड़कनों का तेज चलना।
-शरीर का रंग पीला या नीला पड़ जाना।
-उल्टी-दस्त, पेट दर्द, कमजोरी।
-होंठ और जीभ, पीठ पर लाल दाने।
-हाथ पैरों व गर्दन में सूजन।
-शरीर पर लाल चकत्ते उठ आना।

कोरोना संक्रमित इलाकों में ज्यादा खतरा
एक रिपोर्ट में सामने आया कि जिन इलाकों में कोरोना वायरस के मामले ज्यादा है, वहां बच्चों को इसका खतरा ज्यादा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों में करीब 300 बच्चों के शिकार होने के बाद इटली में शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस और इस बीमारी के बीच संबंध खोजा था। हालांकि, टोसिलिजुमैब दवाओं के बाद बच्चों को स्वस्थ कर लिया गया था। 

लडाखमधील पॅन्गाँग सरोवराजवळ २९-३० ऑगस्टच्या रात्री भारतीय सैन्याने चिनी सैन्याला जोरदार प्रत्युत्तर देत त्यांच्या घुसखोरीचा डाव हाणून पाडला. त्यानंतर आता चीनचा थयथयाट सुरू झाला आहे. प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवरील तणाव कमी करण्यासाठी चीनने भारताकडे अजबच मागणी केली आहे. भारताने या भागातील सैन्य त्वरीत मागे घ्यावे असे चीनने म्हटले आहे. याआधी चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने पॅन्गाँग सरोवराजवळ झालेल्या घुसखोरीचा भारताचा दावा फेटाळून लावला.

चीन सरकारचे वृत्तपत्र असलेल्या ग्लोबल टाइम्सने पीपल्स लिबरेशन आर्मीच्या हवाल्याने म्हटले की, भारतीय सैन्याने दोन्ही देशांमध्ये सुरू असलेल्या चर्चेत सहमती झालेल्या निर्णयाचे उल्लंघन केले आहे. सोमवारी भारतीय सैन्याने जाणूनबुजून प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषा ओलांडलू असल्याचा आरोप ग्लोबल टाइम्सने केला आहे. भारताची ही कृती चीनला उकसवण्यासाठी होती असेही त्यांनी म्हटले.

चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाचे प्रवक्ते झाओ लिजीन यांनी सांगितले की, चीनच्या सैन्याने कायमच प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेच्या (एलएसी) नियमांचे पालन केले आहे. त्यांनी कधीच एलएसी ओलांडली नसल्याचाही हास्यास्पद दावा केला. भारत-चीनच्या लष्करी अधिकाऱ्यांमध्ये सध्याच्या परिस्थितीबाबत चर्चा सुरू असून दोन्ही देश राजनयिक आणि लष्कराच्या माध्यमातून संपर्कात असल्याचे त्यांनी सांगितले.

करोनाच्या संसर्गाने जगभरात थैमान घातले आहे. जगभरातील सुमारे २०० देशांमध्ये करोनाचा संसर्ग फैलावला आहे. करोनाबाधितांच्या वाढत्या संख्येमुळे अनेक देशांच्या आरोग्य व्यवस्थेवर प्रचंड ताण पडला आहे. जगभरातील जवळपास ९० टक्क्यांहून अधिक देशांमधील आरोग्य व्यवस्था कोलमडण्याची भीती जागतिक आरोग्य संघटनेने व्यक्त केली आहे.

जागतिक आरोग्य संघटनेने मार्च ते जून या दरम्यान मिळालेल्या माहितीच्या आधारे आरोग्य व्यवस्थेबाबत चिंता व्यक्त केली आहे. अशी परिस्थिती कायम राहिल्यास आरोग्य यंत्रणा उद्धवस्त होण्याची भीतीदेखील व्यक्त करण्यात आली आहे. करोनाच्या संसर्गामुळे अनेक नियमित आरोग्य तपासणी, आरोग्यविषयक असलेल्या तक्रारींचे निदान लांबणीवर पडले आहे. करोनाच्या महासाथीमुळे कर्करोगाच्या उपचारावर मोठा परिणाम झाला आहे. मध्यम आणि कमी उत्पन्न असलेल्या देशांना सर्वाधिक अडचणींना सामना करावा लागू शकतो. निम्म्याहून अधिक देशांमध्ये गर्भनिरोध आणि कुटुंब नियोजन (६८ टक्के) मानसिक आरोग्याशी संबंधित असलेला उपचार (६१ टक्के) आणि कर्करोगाबाबतच्या उपचारांवर (५५ टक्के) परिणाम झाला असल्याची माहिती समोर आली आहे.

प्रकृती अस्वास्थामुळे पंतप्रधानपदाच्या राजीनाम्याची घोषणा करणारे जपानचे पंतप्रधान शिंजो आबे यांनी भारताचे पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांचे आभार मानले आहे. आबे यांनी राजीनाम्याची घोषणा केल्यानंतर पंतप्रधान मोदी यांनी ट्विट केले होते. पंतप्रधान मोदी यांचे हे शब्द काळजाला भिडले असल्याचेआबे यांनी म्हटले.

शिंजो आबे यांनी म्हटले की, पंतप्रधान मोदी यांचे ट्विट काळजाला भिडले आहे. भविष्यातही भारत आणि जपान यांच्यातील मैत्री कायम राहिल व आणखी वृद्धिगंत होणार असल्याचे त्यांनी म्हटले. पंतप्रधान मोदी यांनी दिलेल्या सदिच्छांसाठी आभार मानले आहेत. भारत आणि जपान यांच्यातील संबंध आणखी वृद्धिगंत होतील असा विश्वासही व्यक्त केला.

शिंजो आबे हे आतड्यासंबंधीच्या आजाराने ग्रस्त आहेत. मागील काही महिन्यांपासून त्यांच्या या आजाराने पुन्हा उचल खाल्ली. उपचाराअभावी पंतप्रधानपदाची जबाबदारी सांभाळता येणार नसल्यामुळे त्यांनी जनतेची माफी मागत राजीनाम्याची घोषणा केली. आबे यांच्यानंतर पंतप्रधानपदी कोण असणार, याची लवकरच घोषणा होणार आहे. तोपर्यंत आबे पंतप्रधानपदावर असणार आहेत. शिंजो आबे हे मागील आठवड्यात दोन वेळेस रुग्णालयात दाखल झाले होते. सातत्याने रुग्णालयात उपचारासाठी जात असल्यामुळे त्यांच्या प्रकृतीबाबतही उलटसुलट चर्चा सुरू आहेत. काही दिवसांपूर्वी जवळपास सात तास आबे रुग्णालयात दाखल होते. आबे यांच्या पंतप्रधानपदाचा कार्यकाळ सप्टेंबर २०२१ पर्यंत आहे. जपानच्या पंतप्रधानपदी सर्वाधिक काळ राहिलेले ते पहिलेच पंतप्रधान आहेत.

मागील काही महिन्यांपासून भारत आणि चीन दरम्यान सीमा प्रश्नी वाद सुरू आहे. दोन्ही देशांमधील तणाव निवळण्याचा प्रयत्न सुरू असताना चीन सीमा भागात जोरदार हालचाली करत आहे. चीनने अरुणाचल आणि भूटान सीमेवरील तिबेटी नागरिकांना हटवण्यास सुरुवात केली आहे. त्यामुळे चीनला नेमके काय साध्य करायचे आहे, यावर चर्चा सुरू झाली आहे.

चीन सरकारचे वृत्तपत्र असलेल्या 'ग्लोबल टाइम्स'ने दिलेल्या वृत्तानुसार हा खुलासा करण्यात आला आहे. चीन भारत आणि भूतान सीमेजवळ असणाऱ्या ९६ गावांतील लोकांना सीमेपासून दूर असणाऱ्या ठिकाणी त्यांचे पुनर्वसन करत आहे. या ग्रामस्थांना नवीन घरे देण्यात आली असून यामध्ये वीज, पाणी आणि इंटरनेटसारख्या सुविधा देण्यात आल्याचा दावा करण्यात आला आहे. मात्र, सीमेलगतच्या भागात चीनकडून जमिनीवरून हवेत मारा करणारे क्षेपणास्त्र तैनात करण्यात येणार असल्याचे म्हटले जात आहे.

भारत आणि भूतान सीमेजवळील तिबेटी लोकांना हटवण्याचे काम २०१८ पासूनच सुरू करण्यात आले होते. त्यावेळी ले गावातील २४ घरातील ७२ लोकांचे नवीन घरात स्थलांतर करण्यात आले होते. ही नवीन घरे जुन्या मूळ घरांपासून दूरवरच्या अंतरावर आहे. मात्र, या स्थलांतरामुळे तिबेटी नागरिकांचे उत्पन्न वाढले असल्याचा दावा चीनने केला आहे.

चीन ३० सप्टेंबरपर्यंत सर्वच ९६ गावांतील लोकांसाठीचे पुनर्वसनाचे काम पूर्ण करण्यात येणार आहे. त्यानंतर या ग्रामस्थांना या नव्या ठिकाणी स्थलांतरीत करण्यात येणार आहे. चीन अरुणाचल प्रदेशचा तवांग हा आपला भाग असल्याचा दावा करतो. तवांग हा दक्षिण तिबेटचा भाग असल्याचे चीन सांगतो. तवांग हा बौद्ध धर्मातील पवित्र स्थळापैकी एक आहे. १९६२ च्या युद्धात चिनी सैन्य तवांगपर्यंत पोहचले होते.
 

जगभरातील जवळपास २०० देशांमध्ये करोनाचा संसर्ग फैलावला आहे. जवळपास अडीच कोटींच्या घरात करोनाबाधितांची संख्या पोहचली आहे. करोनामुळे जगभरातील जनजीवन ठप्प झाले आहे. तर, दुसरीकडे संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी लस विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. काही लशींची अंतिम टप्प्यातील चाचणी सुरू आहे. संपूर्ण जगाचे लक्ष लागलेल्या ऑक्सफर्डच्या लशीबाबत ब्रिटनमधून चांगली बातमी समोर आली आहे. ही लस कधी लाँच होणार याबाबत ब्रिटन सरकारने माहिती दिली आहे. आगामी सहा आठवडे म्हणजे ४२ दिवसांमध्ये ही लस तयार होणार आहे. करोनावरील लस लवकरात लवकर उपलब्ध व्हावी यासाठी ब्रिटन सरकार आता कायद्यातही बदल करणार आहे. त्यानुसार, शास्त्रज्ञांनी लशीच्या यशस्वीतेबाबत घोषणा केल्यानंतर ताबडतोब आपात्कालीन परिस्थितीत बाधितांना ही लस देण्यात येणार आहे.

सहा आठवड्यात लस तयार होणार!

ब्रिटनमधील माध्यमांनी दिलेल्या वृत्तानुसार, एका ब्रिटीश अधिकाऱ्याने संडे एक्स्प्रेसला सांगितले की, ऑक्सफर्ड विद्यापीठ आणि इम्पिरिअल कॉलेजचे वैज्ञानिक लस बनवण्याच्या अंतिम टप्प्यात पोहचले आहेत. दोन्ही विद्यापीठांनी स्वतंत्रपणे विकसित केलेल्या लशीची वेगवेगळी चाचणी होत आहे. सर्व काही नियोजनानुसार पार पडले की, ऑक्सफर्डची लस आगामी सहा आठवड्यात बनवून तयार होणार आहे.

लशीबाबत घोषणा झाल्यानंतर काही महिन्यांतच मोठ्या प्रमाणावर उत्पादन सुरू करण्यात येणार आहे. ब्रिटनच्या सर्वच नागरिकांना लस देण्याचे नियोजन असल्याचेही या अधिकाऱ्याने सांगितले. यामुळे २०२१ मध्ये जनजीवन पु्न्हा एकदा वेगाने पूर्वपदावर येईल असा विश्वासही या अधिकाऱ्याने व्यक्त केला. सध्या ब्रिटन सरकार लॉकडाउनचे निर्बंध आणखी शिथिल करण्याबाबत बरीच खबरदारी बाळगत आहे.

करोनाच्या संकटाशी दोन हात करत असताना जगभरातील अनेक देशांमध्ये करोनाची लस विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी लस प्रभावी ठरण्याची शक्यता असून काही लशींची अंतिम टप्प्यातील चाचणी सुरू आहे. मात्र, करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी लशीचा एकच डोस पुरेसा ठरणार नसल्याची चर्चा आहे.

सध्या काही लशींची चाचणी सुरू आहे. या चाचणीत ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका, मॉडर्ना, नोवावॅक्स आणि सनोफी आदींच्या चाचण्या सुरू आहेत. या कंपन्यांच्या चाचण्यांमध्ये स्वयंसेवकांना किमान डोस देण्यात आले आहेत. 'सीएनएन'ने दिलेल्या वृत्तानुसार, अमेरिकन सरकारने देशातील मोठ्या सहा फार्मा कंपन्यांना लस उत्पादनाची जवाबदारी दिली आहे. मॉडर्ना, पीफाइजरकडून सध्या तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू आहे. या चाचणीत सहभागी झालेल्या ३० हजार स्वयंसेवकांना लशीचे दोन डोस देण्यात आले आहेत. मॉडर्नानुसार त्यांना २८ दिवसानंतर दुसरा डोस देण्याची आवश्यकता भासली. तर, पीफाइजर कंपनीने २१ दिवसानंतर लशीचा दुसरा डोस दिला.

ऑक्सफर्ड विद्यापीठाने विकसित केलेली लस उत्पादित करत असलेल्या एस्ट्राजेनका कंपनीनेदेखील तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू केली आहे. त्यांच्या चाचणीत सहभागी असलेल्या स्वयंसेवकांना २८ दिवसांत दुसऱ्यांदा डोस द्यावा लागला. पहिल्या व दुसऱ्या टप्प्यातही स्वयंसेवकांना दोनदा लस टोचण्यात आली. नोवावॅक्स आणि जॉन्सन अॅण्ड जॉन्सनने यांनी सांगितले की, फक्त काही मोजक्याच स्वयंसेवकांना एकच डोस पुरेसा झाला. मात्र, बहुतांशी लोकांना दोन डोस द्यावे लागले. कांजण्या, हेपेटाइट्स-A या आजारांवरही लशीचे दोन डोस द्यावे लागत असल्याकडे कंपन्यांनी लक्ष वेधले.

भूमध्य सागरामध्ये ग्रीस आणि तुर्कीमध्ये मागील काही दिवसांपासून तणाव वाढू लागला आहे. तुर्कीच्या आक्रमक भूमिकेविरोधात फ्रान्सने ग्रीसला लष्करी मदत देण्याची घोषणा केली होती. आता तुर्कीच्या अद्यावत एफ-१६ फायटर जेटचा सामना करण्यासाठी फ्रान्स ग्रीसला १८ राफेल लढाऊ विमाने देणार आहे. त्यातील १० विमाने ही राफेलची एफ३-आर वॅरिएंटची असणार आहे. तर, उर्वरीत आठ विमाने सेकंड हँड जेट्स असणार आहेत. त्यासाठी मात्र, ग्रीसला कोणतीही रक्कम द्यावी लागणार नाही.

तुर्कीचे राष्ट्रपतींनी ग्रीसला धमकी दिल्यानंतर फ्रान्सने ग्रीसच्या संरक्षणासाठी भूमध्य सागरात आपले नौदल तैनात केले. त्यानंतर तुर्की आणि फ्रान्समध्ये तणाव वाढू लागला. तुर्कीच्या परराष्ट्र मंत्र्यांनी फ्रान्सवर टीका केली होती. फ्रान्सकडून युद्ध छेडण्याचा प्रयत्न सुरू असल्याची टीका त्यांनी केली. तर, आपल्या मित्र देशाच्या संरक्षणासाठी फ्रान्स कोणतेही पाऊल उचलण्यास मागे हटणार नसल्याचे फ्रान्सने म्हटले होते.

ग्रीसला घाबरवण्यासाठी तुर्कीने काही आठवड्यांपूर्वी कस्तेलोरिजो बेटाजवळ नौदलाचे काही जहाज पाठवले. त्याच्या प्रत्युत्तरात ग्रीसनेदेखील आपले नौदल कस्तेलोरिजो बेटाजवळ तैनात केले आहेत. दोन्ही देशांचे नौदल या भागात उभे ठाकले असून नौसैनिकांची संख्याही वाढत आहे. त्यामुळे युद्धजन्य परिस्थिती निर्माण झाली आहे.

हॉलिवूड स्टार चॅडविक बोसमन म्हणजेच जगप्रसिद्ध 'ब्लॅक पँथर'चं आज (29 ऑगस्ट) निधन झालं. चॅडविक हा गेल्या चार वर्षापासून कोलोन कॅन्सरशी अर्थात आतड्याच्या कर्करोगाशी झुंज देत होता आणि अखेर त्याची ही झुंज अपयशी ठरली. लॉस एंजलिसमधील राहत्या घरी त्याने वयाच्या 43 व्या वर्षी अखेरचा श्वास घेतला. चॅडविक बोसमनच्या अंतिम काळात त्याची पत्नी आणि कुटुंबसोबत होतं.

मार्वेल स्टुडिओ फिल्मचा हा एक लाडका अभिनेता होता. त्याच्या निधनानंतर मार्वेल स्टुडिओसह अनेक हॉलिवूड कलाकार, निर्माते आणि चॅडविकचे जगभरातले फॅन्स आपल्या भावना व्यक्त करत आहेत, त्याला श्रद्धांजली वाहत आहेत.

"चॅडविक हा एक खरा फायटर होता, तो आपलं काम सांभाळत या आजाराशी चार वर्ष लढल, मार्शल चित्रपटापासून ते 'डा 5' या चित्रपटापर्यंत, मा रॅनीज् ब्लॅक बॉटम आणि बरेच चित्रपट त्याने कॅन्सरसाठीची शस्त्रक्रिया आणि केमोथेरपी सुरु असताना चित्रित केले आणि 'ब्लॅक पँथर' या चित्रपटातील किंग टी'चला (King T'Challa) या पात्राने त्याच्या करिअरला एका वेगळ्या उंचीरवर नेऊन ठेवलं", असं त्याच्या कुटुंबाने म्हटलं.

 

मागील काही महिन्यांपासून नेपाळच्या राजकारणात सातत्याने लुडबुड करणाऱ्या चीनला झटका बसला आहे. चीनच्या नेपाळमधील राजदूत हाओ यांकी यांना आता पंतप्रधान केपी शर्मा ओली आणि राष्ट्रपतींना थेट भेटता येणार नाही. नेपाळच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने राजदूतांसाठी नवीन नियमावली तयार केली आहे. त्यानुसार आता कोणत्याही देशाच्या राजदूताला थेट राष्ट्रपती आणि पंतप्रधानांना भेटता येणार नाही.

सीमा प्रश्नी भारताविरोधात भूमिका घेतल्यानंतर आणि इतर मुद्यावर सत्ताधारी कम्युनिस्ट पक्षात मतभेद निर्माण झाले होते. नेपाळमधील दिग्गज कम्यु्निस्ट नेते प्रचंड हे केपी शर्मा ओली यांच्या भूमिकेवरून नाराज होते. या वादातून पक्षात फूट पडून सरकार कोसळण्याची शक्यता निर्माण झाली होती. अशा वेळी चीनच्या राजदूत हाओ यांकी सक्रीय झाल्या होत्या. त्यांनी नेपाळच्या कम्युनिस्ट पक्षाच्या नेत्यांसह राष्ट्रपती विद्यादेवी भंडारी यांच्याशी थेट भेट घेत चर्चा केली होती. राष्ट्रपतींच्या भेटीबाबत परराष्ट्र मंत्रालयाच्या अवर सचिवांना याची माहिती देण्यात आली नव्हती. शिष्टाचारानुसार, या भेटीची माहिती देणे आणि भेटी दरम्यान प्रत्यक्ष उपस्थिती आवश्यक होती. मात्र, त्यांना या भेटीपासून दूर ठेवण्यात आले होते. ओली यांच्या हातातून सरकार जाऊ नये यासाठी चीनने मोठे प्रयत्न चालवले होते. चीनच्या या लुडबुडीविरोधात नेपाळमधील राजकीय विश्लेषकांनी आणि माजी परराष्ट्र अधिकाऱ्यांनी नाराजी व्यक्त केली होती.

अमेरिकेच्या राष्ट्राध्यक्षपदाच्या निवडणुकीचा प्रचार सुरू झाला असून राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प आणि डेमोक्रेटिक पक्षाचे जो बायडन यांच्यात आरोप प्रत्यारोप सुरू झाले आहेत. रिपब्लिकन पक्षाकडून अधिकृत उमेदवारी स्वीकारल्यानंतर डोनाल्ड ट्रम्प यांनी बायडन यांच्यावर जोरदार हल्ला बोल केला आहे. निवडणुकीत माझा पराभव होऊन बायडन विजयी झाल्यास चीन देशवर ताबा मिळवणार असल्याचा आरोप केला.

ट्रम्प यांनी बायडन यांच्यावर जोरदार टीका केली. बायडन यांचा निवडणूक अजेंडा हा मेड इन चायना असून माझा अजेंडा मेड इन अमेरिका आहे. डोनाल्ड ट्रम्प यांनी सांगितले की, या निवडणुकीत पुन्हा विजयी झाल्यास आगामी चार वर्षात अमेरिकेला मॅन्यूफॅक्चरिंगमध्ये सुपरपॉवर बनवू. देशामध्ये रोजगाराच्या संधी विकसित करण्यासोबतच आरोग्यावर भर देणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. अमेरिकेचे चीनवरील अवलंबित्व कमी करणार असून आत्मनिर्भर होणार असल्याचे त्यांनी सांगितले.

डोनाल्ड ट्रम्प यांनी सांगितले की, वॉशिंग्टनमध्ये चीनविरोधात न बोलण्याचा सल्ला मला काही जणांनी दिला होता. चीनने आपल्या देशातील रोजगार चोरला तरी हरकत नाही असे काहींनी म्हटले होते. मात्र, अमेरिकन जनतेला वचन दिले होते. अमेरिकेच्या इतिहासात आतापर्यंतचे चीनविरोधात सर्वात मोठे पाऊल उचलले असल्याचेही ट्रम्प यांनी सांगितले. करोनाच्या संसर्गामुळे अमेरिकेसह सगळे जग हैराण झाले आहे. चीनने करोनाचा संसर्ग संपूर्ण जगभरात फैलावला असल्याचाही दावा त्यांनी केला.

करोनाला अटकाव करणाऱ्या लशींबाबतही त्यांनी माहिती दिली. तीन लशी चाचणीच्या अंतिम टप्प्यात आहेत. यावर्षात करोनावर प्रभावी लस आणणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. अमेरिका चंद्रावर पहिली महिला अंतराळवीर उतरवणार असल्याची घोषणा त्यांनी केली. अमेरिका आपली मंगळ ग्रहावरील मोहीम फत्ते करणार असल्याचाही विश्वास त्यांनी व्यक्त केला.

करोना व्हायरसवर मात करुन पुन्हा पूर्वपदावर येण्यासाठी जपानने कंबर कसली आहे. आपल्या लोकसंख्येच्या चार पट एवढ्या करोना लसीचे डोस जपानने मागवले आहेत. यामुळे पुढील वर्षीच्या नियोजित ऑलिम्पिक आयोजनासाठी मदत मिळेल, असा विश्वास जपानला आहे. इतर श्रीमंत राष्ट्रांप्रमाणेच जपानही करोना लस मिळवण्यासाठी विविध देशांसोबत करार करत आहे. कारण, काही लसी वैद्यकीय चाचणीत अयशश्वी होऊ शकतात, तर काही लसींना विलंब होऊ शकतो. त्यामुळे जपान विविध देशांकडे लस मागत आहे.

जपानचे पंतप्रधान शिंजे आबे प्रकृतीच्या कारणास्तव पदावरुन पायउतार होत आहेत. पण टोकियोमध्ये जगभरातील खेळाडूंना आणून ऑलिम्पिक सुरळीत पार पाडणं त्यांचं स्वप्न आहे. करोनामुळे ऑलिम्पिकवर अगोदरच परिणाम झाला आहे. पण तरीही जपान सरकारने जिद्द मात्र सोडलेली नाही. लोकसंख्येच्या चार पट डोस आणून देशाची सुरक्षा सुनिश्चित केली जात आहे.

मुख्य कॅबिनेट सचिव आणि सरकारचे महत्त्वाचे प्रवक्ते योशिहिडे सुगा यांनी दिलेल्या माहितीनुसार, जपान सध्या ऑलिम्पिक आयोजकांसोबत बातचित करुन स्पर्धा भरवण्याबाबत चर्चा करत आहे. त्यामुळेच लस जास्त प्रमाणात असेल याची सुनिश्चिती केली जात आहे. या वर्षाच्या अखेरपर्यंत विविध कंपन्या लस निर्मिती करणं अपेक्षित असल्याचं सुगा म्हणाले. बरंच काही ग्रहित धरलं जात आहे. पण आम्हाला कोणत्याही परिस्थितीत ऑलिम्पिक भरवायची आहे, असं ते म्हणाले.
 

जपानचे पंतप्रधान शिंजो आबे आपल्या प्रकृतीच्या कारणास्तव राजीनामा दिला आहे. शिंजो आबे हे प्रकृती अस्वास्थामुळे रुग्णालयात उपचार घेत आहेत. मागील काही महिन्यांत त्यांना अनेकदा रुग्णालयात दाखल करण्यात आले होते. शिंजो आबे यांनी आपल्या राजीनाम्याबाबत घोषणा केली आहे.

पत्रकार परिषदेदरम्यान आबे यांनी सांगतिले की, मी पंतप्रधानपदाचा राजीनामा देण्याचा निर्णय घेतला आहे. आबे हे अल्सरेटिव कोलाइटिस या आजारावर उपचार घेत आहेत. त्यांनी सांगितले की, नवीन उपचार घेत आहे. त्यानुसार, नियमितपणे आरोग्य तपासणी आणि देखभालीची आवश्यकता आहे. उपचारांमुळे मी पंतप्रधान म्हणून कर्तव्य पूर्णपणे पूर्ण करू शकत नाही. लोकांनी बहुमत देऊन पुन्हा विश्वास दर्शवला होता. मात्र, पूर्ण क्षमतेनुसार आपण काम करू शकत नसल्याचेही त्यांनी सांगितले. लवकरच सत्तारुढ लिबरल डेमोक्रेटीक पार्टी नव्या पंतप्रधानाची निवड करणार आहे.

शिंजो आबे हे मागील आठवड्यात दोन वेळेस रुग्णालयात दाखल झाले होते. सातत्याने रुग्णालयात उपचारासाठी जात असल्यामुळे त्यांच्या प्रकृतीबाबतही उलटसुलट चर्चा सुरू आहेत. काही दिवसांपूर्वी जवळपास सात तास आबे रुग्णालयात दाखल होते. आबे यांच्या पंतप्रधानपदाचा कार्यकाळ सप्टेंबर २०२१ पर्यंत आहे. प्रकृतीच्या कारणास्तव आबे राजीनामा देणार असल्याची चर्चा होती. या चर्चेचा परिणाम शेअर बाजारावरही दिसून आला. जपानच्या शेअर बाजारात मोठी घसरण दिसून आली.

मागील सोमवारी त्यांनी आपल्या पंतप्रधानपदाची आठ वर्षे त्यांनी पूर्ण केली. जपानच्या पंतप्रधानपदी सर्वाधिक काळ असणारे ते पहिलेच व्यक्ती आहेत. करोनाच्या वाढत्या संसर्सामुळे त्यांच्या लोकप्रियतेतही घसरण दिसून आली. जवळपास ३० टक्के घट नोंदवण्यात आली. त्यांच्या सरकारवर आणि पक्षावर घोटाळ्यांचे आरोप करण्यात आले आहेत. आबे यांनी जपानची अर्थव्यवस्था पुन्हा एकदा रुळावर आणण्याचे आश्वासन दिले होते. तर, चीनचा संभाव्य धोका ओळखून त्यांनी आपल्या देशाच्या सैन्याला अधिक सुसज्ज करण्याचा प्रयत्न सुरू केला होता.

मागील काही दिवसांपासून झालेल्या पावसामुळे पाकिस्तानमध्ये हाहाकार उडाला आहे. पाकिस्तानचे आर्थिक केंद्र समजले जाणारे कराची शहरात पूर परिस्थिती निर्माण झाली असून अनेक घरे पाण्याखाली गेले आहे. पाकिस्तानात जवळपास १०० जणांचा मृत्यू झाला असून हजारोजण बेघर झाले असल्याची माहिती पाकिस्तानच्या राष्ट्रीय आपत्ती व्यवस्थापन विभागाने दिली आहे.

पावसाचा मोठा फटका कराची शहराला बसला. अनेक ठिकाणी पाणी मोठ्या प्रमाणावर साचले होते. त्यामुळे अनेकजणांना घरी पोहचता आले नाही. सर्वाधिक जीवितहानी सिंध प्रांतात झाली असून, तेथे मृतांची संख्या ३१ झाली आहे. खैबर पख्तुनख्वा प्रांतात २३ जणांचा मृत्यू झाला आहे. बलुचिस्तानमध्ये १५, तर पंजाबमध्ये आठ जणांचा मृत्यू झाला आहे. उत्तर पाकिस्तानमधील मृतांची संख्या १३ वर पोहोचली असून, पाकव्याप्त काश्मीरमध्ये झालेल्या मुसळधार पावसामुळे तिघांचा मृत्यू झाला आहे. या आठवड्यातही कराचीत मुसळधार पावसाचा अंदाज वर्तवण्यात आला आहे. कराचीत ५० मिलीमीटरपेक्षा अधिक पाऊस पडल्यामुळे सखल भागात पाणी साचले असल्याचे हवामान विभाग प्रमुख सरदार सरफराज यांनी सांगितले.

जगातील दोन शक्तीशाली देश असलेले रशिया आणि अमेरिकेच्या सैन्यांमध्ये सीरियात तीव्र संघर्ष झाल्याचे समोर आले आहे. या संघर्षात काही सैन्य जखमी झाले आहेत. यु्द्धाच्या झळा सहन करत असलेल्या सीरियात अमेरिका-रशियाच्या सैन्यांमध्ये हा संघर्ष झाला.

रशियन सैन्याच्या एका गटाकडून आर्मर्ड व्हेइकलने अमेरिकन सैन्याला धडक दिली. त्यानंतर या सैन्यांमध्ये हाणामारी झाली असल्याचे वृत्त आहे. यामध्ये चारजण जखमी झाले आहेत. अमेरिकन सैन्यासोबत हाणामारी सुरू असताना रशियाने आपल्या हेलिकॉप्टरचाही वापर केला असल्याचे एका व्हिडिओत समोर आले आहे.

अमेरिकेच्या सेंट्रल कमांडने दिलेल्या माहितीनुसार, ही घटना २५ ऑगस्ट रोजी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास घडली. त्यांनी सांगितले की, उत्तर पूर्व सीरियात अमेरिकन आणि रशियन सैन्य समोरासमोर आले. त्यावेळी त्यांच्यात वाद झाले. त्यातच रशियन आर्मर्ड व्हेइकलने अमेरिकेच्या आर्मर्ड व्हेइकलला धडक दिली. यामध्ये काही सैनिक जखमी झाले. तणाव कमी होण्यासाठी त्या भागातून अमेरिकन सैन्याने माघार घेतली असल्याचेही अमेरिकेने स्पष्ट केले.

कोविड-१९ विषाणूवर मात करणाऱ्या लशीच्या निर्मितीत अनेक देश गुंतलेले असताना आता केंब्रिज विद्यापीठाने आणखी एक महत्त्वाचे पाऊल टाकले आहे. करोना वर्गातील सर्वच विषाणूंवर परिणामकारक ठरणाऱ्या लशीसाठी संशोधन सुरू केले आहे. वर्षअखेरीपर्यंत त्याच्या चाचण्या सुरू करण्यात येतील, अशी माहिती विद्यापीठाच्यावतीने देण्यात आली आहे.

वटवाघळांसह अनेक प्राण्यांमध्ये आढळणाऱ्या निरनिराळ्या करोना विषाणूंचा मानवाला भविष्यात धोका उद्भवू नये, यासाठी केंब्रिज विद्यापीठाकडून 'डायओस-कोवॅक्स२' असे नाव असलेली ही लस विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. ही लस देण्यासाठी सुई न वापरता जेट इंजेक्शनच्या नव्या तंत्रज्ञानाचा वापर करण्यात येणार आहे. वर्षअखेरीस या लशीच्या मानवी चाचण्या सुरू करण्यात येणार आहे. या लशीच्या संशोधनासाठी ब्रिटन सरकारने १९ लाख पौंडाचे अर्थसहाय्य दिले आहे. तर डायोसिनवॅक्स कंपनी चाचण्यांसाठीचा ४ लाख पौंड खर्च उचलणार आहे.

सध्या काळाची तातडीची आवश्यकता म्हणून लस विकसित करताना अनेकांनी प्रस्थापित असलेली पद्धत वापरली आहे. या लशीच्या चाचण्या यशस्वी होतील, अशी आशा आहे. मात्र, प्रचंड यशस्वी लशींनाही मर्यादा असते. त्या काही नाजूक स्थितीतील काही व्यक्तींसाठी अयोग्य ठरू शकतात तसेच त्यांचा प्रभाव किती काळ राहील, याविषयीही निश्चित दावा करता येत नाही', असे डायोसिनव्हॅक्स कंपनीच्या सीओओ डॉ. रिबेका किन्सली यांनी स्पष्ट केले. सिथेंटिक डीएनएच्या वापराने करोनाविरोधात अधिक प्रभावी ठरेल अशी लस विकसित करण्याचा प्रयत्न आहे. अशाप्रकारे विकसित केलेली लस क्रांतीकारक बदल घडवू शकते. त्यामुळे ही लस कमी खर्चात उत्पादीत आणि वितरीत करता येऊ शकते असेही त्यांनी सांगितले.

गेल्या वर्षी १४ फेब्रुवारी या दिवशी जम्मू आणि काश्मीरमधील पुलवामा (Pulwama Attack) येथे केंद्रीय राखीव पोलिस दलाच्या (CRPF) ताफ्यावर झालेल्या दहशतवादी हल्ला प्रकरणी राष्ट्रीय तपास संस्थेने (NIA)मंगळवारी १३ हजार ५०० पानांचे आरोपपत्र दाखल केले. त्यानंतर आता पाकिस्तानचा थयथयाट सुरू झाला आहे. या आरोपपत्रातील आपल्यावरील आरोप फेटाळून लावत भाजपवर आरोप केले आहेत.

पाकिस्तानने एनआयएने दाखल केलेले आरोपपत्र फेटाळले आहे. पुलवामा हल्ल्यात पाकिस्तानला विनाकारण अडकवण्याचा हा भारताचा प्रयत्न असल्याचे पाकिस्तानने म्हटले आहे. भारताकडून आम्ही ठोस पुरावे मागितले होते. मात्र, भारताने आम्हाला पुरावे दिले नसल्याचा दावा पाकिस्तानने केला आहे. या आरोपपत्रातून फक्त संकुचित राजकारण करायचे असल्याचा आरोप पाकिस्तानने केला आहे.

पाकिस्ताननच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने बुधवारी याबाबतचे एक निवेदन प्रसिद्ध केले आहे. पाकिस्तानला या हल्ल्यात गोवण्याचा प्रयत्न होत आहे. भारतातील सत्ताधारी पक्ष भारतीय जनता पक्षाला आपली पाकिस्तानविरोधी भूमिका आणि देशांतर्गत राजकीय फायदा करून घ्यायचा असल्यामुळे पुलवामाप्रकरणी खोटा आरोप केला असल्याचा दावा पाकिस्तानने केला आहे. पुलवामा हल्ल्यानंतर पाकिस्तानने सातत्याने आपल्यावरील आरोप फेटाळून लावले आहेत. त्याशिवाय योग्य माहितीच्या आधारे सहकार्य करण्याची तयारी पाकिस्तानने दर्शवली होती. मात्र, भारताने कोणतेही ठोस, विश्वसनीय पुरावे दिले नसल्याचे पाकिस्तानने म्हटले.

भारतीय हवाई दलाने २६ फेब्रुवारी २०१९ रोजी पाकिस्तानविरोधात कारवाई करण्याचा प्रयत्न केला. त्यानंतर उद्भवलेल्या परिस्थिती पाकिस्तानने भारताचे दोन लढाऊ विमान पाडले आणि भारतीय पायलटला अटक केली. दोन्ही देशांमध्ये शांतता रहावी यासाठी पायलटला सोडण्यात आले असल्याचा दावा पाकिस्तानने केला.

अमेरिकी अंतराळ संशोधन संस्थेच्या (नासा) उपग्रहांकडून येणाऱ्या माहितीचे कृत्रिम बुद्धिमत्तेद्वारे (Artificial Intelligence) विश्लेषण करून सुमारे ५० संभाव्य ग्रहांचा शोध लावल्याचा दावा वैज्ञानिकांनी केला आहे. यातील काही ग्रह 'नेपच्युन'इतके मोठे असून, काही पृथ्वीपेक्षा लहान आहेत.

कृत्रिम बुद्धिमत्तेचा वापर प्रथमच उपग्रह शोधण्यासाठी करण्यात आला आहे. वॉर्विक विद्यापीठातील खगोलशास्त्रज्ञ आणि संगणक संशोधकांनी हा शोध लावला आहे. केप्लर या अमेरिकी यानाकडून सातत्याने मोहिती पाठविली जाते. तिचे विश्लेषण करण्यासाठी एक मशीनसाठीचा 'अल्गोरिदम' तयार करण्यात आला. येणाऱ्या माहितीतून खरा ग्रह कसा ओळखायचा आणि कोणता खोटा असू शकतो, यासाठीचे आडाखे संगणकाला पुरविण्यात आले. त्या आधारे आलेल्या माहितीचे पृथक्करण करून सुमारे ५० ग्रह असावेत, असा कयास या संशोधकांनी बांधला आहे. यातील काही ग्रह लहान आणि काही मोठे आहेत. काहींची परिवलन कक्षा २०० दिवस तर काहींची एक दिवस आहे.

या प्रयोगाबाबत वॉर्विक विद्यापीठातील भौतिकशास्त्र विभागाचे प्रमुख डॉ. डेव्हिड आर्मस्ट्राँग म्हणाले, 'मशीन लर्निंगद्वारे ग्रह निश्चितीचा प्रयोग प्रथमच करण्यात आला आहे. आता सांख्यिकीच्या मदतीने खरा ग्रह अचूकपणे ओळखता येणार आहे. यात चुकीचे प्रमाण फक्त एक टक्का आहे.'

करोनाच्या संकटाशी दोन हात करत असताना जगासाठी एक चांगली बातमी समोर आली आहे. आफ्रिका खंडातून पोलिओ हद्दपार झाला आहे. आफ्रिका खंड पोलिओमु्क्त झाला असल्याची घोषणा मंगळवारी करण्यात आली. आफ्रिका खंडात नायजेरिया हा शेवटचा देशही पोलिओ मु्क्त जाहीर करण्यात आला. आफ्रिका रिजनल सर्टिफिकेशन कमिशनने याची घोषणा केली. याआधी जागतिक आरोग्य संघटनेने आफ्रिका खंडातील सर्व ४७ देशांसोबत व्हिडिओ कॉन्फरन्सद्वारे बैठक घेतली होती. जगात दोन महत्त्वाचे देश अद्यापही पोलिओ मुक्त झाले नाही.

आफ्रिका खंडात वाइल्ड पोलिओचे शेवटचे प्रकरण चार वर्षांपूर्वी नायजेरियात आले होते. जागतिक आरोग्य संघटनेच्या दिलेल्या माहितीनुसार, आफ्रिका खंडातील विविध देशांचे सरकार, आरोग्य कर्मचाऱ्यांचे प्रयत्न आणि समाजातील सर्व घटकांनी केलेल्या सहकार्यांमुळे १८ लाख बालकांना अंपगत्वापासून वाचवण्यात यश आले आहे. पोलिओमुळे पाच वर्षापर्यंतच्या बालकांना अपंगत्व येण्याचा धोका असतो.

जवळपास २५ वर्षांपूर्वी आफ्रिका खंडात हजारो बालकांना पोलिओमुळे अपंगत्व आले होते. पोलिओला अटकाव करण्यासाठी लशीकरण मोहीम राबवण्यात आली. जगात आता फक्त पाकिस्तान आणि अफगाणिस्तानमध्ये पोलिओ आढळला जात आहे. या आजारावर कोणताही उपचार नाही. मात्र, पोलिओच्या लशीमुळे बालकांचे या आजारापासून संरक्षण होते.

औषध निर्मिती कंपनी AstraZenecaने करोनाच्या लशीनंतर आता एका औषधाची चाचणी सुरू केली आहे. हे औषध कोविड-१९ पासूनच्या संसर्गापासून बचावही करणार असून उपचारातही मोठी मदत होणार आहे. या औषधाच्या चाचणीसाठी स्वयंसेवकांना औषधांचा डोस देण्यात आला आहे. AstraZenecaने याआधी ऑक्सफर्डसोबत AZD1222 या करोना लशीवर काम सुरू केले आहे. या लशीची चाचणी तिसऱ्या टप्प्यात आली आहे.

AstraZeneca ने सांगितले की ब्रिटनमध्ये होणाऱ्या चाचणीत १८ ते ५५ वयोगटातील ४८ निरोगी स्वयंसेवक सहभागी होणार आहेत. औषध कितपत सुरक्षित आहे, शरीरावर याचा किती परिणाम होतो आदी विविध मुद्यांचा अभ्यास या चाचणीत केला जाणार आहे. ज्यांना करोना संसर्ग होण्याचा अधिक धोका आहे, अशांसाठी हे औषध उपयोगी ठरणार असल्याचा दावा कंपनीने केला आहे. त्याशिवाय ज्यांना करोनाची बाधा झाली आहे, त्यांच्या उपचारातही हे औषध उपयोगी ठरणार असल्याचे कंपनीने म्हटले आहे.

कंपनीचे बायोफार्मास्युटिकल रिसर्च अॅण्ड डेव्हलेपमेंटचे एक्झिक्युटीव्ह उपाध्यक्ष सर पँगलोस यांनी सांगितले की, अॅण्टीबॉडीटचे कॉम्बिनेशन, हाफ-लाइफ एक्सटेंशन तंत्रज्ञानासोबत अधिक मोठ्या प्रमाणावर आणि दीर्घकाळासाठी परिणामकारक आहे. त्याशिवाय विषाणू या औषधाविरोधात आपली प्रतिकारक क्षमता वाढवणार नाही, याची दक्षता ही या औषधाद्वारे घेण्यात येणार असल्याचे त्यांनी सांगितले.

AstraZeneca कंपनी ऑक्सफर्डने विकसित केलेल्या लशीचे उत्पादन करत आहे. सध्या करोनावरील सर्वाधिक आश्वासक लस म्हणून या लशीकडे पाहिले जात आहे. या लशीची तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू असून लवकरच निकाल अपेक्षित आहेत. भारतात सिरम इन्स्टिट्यूट या लशीचे उत्पादन करणार असून परवडणाऱ्या दरात ही लस भारतामध्ये उपलब्ध होणार आहे.

करोनाबाधितांच्या उपचारांसाठी प्लाज्मा थेरेपीचा वापर करण्याचा निर्णय ट्रम्प प्रशासनाने जाहीर केल्यानंतर अमेरिकेत मोठा वाद सुरू झाला आहे. अमेरिकेतील तज्ञांनी प्लाज्मा थेरेपीला विरोध केल्यानंतर आता अन्न व औषध प्रशासनाचे (FDA) आयुक्त स्टीफन हॉन माफी मागितली आहे. प्लाज्मा उपचार पद्धतीबाबतच्या फायद्यांबाबत अधिक दावा केल्याबद्दल त्यांनी ही माफी मागितली आहे.

अमेरिकन सरकारने प्लाज्मा थेरेपीला मान्यता दिल्यानंतर अमेरिकेतील तज्ञांनी आणि डॉक्टरांनी नाराजी व्यक्त करत विरोध दर्शवला होता. ट्रम्प यांनी या निर्णयाला ऐतिहासिक म्हटले होते. तर, या उपचाराची गुणवत्ता व इतर फायद्याबाबत अधिक संशोधन होणे आवश्यक असल्याचे मत समोर येत आहे. ट्रम्प यांचा निर्णय हा राजकीय असल्याची टीका करण्यात आली.

करोनाबाधितांवर प्लाज्माचा वापर केल्यास १०० पैकी ३५ बाधितांचे प्राण वाचू शकतात असा दावा करण्यात आला होता. हॉन यांनी ट्रम्प या निर्णयाचे समर्थनही केले होते. हा निष्कर्ष मायो क्लिनिकच्या सुरुवातीच्या निष्कर्षांपेक्षाही अधिक होता . या ३५ टक्क्यांच्या आकड्यावरून शास्त्रज्ञ आणि काही माजी एफडीए अधिकाऱ्यांनी एफडीए आणि सरकारवर टीका केली होती. ही आकडेवारी अवाजवी असून ती दुरुस्त आणि आणखी तथ्यांच्या आधारे समोर येणे आवश्यक असल्याचे त्यांनी म्हटले.

हॉन यांनी सांगितले की, रविवारी प्लाज्मा उपचार पद्धतीबाबत मी केलेल्या टिप्पणीसाठी माझ्यावर टीकाही करण्यात आली. ही टीका योग्य असून मी आकड्यांमधून जोखीम कमी असल्याचे समजते. मात्र, पूर्णपणे आजार बरा होतो असे नाही, असे वक्तव्य करायला हवे होते. आता प्लाज्मा उपचार पद्धतीवर देखरेख ठेवण्यात येणार असून आवश्यकता भासल्यास या उपचार पद्धतीला मागे घेण्यात येईल असेही हॉन यांनी स्पष्ट केले. एफडीएने मायो क्लिनिकने त्यांच्या देशभरातील रुग्णालयातून एकत्रित केलेल्या आकडेवारीच्या आधारे करोनाबाधितांवर प्लाज्माचा वापर करण्याची परवानगी दिली.

भारतासोबत चांगली घट्ट मैत्री असल्याचा दावा करणाऱ्या अमेरिकेने आपल्या नागरिकांना भारतात न जाण्याचा सल्ला दिला आहे. करोनाचे वाढते संकट, गुन्हेगारी आणि दहशतवादामुळे भारतात प्रवास न करण्याचा अमेरिकेने आपल्या नागरिकांना म्हटले. धक्कादायक म्हणजे अमेरिकेने भारताला सीरिया, पाकिस्तान, इराक, येमेन या देशांच्या श्रेणीत स्थान दिले आहे.

अमेरिकेने भारताला चार इतकी रेटिंग दिली आहे. ही रेटिंग वाईट असल्याचे म्हटले जाते. अमेरिकेने सांगितले की, भारतात करोनाचे संकट आहे. त्याशिवाय देशात गु्न्हेगारीच्या घटना आणि दहशतवादी घटनांमध्ये वाढ झाली आहे. त्यामुळे अमेरिकन नागरिकांनी भारतात प्रवास करू नये अशी सूचना देण्यात आली आहे. अमेरिकेने दिलेल्या मार्गदर्शक तत्वांमध्ये काही ठिकाणी महिलांवरील वाढत्या अत्याचाराचेही कारण दिले आहे. तर, इंडियन टूरिझम अॅण्ड हॉस्पिटलटी संघाने (FAITH) केंद्र सरकारकडे ही ट्रॅव्हल अॅडव्हायझरी बदलण्यासाठी अमेरिकेवर दबाव टाकावा अशी विनंती केली आहे.

FAITH ने सांगितले की, भारत सरकारने या विषयाला प्राथमिकता देऊन या सूचनांमध्ये बदल करण्यास सांगितले पाहिजे. यामुळे भारताबद्दल नकारात्मक प्रतिमा तयार होत आहे. करोनाच्या महासाथीमुळे आधीच पर्यटन व्यवसायाला मोठा फटका बसला आहे. भारतात पुन्हा एकदा पर्यटन व्यवसाय सुरू होण्याच्या मार्गावर आहे. अशातच अमेरिकेने नागरिकांना दिलेल्या अॅडव्हायझरीमुळे पर्यटन व्यवसायाला आणखी फटका बसणार असल्याची भीती व्यक्त करण्यात येत आहे. पाकिस्तान, येमेन, सीरियासारख्या देशांच्या श्रेणीत भारताचा समावेश करणे म्हणजे भारतासाठी ही वाईट घटना असल्याचे FAITHने म्हटले आहे.

जगातील सर्वाधिक वयाची व्यक्तीचे निधन झाले. फ्रेडी ब्लोम यांनी अवघ्या तीन महिन्यांपूर्वीच आपला ११६ वा वाढदिवस साजरा केला होता. त्यांचा जन्म १९०४ मध्ये झाला होता. करोनाच्या संसर्गामुळे त्यांची शेवटची इच्छा मात्र अपूर्णच राहिली.

फ्रेडी यांना सिगारेट ओढण्याचा शौक होता. मात्र, करोनाच्या संसर्गामुळे लॉकडाउन असल्यामुळे त्यांना तंबाखू मिळाला नाही. त्यामुळे त्यांना आपली शेवटची सिगारेट बनवता आली नाही. देवाच्या कृपेने इतकी वर्षे जगलो असल्याचे त्यांनी आपल्या ११६ व्या वाढदिवशी फ्रेडी यांनी सांगितले. आपल्या ११६ व्या वाढदिवशी त्यांनी एक सिगारेट ओढण्याची इच्छा व्यक्त केली होती. मात्र, लॉकडाउनमुळे तंबाखू मिळाली नाही. दक्षिण आफ्रिकेत लॉकडाउनमुळे दारू आणि सिगारेटवर बंदी आहे. जेणेकरून दारू प्यायल्यामुळे होणाऱ्या मारहाणीच्या संख्येत घट व्हावी आणि रुग्णालयात कमी प्रमाणात जखमी दाखल व्हावे.

फ्रेडी यांनी ८ मे रोजी रोजी आपला ११६ वा वाढदिवस साजरा केला होता. फ्रेडी यांच्या संपूर्ण कुटुंबीयांचा १९१८ च्या स्पॅनिश फ्लूच्या महासाथीमध्ये मृत्यू झाला होता. दक्षिण आफ्रिकेच्या माध्यमांनुसार फ्रेडी हे सर्वाधिक वयाचे व्यक्ती असल्याचे म्हटले. फ्रेडी यांच्या कुटुंबीयाच्यावतीने त्यांचे नातू अँड्रे नाइदू यांनी म्हटले की, त्यांची इच्छाशक्ती चांगली होती. मागील दोन वर्षांपासून त्यांनी डॉक्टरांकडे तपासणीसाठी जाणे थांबवले होते. फ्रेडी यांचा मृत्यू वृद्धपकाळाने झाला असून करोनामुळे झाला नसल्याचेही त्यांनी स्पष्ट केले. फ्रेडी यांच्या वयाबाबतचा विक्रम जिनियस बुक ऑफ रेकोर्डमध्ये नोंदवण्यात आला नाही.

पाकव्याप्त काश्मीरमध्ये चीन सरकारच्या प्रकल्पाला स्थानिकांकडून जोरदार विरोध सुरू झाला आहे. मुझफ्फराबादमध्ये नीलम आणि झेलम नदींवर चीन बांधत असलेल्या धरणाला विरोध वाढत आहे. सोमवारी रात्री मोठ्या संख्येने लोकांनी मुझफ्फराबाद शहरात जोरदार मशाल रॅली आणि धरणाच्या बांधकामाविरोधात मोर्चा काढला.

चीनकडून झेलम आणि निलम नदीवर धरणाचे बांधकाम सुरू आहे. हे बांधकाम बेकायदेशीर असून पर्यावरणाचा गंभीर प्रश्न निर्माण होणार असल्याचे स्थानिकांनी म्हटले. स्थानिकांनी या बांधकामाच्या मुद्यावरून प्रशासनावर सडेतोड टीकाही केली. पाकिस्तानमध्ये ट्विटरवर #SaveRiversSaveAJK असा ट्रेंड चालवून लोकांनी आपला विरोध दर्शवला. नदींवर ताबा मिळवून पाकिस्तान आणि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषदेच्या प्रस्तावांचे उल्लंघन करत असल्याचा आरोप पाकव्याप्त काश्मीरमधील नागरिकांनी केला. या धरणाच्या बांधकामामुळे स्थानिक पर्यावरणासह इतरही मोठ्या समस्या निर्माण होणार असल्याचे स्थानिकांनी म्हटले आहे.

चीन आणि पाकिस्तान दरम्यान अब्जावधींचा करार झाला आहे. पाकिस्तानच्या ताब्यात असलेल्या पाकव्याप्त काश्मीरमधील कोहलामध्ये २.४ अब्ज डॉलरच्या हायड्रो पॉवर प्रकल्पासाठी हा करार झाला आहे. हा प्रकल्प चीनच्या महत्त्वकांक्षी 'बेल्ट अॅण्ड रोड इनिशिएटीव्ह' प्रकल्पाचा भाग आहे. हा जलविद्युत प्रकल्प पूर्ण झाल्यास पाकिस्तानला कमी दरात वीज उपलब्ध होणार असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. भारताने चीनच्या 'बेल्ट अॅण्ड रोड इनिशिएटीव्ह' प्रकल्पालाविरोध केला आहे. या प्रकल्पातील रस्ता आणि काही प्रकल्पांची बांधकामे पाकव्याप्त काश्मीरमध्ये होणार आहे. काश्मीर हा भारताचा हिस्सा असून चीनने या भागात बांधकाम न करण्याचे आवाहन भारताने केले होते. मात्र, चीनने याकडे दुर्लक्ष करत हा प्रकल्प दामटवला आहे. 'बेल्ट अॅण्ड रोड इनिशिएटीव्ह' प्रकल्पामुळे चीनला पाकिस्तान मार्गे आशिया आणि युरोपमधील देशांमध्ये वेगाने मालवाहतूक करणे शक्य होणार आहे.

बेलारूसमध्ये एकीकडे नागरिकांचे आंदोलन सुरू असताना दुसरीकडे रशिया आणि नाटो दरम्यान तणाव वाढत चालला आहे. रशियाने बेलारूसचे राष्ट्रपती अलेक्झांडर लुकाशेन्को यांना पाठिंबा दिला आहे. तर, दुसरीकडे नाटो देशांकडून त्यांना विरोध सुरू आहे. जवळपास २६ वर्ष सत्तेवर असलेल्या लुकाशेन्को यांना नाटो देश सत्तेवरून हटवण्याचा प्रयत्न करत आहे. यामुळे रशिया आणि नाटो देशांमध्येही तणाव वाढत आहे. या वाढत्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर अमेरिकेने आता आपली सहा बी-५२ क्षेपणास्त्र डागणारी लढाऊ विमाने पाठवली आहेत.

अमेरिकेच्या हवाई दलाने एक निवदेश प्रसिद्ध केले असून त्यानुसार, सहा बी-५२ बॉम्बर विमाने ही उत्तरी डकोटाच्या मिनोटमधील हवाई तळावरून उड्डाण घेऊन २२ ऑगस्ट रोजी ब्रिटनच्या फेअरफोर्ड हवाई ठिकाणांवर दाखल झाली आहेत. अमेरिकेने सांगितले की, बॉम्बवर्षाव करणारी विमाने युरोप आणि आफ्रिकेमधील विमान प्रशिक्षणातही सहभाग घेतील. अमेरिकेने सांगितले की, २०१८ पासून ही लढाऊ विमाने या ठिकाणी येत आहेत. नाटो मित्र देश आणि अन्य भागिदार देशांसोबत या विमानांची ओळख करून दिली जाते. हे विमान बॉम्बर यंत्रणेला वाढवतील आणि आवश्यक ते प्रशिक्षण देतील. त्याशिवाय पूर्ण जगात कोणत्याही आव्हानांना तोंड देण्यास सज्ज आहेत.

करोनाच्या संकटाशी दोन हात करणाऱ्या जगासाठी आणखी एक वाईट बातमी समोर आली आहे. हवामान बदल, पृथ्वीवरील वाढत्या तापमानाची चिंता व्यक्त केली जात असताना ब्रिटीश शास्त्रज्ञांनी आणखी एक धक्कादायक माहिती समोर आणली आहे. वाढत्या तापमानामुळे मागील ३० वर्षात पृथ्वीवप २८ ट्रिलियन टन बर्फ विरघळला असल्याचे समोर आले आहे. एडिनबर्ग विद्यापीठ आणि युनिर्व्हसिटी कॉलेज लंडनमधील संशोधनकर्त्यांनी वर्ष १९९४ ते २००७ दरम्यान उत्तर आणि दक्षिण ध्रुवाच्या सॅटेलाइट फोटोंचा अभ्यास केला. त्यातून ही माहिती समोर आली आहे.

ग्रीन हाउसमध्ये वाढत्या गॅसच्या परिणामाचा अभ्यास करण्यासाठी हे संशोधन करण्यात आले. शास्त्रज्ञांचे संशोधन क्रियोफेअर डिस्कशन जर्नलमध्ये प्रकाशित झाले आहे. या शतकाच्या अखेरपर्यंत समुद्राच्या पातळीत मोठी वाढ होणार आहे. या संशोधनात सहभागी असलेल्या प्रा. एंडी शेफर्ड यांनी सांगितले की समुद्रातील जलस्तरात एक सेंटिमीटरची वाढ झाली तरी सखल भागात राहणारे किमान १० लाख लोक विस्थापित होण्याचा धोका आहे.

शास्त्रज्ञांनी सांगितले की, निम्म्याहून अधिक बर्फ हा उत्तर गोलार्धात वितळला आहे. तर, उर्वरीत दक्षिण गोलार्धा भागातील वितळला आहे. वर्ष १९९० नंतर बर्फ वितळण्याचा दर ५७ टक्क्यांहून अधिक आहे. आता हा दर ०.८ हून अधिक वाढला असून १.२ ट्रिलियन प्रतिवर्ष इतका झाला आहे.

करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करणाऱ्या लशीवर संशोधन सुरू आहे. काही लशींच्या चाचण्या अंतिम टप्प्यात आली आहे. मात्र, रशियानंतर आता चीननेही रुग्णांवरील वापरासाठी लस वापराला मान्यता दिली आहे. चीनमध्ये विकसित करण्यात आलेल्या लशींचा वापर करण्यात येणार आहे. यामध्ये Sinopharm च्या लशीचा समावेश आहे.

चीनच्या करोना वॅक्सीन डेव्हलेपमेंट टास्कफोर्सचे प्रमुख झेंग झॉन्गवी यांनी सीसीटीव्ही वृत्तवाहिनीला सांगितले की, एक महिन्यापूर्वी चीनने आपात्कालीन परिस्थितीत वापरता येणारी लस लाँच केली होती. ही लस देण्यात आलेल्या लोकांना ताप आला नाही. मात्र, इतर काही साइड इफेक्टस जाणवले.

चीनमधील लस प्रतिबंधक कायद्यानुसार, जर कोणतीही आपात्कालीन आरोग्य समस्या निर्माण झाली तर लस चाचणीचा कालावधी मर्यादित करण्यात येतो. जेणेकरून आरोग्य कर्मचारी, कस्टम अधिकारी व इतर आवश्यक अधिकारी, कर्मचाऱ्यांना लस टोचता येऊ शकते. चीनच्या Sinopharm कंपनीने आपल्या तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणीसाठी पेरू, मोरक्को आणि अर्जेंटिनासोबत करार केला आहे.

झेंग यांनी सांगितले की, आगामी काळात आजाराला रोखण्यासाठी फूड मार्केट, परिवहन वाहतूक व्यवस्था, सेवा क्षेत्रात काम करणाऱ्या लोकांपर्यंत लस देण्याचा प्रयत्न करण्यात येणार आहे. आपात्कालीन काळात ही लस वापरता येणार आहे. यामध्ये काही हजार, लाख लोकांचाही समावेश असू शकतो. त्याशिवाय अनेकांना मोफत लस देण्यात येत आहे. मात्र, त्यांची संख्या सांगणे अशक्य आहे. चीनच्या लष्करी जवानांनाही लस देण्यात येत आहे. मात्र, त्याची संपूर्ण माहिती समोर आली नाही.

१९९३ मुंबई बॉम्बस्फोट प्रकरणातील आरोपी आणि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिमचा समावेश निर्बंध लादण्यात आलेल्या दहशतवाद्यांच्या यादीत असल्याचे निश्चित केल्यानंतर पाकिस्तानने रविवारी दाऊदच्या पाकमधील वास्तव्याबाबत सारवासारव करण्याचा प्रयत्न केला. संयुक्त राष्ट्रांनी दिलेल्या तपशीलांच्या आधारावर निर्बंध लादण्यात आलेल्या ८८ दहशतवादी गट व त्यांच्या म्होरक्यांची यादी तयार करण्यात आल्याचा दावा पाकिस्तानने केला आहे. पाकिस्तानच्या अधिकाऱ्यांनी या यादीत दाऊद इब्राहिमच्या घराचा पत्ता दिला होता.

पॅरिसस्थित आर्थिक कृती गटातर्फे (एफएटीएफ) काळ्या यादीत टाकले जाण्यापासून वाचण्यासाठी पाकिस्तानने शनिवारी बंदी घालण्यात आलेले ८८ दहशतवादी गट व त्यांच्या म्होरक्यांवर कठोर आर्थिक निर्बंध लादले. या यादीमध्ये दाऊदसह जमात-उद-दवाचा म्होरक्या हाफीझ सईद, जैश-ए-महंमदचा म्होरक्या मसूद अझर यांचाही समावेश आहे. दहशतवादी संघटना आणि त्यांच्या म्होरक्यांची संपत्ती जप्त करणे आणि बँक खाते सील करण्याचे आदेश पाकिस्तान सरकारने दिले आहेत. पॅरिस येथील 'फायनान्शिअल अॅक्शन टास्क फोर्स' (FATF) या संस्थेने जून २०१८ मध्ये पाकिस्तानला ग्रे यादीत ठेवले होते. पाकिस्तानने तातडीने २०१९ पर्यंत दहशतवादी संघटनांविरोधात टेरर फंडिंगसंदर्भात आपला कृती आराखडा पूर्ण करण्याची सूचना केली होती. मात्र, कोविड-१९ च्या प्रादुर्भावामुळे कारवाईची मुदत वाढवण्यात आली.

चीनच्या वाढत्या आक्रमक विस्तारवादी भूमिकेमुळे आंतरराष्ट्रीय पातळीवरील राजकीय संबंधांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर बदल होत असल्याचे चित्र आहे. एकमेकांना पाण्यात पाहणारे अमेरिका आणि रशिया चीनच्या विरोधात एकत्र येणार असल्याची चर्चा सुरू झाली आहे. या दोन टोकांच्या देशांना भारत एकत्र आणणार असल्याचे म्हटले जात आहे. त्यामुळे आता चीन व रशियामध्ये पूर्वी प्रमाणो मैत्रीपूर्ण संबंध राहिले नसल्याचे म्हटले जात आहे.

हाँगकाँगमधील साउथ चायना मॉर्निंग पोस्टने दिलेल्या वृत्तानुसार, अमेरिकेने शीत युद्धाच्या काळात ज्याप्रमाणे सोव्हिएट रशियाला आव्हान देण्यासाठी चीनला झुकतं माप दिले होते. अगदी त्याचप्रमाणे आता ट्रम्प चीनविरोधात रशियाला आपल्या बाजूने वळवण्याचा प्रयत्न करत आहे. अमेरिकेने मात्र अशा प्रकारची शक्यता फेटाळून लावली आहे. मात्र, रशियाकडून चीनच्या विरोधानंतरही भारताला होत असलेल्या मदतीमुळे अनेक प्रश्नही निर्माण झाले आहेत.

रशियाने चीनच्या विरोधानंतरही भारताला शस्त्र पुरवठा केला आहे. गलवान खोऱ्यात झालेल्या संघर्षानंतर भारताचे संरक्षण मंत्री राजनाथ सिंह यांनी रशियाचा दौरा करून लढाऊ विमाने व इतर अत्याधुनिक शस्त्रांबाबत चर्चा केली. त्यावरून चीन नाराज आहे. इतकंच नव्हे तर चीनच्या विरोधानंतरही रशियाने भारताला घातक एस ४०० हे मिसाइल डिफेन्स सिस्टीम देण्याचे कबूल केले आहे. तर, दुसरीकडे रशियाने चीनला देण्यात येणाऱ्या एस ४०० देण्यास टाळटाळ करत आहे. वर्ष २०१८ मध्ये रशियाने चीनला एस ४०० ची पहिली खेप दिली होती. मात्र, काही महिनेआधी एका रशियन प्राध्यापकाला चीनने हेरगिरी करत असल्याच्या आरोपावरून अटक केली होती. त्यानंतर रशिया नाराज असून त्यामुळे एस-४०० ची दुसरी खेप दिली नसल्याची चर्चा आहे.
 

करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी जगभरात लस विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. रशियाने लस विकसित केल्याची घोषणा केल्यानंतर अनेक देशांनी आश्चर्य व्यक्त केले होते. या लशीची चाचणी पूर्ण होण्याआधीच लस देण्याचा निर्णय रशियाने घेतला. त्यावर तज्ञांनी चिंता व्यक्त केली आहे. या लशीमुळे करोनाचा संसर्ग अधिक घातक होऊ नये अशी आशाही त्यांनी व्यक्त केली आहे.

ब्रिटनच्या रिडींग विद्यापीठाचे वायरॉलॉजीचे प्राध्यापक इयान जोन्स यांनी सांगितले की, लस संपूर्णपणे सुरक्षित नसल्यास विषाणू त्या अॅण्टीबॉडीविरोधात आपल्याला अधिक सक्षम करू शकतो. त्यामुळे लशीचा कोणताही परिणाम न होणारे असे काही स्ट्रेन निर्माण होण्याची भीती आहे. त्यामुळे लस नसण्यापेक्षा लस असणे हेच अधिक धोकादायक ठरू शकते असा इशारा त्यांनी दिला. अमेरिकेतील वाँडरबिट युनिर्व्हसिटी ऑफ मेडिसीनचे प्राध्यापक आणि लस तज्ञ कॅथरीन एडवर्डस यांनी सांगितले की, लशीचा विषाणूवर काय परिणाम होऊ शकतो, विषाणूंचा कितपत सामना करेल, अथवा या लशीचा परिणाम उलटा होईल, आदी चिंता निर्माण करणारे प्रश्न अनुत्तरीत असल्याचे त्यांनी म्हटले.

५० बलात्कार आणि १३ हत्या करणारा दोषी 'गोल्डन स्टेट किलर' माजी अमेरिकन पोलिसाला अखेर जन्मठेपेची शिक्षा सुनावण्यात आली आहे. या शिक्षेदरम्यान त्याची पॅरोलवरही सुटका करण्यात येणार नसल्याचे कोर्टाने स्पष्ट केले आहे. कोर्टान निकाल देण्यापूर्वी दोषी पोलीस अधिकाऱ्याने पीडितांची, त्यांच्या कुटुंबीयाची माफी मागितली.

जोसेफ जेम्स डीअॅंजेलो असे या पोलीस अधिकाऱ्याचे नाव आहे. त्याने याआधीच केलेल्या गुन्ह्याची कबुली दिली होती. त्याने हे सगळे गुन्हे ७० आणि ८० च्या दशकात केले असल्याची कबुली दिली होती. शिक्षा सुनावताना कोर्टात मोठ्या प्रमाणावर गर्दी झाली होती. यावेळी पक्षकारांसह पीडितांचे कुटुंबीय, पत्रकारांचीही गर्दी होती. कोर्टात दोषी जोसेफ जेम्स डीअॅंजेलोने उभे राहून पीडितांच्या दिशेने पाहत माफी मागितली. मी केलेल्या कृत्यांची माफी मागत असून माझ्यामुळे तुम्हाला त्रास सहन करावा लागत असल्याचे त्याने म्हटले. जोसेफ जेम्स डीअॅंजेलोचे वय ७४ आहे. त्याला १३ खूनाच्या आरोपांखाली ११ जन्मठेपेची शिक्षा सुनावण्यात आली. यामध्ये त्याची पॅरोलवरही सुटका करण्यात येणार नाही. दोषी जोसेफने १९७९ मध्ये तीन हत्या केल्या असल्याचे समोर आले.

अशी झाली अटक
दोषी जोसेफ जेम्स डीअॅंजेलोला २०१८ मध्ये अटक करण्यात आली होती. जवळपास तीन दशकानंतर 'गोल्डन स्टेट किलर' सीरियल किलरला अटक करण्यात पोलिसांना यश आले. गु्न्हा घडलेल्या ठिकाणांच्या डीएनएच्या आधारे त्याला अटक करण्यात आली. त्याला अटक करण्याच्या चार महिन्याआधी एफबीआय अधिकारी पॉल होल्स यांनी बलात्कार प्रकरणातील डीएनए हा डेटाबेसमधील डीएनएशी जुळवून पाहिला. जवळपास १० जणांचे डीएनए गुन्ह्याच्या घटनेतील डीएनएशी मिळतेजुळते दिसत होते. मात्र, अधिक तपासानंतर जोसेफला अटक करण्यात आली.
 

जगभरात करोनाच्या संसर्गाने जगभरात थैमान घातले आहे. करोनाला अटकाव करण्यासाठी जगभरात विविध पातळीवर प्रयत्न सुरू आहेत. काही लशींवर संशोधन सुरू असून चाचणीही अंतिम टप्प्यात आली आहे. करोनाचा हाहाकार सुरू असताना दोन वर्षाच्या आतच करोनाचा खात्मा करता येऊ शकतो असे जागतिक आरोग्य संघटनेचे प्रमुख टेड्रोस घ्रेबेयसस यांनी म्हटले आहे.

जागतिक आरोग्य संघटनेचे प्रमुख टेड्रोस घ्रेबेयसस यांनी शुक्रवारी म्हटले की, १०२ वर्षांपूर्वी आलेली स्पॅनिश फ्लूची साथ दोन वर्षांत संपली होती. जगभरातील देशांमध्ये एकजूट कायम राहिल्यास आणि परिणामकारक लशीचा शोध लागल्यास करोनाही दोन वर्षांत संपू शकतो. शंभर वर्षातून असा एखादा आजार निर्माण होत असल्याकडेही त्यांनी लक्ष वेधले. स्पॅनिश फ्लूमुळे फेब्रुवारी १९१८ ते एप्रिल १९२० दरम्यानच्या या दोन वर्षाच्या कालावधीत जगभरात जवळपास दोन कोटी लोकांचा मृत्यू झाला होता.

टेड्रोस घ्रेबेयसस यांनी सांगितले की, जागतिकीकरणामुळे करोनाच्या संसर्गाच्या प्रसार १९१८ च्या तुलनेत अधिक झाला आहे. मात्र, त्या काळाच्या तुलनेने आजच्या काळात विषाणूला अटकाव करण्यासाठी आपल्याकडे अत्याधुनिक तंत्रज्ञान असल्याचे त्यांनी सांगितले. विषाणूला रोखण्यासाठी १९१८ मध्ये एवढं तंत्रज्ञान, आरोग्य सेवा एवढी विकसित नसल्याचे त्यांनी सांगितले.

 

पाकिस्तानमधील वाचाळवीर रेल्वेमंत्री शेख रशीद अहमद यांनी पुन्हा एकदा भारताला धमकी दिली आहे. भारतासोबत वाढत्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर अहमद यांनी भारताला थेट अणूबॉम्ब हल्ल्याची धमकी दिली आहे. आता भारतासोबत छोटे युद्ध होणार नाही, तर थेट अणूबॉम्बनेच हल्ला करण्यास पाकिस्तान सज्ज असल्याचे त्यांनी सांगितले. याआधीही शेख रशीद अहमद यांनी भारताविरोधात गरळ ओकली आहे.

एका वृत्तवाहिनीला दिलेल्या मुलाखतीत शेख रशीद यांनी जागतिक राजकारणावरही भाष्य केले. चीनच्या विरोधात अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कॅनडा आणि ब्रिटन हे देश उभे आहेत. तर, चीन नवा मित्र नेपाळ, श्रीलंका, इराण, रशिया या देशांसोबत एकत्र येत आहे. पाकिस्तानलाही चीनसोबत उभे राहण्याची आवश्यकता असल्याचे त्यांनी सांगितले. पुढे त्यांनी म्हटले, आता भारताने पाकिस्तानवर हल्ला केल्यास छोटी लढाई, युद्ध वगैरे होणार नाही. आता थेट शेवटची लढाई होईल. पाकिस्तानचे शस्त्र अगदी योग्य ठिकाणी हल्ला करण्यास सक्षम आहे. पाकिस्तान भारताच्या आसामपर्यंतही हल्ला करण्यास सक्षम आहे. त्यामुळे भारतासोबत आता थेट अणूयुद्धच होईल अशी दर्पोक्तीही त्यांनी केली.

उत्तर कोरियाचे राष्ट्रपती व हुकूमशहा किम जोंग उन यांनी एक मोठा निर्णय घेतला आहे. किम जोंग उनने त्यांची बहीण किम यो जोंगच्या अधिकारात वाढ केली आहे. यामुळे आता किम यो जोंग या उत्तर कोरियाच्या दुसऱ्या क्रमांकावरील सर्वोच्च नेत्या असणार आहेत. दक्षिण कोरियाच्या गुप्तचर संस्थानी दिलेल्या माहितीनुसार आता किम यो जोंग अमेरिका आणि दक्षिण कोरियाबाबतचे निर्णय घेणार आहे. तर, दुसरीकडे किम यांच्या प्रकृतीबाबत चर्चा सुरू झाल्या आहेत.

उत्तर कोरियातील सूत्रांनी मात्र, किम जोंग उन यांच्यावरील जबाबदारीचा भार हलका करण्याच्यादृष्टीने काही निर्णय घेण्यात आल्याची माहिती दिली. किम जोंग उन आताही उत्तर कोरियाचे सर्वोच्च नेते असणार आहेत. किम यांच्या प्रकृतीबाबत उलटसुलट चर्चा सुरू असताना हा निर्णय समोर आल्यामुळे अनेक तर्क लावले जात आहेत.

दक्षिण कोरियाची गुप्तचर संस्थेच्या एका कमिटीचे सदस्य ताई क्यूंग यांनी सांगितले की, गुरुवारी सत्तेचे हस्तातंरण करण्यात आले. किम जोंग उन यांच्याकडे सर्व निर्णय घेण्याचे अधिकार असले तरी त्यांनी आता बहिणीलाही अधिक अधिकार दिले आहेत. किम जोंग यांनी बहिणीला अधिक अधिकार देऊन आता अप्रत्यक्षपणे बहिणीलाच उत्तराधिकारी नेमले असल्याची चर्चा सुरू आहे.

करोनाच्या संसर्गाने थैमान घालण्यास सुरुवात केल्यानंतर अनेक देशांनी लॉकडाउन जाहीर केला. दोन-महिन्यानंतर लॉकडाउनचे निर्बंध शिथील केल्यानंतर सार्वजनिक ठिकाणी मास्कचा वापर अनिवार्य करण्यात आला आहे. मात्र, करोनाचा संसर्ग हा कार्यालयातून नव्हे तर घरातूनच होत असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. ब्रिटनचे आरोग्य सचिव मॅट हँकॉक यांनी हा दावा केला आहे.

हँकॉक यांनी बीबीसीला दिलेल्या मुलाखतीत हा दावा केला आहे. त्यासाठी त्यांनी नॅशनल हेल्थ सर्व्हिसचा (NHS)हवाला दिला आहे. NHS ने केलेल्या चाचणीनुसार, अनेकजणांना एका घरातून दुसऱ्या घरात जात असल्यामुळे करोनाची बाधा होत आहे. ब्रिटनमध्ये करोनाचा संसर्ग फैलावण्याचे मुख्य कारण हे घरातून होणारा संसर्ग आहे. घराच्या तुलनेत कामाच्या ठिकाणी बाधित झालेल्यांची संख्या कमी असल्याचे त्यांनी सांगितले.

जगभरात आतापर्यंत दोन कोटी २७ लाख २० हजारजणांना करोनाची बाधा झाली आहे. तर, सात लाख ९३ हजार जणांचा मृत्यू झाला आहे. ब्रिटनमध्ये तीन लाख २२ हजारजणांना करोनाची बाधा झाली आहे. तर, ४१ हजार ४०३ जणांचा मृ्त्यू झाला आहे. करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी लस विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. किमान सहा लशींची तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू आहे. मात्र, त्यावरही अनेक प्रश्न उपस्थित करण्यात येत आहे.

इस्रायलमधील इलट शहर सामूहिक बलात्काराच्या घटनेने हादरले आहे. येथील एका हॉटेलात १६ वर्षीय मुलीवर ३० जणांनी सामूहिक बलात्कार केला. या अमानवीय घटनेने इस्रायलमध्ये खळबळ उडाली आहे. पंतप्रधान बेंजामिन नेतान्याहू यांनी 'मानवतेविरोधातील गुन्हा' अशी प्रतिक्रिया दिली आहे. पोलिसांनी आतापर्यंत दोघांना अटक केली आहे. आरोपींनी मुलीचे आक्षेपार्ह व्हिडिओ शूट केले आहेत, अशी माहिती समोर आली आहे.

घटना घडली त्यावेळी पीडित मुलगी नशेत होती, असे सांगितले जात आहे. या मुलीनेच घडलेली घटना पोलिसांना सांगितली. पोलिसांनी एका संशयिताकडे चौकशी केली असता,मुलीवर बलात्कार करणारे अनेक जण होते, असे त्याने सांगितले. मात्र, मुलीच्या सहमतीनेच शरीरसंबंध ठेवल्याचा दावा त्याने केला आहे. आरोपींनी मुलीचा आक्षेपार्ह अवस्थेतील व्हिडिओ शूट केला आहे. हा व्हिडिओ व्हायरल झाल्यानंतर पोलिसांनी एका आरोपीला अटक केली आहे.

.मित्रांसोबत दारू प्यायल्याचा दावा
पोलिसांनी सांगितले की, पीडित मुलगी ही हॉटेलची गेस्ट नव्हती. ती मित्रांसोबत दारू प्यायल्यानंतर वॉशरूममध्ये गेली होती. त्यानंतर मुलीला काही जण हॉटेलच्या खोलीत घेऊन गेले. हे सर्व आरोपी एकमेकांना ओळखतही नव्हते. एका संशयिताने सांगितले की, एकेक आरोपी खोलीत गेला आणि अशा ३० जणांनी तिच्यावर बलात्कार केला. वैद्यकीय मदत करण्याच्या बहाण्याने आरोपी एकेक करून खोलीत गेले होते. नशेत असल्याचा गैरफायदा घेऊन त्यांनी तिच्यावर बलात्कार केला. मुलीच्या वैद्यकीय अहवालाची तपास करणाऱ्या पोलिसांना प्रतीक्षा आहे. या घटनेने इस्रायलच्या पंतप्रधानांना मोठा धक्का बसला आहे. हा मानवतेविरोधातील गुन्हा आहे. त्याचा तीव्र निषेध करत असून, आरोपींवर कठोर कारवाई व्हायला हवी, अशी प्रतिक्रिया त्यांनी दिली.

 

अमेरिकेतील कॅलिफोर्नियामधील जंगलाला लागलेल्या आगीने महाभयंकर रुप धारण केले आहे. जंगलाला लागलेली आग नियंत्रणात आणण्यासाठी पूर्ण प्रयत्न केले जात आहेत. मात्र, आगीवर नियंत्रण मिळवण्यास अनेक अडचणींचा सामना करावा लागत आहे. या आगीवर नियंत्रण मिळवण्यासाठी प्रशासनाने हेलिकॉप्टरचीही मदत घेतली. मात्र, आगीच्या उठलेल्या ज्वाळांमुळे हेलिकॉप्टर कोआलिंगाजवळ कोसळले. कॅलिफोर्नियाचे राज्यपाल गॅविन न्यूसम यांनी शंभराहून अधिक आगीच्या घटनांमुळे आणीबाणी जाहीर केली आहे. आगीमुळे सॅन फ्रॅन्सिस्कोमधील पाच हजार नागरिकांना स्थलांतर करावे लागले आहे. या आगीमुळे मोठ्या प्रमाणावर प्राण्यांचा मृत्यू झाला आहे. मागील ७२ तासांपासून आग लागली असून हा वणवा अधिकच पसरत आहे. अग्निशमन दलाचे जवान आणि इतर यंत्रणा आगीवर नियंत्रण आणण्यासाठी प्रयत्नांची शर्थ करत आहेत.

या आगीचा सर्वात मोठा धोका वॅकवील शहराला आहे. याठिकाणी एक लाखांहून अधिक नागरीक राहतात. हे शहर सॅन फ्रॅन्सिस्को आणि सॅक्रिमेंटो शहरामध्ये आहे. नागरिकांनी घर सोडून इतरत्र आसरा घ्यावा यासाठी अधिकारी घरोघरी जाऊन लोकांना सूचना देत सतर्क करत आहेत. अधिकाऱ्यांनी दिलेल्या माहितीनुसार, वॅकवीलमध्ये ५० हून अधिक इमारतींना आग लागली आहे. तर, ५० हून अधिक इमारतींना आगीती झळ बसली आहे.

अमेरिकेकडून चीनची कोंडी करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. चीनने हाँगकाँगमध्ये सुरक्षा कायदा लागू केल्यानंतर अमेरिका चीनवर आणखीच नाराज झाला होता. व्यापार करार, करोना संसर्गानंतर हाँगकाँगच्या मुद्याने अमेरिका-चीनच्या संबंधाच्या तणावात भर घातली आहे. अमेरिकेने चीनला आता आणखी झटका दिला असून हाँगकाँगशी संबंधित तीन द्विपक्षीय करार रद्द केले आहेत.

हाँगकाँगमध्ये सुरक्षा कायदा लागू करणे हे चीनकडून हाँगकाँगच्या स्वायत्तेवर हल्ला असल्याचा आरोप स्थानिकांसह अमेरिकेनेही केला होता. हाँगकाँगमध्ये हा कायदा लागू केल्यास त्याचे परिणाम चांगले होणार नसल्याचा इशारा अमेरिकेने दिला होता. बुधवारी, ट्रम्प प्रशासनाने हाँगकाँगसोबतचे तीन द्विपक्षीय करार स्थगित, रद्द केले आहेत. चीनने आशियाच्या ट्रेडिंग हबची स्वायत्ता आणि लोकशाही स्वातंत्र्यावर घाला घालण्यासाठी हा सुरक्षा कायदा थोपवला असल्याचा आरोप अमेरिकेने केला आहे.

एक महिन्यापूर्वी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी अमेरिकेने हाँगकाँगला दिलेला विशेष दर्जा मागे घेतला होता. त्याशिवाय, हाँगकाँगमध्ये लोकशाहीसाठी लढणाऱ्या राजकीय कार्यकर्त्यांवर कारवाई करणाऱ्या अधिकाऱ्यांवर अमेरिकेतील प्रवेशावर निर्बंध लागू केले. परराष्ट्र खात्याच्या प्रवक्त्या मॉर्गन ऑर्टागस यांनी सांगितले की, आम्ही तीन द्विपक्षीय करार स्थगित, रद्द करणार आहोत. याबाबत हाँगकाँगच्या अधिकाऱ्यांना १९ ऑगस्ट रोजी माहिती देण्यात आली आहे. या तीन करारांमध्ये गुन्हेगार, आरोपींचे प्रत्यार्पण, दोषींचे स्थानांतरण आणि जहाजांच्या आतंरराष्ट्रीय वाहतुकीतून मिळणाऱ्या उत्पन्नाक परस्परांना सवलत देणे आदी करारांचा समावेश आहे.

हाँगकाँगमधील नागरिकांना स्वायत्ता देण्याबाबत चीनने चीन-ब्रिटीश संयुक्त जाहीरनाम्याद्वारे वचन दिले होते. चीनच्या कम्युनिस्ट पक्षाने हाँगकाँगची स्वायत्ता संपवण्यासाठी कठोर पावले उचलली असल्याचा आरोप मॉर्गन ऑर्टागस यांनी केला.

नोव्हेंबर महिन्यात होणाऱ्या अमेरिकन राष्ट्राध्यक्षपदाच्या निवडणुकीच्या प्रचाराला सुरुवात झाली आहे. सोशल मीडियावरून होणाऱ्या प्रचारावर लक्ष ठेवण्यासाठी फेसबुकनेही कंबर कसली आहे. फेसबुकवर फेक न्यूज, द्वेष पसरवणाऱ्या पोस्टवर कारवाई करण्यात येणार आहे. अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांच्याही अकाउंटवरून अशा पोस्ट आल्यास कारवाई होणार असल्याचे फेसबुकच्या मुख्य परिचालन अधिकारी शेरिल सँडबर्ग यांनी स्पष्ट केले.

तीन नोव्हेंबर रोजी होणाऱ्या अमेरिकन राष्ट्राध्यक्षपदाच्या निवडणुकीच्या पार्श्वभूमीवर फेसबुकवरून होणाऱ्या अपप्रचाराला आळा घालण्यासाठी पावले उचलण्यास सुरुवात केली आहे. यामध्ये सँडबर्ग यांनी सांगितले की,फेसबुक आपल्या सोशल मीडिया प्लॅटफॉर्मवरून फेक न्यूज, द्वेष पसरवणाऱ्या माहितीची पोस्ट डिलीट करणार आहे. मग, ती पोस्ट ट्रम्प यांनी टाकली तरी त्याच्यावर कारवाई होणार.

सँडबर्ग यांनी सांगितले की, फेसबुकने आगामी राष्ट्राध्यक्ष निवडणुकीच्या पार्श्वभूमीवर फेक न्यूज, दिशाभूल करणारी माहिती रोखण्यासाठी नवीन सेवाही सुरू केली आहे. यामध्ये निवडणुकीच्या संबंधात असलेल्या पोस्टची सत्यता पडताळून पाहण्याबाबतची सूचना असणार आहे.

पश्चिम आफ्रिकन खंडातील देश मालीमधील राजकीय परिस्थिती बिघडली आहे. माली देशाचे राष्ट्रपती आणि पंतप्रधानांना बंडखोर सैनिकांनी ताब्यात घेतले आहे. बंडखोर सैनिकांनी केलेला सत्तापालटाचा प्रयत्न केला असल्याचे म्हटले जाते. त्याआधी बंडखोर सैनिकांनी मंगळवारी राष्ट्रपतींच्या खासगी निवासस्थानाला घेरले होते. त्यावेळी हवेत गोळीबारही झाला असल्याचे वृत्त आहे. राष्ट्रपती इब्राहिम बाउबकर कीता यांनी आपल्या पदाचा राजीनामा दिला असल्याचे वृत्त 'अल जझीरा'ने दिले आहे.

राष्ट्रपती इब्राहिम बाउबकर कीता यांनी राजीनामा दिल्यानंतर देशाला संबोधित करत आपण सत्तेतून पायउतार होत असल्याचे सांगितले. आज सैन्यातील काही जवानांनी हस्तक्षेप करणे आवश्यक असल्याचे म्हटले. रक्तपात होऊ नये यासाठी माझ्याकडे राजीनामा देण्याशिवाय काहीच पर्याय नसल्याचे त्यांनी सांगितले. मालीमधील संसंदही बरखास्त झाली आहे. याआधी २०१८ मध्ये झालेल्या निवडणुकीत किता यांना बहुमत मिळाले होते. कोलमडलेली अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार आणि वाढलेली धर्मांधता यामुळे नागरिकांमध्ये रोष निर्माण झाला होता.

बंडखोर सैनिकांनी लष्करातील वरिष्ठ अधिकाऱ्यांना ताब्यात घेतले. राजधानी बमाकोजवळील काटी शहरात गोळीबार झाला असल्याचा काहीजणांनी दावा केला आहे. 'एएफपी' या वृत्तसंस्थेने दिलेल्या वृत्तानुसार, मालीमध्ये सैनिकांनी राष्ट्रपती इब्राहिम बाउबकर कीता आणि पंतप्रधान बाउबो सिसे यांना ताब्यात घेतले. या दोन्ही नेत्यांना राजधानी बामाकोमधील कीटा निवासस्थानातून ताब्यात घेण्यात आले.

चीनसोबत असलेल्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर अमेरिकेने चिनी अॅप टिकटॉकवर बंदी आणण्यासाठी प्रयत्न सुरू केले आहेत. टिकटॉक अॅप अमेरिकन कंपनीला विकावे अन्यथा गाशा गुंडाळावा असा इशाराच अमेरिकेने दिला आहे. आता राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी टिकटॉक खरेदीसाठी कोणती कंपनी सक्षम ठरू शकते यावर भाष्य केले आहे. मागील काही दिवसापासून मायक्रोसॉफ्ट टिकटॉक खरेदी करू शकते, अशी चर्चा सुरू आहे. मात्र, ट्रम्प यांनी दुसऱ्याच कंपनीला आपली पसंती दर्शवली आहे.

अमेरिकन राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी मंगळवारी म्हटले की, अमेरिकन कंपनी ओरॅकल ही एक चांगली कंपनी आहे. या कंपनीचे संस्थापक-मालक अतिशय चांगली व्यक्ती आहे. ही कंपनी टिकटॉकला खरेदी करू शकते आणि उत्तम प्रकारे कामही करू शकते. त्यांनी पुढे म्हटले की, मायक्रोसॉफ्ट कंपनी टिकटॉक खरेदीसाठी इच्छुक असल्याचे समोर आले आहे. आता ट्विटरनेदेखील टिकटॉकची मूळ कंपनी असलेल्या बाइटडान्ससोबत चर्चा केली आहे.

एकीकडे चीन आशिया खंडातील अनेक भागांवर, विशेषत: दक्षिण चीन समुद्रात आपला हक्क सांगत आहे आणि दुसरीकडे लष्करी सामर्थ्य दाखवत आहे. शेजारच्या देशांवर दबाव वाढवण्यासाठी चीन आपले लष्करी सामर्थ्यांचे प्रदर्शन करत आहे. मात्र, नुकत्याच एका व्हिडिओमुळे चीनची नाचक्की झाली आहे.

तैवानवर आपला हक्क सांगणाऱ्या चीनने तैवान ताब्यात घेऊ अशी धमकीही दिली आहे. तैवानविरोधात लढण्यासाठी चीनचा आपल्या amphibious रणगाड्यावर मोठा विश्वास आहे. हा रणगाडा जमीन आणि पाणी या दोन्ही ठिकाणी धावतो. मात्र, नुकत्याच समोर आलेल्या या व्हिडिओनुसार, हा रणगाडा सरावादरम्यान बुडाला. पाण्याच्या मार्गे तैवानला युद्धात पराभूत करण्याची स्वप्ने पाहणाऱ्या चीनला यामुळे धक्का बसला आहे.

चीनचा विश्वास असलेल्या amphibious रणगाडा हा पाण्यात बराच काळ राहू शकतो आणि आवश्यकता भासल्यास हा रणगाडा अचानकपणे हल्ला करू शकतो. त्याशिवाय कोणत्याही संशयितास नदीतून जाण्यास अटकाव करू शकतो. मात्र, amphibious टँक बुडाल्यामुळे त्याच्या गुणवत्तेवर प्रश्न उभे राहिले आहेत. हा रणगाडा हलक्या प्रतीच्या स्टीलपासून बनवण्यात आला असल्याची चर्चा आहे. त्याशिवाय याकामी भ्रष्टाचार झाला असल्याचे म्हटले जात आहे. या एका टँकमुळे आता चीनच्या पीपल्स लिबरेशन आर्मीचे शस्त्र, उपकरणे याच्या दर्जावर प्रश्न निर्माण होत आहे.

करोनाशी जगभरातील देश दोन हात करत असताना मलेशियात करोनाचा नवीन प्रकार आढळला होता. हा विषाणू D614G म्हणून ओळखला जातो. मलेशियाच्या आरोग्य विभागाने केलेल्या दाव्यानुसार या नव्या विषाणूच्या संसर्गाचा वेग १० पट अधिक आहे. मात्र, मलेशियाच्या या दाव्यावर जगभरातील संशोधकांनी प्रश्न, शंका उपस्थित केली आहे.

करोना विषाणूच्या नव्या प्रकारावर अनेकांनी प्रश्न उपस्थित करत असा विषाणू नसल्याचा दावा काही संशोधकांनी केला आहे. सिंगापूरच्या शास्त्रज्ञांच्या मते, हा विषाणू १० पट अधिक वेगाने संसर्ग फैलावतो या दाव्याला आधार नाही. करोना विषाणूचा D614G हा प्रकार याआधीपासून सिंगापूरमध्ये आहे. त्याशिवाय सध्या विकसित होत असलेल्या लशीवर या स्ट्रेनचा काहीही फरक पडणार नाही. D614G प्रकार हा फिलीपाइन्समध्येही आढळला असल्याचे त्यांनी सांगितले.

ड्युक-एनयूएस स्कूलमधील संसर्गजन्य आजाराचे तज्ञ वांग लिंफा यांनी 'द स्ट्रेच टाइम्स' ला सांगितले की, अशा प्रकारचा कोणताही वैज्ञानिक पुरावा नाही. ज्या आधारे करोनाचा D614G हा १० पट अधिक वेगाने संसर्ग फैलावू शकतो. प्रा. ओई इंग इओंग यांनी सांगितले की, या प्रकाराच्या विषाणूचा लशीवर कोणताही परिणाम नाही. विकसित करण्यात येत असलेल्या लशीतून निर्माण होणाऱ्या अॅण्टीबॉडी करोनाच्या स्पाइक प्रोटीनला अटकाव होणार आहे.

संसर्गजन्य रोगांचे आणखी एक तज्ञ हसू लियांग यांनी सांगितले की, विषाणूचा हा नवीन प्रकार फेब्रुवारीपासून जगभरात आढळला आहे. सिंगापूरमध्ये फेब्रुवारी ते जुलैपर्यंत या करोनाचे १०० रुग्ण आढळले. फार कमीजणांमध्ये या विषाणूची बाधा झाली असल्याचे समोर आले आहे. त्यामुळे D614G या विषाणूमुळे हजारोजण बाधित झालेत असे म्हणणे चुकीचे ठरेल असेही त्यांनी म्हटले.

समुद्रात बुडत असणाऱ्या दोन महिलांचे प्राण पोर्तुगालच्या ७१ वर्षीय राष्ट्रपतींनी वाचवले. अलगर्व बीचवर ही घटना घडली. राष्ट्रपतींनी दाखवलेल्या प्रसंगावधानाचे सध्या कौतुक होत असून या घटनेचा व्हिडिओ व्हायरल होत आहे. या मुलींची छोटी नौका अचानकपणे उलटली. त्यानंतर प्राण वाचवण्यासाठी त्या धडपड करत होत्या.

पोतुर्गालचे राष्ट्रपती मार्सेलो रेबेलो डी सूसा (Marcelo Rebelo De Sousa) हे सध्या सुट्टीवर आहेत. देशाच्या पर्यटन व्यवसायाला चालना मिळावी यासाठी त्यांनी पर्यटन सुरू केले आहे. राष्ट्रपती मार्सेलो रेबेलो डी सूसा (Marcelo Rebelo De Sousa)यांनी सांगितले की, या महिला समुद्रात अडकल्या होत्या. समुद्राच्या उंच लाटा उसळत होत्या. त्यातच त्यांची नौका उलटली. प्राण वाचवण्यासाठी त्यांची धडपड सुरू होती. या धडपडीत त्यांच्या पोटात मोठ्या प्रमाणावर समुद्राचे पाणी गेले. समुद्राचे पाणी पोटात गेल्यामुळे आणि उसळलेल्या लाटांमुळे या महिलांना पोहण्यास अडचण येत होती.

या महिलांनी बचावासाठी हाका मारण्यास सुरुवात केली. त्यावेळी किनाऱ्याजवळ असलेल्या राष्ट्रपतींनी तात्काळ समुद्रात उडी मारली आणि या महिलांजवळ पोहचले. त्याच वेळी जेट स्कीने आणखी एक व्यक्ती त्यांच्याजवळ पोहचला. त्यांनंतर या सर्वांनी या महिलांना समुद्रात बाहेर काढले.

राष्ट्रपतींनी घटनास्थळी जेट स्कीने तात्काळ पोहचणाऱ्या व्यक्तीचे कौतुक करत देशप्रेमी असल्याचे म्हटले आहे. त्याशिवाय भविष्यात नौका घेऊन समुद्रात जाताना अधिक सतर्क राहण्याचा सल्ला राष्ट्रपतींनी त्या महिलांना दिला. राष्ट्रपतींना हृदयविकार आहे. तरीदेखील त्यांनी बुडणाऱ्या महिलांचे प्राण वाचवले.

क्वालालंपूर: जगभरात करोनाच्या संसर्गाने थैमान घातले असून संसर्गाला अटकाव करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. करोनाबाधितांची संख्या दिवसेंदिवस वाढत असताना आता चिंता वाढणारे वृ्त्त समोर आले आहे. करोनाच्या संसर्गाचा नवा प्रकार समोर आला आहे. या प्रकारातील विषाणू तब्बल १० पट अधिक वेगाने पसरत असल्याचे समोर आले आहे. या करोनाची सुरुवात मलेशियातील एका रेस्टोरंटच्या मालकापासून सुरू झाल्याचे म्हटले जात आहे. भारतातून पुन्हा मलेशियात गेल्यानंतर या मालकाने १४ दिवसांचा क्वारंटाइनची मुदत पूर्ण केली नाही. जुलै महिन्यात हा बाधित आढळला होता.

भारतीय वंशाच्या या रेस्टोरंट मालकाला आता क्वारंटाइन नियम तोडल्याबद्दल पाच महिन्यांची शिक्षा दंड ठोठावण्यात आला आहे. या नव्या करोनाची बाधा फिलीपाइन्समधून पुन्हा मलेशियात येणाऱ्या एका गटातही झाल्याचे समजते. यातील ४५ जणांपैकी तीन जणांना या नव्या प्रकाराच्या करोनाची लागण झाली आहे. अमेरिकेचे मुख्य आरोग्य सल्लागार डॉ. फौसी यांनी सांगितले की, या करोनाचा प्रसार अधिक वेगाने होण्याची दाट शक्यता आहे.

मलेशियाच्या आरोग्य विभागाचे संचालक जनरल नूर हिशाम अब्दुला यांनी सांगितले की, करोनाच्या नव्या म्यूटेशनचे गंभीर परिणाम समोर येऊ शकतात. त्यामुळे आतापर्यंत लस बनवण्यासाठी घेतलेली मेहनत आणि खर्च वाया जाण्याची शक्यता आहे. नवीन म्युटेशन डी६१४जी या प्रकारातील आहे.

बीजिंग: लडाखमध्ये प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषा (LAC)ओलांडून भारताच्या हद्दीत घुसखोरी करणारे चिनी सैन्य अद्यापही मागे हटण्यास तयार नाही. एकीकडे भारतासोबत सुरू असलेला तणाव कमी करण्याचा प्रयत्न करत असलेल्याची टिमकी वाजवणाऱ्या चिनी सैन्याने आता लडाखमधील पँगोग त्सो आणि गोगरा-हॉट स्प्रिंग भागात फायबर ऑप्टिक केबल लाइन टाकण्यास सुरुवात केली आहे.

ओपन इंटेलिजेंस सोर्स detresfa ने भारतीय माध्यमांच्या हवाल्याने दिलेल्या वृत्तानुसार सांगितले की, चीनच्या पीपल्स लिबरेशन आर्मीने पँगोग त्सो आणि गोगरा-हॉट स्प्रिंग भागात फायबर ऑप्टिकल केबल टाकण्याचे काम सुरू केले आहे. detresfa या भागातील काही सॅटेलाइट छायाचित्रेही समोर आणली आहेत. लडाख आणि अक्साइ चीन भागातील चिनी सैन्याची संख्या कमी झाली असली तरी १५९७ किमी अंतरावर त्यांची सैन्य अद्यापही असून मागे हटलेले नाही. लडाखमध्ये चिनी सैन्याच्या या हालचालींना चीनच्या केंद्रीय सैन्य आयोगाकडून परवानगी मिळाली आहे. हा विभाग राष्ट्रपती शी जिनपिंग यांच्या अखत्यारीत येतो.

चीनकडून सातत्याने शांतता आणि स्थिरता यावर भाष्य करण्यात येते. मात्र, प्रत्यक्षात त्यांची कृती वेगळीच असल्याचेही समोर आले आहे. भारतीय सैन्याने पँगोग त्सोमधील जुने प्रशासनिक तळ हटवण्याची मागणी चीनने केली आहे. इतकंच नव्हे तर, कुगरंगमधील डोंगराळ भागातून भारतीय सैन्याला माघार घेण्यास चीनकडून सांगण्यात आले आहे.

सीमावादामुळे भारत आणि नेपाळच्या मैत्रीपूर्ण संबंधामध्ये तणाव निर्माण झाला आहे. या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर भारत आणि नेपाळमध्ये राजनयिक पातळीवर चर्चा होणार आहे. नेपाळ- भारतमधील ओवरसाईट मॅकन्झिमची ही आठवी बैठक असून दोन्ही देशांमधील तणाव निवळण्याच्यादृष्टीने ही बैठक महत्त्वाची समजली जात आहे.

या बैठकीच्या विषयपत्रिकेवर सीमावादाचा समावेश नसला तरी मागील काही महिन्यांमध्ये दोन्ही देशांमध्ये निर्माण झालेला तणाव या बैठकीच्या माध्यमातून कमी होऊ शकतो. या बैठकीत भारताने नेपाळला विविध विकासकामांसाठी दिलेल्या निधीवर चर्चा होणार आहे. या बैठकीत नेपाळच्यावतीने शंकरदास बैरागी प्रतिनिधीत्व करणार आहेत. तर, भारताकडून नेपाळमधील राजदूत विनय मोहन क्वात्रा सहभागी होणार आहेत. ओवरसाईट मॅकन्झिमची बैठक सप्टेंबर २०१६ मध्ये तत्कालीन पंतप्रधान पुष्प कमल दहल यांच्या भारत दौऱ्यानंतर निश्चित करण्यात आली. दोन्ही देशांत निश्चित करण्यात आलेले प्रकल्प आणि हे वेळेत प्रकल्प पूर्ण होण्याबाबत पावले उचलण्यासाठी या बैठकीचे आयोजन करण्यात येते.

भारतासोबतच्या चर्चेला नेपाळ उत्सुक
भारतासोबतच्या संबंधांमध्ये तणाव निर्माण झाल्यानंतर नेपाळ आता चर्चेसाठी उत्सुक आहे. यामध्ये भारतीय स्वतंत्रता दिनानिमित्त नेपाळचे पंतप्रधान केपी शर्मा ओली यांनी भारताचे पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांना दूरध्वनीवरून शुभेच्छा दिल्या होत्या. भारत आणि नेपाळ यांच्यात घनिष्ट संबंध असून चर्चेद्वारे समस्यांचे निराकरण करू शकतो असे भारतातील नेपाळच्या राजदूतांनी म्हटले. दोन्ही देश एका योग्य वेळी बैठक घेतील आणि कोणत्याही समस्येवर तोडगा काढू शकतात, असेही त्यांनी म्हटले.

न्यूयॉर्क: करोनाच्या आजारावर उपचार करण्याच्या दृष्टीने शास्त्रज्ञांना मोठे महत्त्वाचे यश मिळाले आहे. 'कोव्हिड-१९'वर उपचार करण्यासाठी शास्त्रज्ञांनी शंभराहून अधिक संभाव्य औषधे शोधून काढली आहेत. 'मशिन लर्निंग'चा वापर करून ही औषधे शोधण्यात आली असून करोनावर ती प्रभावी ठरतील, असा दावा शास्त्रज्ञांनी केला आहे. या शास्त्रज्ञांच्या या पथका एका भारतीय वंशाच्या शास्त्रज्ञाचाही समावेश आहे.

कॅलिफोर्निया विद्यापीठातील संशोधक आनंदशंकर रे यांनी सांगितले, की आम्ही एका औषधाची निर्मिती केली. 'ड्रग डिस्कव्हरी पाइपलाइन' असा शब्दप्रयोग त्यांनी यासाठी वापरला. कम्प्युटरच्या साह्याने आर्टिफिशिअल इंटेलिजन्सचा वापर करून ही औषधे शोधण्यात आली आहेत. जर्नल हेलियोन यामध्ये हे संशोधन प्रसिद्ध झाले आहे. रे म्हणाले, 'आम्ही विकसित केलेली 'ड्रग कँडिडेट पाइपलाइन' खूप महत्त्वाची असून 'कोव्हिड-१९'वर उपचार करण्यासाठी नवीन औषधे शोधण्यासाठीचे हे पहिले पाऊल आहे. विषाणूचा शरीरात प्रवेश आणि तेथे त्याची होणारी वाढ रोखण्यासाठी सध्याची औषधे काम करीत असून त्यांना सर्वाधिक प्राधान्य आहे. 'कोव्हिड'वर उपचारांसाठी आणखी औषधांची गरज असून 'डिस्कव्हरी पाइपलाइन'चा त्यासाठी उपयोग होईल.'

बीजिंग: भारतासोबत वाढत्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर चीनच्या हालचालींना वेग आला आहे. चीनने हिमालयात आपल्या नव्या शस्त्रांची चाचणी करणे सुरू केले आहे. चीनने केलेल्या या युद्धसरावात १२२ एमएमच्या वाहनांवर ठेवण्यात येणारी Howitzer आणि HJ-10 अॅण्टी टँक क्षेपणास्त्रांची चाचणी चीनच्या पीपल्स लिबरेशन आर्मीच्या तिबेट मिलिट्री भागात मागील महिन्यात केली असल्याचे वृत्त सीसीटीव्ही वृत्तवाहिनीने दिले आहे.

हा युद्धसराव ४६०० मीटर उंचीवर (जवळपास १५ हजार फूटांवर) करण्यात आली. यामध्ये Howitzer चा वापर करण्यात आला. पहिल्यांदाच या भागात चाचणी केली असल्याचे म्हटले जात आहे. यावेळी सहाऐवजी चार चाकी वाहनांवर Howitzer ला ठेवण्यात आले होते. तर, ट्रकवर असलेल्या HJ-10 मध्येही चारऐवजी दोन लाँचर ठेवण्यात आले होते. हिमालयातील डोंगराळ भागात ही शस्त्रे ने-आण करण्यासाठी त्यामध्ये बदल करण्यात आले असल्याचे म्हटले जात आहे. गरज भासल्यास या शस्त्रांना हवाई दलामार्फतही पाठवण्यात येऊ शकतात.

डोंगराळ भागात Howitzer चा वापर फायदेशीर ठरू शकतो. Howitzer लांब पल्ल्यावरील प्रोजेक्टाइल फायर करू शकतात. तर, दुसरीकडे HJ-10 १० किमी अंतरावरील मोठ्या ठिकाणांवरही लक्ष्य साधू शकतो. त्याशिवाय लहान नौका, हेलिकॉप्टरवरदेखील निशाणा साधून त्यांना उडवून लावू शकतात. लडाखमध्ये चीनकडून सातत्याने सैन्याची जमावजमव केली जात असून शस्त्रे तैनातही केली असल्याचे वृत्त आहे.

तर, दुसरीकडे दक्षिण चीन समुद्रात वाढत्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर चीनने या भागातही आपले नौदल आणि सैन्य सज्ज ठेवले आहे. मागील काही दिवसांपासून युद्ध सराव करण्यात येत आहे. या सरावाचे काही व्हिडिओ चीन सरकारचे माध्यम ग्लोबल टाइम्सने ट्विट केले आहे. यामध्ये अॅण्टी एअरक्राफ्ट शूटींग ड्रीलही करण्यात आली. त्याशिवाय आपत्कालीन स्थितीत कमी वेळेत सैन्य सज्ज करण्यावरही भर देण्यात येत आहे.

बीजिंग: लडाखमध्ये चीनसोबत सुरू असलेल्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर भारताची चिंता आता आणखी वाढणार असल्याची चिन्हे आहेत. चीनचे राष्ट्रपती शी जिनपिंग लवकरच पाकिस्तानच्या दौऱ्यावर जाणार आहेत. या दौऱ्यात दोन्ही देशांमध्ये संरक्षणविषयक महत्त्वाचे करार होणार असल्याची दाट शक्यता आहे.

चीनच्या राष्ट्रपतीपदाची सूत्रे सांभाळल्यानंतर शी जिनपिंग यांचा हा पाकिस्तानचा दुसरा दौरा आहे. याआधी त्यांनी २०१५ मध्ये इस्लामाबादचा दौरा केला होता. जिनपिंग यांचा पाकिस्तान दौरा याआधी जूनमध्ये होणार होता. मात्र, करोना महासाथीच्या आजाराच्या पार्श्वभूमीवर हा दौरा रद्द करण्यात आला. तर, २०२० मध्ये आता चीनच्या राष्ट्रपतींचा हा दुसरा परदेश दौरा असणार आहे. याआधी त्यांनी जानेवारीत म्यानमारचा दौरा केला होता.

चीनच्या माध्यमांनी दिलेल्या वृत्तानुसार, जिनपिंग यांच्या पाकिस्तान दौऱ्याबाबत अद्यापही तारखा जाहीर झाल्या नाहीत. या दौऱ्याला ऐतिहासिक करण्यासाठी पाकिस्तान आणि चिनी अधिकाऱ्यांचे प्रयत्न सुरू असून सातत्याने बैठकांचे आयोजन केले जात आहे. जिनपिंग यांनी २०१५ मध्ये पाकिस्तानचा दौरा केला होता. त्यावेळी चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडोरच्या अनुषंगाने ५१ करारावर स्वाक्षरी करण्यात आली होती.

बीजिंग: आक्रमक विस्तारवादाच्या धोरणांमुळे भारतासह, अमेरिकेसोबत चीनचे संबंध तणावाचे झाले आहेत. चीनच्या आगळकीला उत्तर देण्यासाठी भारताने चिनी कंपन्यांच्या अॅप्सवर बंदी आणली. भारताच्या पावलावर पाऊल टाकत अमेरिकेनेही चिनी कंपनीचे अॅप असलेल्या टिकटॉकवर बंदी आणण्यासाठी प्रयत्न सुरू केले आहेत. मात्र, टिकटॉकवर बंदीचा इशारा म्हणजे दिवसाढवळ्या दरोडा टाकण्यासारखे असल्याची टीका चीनने केली आहे.

चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाच्या प्रवक्त्या हुआ चुनयिंग यांनी अमेरिकेच्या टिकटॉक बंदीबाबत भाष्य केले. अमेरिकेने टिकटॉक अॅप अमेरिकन कंपनीला विकण्यास सांगितले असून तसे न केल्यास अमेरिकेत कायमस्वरूपी बंदी आणण्यात येणार असल्याचे सांगितले आहे. अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी त्याबाबतच्या आदेशावर स्वाक्षरीही केली आहे. हुआ चुनयिंग यांनी सांगितले की, कोणत्याही ठोस पुराव्याशिवाय अमेरिका टिकटॉकला दोषी ठरवत असून ४५ दिवसांच्या आत अमेरिकन कंपनीला अॅप विकण्यास सांगत आहे. अमेरिकेने उचलले पाऊल हे अपमानजनक आहे. अमेरिकेच्या अशाच खोट्या प्रचाराचा फटका हुवैई कंपनीला बसला असल्याचे त्यांनी सांगितले. अमेरिकेने टिकटॉक कंपनीवर बंदीची धमकी देणे हे एखाद्या गँगस्टरच्या तर्कासारखे असून दिवसाढवळ्या दरोडा टाकण्याचा प्रकार असल्याचे त्यांनी सांगितले.

 

टोकियो: चीनच्या घुसखोरीने त्रस्त झालेल्या जपानने आता निर्वाणीचा इशारा दिला आहे. चीनच्या नौकांनी घुसखोरी केल्यास थेट लष्करी करणार असल्याचा इशारा जपानने दिला आहे. पूर्व चीन समुद्रात चीनच्या मासेमारी नौका सातत्याने जपानच्या हद्दीत प्रवेश करत आहेत. त्यावरून जपान नाराज आहे. मासेमारी नौकांच्या घुसखोरीला चीनची फूस असल्याचा जपानला संशय आहे.

दिआओयू बेट समूहावर जपानचे नियंत्रण आहे. चीन आणि जपानमध्ये या बेटांच्या ताब्यावरून वाद सुरू आहे. जपानच्या हद्दीत घुसखोरी करणाऱ्या मासेमारी नौकांची संख्या १०० च्या आसपास असते आणि सगळ्यांना चिनी तटरक्षक दलाचा पाठिंबा मिळाल्यास जपानी सैन्याला त्यांना प्रत्युत्तर देणे कठीण होऊ शकते, असे तज्ञांनी म्हटले आहे. तर, दुसऱ्या बाजूला चीनने आपली हेकेखोरी कायम ठेवली आहे. दिआओयू बेट समूह हा आमच्याच देशाचा भाग असून चिनी मच्छिमारांना अटकाव, बंदी घालू शकत नसल्याचे चीनने म्हटले आहे.

जपानचे संरक्षण मंत्री तारो कोनो यांनी सांगितले की, जपानी सैन्य चीनच्या घुसखोरीला प्रत्युत्तर देण्यास सज्ज आहे. याआधी २०१६ मध्ये ७२ चिनी जहाज आणि चीन कोस्ट गार्डच्या २८ जहाजांनी चार दिवस या भागात घुसखोरी केली होती. मागील १८ महिन्यांपासून चिनी कोस्टगार्ड जहाजांकडून सातत्याने जपानवर दबाव निर्माण केला जात आहे. जपानने सातत्याने सतर्क केल्यानंतरही चिनी जहाज १११ दिवस सातत्याने या भागात घुसखोरी करत होते.

 

वॉशिंग्टन: जगभरात हाहाकार माजवणाऱ्या करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी जगभरातून प्रयत्न होत आहेत. करोनाच्या आजाराविरोधात लढण्यासाठी लस विकसित करण्याचेही प्रयत्न सुरू आहेत. रशियाने करोनावर लस सापडली असल्याची घोषणा केली आहे. तर, दुसरीकडे चीन, ब्रिटन आणि अमेरिकेच्या कंपन्यांकडूनही सुरू असलेली लस चाचणी अंतिम टप्प्यात आली आहे. जगभरात लस स्पर्धा तीव्र झाली असून आतापर्यंत पाच अब्ज लशींची नोंदणी करण्यात आली आहे.

विविध कंपन्यांच्या लशीची अंतिम टप्प्यातील चाचणी सुरू असताना जवळपास ५. ६ अब्जाहून अधिक लशीची नोंदणी करण्यात आली आहे. पाश्चिमात्य देशांच्या प्रयोगशाळेत विकसित होत असलेल्या लशीची पहिल्या खेपेची बहुतांश नोंदणी अमेरिकेने केली आहे. सध्या जगभरात सहा लशींची चाचणी अंतिम टप्प्यात आली आहे. तर, मंगळवारी रशियाचे राष्ट्रपती व्लादिमीर पुतीन यांनी करोनाला अटकाव करणाऱ्या 'स्पुटनिक व्ही' (Sputnik V) या रशियन लशीची घोषणा केली.

करोनाला अटकाव करण्यासाठी लस विकसित करण्यासाठी कंपन्यांना आर्थिक मदतही मिळत आहे. या वर्षाखेरीस अथवा पुढील वर्षी लशीचे उत्पादन सुरू होणार असल्याचा अंदाज व्यक्त केला जात आहे. करोना लस मोठ्या प्रमाणावर खरेदी करणाऱ्यांमध्ये अमेरिका, ब्रिटन, युरोपीयन महासंघ आणि जपान यांचा समावेश आहे. यामध्ये युरोपीयन महासंघाच्या ७० कोटी, ब्रिटन २५ कोटी, जपान ४९ कोटी डोसचा समावेश आहे. तर, रशियाकडे २० देशांनी एक अब्ज डोसची मागणी नोंदवली आहे. यामध्ये भारताचाही समावेश आहे. त्याशिवाय भारतातही 'स्पुटनिक व्ही' (Sputnik V) या लशीच्या उत्पादनाबाबतही चर्चा सुरू आहे. भारतात सीरम इन्स्टिट्यूटच्यावतीने सध्या ऑक्सफर्ड विद्यापीठ विकसित करत असलेल्या लशीचे उत्पादन करण्यात येत आहे. अमेरिकेने आपल्याच देशात विकसित होत असलेल्या मॉडर्ना इंक, जॉन्सन अॅण्ड जॉन्सन यासारख्या कंपन्यांकडे कोट्यवधी लशी मागणी नोंदवली आहे.
 

जिनिव्हा: संपूर्ण जगाला वेठील धरणाऱ्या करोनाबाबत धक्कादायक आकडेवारी येत आहे. मागील काही दिवसांमध्ये भारतात करोनाबाधितांची संख्या सातत्याने वाढत असल्याने चिंता व्यक्त केली जात आहे. आता भारतात मृतांची संख्या वाढत असल्याचे समोर येत आहे. एकाच दिवसांत सर्वाधिक मृतांची संख्या भारतात नोंदवण्यात आली आहे. तर, अमेरिकेत दुसऱ्या क्रमाकांचे सर्वाधिक मृत्यू झाले आहेत. जागतिक आरोग्य संघटनेने दिलेल्या माहितीत ही बाब समोर आली आहे.

मंगळवारी ११ ऑगस्ट रोजी जगात एकाच दिवसात सर्वाधिक करोनाबाधितांचे मृत्यू हे भारतात नोंदवण्यात आले. जागतिक आरोग्य संघटनेने दिलेल्या माहितीनुसार, ११ ऑगस्ट रोजी ८७१ जणांचा मृत्यू नोंदवण्यात आला. तर, अमेरिकेत मंगळवारी ५५८ करोनाबाधितांचा मृत्यू झाला. ब्राझीलमध्ये ५७२ बाधितांच्या मृत्यूची नोंद करण्यात आली. त्याशिवाय मंगळवारी भारतात ५३ हजार ६०१ नवीन करोनाबाधित आढळले. तर, अमेरिकेत ४७ हजार ९६४ आणि ब्राझीलमध्ये २३ हजार १० नवीन करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली होती.

जागतिक आरोग्य संघटनेच्या माहितीनुसार, ४ ऑगस्ट ते ११ ऑगस्ट दरम्यान भारतात इतर देशांच्या तुलनेत सर्वाधिक करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली. मागील आठ दिवसांत भारतात सातत्याने करोनाबाधितांची संख्या वाढत आहे. चार ऑगस्ट रोजी अमेरिकेत ४७ हजार १८३ करोनाबाधित आढळले तर भारतात ५२ हजार बाधित आढळले होते. पाच ऑगस्ट रोजी अमेरिकेत ४९ हजार १५१ आणि ब्राझीलमध्ये १६ हजार ६४१ बाधित आढळले. तर, भारतात ५२ हजार ५०९ करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली. सोमवारी १० ऑगस्ट रोजीदेखील अमेरिकेत ५३ हजार ८९३ करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली होती. ब्राझीलमध्ये ४९ हजार ९७० करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली. भारतात ६२ हजार ६४ नवीन करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली.

रशियाने करोनाच्या संसर्गावर मात करणारी लस शोधली असल्याची घोषणा केल्यानंतर आता लस स्पर्धा आणखी तीव्र होणार असल्याची चिन्हे आहेत. रशियाने अमेरिका, चीन, ब्रिटनला मात देत लस शोधली असल्याची घोषणा केली आहे. तर, दुसरीकडे आता रशियानंतर चीनकडे जगाचे लक्ष लागले आहे. चीनच्या एक नव्हे तर तीन लशी चाचणीच्या तिसऱ्या टप्प्यात दाखल आहेत. त्यातील CanSino ही लस आपल्या सैनिकांना देण्यास चीनने सुरुवात केली असल्याचे वृ्त्त समोर आले आहे. चीनने विकसित केलेल्या या तिन्ही लशी चाचणीच्या महत्त्वाच्या टप्प्यात आहेत. त्यामुळे रशियानंतर चीनकडून लस शोधली असल्याची घोषणा होण्याची दाट शक्यता आहे. मात्र, या लशींसमोर काही आव्हाने आहेत.

चिनी कंपनी CanSino Biologicsचे सुरुवातीच्या टप्प्यातील चाचणीचे परिणाम अतिशय चांगले आहेत. ही लस सर्दीच्या विषाणूंपासून बनवण्यात आली आहे. आता ही लस चाचणीच्या अंतिम टप्प्यात आली आहे. सौदी अरेबियाने चाचणीसाठी ही लस पाच हजार जणांना देण्याचे नियोजन केले आहे. ही चाचणी रियाध, मक्का आणि दम्माम या ठिकाणी होणार आहे. CanSino ला मर्यादित वापरासाठी परवानगी देण्यात आली आहे.

बीजिंगच्या Sinovacच्या चाचणीचे सुरुवातीचे परिणामदेखील चांगले आले होते. या लशीची मागील महिन्यात ब्राझीलमध्ये तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणीची सुरुवात झाली आहे. Sinovacने चाचणीसाठी ब्राझीलच्या बुटंटन इन्स्टिट्यूटसोबत करार केला आहे. या लस चाचणीच्या पहिल्या व दुसऱ्या टप्प्यातील चाचणीचे परिणाम सकारात्मक आले होते. या लसीमुळे रोगप्रतिकारक शक्ती वाढत असल्याचा दावा कंपनी केला आहे. या लसीच्या चाचणीसाठी १८ ते ५९ दरम्यानच्या ७४३ आरोग्य स्वयंसेवकांनी आपली नोंदणी केली होती. पहिल्या टप्प्यात १४३ जणांचा पहिल्या टप्प्यात समावेश होता. तर, दुसऱ्या टप्प्यात ६०० जणांवर चाचणी करण्यात आली. या चाचणीत सहभागी झालेल्या स्वयंसेवकांना दोन इंजेक्शन देण्यात आले होते. त्यांच्यावर १४ दिवसांपर्यंत कोणतेही दुष्पपरिणाम दिसले नाहीत.

 करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी लस विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. या लशींकडे जगाचे लक्ष लागले आहे. करोनाची लस विकसित झाल्यानंतर पहिल्यांदा आरोग्य कर्मचाऱ्यांना लस देण्याचा विचार अनेक देशांची सरकार करत आहेत. तर, दुसरीकडे चीनने आपल्या सैनिकांना करोना प्रतिबंधक लस देणे सुरू केले आहे. पीपल्स लिबरेशन आर्मीच्या मदतीने विकसित केलेली लस सैनिकांना देण्यात येत आहे. विशेष म्हणजे या लशीची तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू आहे.

'फायनान्शियल टाइम्स'ने दिलेल्या वृत्तानुसार, चीनमध्ये नागरीक व सैन्यासाठी बनवण्यात आलेल्या तंत्रज्ञानाचा वापर एकमेकांसाठी करणे ही सामान्य बाब आहे. राष्ट्रपती शी जिनपिंग यांच्या कार्यकाळात याला अधिक महत्त्व देण्यात आले आहे. करोना संसर्गाच्या काळात सैन्य व नागरीक यांच्यात संयुक्तपणे महासाथीच्या आजाराविरोधात अधिक कार्यक्रम घेण्यात आले. कॅनबरामधील चायना पॉलिसी सेंटरचे संचालक अॅडम नी यांनी सांगितले की, चिनी सैन्यातील जवानांमध्ये जैविक आणि संसर्गजन्य आजाराशी लढण्याची क्षमता आहे. त्याचाच फायदा चीनचे सत्ताधारी घेत आहेत. एका बाजूला तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू असताना आता दुसऱ्या बाजूला चीनने सरसकट लष्करातील जवानांना लस देण्यास सुरुवात केली आहे.

रियो डी जानीरो: करोनाचे संकट अद्याप जगावरून गेले नाही. रुग्णांची संख्या रोज वाढत चालली आहे. अशाच धोका असताना देखील क्रीडा स्पर्धांना सुरूवात झाली. सुरक्षिततेची काळजी घेऊन आणि जैव वातावरणाची निर्मिती करून अनेक क्रीडा स्पर्धा सुरू झाल्या. अशाच एका स्पर्धेत एकाच संघातील १० खेळाडूांची करोना चाचणी पॉझिटिव्ह आल्याचा धक्कादाय प्रकार समोर आला आहे.

ब्राझीलमधील एका फुटबॉल संघातील १० खेळाडूंना करोनाची लागण झाली आहे. गोइस या फुटबॉल संघातील १० खेळाडूंची करोना चाचणी पॉझिटिव्ह आली. यामुळे अखेरच्या क्षणी सामना स्थगित करावा लागला.

गोइस आणि साओ पाउलो एफसी यांच्यात मॅच होणार होती. या सामन्यासाठी स्टेडियमवर प्रेक्षकांना परवानगी नाकारली होती. ब्राझीलमधील फुटबॉल सिझनच्या पहिल्या आठवड्यातील अखेरचा सामना होता.

झीलमध्ये या सीझनमधील फुटबॉलची सुरुवात शनिवारी झाली. करोना व्हायरसमुळे गेल्या तीन महिन्यांपासून फुटबॉल सामना झाला नव्हता. CBFने निश्चित केलेल्या नियमानुसार प्रत्येक खेळाडूची मॅचच्या ७२ तास आधी करोना चाचणी घेणे बंधनकारक होते.

वॉशिंग्टन: जागतिक महासत्ता असणारी अमेरिका करोनाच्या थैमानासमोर हतबल झाल्याची परिस्थिती आहे. करोना संसर्गाचे मुख्य केंद्र झालेल्या अमेरिकेत बाधितांच्या संख्येने ५० लाखांचा आकडा ओलांडला आहे. रविवारी अमेरिकेत ५० लाख करोनाबाधितांची संख्या नोंदवण्यात आली. जगभरातील देशांमध्ये ही सर्वाधिक बाधितांची संख्या आहे.

रविवारी अमेरिकेत एकाच दिवसांत ४८ हजार नवीन करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली. अमेरिकन आरोग्य अधिकाऱ्यांनी सांगितले की, करोनाची कमी लक्षणे असलेल्या रुग्णांची संख्या मोठ्या प्रमाणावर आहे. मात्र, या रुग्णांची ओळख न पटल्यामुळे अमेरिकेत करोनाबाधितांची संख्या वाढत आहे. अमेरिकेत ही संख्या मोठी असून जवळपास पाच कोटी नागरिकांना करोनाची सौम्य लक्षणे असू शकतात अशी शक्यताही अधिकाऱ्यांनी व्यक्त केली. अमेरिकेत दरदिवशी सरासरी ५० हजार नवीन करोनाबाधित आढळत आहेत. तर, दुसरीकडे युरोपमध्ये सध्या करोनावर नियंत्रण मिळवले असल्याचे समोर आले आहे. जागतिक महासत्ता असणाऱ्या अमेरिकेत करोनाबाधितांची संख्या वाढत असल्यामुळे जगभरात आश्चर्य व्यक्त करण्यात येत आहे.

इस्लामाबाद: भारताविरोधात काड्या करणाऱ्या पाकिस्तानला आता जागतिक बँकेनेही दणका दिला आहे. भारत आणि पाकिस्तानमध्ये सुरू असलेल्या पाणी वाटप मुद्यावर मध्यस्थी करण्यास जागतिक बँकेने नकार दिला आहे. दोन्ही देशांच्या वादावर एखाद्या तटस्थ तज्ञांस अथवा न्यायलयीन मध्यस्था नियुक्तीवर विचार करायला हवा, असेही जागतिक बँकेने पाकिस्तानला सुनावले.

इस्लामाबादमध्ये आपल्या कार्यकाळाची पाच वर्षे पूर्ण झाल्याबद्दल जागतिक बँकेचे पाकिस्तानबाबतचे माजी संचालक पेटचमुथू इलंगोव्हन यांनी सांगितले की, पाणी वाटपाच्या मुद्यावर काम करण्यासाठी भारत आणि पाकिस्तान या दोन्ही देशांना एकत्रपणे काम करण्याची आवश्यकता आहे. पाकिस्तानने भारताच्या दोन जल विद्युत प्रकल्पांना घेऊन कोर्ट ऑफ ऑर्बिट्रेशन (सीओए) यांची नियुक्ती करण्यासाठी जागतिक बँकेला गळ घातली होती.

भारताच्या ३३० मेगावॅट क्षमतेच्या किशनगंगा जलविद्युत प्रकल्प आणि ८५० मेगावॅटच्या रातले जलविद्युत प्रकल्पावर पाकिस्तानला आक्षेप आहे. तर, जागतिक बँकेच्या नियमांनुसार, जम्मू-काश्मीरच्या विकासासाठी हे प्रकल्प सुरू केले असल्याचे भारताने म्हटले आहे.

 

वॉशिंग्टन: अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष असलात तरी चौकशी करण्यात येणार असल्याचे न्यूयॉर्क कोर्टाने स्पष्ट केले आहे. डोनाल्ड ट्रम्प यांच्यावर एका महिलेने बलात्काराचा आरोप केला आहे. कायद्यातील पळवाट शोधून ट्रम्प हे चौकशीापासून स्वत:चा बचाव करत असल्याचा आरोप करण्यात येत आहे.

डोनाल्ड ट्रम्प हे राष्ट्राध्यक्षपदावर आहेत. त्यामुळे त्यांच्यावर राज्य न्यायलयात खटला चालू शकत नाही. मात्र, कोर्टाने हा दावा फेटाळून लावला. मॅनहॅट्टनच्या न्या. वर्ना साँडर्स यांनी म्हटले की, राष्ट्राध्यक्षपदावर असल्यामुळे त्यांना या प्रकरणातून सवलत देता येणार नाही. साँडर्स यांनी म्हटले की, या निर्णयानंतरही ई जी कॅरोल यांना आपला खटला सुरू ठेवण्याची परवानगी मिळाली आहे. कॅरोल यांच्याकडून ट्रम्प यांच्या डीएनए चाचणीची मागणी करण्यात येत आहे. डोनाल्ड ट्रम्प यांनी १९९० च्या दशकात बलात्कार केल्याचा आरोप आहे. बलात्काराचा आरोप मागे घेण्यासाठी त्यांच्यावर दबावही टाकण्यात आला होता. त्यासाठी त्यांची मानहानीही करण्यात आले असल्याचा आरोप ट्रम्प यांच्यावर करण्यात आला आहे. पीडितेचे वकील रोबर्टा कपलान यांनी सांगितले की, डोनाल्ड ट्रम्प यांनी ई जीन कॅरोल यांची बदनामी केली असल्याचेही सिद्ध करण्यास तयार आहोत. कोर्टाच्या निर्णयाबाबत ट्रम्प यांच्या वकिलांनाही माहिती देण्यात आली आहे.

बैरूत: लेबनॉनची राजधानी बैरूतमधील बंदरात झालेल्या स्फोटातील मृतांची संख्या वाढली आहे. स्फोटामुळे बंदर आणि परिसरातील इमारती उद्धवस्त झाल्या आहेत. मातीच्या ढिगाऱ्यातून अनेकांना बाहेर काढण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. मृतांची संख्या १५४ वर पोहचली आहे. तर, दुसरीकडे लेबनॉनच्या राष्ट्रपतींनी या स्फोटामागे परकिय शक्तींचा हात असल्याचा संशय व्यक्त केला आहे. तर, संयुक्त राष्ट्रानेदेखील या प्रकरणाची स्वतंत्र चौकशी करण्याचे आवाहन केले आहे.

लेबनॉनचे राष्ट्रपती मायकेल आउन यांनी म्हटले की, स्फोटाच्या घटनेची चौकशी सुरू आहे. मात्र, अद्यापही याबाबतचे ठोस कारण समजू शकले नाही. या स्फोटामागे रॉकेट हल्ला, बॉम्बस्फोटासह देशाबाहेरील काही शक्तिंचा हात आहे का, याचीही चौकशी सुरू असल्याचे त्यांनी सांगितले. तर, दुसरीकडे देशात सरकार तीव्र विरोधालाही सामोरे जावे लागत आहे.बैरूत स्फोटाची घटना ही अक्षम्य दुर्लक्ष आणि भ्रष्टाचारामुळे घडली असल्याचा आरोप करण्यात येत आहे. या घटनेमुळे स्थानिक जनतेत मोठा रोष निर्माण झाला आहे.

चौकशीचे आवाहन
संयुक्त राष्ट्र संघाने या प्रकरणाची स्वतंत्र चौकशी करण्याचे आवाहन केले आहे. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्तालयाचे प्रवक्ते रुपर्ट कॉलविले यांनी आंतरराष्ट्रीय समुदायाला लेबनॉनच्या मदतीसाठी पुढे येण्याचे आवाहन केले आहे. लेबनॉनवर सामाजिक-आर्थिक संकट, कोविड-१९ आणि अमोनियम नायट्रेटच्या स्फोटामुळे मोठे संकट ओढावले आहे.

बीजिंग: लडाख आणि दक्षिण चीन समुद्रात आपली आक्रमक विस्तारवादी भूमिका घेणाऱ्या चीनने आता आणखी एका देशाच्या भूभागावर दावा ठोकला आहे. चीनने आता मध्य आशियातही विस्तारवादी भूमिका घेतली असून ताजिकिस्तानमधील पामीरच्या डोंगरांवर आपला दावा सांगण्यास सुरुवात केली आहे. त्यामुळे आता मध्य आशियातील गरीब देशांमध्ये चिंतेचे वातावरण वाढले आहे. चीन आणि ताजिकिस्तानमध्ये २०१० मध्ये एक करार झाला होता. त्यावेळी ताजिकिस्तानला पामीरमधील ११५८ किमीचा भाग चीनला द्यावा लागला होता.

चिनी इतिहासकार याओ लू ने यांनी चीनच्या सूत्रांच्या हवाल्याने दावा केली की, पूर्ण पामीरचा भाग चीनचा आहे आणि चीनला हा संपूर्ण भूभाग आपल्या ताब्यात घ्यायला हवा. चीनच्या सरकारी वृत्तमाध्यमांत हा लेख छापून आल्यानंतर ताजिकिस्तानच्या अधिकाऱ्यांनी चिंता व्यक्त केली आहे. चीनच्या दाव्यानंतर आता रशियाही अधिक सतर्क झाला आहे. रशियाच्या दृष्टीने मध्य आशियाचा भाग हा सामरीकदृष्ट्या महत्त्वाचा आहे.चीन ताजिकिस्तान-अफगाणिस्तान सीमेवर ताशकुर्गानजवळ एक विमानतळ उभारत आहे. त्यामुळे अधिकच चिंता व्यक्त केली जात आहे. चिनी इतिहासकारांनी आता चीनने आपला भूभाग पुन्हा ताब्यात घेण्याचे आवाहन सरकारला केले आहे. काही जमीन आपल्याला पुन्हा मिळाली असून काही अद्यापही शेजारच्या देशांकडे आहे. त्यामध्ये पामीरचाही प्राचीन भाग असून मागील १२८ वर्षांपासून जागतिक दबावामुळे चीनपासून वेगळा असल्याचेही चिनी अभ्यासकांनी म्हटले आहे.

लेबनानची राजधानी बैरूतमध्ये मंगळवारी दुपारच्या सुमारास भूकंप आल्यासारखी परिस्थिती होती. अनेक किलोमीटर अंतरावरील जमिनीवर कंपने जाणवत होती आणि नेमकं काय सुरू आहे, हे कळण्याच्या आतच दोन महाभयंकर स्फोटाने संपूर्ण शहराला आदरवून सोडले. बैरूतच्या आकाशात धुराचे लोळ होते तर दुसरीकडे गगनचुंबी इमारती क्षणार्धात जमिनदोस्त झाल्या होत्या. बैरूतमध्ये झालेल्या भीषण स्फोटामुळे फक्त लेबनानच नव्हे तर संपूर्ण जग हादरले होते. या स्फोटामुळे सगळ्या जगाला अमेरिकेने १९४५ मध्ये जपानमधील हिरोशिमामध्ये केलेल्या अणू बॉम्ब हल्ल्याची आठवण झाली. बैरूतच्या राज्यपालांनी दिलेल्या माहितीनुसार, या स्फोटामुळे जवळपास तीन लाख नागरीक बेघर झाले आहेत.

 

वॉशिंग्टन: अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प पु्न्हा एकदा फेसबुक आणि ट्विटरच्या निशाण्यावर आले आहेत. या दोन्ही सोशल मीडिया प्लॅटफॉर्मवरून डोनाल्ड ट्रम्प यांनी केलेल्या पोस्ट डिलीट करण्यात आल्या आहेत. करोना व्हायरसचा परिणाम लहान मुलांवर होत नसल्याचा दावा केला होता.

फेसबुककडून पहिल्यांदाच डोनाल्ड ट्रम्प यांच्या करोनाबाबतच्या पोस्टवर कारवाई करण्यात आली. ट्रम्प यांनी पोस्ट केलेला व्हिडिओ खोटे दावे करत असून त्यामध्ये कोणत्याही प्रकारचे तथ्य नाही. कोणत्याही व्यक्तीमध्ये करोनाशी पूर्णपणे लढण्याची क्षमता विकसित झाली नाही. त्यामुळे हा व्हिडिओ आमच्या नियमांविरोधात असल्यामुळे व्हिडिओ हटवला असल्याची माहिती फेसबुकच्या प्रवक्त्यांनी दिली. फेसबुकनंतर सायंकाळी ट्विटरने ट्रम्प यांचा व्हिडिओ हटवला.

बुधवारी सकाळी फॉक्स अॅण्ड फ्रेंड्सना दिलेल्या मुलाखतीत ट्रम्प यांनी म्हटले की, आता सगळ्याच शाळा पुन्हा सुरू करण्याची वेळ आली आहे. लहान मुलांमध्ये करोनाच्या संसर्गासोबत लढण्याची क्षमता असल्याचे त्यांनी म्हटले. जागतिक आरोग्य संघटना अथवा अमेरिकेकडूनही याबाबतही काही निर्देश जारी करण्यात आलेल्या नाहीत.

 

वॉशिंग्टन: जगभरात करोनाचे थैमान सुरू आहे. जवळपास २०० देशांमध्ये करोनाचा संसर्ग फैलावला आहे. जगभरात करोनाच्या संसर्गामुळे प्राण गमावलेल्यांची संख्या सात लाखांहून अधिक झाली आहे. अमेरिका, ब्राझील, भारत आणि मेक्सिकोसह अनेक देशांमध्ये करोनाचा संसर्ग फैलावत आहे. मागील काही दिवसांपासून जगभरात सरासरी १५ सेकंदाला एका करोनाबाधिताचा मृत्यू होत असल्याचे समोर आले आहे.

रॉयटर्स' या वृत्तसंस्थेने दिलेल्या वृत्तानुसार, मागील दोन आठवड्यात करोनाबाधितांच्या मृत्यूंची संख्या वाढली आहे. मागील २४ तासात ५९०० जणांचा मृत्यू झाला आहे. याचाच अर्थ दर एका तासात २४७ अथवा १५ सेकंदाला एका करोनाबाधिताचा मृत्यू होत आहे. जगभरात करोनामुळे सात लाखांहून अधिकजणांचा मृत्यू झाला आहे. तर, करोनामुळे संसर्गबाधित होणाऱ्यांचे प्रमाण एक कोटी ८७ लाखांहून अधिक झाले आहे. जागतिक आरोग्य संघटनेने ११ मार्च रोजी करोनाच्या आजाराला महासाथीचा आजार घोषित केला होता. अमेरिका हा सध्या करोना संसर्गाचे मुख्य केंद्र झाले आहे. कॅलिफोर्निया, टेक्सास, फ्लोरिडासह अन्य राज्यांमध्ये करोना संसर्ग पसरत आहे. एका आकडेवारीनुसार, अमेरिकेत दररोज एक हजार बाधितांचा मृत्यू होत आहे. ब्राझीलमध्ये मागील २४ तासात ५१ हजारांहून अधिक करोनाबाधित रुग्ण आढळले होते. त्यानंतर करोनाबाधितांच्या संख्येने २८ लाखांचा आकडा ओलांडला. ब्राझीलमध्ये ११०० जणांचा एका दिवसांत मृत्यू झाला आहे.

वॉशिंग्टन: मंगळवारी लेबनानची राजधानी बैरूतमध्ये झालेल्या स्फोटाने सगळं जगंच हादरलं आहे. बैरूत बंदरात झालेला स्फोट हा बंदरातील वेअरहाउसमध्ये ठेवण्यात आलेला अमोनियम नायट्रेटमुळे झाला असल्याचे लेबनान सरकारने म्हटले आहे. मात्र, अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी वेगळंच मत व्यक्त केले असून तो 'हल्ला' असल्याचे त्यांनी म्हटले आहे.

डोनाल्ड ट्रम्प यांनी व्हाइट हाउसमध्ये पत्रकारांशी संवाद साधताना बैरूतमधील स्फोटावर आपली प्रतिक्रिया व्यक्त केली. त्यांनी म्हटले की, बैरूतमधील स्फोट हे 'हल्ल्या'सारखे आहेत. अमेरिकन लष्कराच्या जनरल यांनी दिलेल्या माहितीनुसार, हे स्फोट एखाद्या बॉम्बनेच घडवून आणले असल्याचे ट्रम्प यांनी सांगितले. लेबनानमधील घटना ही जगासाठी दुखद असून मोठे नुकसान झाले असल्याचेही ट्रम्प यांनी म्हटले. लेबनानने या घटनेची चौकशी बॉम्ब हल्ल्याच्या अनुषंगाने करायला हवी असेही त्यांनी म्हटले. दरम्यान, अमेरिकेच्या संरक्षण विभागाने पेंटागॉनने राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प यांच्या विधानावर असहमती दर्शवली. ट्रम्प यांच्या विधानावर व्हाइट हाउस कार्यालयच योग्य ते स्पष्टीकरण देणार असल्याचे वृत्त वृतसंस्था 'एएफपी'ने दिले आहे.

इस्लामाबाद: सुप्रीम कोर्टाच्या निकालानंतर अयोध्येत आज राम मंदिराचे भूमिपूजन सोहळा पार पडत असताना पाकिस्तानची पोटदुखी समोर आली आहे. पाकिस्तानचे केंद्रीय मंत्री शेख रशीद अहमद यांनी राम मंदिर भूमिपूजनाच्या मुद्यावर भारतावर टीका केली आहे. भारत आता धर्मनिरपेक्ष राहिला नसून 'राम नगर' झाला असल्याची टीका केली आहे.

मंगळवारी एका व्हिडिओद्वारे शेख रशीद अहमद यांनी भारताविरोधात गरळ ओकली आहे. त्यांनी म्हटले की, जगाच्या नकाशावरून आता एक सर्वात जुने धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र हटले आहे. भारत आता हिंदुत्ववादी देश झाला असल्याची टीका त्यांनी केली आहे. काश्मीरच्या मुद्यावर शेख यांनी भारतावर टीका केली. काश्मीरला विशेष दर्जा देणारे कलम ३७० हटवल्यानंतर भारतात मुस्लिमांवर अत्याचार सुरू असून त्यात वाढ झाली आहे. पाकिस्तान आणि जगभरातील मुस्लिम काश्मिरी जनतेसोबत असल्याची टिमकी त्यांनी वाजवली.

पाकिस्तानमध्ये अल्पसंख्याक हिंदू, शीख व अन्य समुदायांवर हल्ले होत आहेत. अल्पसंख्याकांच्या धार्मिक स्थळावर पाकिस्तानमधील धार्मिक कट्ट्ररवाद्यांकडून हल्ले सुरू आहेत. काही महिन्यांपूर्वी इम्रान खान यांच्या सरकारने श्रीकृष्ण मंदिरासाठी निधी दिल्यानंतर मुस्लिम धार्मिक कट्टरवाद्यांनी सरकारवर टीका केली होती. त्याशिवाय, गुरुद्वाराही काही कट्टरवाद्यांनी ताब्यात घेतले असल्याचे वृत्त समोर आले होते.

प्योंगयांग: उत्तर कोरियाकडून होणारी क्षेपणास्त्र चाचणीमुळे अमेरिका, जपान, दक्षिण कोरिया चिंतेत असतात. आता या देशांचीच नव्हे तर सगळ्या जगाची चिंता वाढवणारे पाऊल उत्तर कोरियाने उचलले आहे. क्षेपणास्त्रद्वारे डागता येतील अशा लहान अणू बॉम्बची निर्मिती करण्यास उत्तर कोरियाला यश मिळाले आहे. संयुक्त राष्ट्र संघाच्या सुरक्षा परिषदेच्या उत्तर कोरियावरील समितीने ही बाब समोर आणली आहे. उत्तर कोरिया निर्बंधांचे उल्लंघन करत असल्याचा ठपका या समितीने लावला आहे.

संयुक्त राष्ट्र संघाच्या सुरक्षा परिषदेच्या उत्तर कोरियावरील समितीने आपल्या अहवालात म्हटले की, उत्तर कोरियाकडून सातत्याने आपला अणू कार्यक्रम राबवत आहे. यामध्ये युरेनियम आणि लाइट वॉटर रिएक्टरची निर्मिती आहे. एक सदस्य देशाने सांगितले की, उत्तर कोरिया सातत्याने अणवस्त्र निर्मिती करत आहे. इतर देशांनी उत्तर कोरियाने आपल्या क्षेपणास्त्राद्वारे हल्ला करतील अशी लहान अणूबॉम्बची निर्मिती केली असल्याचे म्हटले असल्याचे अहवालात नमूद केले आहे.

उत्तर कोरियाचे राष्ट्रपती किम जोंग उन यांनी सहा अणू बॉम्ब चाचणी ही लहान अणू बॉम्ब निर्मितीसाठी केली असल्याचा दावा काही देशांनी केला असल्याचे अहवालात म्हटले आहे. तर, उत्तर कोरिया मल्टिपल वॉरहेड सिस्टमवर काम करत असल्याचा दावा करण्यात आला आहे.

 

दुबई: करोनावर काही प्रमाणात नियंत्रण मिळवल्यानंतर काही देशांमध्ये विमान वाहतूक सुरू झाली आहे. विमान प्रवाशांची स्क्रिनिंग करण्यात येत आहे. मात्र, दुबई आंतरराष्ट्रीय विमानतळावर सर्वच प्रवाशांची करोना चाचणी पार पाडली जात आहे आणि चाचणीचा निकाल अवघ्या काही मिनिटात येत आहे. या ठिकाणी खास श्वानांच्या मदतीने करोना चाचणी केली जात आहे.

करोनाबाधितांची ओळख पटवण्यासाठी श्वानांची मदत घेण्यात येणार असून त्यासाठी काही श्वानांना प्रशिक्षित करण्यात येत असल्याचे वृत्त होते. दुबई विमानतळावर या श्वानांकडून करोनाबाधित प्रवाशांचा शोध घेतला आहे. श्वानांमध्ये माणसांच्या तुलनेत स्मेल रिसेप्टर्स (वास घेण्याची क्षमता) ही १० हजार पटीने अधिक असते. त्यामुळे त्यांच्या मदतीने मलेरिया, कॅन्सर अथवा वायरल आजारबाधित व्यक्तींची ओळख पटवू शकतात.

करोना चाचणीसाठी स्वॅब घेतला जातो. काही चाचणी किट्समुळे अर्धा ते एक तासाच्या आत चाचणीचा निकाल समजतो. मात्र, श्वानांच्या मदतीने काही मिनिटांमध्ये करोनाबाधित प्रवाशी ओळखता येत असल्याचे विमानतळ सुरक्षा अधिकाऱ्यांनी सांगितले. करोना चाचणीसाठी विमानतळावर एक स्वतंत्र कक्ष उभारण्यात आला आहे. या ठिकाणी 'के९ पोलीस श्वान' पथक आहे. या चाचणी केंद्रात आलेल्या प्रवाशांची माहिती घेतल्यानंतर त्यांना एक लहान कागद दिला जातो. प्रवाशांना हा कागद आपल्या काखेत लावावा लागतो. त्यानंतर हा कागद एका बाटलीत ठेवण्यात येतो. या बाटलीवर सांकेतिक अक्षरावर माहिती भरली जाते. त्यानंतर वेगवेगळ्या काचेच्या भांड्यात हे नमुने जमा केले जातात. एका आयसोलेशन भागात हे नमुने विशिष्ट आकाराच्या भांड्यात येतात. त्या ठिकाणी पोलिसांचे प्रशिक्षित श्वान वासाच्या आधारे कोविडबाधितांची ओळख पटवतात.

वॉशिंग्टन: चीनच्या आक्रमक विस्तारवादाचा फटका चिनी कंपन्यांना बसत आहे. भारताने चीनच्या १०६ अॅप्सवर बंदी आणल्यानंतर अमेरिकेनेही चिनी अॅप्सवर बंदी आणण्याच्या हालचाली सुरू केल्या आहेत. अमेरिकेतही लोकप्रिय चिनी अॅप टिकटॉकवर बंदी आणण्याचे संकेत याआधीच राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प यांनी दिले होते. आता, ट्रम्प यांनी टिकटॉकची मूळ कंपनी बाइटडान्सला गर्भित इशारा दिला आहे. अमेरिकन कंपनीला टिकटॉकची विक्री करा अथवा अमेरिकेतून निघून जा असे ट्रम्प यांनी बजावले आहे.

राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प यांनी बाइटडान्सला १५ सप्टेंबरपर्यंतची मुदत दिली आहे. या दरम्यान बाइटडान्सला टिकटॉक अमेरिकन कंपनीला विकावे लागणार आहे. अमेरिकेतील मायक्रोसॉफ्ट टिकटॉक विकत घेण्याची दाट शक्यता आहे. अमेरिकन नागरिकांचा डेटा टिकटॉक चीन सरकारला देत असल्याचा आरोप अमेरिकन सिनेटर्सनी केला होता. भारतातही सुरक्षितेच्या कारणास्तव टिकटॉक व इतर चिनी अॅप्सवर बंदी घालण्यात आली. तर, टिकटॉकची मूळ कंपनी असलेल्या बाइटडान्सने हे आरोप फेटाळून लावले आहेत. चीन सरकारला कोणतीही माहिती शेअर केली जात नसून चीनबाहेर सर्व्हर असल्याचे याआधी बाइटडान्सने स्पष्ट केले होते.

लंडन: करोना प्रतिबंधक लस विकसित होत असून काही लशींची अंतिम टप्प्यातील चाचणी सुरू झाली आहे. लस विकसित झाल्यानंतर त्याच्या पुरवठ्याबाबतही आताच नियोजन सुरू झाले आहे. ब्रिटन सरकारने भारतीय कंपनीसोबत करार केला आहे. मुंबईतील फार्मास्युटिकल आणि जैव तंत्रज्ञान कंपनी वॉकहार्टसोबत ब्रिटन सरकारने करार केला आहे.

ब्रिटन सरकारने याची माहिती दिली आहे. या करारानुसार, कोविड-१९ वरील लस तयार झाल्यानंतर कोट्यवधी लशींचा पुरवठा करण्यात येणार आहे. ब्रिटनमध्ये काही लशींची चाचणी अंतिम टप्प्यात आली आहे. यामध्ये ऑक्सफोर्ड विद्यापीठ आणि AsteraZeneca ही कंपनी संयुक्तरीत्या विकसित करत असलेली लस आघाडीवर आहे.

उद्योग, ऊर्जा आणि औद्योगिक विभागाने म्हटले की, 'फिल अॅण्ड फिनिश'च्या टप्प्याला पूर्ण करण्यासाठी भारतीय कंपनीसोबत १८ महिन्यांचा करार करण्यात आला आहे. यामध्ये तयार करण्यात आलेल्या डोसला काचेच्या कुप्पीत टाकण्याच्या कामाचा समावेश आहे. वॉकहार्टमध्ये विकसित करण्यात येत असलेल्या या लशीला ब्रिटन सरकार आणि लस उत्पादकांना जगभरात मोठ्या प्रमाणावर वितरीत करण्यात सेवा देण्यात येणार आहे.

ब्रिटनचे उद्योग मंत्री आलोक शर्मा यांनी सांगितले की, आज आम्ही कोविड-१९च्या लशीच्या उत्पादनाची अतिरिक्त क्षमता सुरक्षित केली आहे. यामुळे आता लस वितरण करण्याची हमी मिळाली आहे. तयार करण्यात आलेले डोस काचेच्या कुप्पीत भरून त्याला वितरणासाठी सज्ज करण्यात येणाऱ्या प्रक्रियेला 'फिल अॅण्ड फिनीश' असे म्हटले जाते. याचा पहिला टप्पा सप्टेंबरमध्ये सुरू होणार आहे. उत्तर वेल्समध्ये वॉकहार्टची उपकंपनी असलेल्या सी. पी. फार्मास्युटिकलमध्ये हे काम होणार आहे.

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकारने चीनच्या दबावासमोर माघार घेतली असल्याची चर्चा सुरू झाली आहे. पाकिस्तान सरकारने ऑनलाइन मल्टिप्लेअर गेम पब्जीवर लावलेली बंदी हटवली आहे. पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरणने (पीटीए) ही बंदी हटवण्याचा निर्णय घेतला आहे. १७ जुलै रोजी पाकिस्तान सरकारने हा पब्जी इस्लामविरोधी असल्याचे सांगत बंदी घातली होती.

पब्जीची पॅरेंट कंपनी प्रॉक्सिमा बीटाच्या (पीबी) प्रतिनिधींनी गेमिंग प्लॅटफॉर्मचा दुरुपयोग रोखण्यासाठी उचलण्यात आलेल्या पावलांची माहिती पाकिस्तान सरकारच्या दूरसंचार नियामक प्राधिकरणाला दिली. त्यानंतर कंपनीच्या खुलाश्यावर आणि उचललेल्या पावलावर समाधान व्यक्त करत पब्जीवरील बंदी हटवण्याचा आदेश काढण्यात आला.

पाकिस्तान टेलिकम्युनिकेशन ऑथिरीटने पब्जीवर बंदी आणताना पाकिस्तानमधील तरुणांवर मानसिक परिणाम होत असल्याचे कारण देण्यात आले होते. गेममुळे मानसिक तणाव निर्माण झाल्यामुळे तरुणांमधील आत्महत्येचे प्रमाण वाढले असल्याचा दावा करण्यात आला. त्याशिवाय, इस्लामाबाद हायकोर्टातील सुनावणी दरम्यान, पब्जी गेममधील काही दृष्ये ही इस्लामविरोधी आहेत. या दृष्यांना पाकिस्तानमध्ये परवानगी देता येत नसल्याचे सरकारच्यावतीने सांगण्यात आले.

पाकिस्तानमध्ये पब्जी बंद केल्यामुळे पंतप्रधान इम्रान खान यांच्या तहरीक-ए-इसांफ या पक्षाला निवडणुकीत नुकसान होण्याची भीती होती. पक्षाच्या दबावात येऊन पाकिस्तान सरकारने हा बंदीचा निर्णय मागे घेतला असल्याची चर्चा आहे. पाकिस्तानच्या तरुणांमध्येही पब्जी लोकप्रिय आहे. त्यामुळे या बंदीमुळे तरुण मतदार पक्षापासून दुरावण्याची भीती व्यक्त केली जात होती.
 

काठमांडू: चीन आणि पाकिस्तानसोबत मैत्री संबंध घट्ट करणाऱ्या नेपाळचे सैन्य पाकिस्तानी लष्कराच्या मार्गावरून चालला आहे. पाकिस्तानच्या सैन्याप्रमाणे आता नेपाळच्या लष्करालाही उद्योग-व्यवसाय सुरू करायचे आहे. मोठ्या प्रमाणावर नफा होईल अशा क्षेत्रातील उद्योगात नेपाळच्या लष्कराला गुंतवणूक करायची आहे. नेपाळ लष्कराच्या या 'कॉर्पोरेट' धोरणाला देशात विरोध सुरू झाला आहे.

'काठमांडू पोस्ट'च्या वृत्तानुसार, 'द नॅशनल डिफेंस फोर्स'ने एका विधेयकाचा मसुदा सादर केला आहे. या मसुद्यानुसार, नेपाळ आर्मी कायद्याला बदलता येणार आहे. नेपाळच्या लष्कराने आपल्या कल्याणकारी निधीला वेगवेगळ्या उद्योग-व्यवसायात 'प्रमोटर' म्हणून गुंतवणूक करण्यास कायदेशीर सल्ला मागितला आहे. यासाठी नेपाळी लष्करी अधिकारी मागील वर्षापासून प्रयत्न करत आहेत.

नेपाळ लष्कराचे कायदेशीर प्रभारी रंत प्रकाश थापा यांनी सांगितले की, त्यांच्या प्रस्तावित विधेयकाला सरकारची मंजुरी मिळेल. नेपाळच्या प्रस्तावित कायद्यानुसार, लष्कराला उद्योग, कंपनी आणि जलविद्युत प्रकल्पासारख्या पायाभूत प्रकल्पात गुंतवणूक करण्यास निर्बंध आहेत. नेपाळी लष्कराला राष्ट्रीय सुरक्षा, गुप्त माहिती संकलित करणे या कामांपेक्षा उद्योगांमध्ये अधिक रस दिसत असल्याचे संरक्षण तज्ञांनी सांगितले.

नेपाळचे संरक्षण तज्ञ गेजा शर्मा यांनी सांगितले की, ही अतिशय चिंताजनक बाब आहे. लष्कर जेवढ्या अधिक प्रमाणात इतर कामांमध्ये सहभागी होईल, तेवढ्याच प्रमाणात लष्करावर परिणाम होईल. नेपाळमध्ये माओवादी हिंसाचारा दरम्यान नेपाळी सैन्य रस्ते बांधणीच्या कामात होती. मात्र, हिंसाचार संपल्यानंतरही लष्कर रस्ते बांधणीच्या कामात आहे. नेपाळी सैन्याकडून गॅस स्टेशन, शाळा, वैद्यकीय महाविद्यालये चालवण्यासह बाटलीबंद पाणी विक्री करण्यात येते.
 

काठमांडू: सीमा प्रश्नावरून आगळीक करणाऱ्या नेपाळने आता भारतीय लष्करातील गोरखा सैन्याबाबतच्या करारावर प्रश्न उपस्थित केले आहे. भारतीय सैन्य दलात असणाऱ्या नेपाळच्या गोरखा सैनिकांबाबतचा करार आता जुना झाला असून निरुपयोगी असल्याचे वक्तव्य नेपाळचे परराष्ट्र मंत्री प्रदीप ज्ञवली यांनी केले आहे. गोरखा सैन्याच्या कराराच्या मुद्यावर नेपाळने आता भारतासह ब्रिटनवरही निशाणा साधला आहे.

भारत, ब्रिटन आणि नेपाळमध्ये भारतीय सैन्य दलात गोरखा सैन्याच्या समावेशाबाबत १९४७ मध्ये करार करण्यात आला होता. या करारानुसार, गोरखा सैनिकांचे वेतन, भत्ते, पेन्शन आणि इतर सुविधा ब्रिटन व भारतीय सैन्याइतकीच असणार आहे. मात्र, भारतीय सैन्यात सेवा बजावलेल्या माजी गोरखा सैन्यांनी हा करार भेदभाव करणार असल्याचा आरोप केला होता.

एका कार्यक्रमात बोलताना नेपाळचे परराष्ट्र मंत्री प्रदीप ज्ञवली यांनी म्हटले की, त्यावेळी करण्यात आलेल्या करारामुळे नेपाळी युवकांना रोजगार आणि प्रगतीचा मार्ग खुला झाला असला तरी आता पुलाखालून बरेच पाणी गेले आहे. त्यामुळे आता या करारावर चर्चा करण्याची आवश्यकता असल्याचे त्यांनी म्हटले. भारत, नेपाळ आणि ब्रिटनने एकत्र येऊन वादग्रस्त मुद्यांवर चर्चा करायली हवी असे त्यांनी सांगितले.

गोरखा सैन्य कराराचा मुद्दा ब्रिटनसमोरही उपस्थित करण्यात आला असल्याचे नेपाळचे परराष्ट्र मंत्री प्रदीप ज्ञवली यांनी म्हटले. मागील वर्षी ब्रिटनचे पंतप्रधान थेरेसा मे यांच्यासोबत झालेल्या चर्चेत नेपाळचे पंतप्रधान केपी शर्मा ओली यांनी या कराराबाबत चर्चा केली असल्याचे त्यांनी सांगितले.

 

काबूल: अफगाणिस्तानच्या नागरी वस्त्या असलेल्या भागात पाकिस्तानने रॉकेट हल्ला केला आहे. पाकिस्तानी सैन्याच्या या हल्ल्यात ९ नागरिकांचा मृत्यू झाला असून ५० हून अधिक जखमी झाले असल्याची माहिती अफगाणिस्तानमधील माध्यमांनी दिली आहे. पाकिस्तानी हल्ल्यानंतर अफगाणिस्ताननेही प्रत्युत्तरासाठी सैन्य सज्ज ठेवले आहे.

अफगाणिस्तानमधील TOLOnewsच्या वृत्तानुसार अफगाण संरक्षण मंत्रालयाने या हल्ल्याची पुष्टी केली आहे.अफगाण सैन्यांना पाकिस्तानी सैन्याविरूद्ध कारवाई करण्यासाठी पूर्णपणे तयार राहण्याच्या सूचना देण्यात आल्या आहेत. संरक्षण मंत्रालयाने सांगितले की, पाकिस्तानी सैनिकांनी निवासी भागात रॉकेट हल्ल्यात नऊ नागरिक ठार तर ५० जण जखमी झाले. अफगाणिस्तान लष्करप्रमुख जनरल मोहम्मद यासीन जिया लेवी यांनी पाकिस्तानविरुद्ध कारवाई करण्यासाठी सर्व सैन्य दलाला तयार राहण्याचे आदेश दिले आहेत.

लष्करप्रमुख मोहम्मद यासीन झिया यांच्या नेतृत्वात हवाई दल आणि विशेष सैन्य दलाला हाय अलर्टवर ठेवण्यात आले आहे. पाकिस्तानी लष्कराने अफगाणिस्तानच्या भूप्रदेशावर रॉकेट हल्ला सुरूच ठेवला तर अफगाण सैन्यदलाकडून त्याला प्रत्युत्तर देण्यात येणार असल्याचेही अफगाणिस्तान सरकारने स्पष्ट केले आहे. पाकिस्तानच्या हल्ल्यात महिला आणि लहान मुलेही ठार झाले असल्याचे वृत्त आहे.

वॉशिंग्टन: करोनाच्या संसर्गाने जगभरात थैमान घातले असताना करोनाच्या विषाणूवर संशोधन सुरू आहे. नुकत्याच केलेल्या संशोधनातील निष्कर्ष हे काळजी वाढवणारे आहेत. पाच वर्षाखालील बालके हे इतर वयोगटातील बालके, वयस्कर नागरिकांच्या तुलनेत करोना व्हायरसचे मोठे वाहक ठरू शकतात. या वयोगटातील बालकांमध्ये करोना विषाणूची जेनेटिक मटेरियल १० ते १०० पटीने अधिक असतात.

JAMA पीडियाट्रिक्सने केलेल्या संशोधनात ही बाब समोर आली आहे. अमेरिकन राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प हे नर्सरी आणि शाळा सुरू करण्यासाठी आग्रही असतानाच हा संशोधन अहवाल समोर आला आहे. २३ मार्च ते २७ एप्रिल दरम्यान शिकागो येथील रुग्णांची नोजल स्वॅबच्या आधारे हे संशोधन करण्यात आले. या बाधितांमध्ये एक आठवड्यांपासून करोनाची लक्षणे होती. करोनाबाधितांची तीन गटात विभागणी करण्यात आली. यामध्ये पाच वर्षाखालील बालके ४६ होती. तर, ५१ बालकांचे वय हे ५ ते १७ वर्षादरम्यान होते. १८ ते ६५ या वयोगटातील ४८ करोनाबाधित होते.

एन अॅण्ड रॉबर्ट एच लुरी चिल्ड्रेन हॉस्पिटलचे डॉक्टर टेलर हिल्ड सर्जेंट यांच्या नेतृत्वात संशोधन करण्यात आले. लहान मुलांच्या श्वसननलिकेत SARS-CoV-2 च्या विषाणूचे प्रमाण १० ते १०० पटीने अधिक होते. त्याशिवाय, जेनेटिक मटेरियलच प्रमाणचे जेवढे अधिक असेल तेवढाचा करोनाचा संसर्ग फैलावण्याचा धोका अधिक असतो.

लहान मुले हे करोना संसर्गाचे महत्त्वपूर्ण वाहक आहेत. याआधी लहान मुले करोनाच्या आजाराने गंभीर आजारी होतात आणि त्यांना संक्रमणाचा धोका नसतो, असेही काही संशोधनात आढळले होते. मात्र, या संशोधनातील दावा त्याच्या अगदी उलट आहे. त्याशिवाय या संशोधनाची अधिक चिकित्सा झालेली नाही.

वॉशिंग्टन: अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी ग्लोबल वार्मिंगच्या मुद्यावर भारत, चीनवर टीका केल्यानंतर आता अमेरिकन सिनेटरनेही भारत-चीनवर टीका केली आहे. भारत आणि चीन या दोन्ही देशांनी मागील दोन दशकात मोठी झेप घेतली असून हे देश श्रीमंत झाले आहेत. मात्र, या दोन्ही देशांची नवीन जबाबदारी घेण्याची तयारी नसल्याचे अमेरिकन सिनेटर चक ग्रास्सले यांनी म्हटले.

अमेरिकन सिनेटर ग्रास्सले हे अर्थ समितीचे अध्यक्ष आहे. त्यामुळे त्यांच्य वक्तव्य मोठे समजले जात आहे. जागतिक व्यापार संघटनेवर अमेरिकन काँग्रेसमध्ये झालेल्या चर्चेदरम्यान त्यांनी ही टिप्पणी केली. त्यांनी म्हटले की, मागील दोन दशकात चीन आणि भारतासारखे देश अधिकच श्रीमंत झाले आहेत. मात्र, त्यांनी नवीन जबाबदारी घेण्यास नकार दिला आहे. अशा वेळेस राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प यांच्याकडून हा असमतोल दूर करण्याचा प्रयत्न सुरू आहे. जागतिक व्यापार संघटनेला अधिक तार्किकपणे निर्णय घेण्यास भाग पाडण्याच्या ट्रम्प यांच्या प्रयत्नाचे कौतुक करावे लागतील असेही त्यांनी सांगितले.

भारत आणि चीन या दोन देशांनी स्वत:ला विकसनशील देश असल्याचा दावा करत विशेष सवलत, व्यवहार करावा अशी अपेक्षा बाळगतात. या दोन्ही देशांना कॅमेरून सारख्या देशाला मिळणाऱ्या सवलती, सुविधा हव्या असल्याची टीका त्यांनी केली.

 

वॉशिंग्टन: जगभरातील २०० देशांमध्ये करोना संसर्गाचे थैमान सुरू आहे. करोनाचा सर्वाधिक संसर्ग अमेरिकेत झाला असून करोनाबाधितांची संख्या दिवसेंदिवस वाढत आहे. करोनाच्या आजारामुळे प्राण गमावलेल्या नागरिकांची संख्या एक लाख ५० हजारांहून अधिक झाली आहे.

वर्ल्डोमीटर या संकेतस्थळाच्या माहितीनुसार, अमेरिकेत सर्वाधिक करोनाबाधितांच्या मृत्यूची नोंद करण्यात आली आहे. अमेरिकेत ४५ लाखांहून अधिकजणांना करोनाची बाधा झाली आहे. त्यापैकी एक लाख ५३ हजारजणांचा मृत्यू झाला आहे. तर, २२ लाखांहून अधिकजणांनी करोनावर मात केली आहे. मागील २४ तासात अमेरिकेत करोनामुळे ११५६ जणांचा मृत्यू झाला असून ५० हजारांहून अधिक नवीन करोनाबाधित रुग्ण आढळले आहेत.

अमेरिकेनंतर सर्वाधिक करोनाबाधित ब्राझीलमध्ये आढळले आहेत. ब्राझीलमध्ये २५ लाख नागरिकांना करोनाची बाधा झाली आहे. तर, ९० हजारांहून अधिकजणांचा मृत्यू झाला आहे. मागील २४ तासात ब्राझीलमध्ये करोनाच्या संसर्गामुळे १५०० जणांचा मृ्त्यू झाला आहे. सर्वाधिक करोनाबाधित रुग्णांच्या संख्येत भारत तिसऱ्या स्थानावर आहे. भारतात १५ लाख ८४ हजार करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली असून त्यापैकी ३५ हजारजणांचा मृत्यू झाला आहे. तर, १० लाख रुग्णांनी करोनावर मात केली आहे.

बीजिंग: चीनने लडाखच्या पूर्व भागातील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषा ओलांडत भारताच्या हद्दीत घुसखोरी केली होती. मागील महिन्यात गलवान खोऱ्यात भारत-चीनच्या सैन्यामध्ये झालेल्या हिंसक संघर्षात २० भारतीय जवान शहीद झाले होते. त्यानंतर वाढलेला तणाव निवळण्यासाठी भारत-चीन दरम्यान चर्चा सुरू असताना लडाखमध्ये चीन पुन्हा आगळीक करण्याच्या तयारीत असल्याचे समोर आले आहे.

भारत-चीन दरम्यान प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवरील तणाव कमी करण्यासाठी चर्चा सुरू असली तरी चीन अद्यापही पँगोग सो सरोवर परिसरातील फिंगर ४ ते ८ दरम्यान असलेले सैन्य मागे घेण्यास राजी नाही. त्यातच आता चीनने अक्साई चीन भागात मोठ्या प्रमाणावर सैन्य जमवण्याची तयारी सुरू केली आहे. सॅटेलाइटद्वारे घेण्यात आलेल्या छायाचित्रातून हा उलगडा झाला आहे. सैतुला भागात चीनने अत्याधुनिक घातक शस्त्रे तैनात केली आहेत.

ओपन सोर्स इंटेलिजेन्से अॅनालिस्ट Detresfa कडून सॅटेलाइट छायाचित्रे प्रसिद्ध केली आहेत. चीनने मागील दोन वर्षात या ठिकाणच्या सैनिकी तळाला 'किल्ल्या'सारखे स्वरूप देण्यास सुरुवात केली आहे. सैतुलामध्ये चिनी सैन्य अधिक काळ वास्तव्य करू शकतील आणि लडाखमध्ये वेगाने जाऊ शकतील यासाठीच्या प्रशिक्षणाची तयारी सुरू केली आहे. चीनने नुकतेच नवीन हेलिपोर्ट तयार केले असल्याचे समोर आले आहे. त्याशिवाय, सैतुलामध्ये चीनने तोफा आणि अन्य काही घातक शस्त्रे तैनात केले आहेत.

न्यूयॉर्क: अयोध्येत पाच ऑगस्ट रोजी राम मंदिराचे शिलान्यास होत असताना न्यूयॉर्कमध्ये जय श्रीरामचा जयघोष होणार आहे. न्यूयॉर्कमधील सुप्रसिद्ध टाइम्स स्क्वेअरमधील मोठ्या स्क्रिनवर प्रभू श्रीराम आणि भव्य राम मंदिराचे थ्रीडी चित्र प्रदर्शित करण्यात येणार आहे. हिंदू धर्मीयांसाठी ऐतिहासिक असणाऱ्या क्षणासाठी अमेरिकेतील हिंदू बांधव सज्ज असल्याचे आयोजकांनी सांगितले.

आयोजक जगदीश सेव्हानी यांनी सांगितले की, न्यूयॉर्कमध्ये पाच ऑगस्ट रोजीच्या ऐतिहासिक क्षणाचा आनंद साजरा करण्याची तयारी सुरू झाली आहे. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी अयोध्येत मंदीर निर्माणासाठी शिलान्यास करतील तेव्हा न्यूयॉर्कमध्येही त्या क्षणाचा आनंद व्यक्त केला जाणार आहे. टाइम्स स्क्वेअरमधील मोठ्या नॅस्डॅक स्क्रीनशिवाय १७ हजार चौफूटांच्या एलईडी स्क्रिनवर थ्रीडी चित्रे प्रदर्शित केली जाणार आहेत.

पाच ऑगस्ट रोजी सकाळी आठ ते रात्री १० वाजेपर्यंत हिंदी आणि इंग्रजीत 'जय श्रीराम' ही अक्षरे दिसणार असून प्रभू राम यांचे चित्र आणि व्हिडिओ, मंदिराचा प्रस्तावित आराखडा, तसेच पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या हस्ते शिलान्यास करते वेळेची छायाचित्रे प्रदर्शित करण्यात येणार आहे. टाइम्स स्क्वेअरमधील बिल बोर्ड हे पर्यटकांच्या आकर्षणाचे केंद्र आहे.

 

वॉशिंग्टन: चीनविरोधात भारताला साथ देणारे अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी आता चीनसोबत भारतावरही टीका केली आहे. ग्लोबल वार्मिंगच्या मुद्यावर ट्रम्प यांनी रशिया, चीनसह भारतावर टीका केली आहे. भारत, चीन आणि रशिया हे तिन्ही देश हवेच्या गुणवत्तेकडे लक्ष देत नसल्याचा आरोप त्यांनी केला. ट्रम्प यांनी पॅरिस करारावरही टीका करत अमेरिकेने यातून बाहेर पडण्याचे समर्थन केले.

ट्रम्प यांनी म्हटले की, पॅरिस करारावर अंमल केला असता तर अमेरिका हा स्पर्धक देश राहिला नसता. अमेरिकेच्या विकासावर याचा परिणाम झाला असता. अनेक अमेरिकन नागरिकांच्या नोकऱ्या, उद्योग, कारखाने हे चीनमध्ये अथवा इतर देशांमध्ये गेले असते. अमेरिकेने आपल्या हवेच्या दर्जाकडे लक्ष द्यावे. मात्र, स्वत:च्या देशातील हवेच्या दर्जाकडे चीन दुर्लक्ष करत असल्याचा आरोप त्यांनी केला. भारतानेही आपल्या देशातील हवेच्या गुणवत्तेकडे दुर्लक्ष केले आहे. रशियाही याच मार्गावरून चालत असून फक्त अमेरिकाच आपल्या देशातील हवेच्या गुणवत्तेकडे लक्ष देत असल्याचा दावा डोनाल्ड ट्रम्प यांनी केला. पॅरिस करारामुळे अमेरिकेचे मोठे नुकसान झाले असते. अब्जावधी रुपये रक्कम दंड भरण्यासाठी द्यावी लागली असती असे त्यांनी सांगितले.

जिनिव्हा: जगभरात करोनाचा संसर्ग वाढत असून करोनाबाधितांच्या संख्येत सातत्याने वाढ होत आहे. मागील सहा आठवड्यातच करोनाबाधितांच्या संख्येत दुप्पटीने वाढ झाली असल्याचे जागतिक आरोग्य संघटनेचे महासंचालक टेड्रोस अॅधनोम गेब्रेयसस यांनी म्हटले आहे. जगभरात करोनाबाधितांची संख्या दीड कोटींहून अधिक झाली आहे.

करोनाबाधितांच्या वाढत्या संख्येच्या पार्श्वभूमीवर आता जागतिक आरोग्य आरोग्य संघटनेने आपात्कालिन बैठक बोलावली आहे. जागतिक आरोग्य संघटनेची ही बैठक गुरुवारी पार पडणार आहे. करोनाला आळा घालण्यासाठी या बैठकीत चर्चा होणे अपेक्षित आहे. जागतिक आरोग्य संघटनेचे महासंचालक टेड्रोस अॅधनोम गेब्रेयसस यांनी सांगितले की, करोनाच्या महासंकटामुळे संपूर्ण जग बदलले आहे. या महासंकटाच्या काळात व्यक्ती, समाज आणि देश एकत्र आले आहेत. काही देशांमध्ये राजकीय नेतृत्व, शिक्षण,करोना चाचणी दर, स्वच्छता आणि सोशल डिस्टेंसिंगसारख्या अनेक उपाययोजनांवर अंमलबजावणी झाली आहे. या सर्वांतून करोनाला बऱ्यापैकी नियंत्रणात आणणे काही देशांना शक्य झाले आहे.

करोनाच्या संसर्गाचा जोर अद्यापही ओसरला नसून येणाऱ्या दिवसांत हा जोर आणखी वाढणार असल्याचा इशारा याआधीच जागतिक आरोग्य संघटनेने दिला होता. काही देशांच्या राजकीय नेतृत्वाने घेतलेल्या चुकीच्या निर्णयामुळे करोनाबाधितांची संख्या वाढत असल्याचेही जागतिक आरोग्य संघटनेने याआधी म्हटले होते.

पॅरिस: करोनाच्या संसर्गाने जगभरात थैमान घातले आहे. करोनाच्या बदलत्या स्वरुपामुळे काहीवेळेस करोनाबाधित रुग्णांना ओळखणे कठीण जात आहे. त्यामुळे करोना चाचणी करण्यावर अनेक देशांनी भर दिला आहे. करोनाचा फटका जगभरातील अनेक विकसित देशांनाही बसला आहे. मात्र, त्यातही आता फ्रान्सने आपल्या नागरिकांसाठी करोनाची चाचणी मोफत केली आहे. त्याशिवाय खासगी रुग्णालयाकडून ज्यांनी चाचणी केली असेल, अथवा ज्यांनी यापूर्वीही चाचणी केली असेल, त्या सर्व नागरिकांना रिफंड देण्यात येणार असल्याची घोषणा आरोग्य मंत्री ऑलिव्हियर वेरन यांनी केली.

व्हर्नन यांनी एका वृत्तपत्राला दिलेल्या मुलाखतीत सांगितले की, "मी या शनिवारी आदेशावर स्वाक्षरी केली आहे. कोणताही फ्रान्सचा नागरीक पूर्णपणे पीसीआर करोना चाचणी पुन्हा करू शकतो." त्यासाठी डॉक्टरांच्या सूचनेची किंवा कारणाची आवश्यकता भासणार नाही. करोनाची लक्षणे दिसत नसलेल्या नागरिकांनाही ही मोफत चाचणी करता येणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. फ्रान्समध्ये करोनाची दुसरी लाट येण्याबाबत त्यांनी अतिशय सावध उत्तर दिले. करोनाच्या दुसऱ्या लाटेबाबत आता बोलणे फार घाईचे होईल. मागील काही दिवसात करोनाबाधित प्रकरणे कमी आढळत आहेत. युवकांनी करोनाच्या संसर्गाला गांभीर्याने घेण्याची आवश्यकता असून योग्य ती खबरदारी घेण्याचे आवाहन त्यांनी केले.

 

पॅरिस: अत्याधुनिक क्षेपणास्त्र आणि घातक बॉम्बनी सुसज्ज असलेले लढाऊ विमान राफेल आज फ्रान्समधून भारतासाठी उड्डाण घेणार आहे. चीन आणि पाकिस्तानसोबत सुरू असलेल्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर या राफेलचे भारतीय हवाई दलाच्या ताफ्यात येणे ही अतिशय महत्त्वाची गोष्ट समजली जात आहे. राफेलने भारतासाठी उड्डाण घेण्यापूर्वी फ्रान्समधील भारतीय दूतावासाने राफेलची आणि भारतीय हवाई दलाच्या वैमानिकांचे छायाचित्र ट्विट केले आहे.

राफेलची विमाने दोन दिवसांच्या प्रवासानंतर २९ जुलै रोजी अंबाला येथील हवाई दलाच्या तळावर दाखल होतील सूत्रांच्या माहितीनुसार, आज फ्रान्समधील पाच किंवा सहा लढाऊ विमाने भारताकडे रवाना होणार आहेत. भारतात दाखल झाल्यानंतर या विमानांना एका आठवड्यातच ही लढाऊ विमाने कोणत्याही मोहिमेसाठी सुसज्ज करण्यात येणार आहे. राफेलच्या उड्डाणासाठी भारतीय हवाई दलाच्या १२ वैमानिकांना प्रशिक्षण देण्यात आले आहे.
जगातील सर्वात प्राणघातक क्षेपणास्त्रे आणि सेमी-स्लॅथ तंत्रज्ञानाने सज्ज असणाऱ्या राफेलच्या समावेशामुळे भारतीय हवाई दलाच्या ताकदीत वाढ होणार आहे.
राफेल लढाऊ विमानांमध्ये जगातील सर्वात आधुनिक हवेतून हवेत मारा करणारी मीटिआर क्षेपणास्त्रेदेखील असणार आहेत.

 

टोकियो: संपूर्ण जग करोनाशी दोन हात करत असताना चीनच्या कुरापती सुरू आहेत. आक्रमक विस्तारवादी धोरणांमुळे शेजारील देशांसोबत चीनचे संबंध तणावपूर्ण झाले आहेत. त्यातच आता चीन आणि रशिया एकत्रितपणे अंतराळात युद्ध सुरू करण्याच्या तयारीत असल्याचा आरोप करण्यात येत आहे. जपानच्या एका उपग्रहाजवळ चीन आणि रशियाचे किलर सॅटेलाइट दिसले. त्यामुळे जपानच्या अधिकाऱ्यांनी याबाबत चिंता व्यक्त केली आहे.

जपानच्या अधिकाऱ्यांनी दिलेल्या माहितीनुसार, चीन आणि रशियाचे सॅटेलाइट्स जपानच्या लष्करी सॅटेलाइटच्या जवळ आले आहेत. त्याबाबत जपानने अमेरिकेला माहिती दिली आहे. चीन आणि रशियाच्या सॅटेलाइट्च्या हालचालींवर लक्ष ठेवण्यासाठी जपानकडे यंत्रणा नसल्यामुळे अमेरिकेची मदत घेण्यात येत आहे. या सॅटेलाइट्सच्या मदतीने जपान गुप्त माहिती मिळवते.

जपानमधील वृत्तपत्र योमीरीने म्हटले की, या वर्षाच्या सुरुवातीला अमेरिकन टोही सॅटेलाइटजवळ रशियाचे कॉस्मोस २५४२ हे उपग्रह पोहचले होते. त्यानंतर अमेरिकेने धोक्याचा इशारा जारी केला होता. रशियन किलर सॅटेलाइट अमेरिकन उपग्रहाच्या खूपच जवळ होता. रशियन उपग्रह अमेरिकन उपग्रहाच्या फोटोग्राफीक डिटेल्सही घेऊ शकत होता.

 

लंडन: करोनाच्या संसर्गाने जगभरात धुमाकूळ घातला आहे. काही देशांमध्ये करोनाच्या संसर्गाने हाहाकार माजवला असून काही देशांमध्ये करोनावर नियंत्रण मिळवण्यास यश आले आहे. करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी अनेक देशांनी विविध उपाययोजना आखल्या त्यात काहींना यशही आले. त्यातच आता, करोनाचा आजार दूर ठेवण्यास आणि बाधा झाल्यास मृत्यूचा धोका कमी करण्यास एका जीवनसत्त्वाने महत्त्वाची भूमिका बजावली असल्याचे शास्त्रज्ञांनी म्हटले आहे.

एका आयरिश वैद्यकीय नियतकालिकेत प्रकाशित झालेल्या अहवालानुसार, ज्या देशांतील नागरिकांच्या शरीरात 'ड' जीवनसत्त्वाचे प्रमाण अधिक आहे, त्या देशांमध्ये करोना संसर्गाचा दर कमी असून मृत्यूही कमी झाले असल्याचे म्हटले आहे. त्याशिवाय, ज्या देशांमध्ये करोनाच्या संसर्गाने थैमान घातले आहे, त्या देशांमधील नागरिकांमध्ये 'ड' जीवनसत्वाची कमतरता आढळत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. नॉर्वे, डेन्मार्क, फिनलँड, स्नीडन या देशांमधील नागरिकांसाठी 'ड' जीवनसत्त्व सुरक्षा कवच झाले आहे. 'ड' जीवनसत्त्वामुळे करोनाच्या संसर्गाचा फैलाव कमी झाला असून आजारी पडणाऱ्या लोकांची संख्या कमी आहे. त्याशिवाय या देशांमध्ये मृतांचा दरही कमी आहे.

लंडन: मित्रांसोबत पार्टी म्हटली की अनेकजण मद्यपान करतात. जे मद्यपान करत नाहीत अशा मित्र-मैत्रिणींना देखील आग्रह केला जातो. दारू पिण्याचा आग्रह एका तरुणीच्या प्राणावर बेतला. उपाशी पोटी दारू प्यायल्या मुळे २७ वर्षीय तरुणीचा मृत्यू झाला. इंग्लंडमधील ब्राइटन शहरात ही घटना घडली. विशेष म्हणजे मृत्यू झालेली तरुणी आपल्या फिटनेसबाबत अधिक सजग होती.

अॅलिस बर्टन ब्रॅडफोर्ड असे या दुर्देवी तरुणीचे नाव आहे. मेट्रो युकेने दिलेल्या वृत्तानुसार, उपाशी पोटी दारू प्यायल्यामुळे मृत्यू होणे ही दुर्मिळ बाब आहे. डॉक्टरांनी दिलेल्या माहितीनुसार, अॅलिसला अल्कोहोलिक किटोएसिडोसिस नावाचा आजार होता. हा आजार अतिशय दुर्मिळ असल्याचे बोलले जाते. कदाचित या आजाराबाबत तिलाही माहिती नसणार, असे डॉक्टरांनी सांगितले. हा आजार मेटाबॉलिझमशी निगडीत असून उपाशी पोटी दारू पिणे हे विष प्राशन करण्यापेक्षाही धोकादायक असल्याचे डॉक्टरांनी सांगितले. अॅलिससोबतही अशाच प्रकारे घटना घडली असण्याची शक्यता आहे. अॅलिसला रुग्णालयात दाखल करण्यापूर्वीच तिचा मृत्यू झाला.

 

लंडन: जगभरात करोनाचा संसर्ग वेगाने फैलावत आहे. जवळपास २०० देशांमध्ये दीड कोटीहून अधिकजणांना करोनाची बाधा झाली आहे. करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी लशींवर संशोधन सुरू करोनाच्या विषाणूंचा अभ्यास सुरू आहे. आता आणखी एक नवीन बाब समोर आली आहे. बऱ्याच दिवसांच्या कालावधीनंतर सलून पुन्हा सुरू झाले असून करोनाच्या बचावापासून फेसशिल्डचा अनेकजण वापर करत आहेत. मात्र, फेसशिल्डच्या वापरानंतरही करोनाची बाधा होत असल्याचे समोर आले आहे.

स्विर्त्झलंडमधील आरोग्य तज्ञांनी केलेल्या अभ्यासानंतर हा दावा करण्यात आला आहे. स्विर्त्झलंडमधील एका गावात करोनाबाधितांची संख्या अचानक वाढली. त्यानंतर एक हॉटेलमधून हा संसर्ग फैलावला असल्याचे समोर आले. या हॉटेलमध्ये सर्व प्रकारची खबरदारी घेण्यात आल्यानंतरही करोना फैलावला असल्यामुळे त्याचा तपास सुरू करण्यात आला. तज्ञांनी केलेल्या पाहणीनुसार, फक्त फेसशिल्ड घातलेल्या नागरिकांना करोनाची बाधा झाली असल्याचे समोर आले. तर, दुसरीकडे ज्यांनी मास्क किंवा फेसशिल्ड व मास्कचा वापर केला, त्यांना करोनाची बाधा झाली नसल्याचेही तज्ञांना आढळले. जगभरातील सलून चालकांना, हेअर स्टाइलिशांना करोनापासून वाचण्यासाठी काही सूचना देण्यात आल्या आहेत. काही ठिकाणी हेअर स्टाइलिश लोकांना करोनाच्या बचावापासून फेसशिल्डचा वापर करण्याचे सांगितले आहे.

किव: खंडणी, तुरुंगातून गुन्हेगाराची सुटका, शत्रू देशाविरोधात कारवाई आदी वेगवेगळ्या कारणांसाठी बस, विमानांचे अपहरण करण्यात आल्याच्या घटना घडल्या आहेत. मात्र, युक्रेनमध्ये एकाने बसचे अपहरण करत अनेकांना ओलीस ठेवले होते. या ओलीस नाट्याचा शेवटही एखाद्या चित्रपटाला साजेशा असा झाला. ज्या कारणासाठी बसचे अपहरण करण्यात आले ते कारण ऐकून अधिकारीही चक्रावून गेले.

युक्रेनमधील लुट्स्क शहरात सोमवारी एका बसचे अपहरण करण्यात आले. बसमध्ये १० पेक्षा अधिक प्रवासी होते. बसचे अपहरण झाल्यानंतर सुरक्षा यंत्रणांनी ताबडतोब हालचाली केल्या. अपहरणकर्त्याने एकाही प्रवाशाला ठार केले नाही. त्यामुळे अधिकाऱ्यांकडून अपहरणकर्त्याशी चर्चा सुरू होती. अपहरण करणाऱ्याने राष्ट्रपतींसोबत चर्चा करण्याची मागणी केली. त्याच दरम्यान इतर अधिकाऱ्यांनीही या अपहरणकर्त्यासोबत चर्चा सुरू ठेवली होती. अखेर त्याने बसमधील जखमी प्रवासी आणि गर्भवती महिलांची सुटका केली. त्यानंतर त्याने राष्ट्रपतींनी एक व्हिडिओ संदेश देण्याची मागणी केली.

अपहरणकर्त्याच्या या मागणीमुळे सगळेच जण चक्रावले. एका महत्त्वाच्या बैठकीत असलेले राष्ट्रपती सातत्याने सुरक्षा अधिकाऱ्यांच्या संपर्कात होते. अपहरणकर्त्याने केलेली मागणी अस्पष्ट होती. त्यामुळे घटनास्थळी काय सुरू आहे, हे समजून घेण्यास वेळ लागला असल्याचे त्यांनी सांगितले. अपहरणकर्त्यांने राष्ट्रपतींनी एक व्हिडिओ शेअर करण्याची मागणी केली. वर्ष २००५ मध्ये प्रदर्शित झालेला 'अर्थलिंग्स' हा चित्रपट सर्वांनी पाहण्याचे आवाहन राष्ट्रपतींनी व्हिडिओद्वारे केले. राष्ट्रपतींच्या या व्हिडिओ आवाहनानंतर अपहरणकर्त्याने बसमधील सर्वच प्रवाशांची सुटका केली आणि जवळपास १० तासांहून अधिक काळ सुरू असलेल्या ओलीस नाट्यावर पडदा पडला.

सुक्रह: जगभरात करोनाच्या संसर्गाने धुमाकूळ घातला आहे. जवळपास २०० देशांतील सुमारे दीड कोटी नागरिकांना करोनाची बाधा झाली आहे. अनेक देशांमधील आरोग्य व्यवस्था करोनाच्या उद्रेकाने कोलमडून पडली आहे. करोनाबाधितांवर उपचारासाठी प्रयत्नांची शर्थ केली जात असताना करोनाबाधितांच्या मृत्यूंची संख्या काही देशांमध्ये वाढत आहे. दक्षिण अमेरिकेत करोनाचा संसर्ग फैलावला असून बोलिव्हियात परिस्थिती चिंताजनक आहे. बोलिव्हियातील रस्त्यांवर मृतदेह पडले असल्याचे समोर आले असून त्यातील बहुतांशी करोनाबाधितांचे मृतदेह आहेत.

मागील पाच दिवसांत बोलिव्हिया पोलिसांनी प्रमुख शहरातील रस्त्यांवरून आणि घरांमधून ४०० जणांचे मृतदेह ताब्यात घेतले आहेत. यातील जवळपास ८५ टक्के जणांचा मृत्यू करोनाच्या संसर्गाने झाला असण्याची शक्यता पोलिसांनी व्यक्त केली आहे. एएफपी या वृत्तसंस्थेने दिलेल्या वृत्तानुसार, बोलिव्हियातील शहर कोचाबांबामधूनन जवळपास १९१ मृतदेह ताब्यात घेतले आहेत. त्याशिवाय, आलावा पाज शहरातून १४१ मृतदेह ताब्यात घेतले आहेत. हे मृतदेह घरातच कुजत होते अथवा रस्त्यावर पडले होते. नॅशनल पोलीस संचालक कर्नल इवान रोजास यांनी सांगितले की, अशी भयावह परिस्थिती त्यांनी याआधी कधीही पाहिली नव्हती. देशातील सर्वात मोठे शहर सांताक्रूझमधील रस्त्यांवरूनही ६८ मृतदेह ताब्यात घेण्यात आले. या शहराच्या अवतीभोवतीच्या परिसरात, भागात देशातील एकूण बाधितांपैकी ५० टक्के रुग्ण याच ठिकाणचे आहेत. या एका शहरात आतापर्यंत ६० हजारांहून अधिक प्रकरणे समोर आली आहेत.

 

फरीदाबाद: फरीदाबादमधील सेक्टर १० मध्ये राहणाऱ्या एका डॉक्टरला हनी ट्रॅपमध्ये अडकवल्याचा धक्कादायक प्रकार उघडकीस आला आहे. क्राइम ब्रँचची पोलीस असल्याची बतावणी करून डॉक्टरला आपल्या जाळ्यात अडकवलं. त्यानंतर त्याला हॉटेलात बोलावलं. त्यानंतर त्याच्यासोबत अश्लिल फोटो आणि व्हिडिओ बनवला. त्यानंतर डॉक्टरला ब्लॅकमेल करण्यास सुरुवात केली. पोलिसांनी या टोळीचा पर्दाफाश केला आहे.

मिळालेल्या माहितीनुसार, एका डॉक्टरला तरुणी आणि तिच्या साथीदारांनी हनी ट्रॅपमध्ये अडकवलं. त्यानंतर त्याला एका हॉटेलात बोलावलं. तेथे आधीच तिचे दोन साथीदार होते. त्यांनी डॉक्टरसोबतचे अश्लिल फोटो आणि व्हिडिओ काढले. त्यानंतर तरुणीसह या टोळीनं त्याला ब्लॅकमेल करण्यास सुरुवात केली. हे प्रकरण जास्त ताणू नका, असं डॉक्टरनं त्यांना सांगितलं. मात्र, टोळीनं त्याच्याकडे १० लाख रुपयांची मागणी केली. याबाबत महिला पोलीस ठाण्याच्या एसीपी धारणा यादव यांनी सांगितलं की, या टोळीचा भंडाफोड करण्याची कामगिरी पोलीस आयुक्तांनी क्राइम ब्रँचकडे सोपवली होती. सेक्टर ८५ क्राइम ब्रँचच्या अधिकाऱ्यांनी सूत्रांच्या मदतीने या टोळीची माहिती घेतली. या टोळीत ३ सदस्य आहेत. त्यातील दोघे जण हे स्वतःला हरयाणा पोलिसांत असल्याची बतावणी करतात अशी माहिती मिळाली. त्यांच्यासोबत एक २५ वर्षीय महिला असून, ती दिल्लीची रहिवासी असल्याचं कळलं.

वेलिंग्टन: मंत्रिपदावर असताना काही मंत्र्यांवर अनैतिक कामे, भ्रष्टाचार करत असल्याचे आरोप होतात. मात्र, त्यांना मंत्रिमंडळातून वगळण्याचा निर्णय फार कमी वेळा घेतला जातो. त्याहीपेक्षा त्यांना क्लिन चीट कशी मिळेल यावर सत्ताधाऱ्यांचा कटाक्ष असल्याचा आरोपही होतो. मात्र, न्यूझीलंडमध्ये एक वेगळंच प्रकरण समोर आले आहे. आपल्या खात्यातील एका महिला कर्मचाऱ्यासोबत अनैतिक संबंध ठेवल्याच्या प्रकरणावरून एका मंत्र्याची मंत्रिमंडळातून हकालपट्टी करण्यात आली आहे. न्यूझीलंडच्या पंतप्रधान जेसिंडा अर्डर्न यांनी ही माहिती दिली. अर्डर्न यांच्या मंत्रिमंडळातील मंत्री इयान लीस-गॅलोवे यांचे एका महिलेसोबत जवळपास एक वर्षापासून संबंध होते.

ही महिला मंत्री लीस-गॅलोवे यांच्या अखत्यारीत असलेल्या एका विभागात कार्यरत होती. त्यानंतर तिची नेमणूक मंत्र्यांच्या कार्यालयात करण्यात आली होती. हकालपट्टी झालेले मंत्री लीस-गॅलोवे यांनी सांगितले की, पंतप्रधान अर्डर्न यांनी घेतलेला निर्णय मान्य आहे. मी केलेल्या चुकीबद्दल माफी मागितली आहे. येत्या सप्टेंबरमध्ये होणाऱ्या निवडणुकीत आपण उमेदवारी दाखल करणार नसल्याचे त्यांनी सांगितले. मंत्री म्हणून काम करत असताना आपण चुकीच्या पद्धतीने काम केले असून पदावर राहण्याचा नैतिक अधिकार नसल्याचेही त्यांनी म्हटले. पंतप्रधान जेसिंडा अर्डर्न यांनी म्हटले की मंगळवारी लीस-गॅलोवे यांच्यावरील आरोपांची माहिती समजल्यानंतर त्यांच्याशी सायंकाळी या मुद्यावर चर्चा करून लीस-गॅलोवे यांना प्रश्न विचारले. त्यानंतर त्यांना मंत्रिमंडळातून बाहेर काढण्याचा निर्णय घेण्यात आला. हकालपट्टी झालेले मंत्री लीस-गॅलोवे हे विवाहीत आहेत.

दरम्यान, एक दिवसआधी विरोधी पक्षाचे खासदार अॅण्ड्रयू फॅलोन यांच्यावर अनेक महिलांना अश्लील छायाचित्रे पाठवल्याचा आरोप करण्यात आला होता. त्यानंतर त्यांनी आपल्या खासदारकीचा राजीनामा दिला. फॅलोन यांनी आरोपांवर कोणतीही टिप्पणी केली नाही. मात्र, आपल्यावरील कथित आरोपांबाबत माफी मागत असल्याचे सांगितले.

वॉशिंग्टन: अमेरिका आणि चीनमधील वाद शिगेला पोहचत असून अमेरिकेने ह्युस्टन येथील चीनच्या महावाणिज्य दूतावास बंद करण्याचे आदेश दिले आहेत. ह्युस्टन येथील दूतावास ७२ तासांमध्ये बंद करण्याचे आदेश अमेरिकेने दिले आहेत. अमेरिकेच्या या कारवाईनंतर चीननेही प्रत्युत्तर देण्याची धमकी दिली आहे.

अमेरिका आणि चीनमधील तणाव दिवसेंदिवस वाढत आहे. व्यापार करार आणि त्यानंतर झालेल्या करोनाच्या संसर्गामुळे दोन्ही देशांमध्ये तणाव निर्माण झाला आहे. त्यातच आता अमेरिकेने ह्युस्टन येथील महावाणिज्य दूतावास बंद करण्याचे आदेश दिले आहेत. त्यासाठी अमेरिकेने चीनला ७२ तासांची मुदत दिली आहे. अमेरिकेच्या या कारवाईमुळे चीन संतप्त झाला असून परराष्ट्र मंत्रालयाने तीव्र प्रतिक्रिया दिली आहे.

चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने अमेरिकेच्या या कारवाईचा तीव्र निषेध केला आहे. अमेरिकेनेही कारवाई मागे न घेतल्यास चीन प्रत्युत्तरादाखल आवश्यक ती कारवाई करेल, अशा इशाराही चीनने दिला आहे.

दरम्यान, अमेरिकेने दूतावास बंद करण्याचे आदेश दिल्यानंतर चीनच्या दूतावासात गोंधळ उडाला. महावाणिज्य दूतावासातील कर्मचाऱ्यांनी मोठ्या प्रमाणावर कागदपत्रे जाळली असल्याचे समोर आले आहे. दूतावास कार्यालयात दिसत असलेल्या आगीमुळे ह्युस्टन अग्निशमन दलाचे जवान घटना स्थळी दाखल झाले. मात्र, त्यांना दूतावास कार्यालयात प्रवेश नाकारण्यात आला.

 

वॉशिंग्टन: अमेरिका आणि चीनमधील वाद शमण्याची चिन्हं नाहीत. करोना संसर्गासाठी चीन जबाबदार असल्याचा आरोप अमेरिकेकडून सातत्याने होत असताना आता आणखी एक आरोप अमेरिकेने चीनवर केला आहे. करोना प्रतिबंधक लस विकसित करणाऱ्या कंपन्या चिनी हॅकर्सच्या निशाण्यावर असल्याचे अमेरिकेच्या न्याय विभागाने म्हटले आहे.

अमेरिकेच्या न्याय विभागाच्या अधिकाऱ्यांनी म्हटले की, नुकत्याच काही महिन्यांमध्ये करोना लस आणि उपचारांशी संबंधित असणाऱ्या काही कंपन्यांची नावे सार्वजनिकरीत्या जाहीर झालेली आहेत. या कंपन्यांच्या नेटवर्किंगमधील कमतरता हॅकर्सने शोधून काढले असल्याचे अधिकाऱ्यांनी म्हटले. इतकंच नव्हे तर चिनी हॅकर्सच्या निशाण्यावर जगभरातील इतर कंपन्यादेखील आहेत. या कंपन्यांच्या व्यापाराशी संबंधित कोट्यवधी डॉलर किंमतीची माहिती या चिनी हॅकर्सने चोरली असल्याचा दावा अमेरिकेने केला आहे.

दरम्यान, याआधीदेखील रशियाच्या गुप्तचरांकडून करोना लशीबाबतची माहिती चोरी करण्याचा प्रयत्न होत असल्याचा आरोप अमेरिका, ब्रिटन आणि कॅनडाने केला होता. ब्रिटनच्या नॅशनल सायबर सिक्युरिटी सेंटरने (एनसीएससी) म्हटले की, करोना प्रतिबंधक लस विकसित करणाऱ्या संस्थांना रशियन हॅकर्स लक्ष्य करत आहेत. रशियन हॅकर्स हे रशियन गुप्तचर संस्थेचा भाग म्हणून काम करत असल्याचा दावा त्यांनी केला आहे. एनसीएससीचे संचालक पॉल चिचेस्टर यांनी हे कृत्य निंदनीय असून मेलवेअरचा वापर करून हॅकर्सने करोना लशीबाबत असलेली माहिती चोरी करण्याचा प्रयत्न केला आहे. अमेरिका, ब्रिटन आणि कॅनडाने म्हटले की, हॅकिंग करणारे 'एपीटी२९' करोना संसर्गाशी संबंधित माहिती चोरत आहेत. कोझी बिअर म्हणून ओळखला जाणारा हॅकर्सचा गट हा रशियाच्या गुप्तचर संस्थेचा एक भाग आहे.

वॉशिंग्टन: करोना साथीला जबाबदार असल्याबद्दल चीनविरोधात अमेरिकी नागरिकांना खटला दाखल करण्याची परवानगी देण्याची तरतूद असलेले विधेयक रिपब्लिकन पक्षाच्या काही सिनेटरनी सादर केले आहे. अमेरिकी नागरिकांना फेडरल कोर्टात चीनविरोधात खटला दाखल करण्याची परवानगी देण्याची तरतूद या विधेयकात आहे. सिनेटर मार्था मॅकसॅली, मार्शा ब्लॅकबर्न, टॉम कॉटन, जॉश हॅवले, माइक राउंड्स आणि थॉम टिलिस यांनी हे विधेयक सादर केले आहे. करोना साथीस जबाबदार असल्याबद्दल चीनविरोधात खटला भरण्याची तरतूद यात आहे. याशिवाय, फेडरल कोर्टांना चिनी मालमत्ता जप्त करण्याचे अधिकारही या विधेयकात देण्यात आले आहेत.

'चिनी कम्युनिस्ट पक्षाचा खोटेपणा आणि कपटाचा बळी ठरलेले अमेरिकी नागरिक, नातेवाइक गमावलेले नागरिक, व्यावसायिक नुकसान झालेले नागरिक; तसेच कोव्हिड-१९मुळे वैयक्तिक नुकसान झालेल्या नागरिकांना भरपाईसाठी चीनविरोधात खटला भरण्याची संधी मिळालया हवी,' असे सिनेटर मॅकसॅली यांनी सांगितले. करोना साथ लपवण्याचे; तसेच आता या साथीच्या काळात नफेखोरी करण्याचे परिणाम चीनला भोगावेच लागतील, असे ब्लॅकबर्न यांनी सांगितले.

 

लंडन: करोनाच्या संसर्गाने जगभरात थैमान घातले असताना करोनाला अटकाव करण्यासाठी प्रयत्न सुरू आहेत. करोना प्रतिबंधक लशींवर संशोधन सुरू असताना डॉक्टरांकडून विविध औषधांचा वापर बाधितांवर उपचारासाठी करण्यात येत आहे. ब्रिटनमधील औषध कंपनी Synairgen एक मोठा दावा केला असून इंटरफेरान बीटा प्रोटीनवर आधारीत असलेले औषध SNG001 या औषधामुळे करोनाबाधितांना मोठा दिलासा मिळत असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. या औषधाच्या वापरामुळे रुग्णांना आयसीयूची आवश्यकता कमी लागत असल्याचेही म्हटले आहे.

करोनाबाधितांच्या उपचारासाठी वापरण्यात आलेले SNG001 या औषधामध्ये नैसर्गिकरीत्या अॅण्टीव्हायरल प्रोटीन असून हे औषध फुफ्फुसापर्यंत जाते. ज्या रुग्णांना SNG001 हे औषध दिले. त्यांच्यामध्ये गंभीर आजारी होण्याचा धोका ७९ टक्के प्रमाणावर कमी झाला. इतकंच नव्हे तर ज्यांना हे औषध दिले, ते रुग्ण इतर करोनाबाधितांच्या तुलनेने लवकर बरे झाले असल्याचाही दावा करण्यात आला आहे.

या औषधामुळे करोनाबाधितांना श्वास घेण्यासही कमी त्रास होत असल्याचे समोर आले आहे. ३० मार्च ते २७ मे दरम्यान १०७ रुग्णांचा अभ्यास करण्यात आल्यानंतर ही बाब समोर आली. Synairgen कंपनीनेच सीईओ रिचर्ड मर्सडेन यांनी सांगितले की, SNG001 हे औषध रुग्णालयात दाखल असलेल्या बाधितांच्या उपचारांसाठी महत्त्वाचे ठरू शकते. सरकार आणि अन्य महत्त्वाच्या संस्थांसोबत एकत्र काम करण्याचा आमचा प्रयत्न असून लवकरात लवकर करोनावर औषध निर्मिती करता येऊ शकते.

तेहरान: इराणमधील चाबहार रेल्वे प्रकल्पातून भारताला वगळण्यात आले नसल्याचे स्पष्टीकरण इराणने दिले आहे. इराण-चीनमध्ये होत असलेल्या कराराच्या पार्श्वभूमीवर इराणने हा निर्णय घेतला असल्याचे वृत्त होते. मात्र, इराणने या वृत्ताचा इन्कार केला असून भारत अजूनही या प्रकल्पाचा हिस्सा असल्याचे इराणने म्हटले आहे.

चाबहार रेल्वे प्रकल्पातून भारताला वगळण्यात आले असल्याचे वृत्त अफवा असल्याचे इराणने म्हटले आहे. या वृत्तामागे काहीतरी कट असावा अशी शक्यता इराणचे परिवहन आणि रेल्वे विभागाते उपमंत्री सईद रसौली यांनी सांगितले. हा रेल्वे मार्ग चाबहार बंदरापासून ते जहेदान दरम्यान असणार आहे. चाबहार रेल्वे प्रकल्पानुसार, चाबहार बंदरापासून जहेदानपर्यंत रेल्वे मार्ग सुरू करण्यात येणार होता. काही दिवसांपूर्वी इराणचे परिवहन आणि शहर विकास मंत्री मोहम्मद इस्लामी यांनी ६२८ किमी लांबीच्या रेल्वे मार्गाचे उद्घाटन केले होते. या रेल्वे मार्ग अफगाणिस्तानच्या सीमेपर्यंत जाणार असल्याचे वृत्त 'द हिंदू'ने दिले होते. हा रेल्वे प्रकल्प मार्च २०२२ पर्यंत पूर्ण करण्यात येणार आहे. या रेल्वे प्रकल्पासाठी भारताकडून निधी येणार होता. मात्र, कराराच्या चार वर्षानंतरही हा निधी न आल्यामुळे इराणने भारताला या प्रकल्पातून वगळले असल्याचे वृत्त 'द हिंदू'ने दिले होते.

बीजिंग: जगभरातील जवळपास २०० देशांमध्ये फैलावलेल्या करोना विषाणूला अटकाव करण्यासाठी विविध पातळीवर प्रयत्न सुरू असतानाच विषाणूला अटकाव करणारी लस दृष्टीपथात दिसू लागली आहे. ऑक्सफोर्ड विद्यापीठाने विकसित केलेली लस पहिल्या टप्प्यात यशस्वी झाल्याचे वृत्त असताना आता चीनच्या आणखी एका लशीने चाचणीचा दुसरा टप्पाही पार केला आहे.

वैद्यकीय क्षेत्रातील नियतकालिक दि लँसेंटमध्ये याबाबतचे संशोधन प्रकाशित झाले आहे. चीनची ही लस 'अॅडनोव्हायरस टाइप-५' वायरल वेक्टरपासून विकसित केली आहे. या लशीची निर्मिती CanSino Biologics आणि लष्कराची एक युनिट संयुक्तपणे करत आहे. या लशीची चाचणी वुहानमध्ये करण्यात आली होती. या लशीची चाचणी १८ वर्षावरील निरोगी स्वयंसेवकांवर करण्यात आली.

या दुसऱ्या टप्प्यातील चाचणीत ६०३ स्वयंसेवकांचा समावेश होता. लस टोचल्यानंतर शरीरात २८ व्या दिवशी व्हायरसशी लढणारे अॅण्टीबॉडी आढळून आले. ही लस अद्याप करोनाबाधितांना देण्यात आली नाही. 'द लँसेंट'ने म्हटले की, तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणीनंतर ही लस SARS-CoV-2 च्या विषाणूशी लढण्यास किती सक्षम आहे, हे समोर येईल. मानवी चाचणी दरम्यान ही लस टोचल्यानंतर त्याचे कोणतेही दुष्परिणाम झाले नाहीत. ही लस सुरक्षित असल्याचाही दावा करण्यात आला आहे. चीनच्या आणखी एका लशीने तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणीला सुरुवात केली आहे. या टप्प्यात १५ हजारजणांना लस देण्यात येणार आहे.

 

जेरुसलेम: करोनाच्या आजारामुळे जगभरात भीषण परिस्थिती निर्माण झाल्याचे चित्र आहे. करोनाबाधित असलेल्या आपल्या नातेवाईकांना भेटण्यास, त्यांची सुश्रुषा करण्यासही बंधने आली आहेत. करोनाबाधित आईवर रुग्णालयात उपचार सुरू असताना तिला पाहण्यासाठी डॉक्टरांनी एका युवकाला नकार दिला. मात्र, आईच्या भेटीसाठी व्याकूळ झालेला हा मुलगा थेट रुग्णालयाच्या भिंतीवर चढून खिडकीत बसत होता. मात्र, या मुलाला आईच्या अखेरच्या दिवसात तिच्याशी दोन शब्दही बोलता आले नाहीत.

करोनाच्या या संकट काळात मानवी संवेदनशीलतेची कसोटी लागत असताना काही घटनांमुळे अनेकांची मने सुन्न झाली आहेत. अशीच एक हृदयद्रावक घटना समोर आली आहे. ही घटना पॅलेस्टाइनमधील असून या युवकांचे छायाचित्र सध्या सोशल मीडियावर व्हायरल झाले आहे. पॅलेस्टाइनमधील या युवकाच्या आईला करोनाची बाधा झाल्यानंतर तिला रुग्णालयात दाखल करण्यात आले. मात्र, आईला भेटण्यासाठी डॉक्टरांनी त्या युवकाला परवानगी दिली नाही. त्यामुळे उपचार घेत असलेल्या आईला पाहण्यासाठी त्याने रुग्णालयाच्या खिडकीचा आधार घेतला. रुग्णालयाची भिंत चढून हा युवक उपचार घेत असलेल्या आईला खिडकीमध्ये बसून अनेक तास पाहत असायचा. मात्र, या युवकाच्या आईचा १६ जुलै रोजी मृत्यू झाला.

इस्लामाबाद: पाकिस्तानने आपला जिवलग मित्र असलेल्या चीनला झटका दिला आहे. पाकिस्तान सरकारने चिनी कंपनीच्या बिगो अॅपवर बंदी घातली असून टिकटॉकला इशारा दिला आहे. पाकिस्तानने याआधी पब्जी गेमवर बंदी घातली होती. भारताने सुरक्षितेच्या कारणास्तव चीनच्या ५९ अॅपवर बंदी घातली. त्यानंतर अमेरिकेतही चिनी अॅपवर बंदी घालण्याचा विचार सुरू आहे.

पाकिस्तानमध्ये या अॅपमुळे समाजात अश्लीलता वाढत असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. मागील आठवड्यात टिकटॉकवर बंदी घालण्यासाठी लाहोर हायकोर्टात याचिका दाखल करण्यात आली आहे. सध्याच्या काळात हे अॅप अतिशय घातक असल्याचा आरोप याचिकाकर्त्यांनी केला. टिकटॉक सोशल मीडियावर प्रसिद्धी मिळवण्यासाठी आणि रेटिंगच्या लालसेतून हे अॅप सध्या पोर्नोग्राफीचे स्रोत झाले असल्याचाही आरोप याचिकाकर्त्याने केला आहे. टिकटॉक आणि बिगो अॅपविरोधात अनेकांनी पाकिस्तान सरकारकडे तक्रारी दाखल केल्या होत्या.

पाकिस्तान सरकारने म्हटले की, दोन्ही अॅप कंपन्यांना याबाबत विचारणा झाली होती. मात्र, त्यांच्याकडून समाधानकारक उत्तर आले नाही. त्यानंतर बिगो अॅपवर बंदी घातली असून टिकटॉकला इशारा देण्यात आला आहे. याआधी पाकिस्तानमधील इम्रान खान सरकारने ऑनलाइन गेम पब्जीवर बंदी घातली होती. हा गेम इस्लामविरोधी असून या गेमचे युवकांना व्यसन लागत असल्याचा दावा करत पब्जीवर बंदी घालण्यात आली.

भारत आणि पाकिस्तान हे पारंपरिक शत्रू आहेत. पण या दोन्ही देशांमधील क्रिकेटच्या सामन्यांना मात्र तुफान गर्दी होते. या दोन्ही देशांतील सामना म्हणजे मैदानावरेच युद्धच. दोन्ही देशांच्या सामन्या खेळाडू आपला जीव ओतून कामगिरी करत असतात. पण भारताच्या एका क्रिकेटपटूला तर थेट पाकिस्तानमधून पत्र यायची, असा खुलासा या क्रिकेटपटूनेच आज केला आहे.

भारत आणि पाकिस्तान यांच्यातील सामन्याची उत्सुकता क्रिकेट विश्वाला असते. त्यामुळे भारत आणि पाकिस्तान यांच्यातील सामन्यांमध्ये प्रचंड दडपण खेळाडूंवर असते. कधी मैदानात खेळाडूंचे वाद विवादही होतात. पण मैदानातील खेळाचा बाहेरच्या आयुष्यात संबंध ठेवायचा नसतो, असे म्हटले जाते. पण भारताच्या क्रिकेटपटूबाबत मात्र असे घडताना दिसले नाही. कारण भारताच्या एका क्रिकेटपटूला थेट पाकिस्तानमधून पत्र यायची, ही बाबा आता समोर आली आहे.

प्‍योंगयांग: उत्तर कोरियामधील भारतीय राजदूत अतुल एम गोतसर्वे यांची सध्या उत्तर कोरियामध्ये चर्चा सुरू आहे. भारतीय राजदूत गोतसुर्वे यांनी उत्तर कोरियाचे राष्ट्राध्यक्ष किम जोंग उन यांना शुभेच्छा दिल्या होत्या. भारताने दिलेल्या शुभेच्छांना शासकीय वृत्तपत्रात आणि वृत्तवाहिन्यांमध्ये स्थान मिळाले. उत्तर कोरियात फार कमी वेळा अशाप्रकारची दखल घेतली जाते. त्यामुळे भारतीय राजदूताने दिलेल्या शुभेच्छांची चर्चा सुरू आहे.

किम जोंग उन यांनी आठ वर्षांपूर्वी मार्शल म्हणून पदभार स्विकारला होता. त्यानिमित्ताने भारतीय दूतावासाकडून किम यांना शुभेच्छा देणारे पत्र आणि पुष्पगुच्छ पाठवण्यात आला. त्याशिवाय किम यांना पुढील कारकीर्दीसाठी व चांगल्या आरोग्यासाठी शुभेच्छा दिल्या.

उत्तर कोरियातील सरकारी वृत्तपत्र रोडोंग सिनमुनमध्ये या बातमीला प्रमुख स्थान देण्यात आले. हे वृत्तपत्र उत्तर कोरिया सरकारची अधिकृत भूमिका व्यक्त करत असतो. जगाच्या मुख्य प्रवाहापासून पोलादी भिंतीआड असणाऱ्या उत्तर कोरियात इतर देशांच्या या वृत्तांना फार कमी वेळा स्थान दिले जाते. भारताचे आणि उत्तर कोरियाचे संबंध चांगले आहेत. कोरियन देशांमध्ये शांतता प्रस्थापित व्हावी यासाठी भारताने महत्त्वाची भूमिका बजावली आहे. कोरियन युद्धादरम्यान भारताने दोन लाख २० हजार नागरिकांवर उपचार केले होते.

अबुधाबी: करोनाच्या संसर्गावर मात करण्यासाठी जगभरातील शास्त्रज्ञांकडून प्रयत्न सुरू आहेत. काही लशींच्या या निर्णायक टप्प्यावर आहे. आता आणखी एका लशीची तिसऱ्या टप्प्यातील लस चाचणी सुरू झाली आहे. तिसऱ्या टप्प्यातील लस चाचणी सुरू करणारी ही पहिलीच कंपनी आहे.

चीनच्या सायनोफार्म कंपनीने ही लस विकसित केली आहे. या तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणीत १५ हजार नागरिकांना लस टोचण्यात येणार आहे. संयुक्त अरब अमिरातीमधील अबुधाबी ही चाचणी करण्यात येणार आहे. या क्लिनिकल चाचणीची सुरुवात युएईचे शेख अब्दुला बिन मोहम्मद अल हमद यांनी केली. जागतिक आरोग्य संघटनेकडे या लसीची नोंदणी करण्यात आली आहे. संयुक्त अरब अमिरातीमध्ये जवळपास २०० देशांच्या नागरिकांचे वास्तव्य आहे. त्यामुळेच या ठिकाणी तिसऱ्या टप्प्यातील लस चाचणी करण्याची परवानगी देण्यात आली आहे. तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणीत १८ ते ६० वर्षापर्यंतच्या वयोगटातील स्वयंसेवकांचा समावेश आहे.

या लशीची तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी अत्यंत कठोर नियमांमध्ये करण्यात येत आहे. या लशीची पहिल्या व दुसऱ्या टप्प्यातील चाचणी यशस्वी झाली. त्यानंतर आता तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी सुरू करण्यात येत आहे. सायनोफार्म कंपनीचे अध्यक्ष यांग शिआओमिंग यांनी तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी यशस्वी होईल असे म्हटले आहे. याआधीच्या चाचणी दरम्यान ही लस २८ दिवसांमध्ये दोन वेळेस दिल्यानंतर १०० टक्के स्वयंसेवकांमध्ये अॅण्टीबॉडी विकसित झाली असल्याचा दावा कंपनीने केला आहे.

इराणने चाबहार-जाहिदान रेल्वे प्रकल्पातून भारताला वगळल्यानंतर जगभरातील माध्यमांमध्ये हा भारताला सर्वात मोठा झटका असल्याची बातमी झळकली. त्याचं कारणही तसंच आहे. इराण हा देश भारताचा पारंपरिक मित्र राहिलेला आहे. भौगोलिकदृष्ट्या बाजूला पाकिस्तान, अफगाणिस्तान आणि मध्य आशियात जाण्याचा मार्ग असलेला इराण भारतासाठी अत्यंत महत्त्वाचा आहे. भविष्यात भारत या प्रकल्पाचा हिस्सा होऊ शकतो असं परराष्ट्र मंत्रालयने स्पष्ट केलं असलं तरी परिस्थिती वेगळी आहे. भारताचा शत्रू बनलेल्या चीनने इराणला आर्थिक बळ दिलं आणि इराणसारखा मित्रही भारताच्या हातून निसटला. अमेरिकेच्या निर्बंधाच्या भीतीने भारताने चाबहार बंदराकडेही दुर्लक्ष केलं. परिणामी चीनने आता इराणमध्ये पाय रोवण्यास सुरुवात केली आहे.

भारताला एक नवा झटका
भारताने यापूर्वीच अमेरिकेच्या निर्बंधाच्या भीतीने इराणकडून अत्यंत कमी खर्चात होणारी तेल आयात थांबवली होती. आता गॅस क्षेत्रातही भारताची चिंता वाढली आहे. आपण स्वतःच्या बळावरच इराण गॅस फिल्ड विकसित करणार असल्याचं इराणने स्पष्ट केलं. करारानुसार भारतीय सरकारी कंपनी ओएनजीसी या प्रकल्पाचा हिस्सा होती. पण नंतर इराणने भूमिका बदलल्याने या करारावर परिणाम झाला आहे. दरम्यान, काही काळानंतर भारतासाठी या प्रकल्पाचे दरवाजे खुले असल्याचंही इराणने म्हटलं आहे. इराणचं नैसर्गिक गॅस क्षेत्र २००८ मध्ये खुलं करण्यात आलं होतं, ज्यासाठी भारताकडूनही हक्क मिळवण्याचा प्रयत्न सुरू होता. पण अमेरिकेकडून मिळालेल्या निर्बंधांच्या इशाऱ्यानंतर भारताचं नियोजन बिघडलं.

वॉशिंग्टन: अमेरिकेत करोनाचे थैमान सुरूच असून बाधितांच्या संख्येत दिवसेंदिवस वाढ होत आहे. मागील २४ तासात ६८ हजारांहून अधिक करोनाबाधितांची नोंद करण्यात आली. आतापर्यंतची ही सर्वाधिक संख्या आहे. तर, ९७४ करोनाबाधितांच्या मृत्यूची नोंद करण्यात आली आहे.

जॉन हॉपकिन्स विद्यापीठाने दिलेल्या माहितीनुसार, अमेरिकेतील करोनाबाधितांची संख्या ३५ लाखांहून अधिक झाली आहे. त्यामध्ये एक लाख ३८ हजारजणांचा मृत्यू झाला आहे. जगभरात करोनाबाधितांची संख्या एक कोटी ३० लाखांहून अधिक झाली असून ५ लाख ६० हजारजणांना प्राण गमवावे लागले आहेत. अमेरिकेत लॉकडाउनचे निर्बंध शिथिल करण्यात आल्यानंतर मोठ्या संख्येने लोक घराबाहेर पडत आहेत. यामध्ये युवकांची संख्या अधिक आहे.

जगभरातील २०० देशांमध्ये करोनाचा संसर्ग फैलावला आहे. करोनावर नियंत्रण ठेवण्यास काही मोजक्याच देशांना यश आले आहे. अमेरिका, ब्राझील आणि भारतामध्ये करोनाचे सर्वाधिक रुग्ण आढळत आहेत. अमेरिका आणि भारतातील एकत्रित करोनाबाधितांची संख्या एक लाखाच्या आसपास जाते. तर, ब्राझीलमध्ये ही दररोज सरासरी ३० हजार करोनाबाधित आढळत आहेत.

लंडन: सध्या सर्वत्र करोनाने थैमान घातले असताना या महासंकटाला आळा घालणारी लस कधी निर्माण होते, याकडे अवघ्या जगाचे लक्ष लागले आहे. अशातच कोविड-१९च्या लसचाचणीत उल्लेखनीय यश मिळाल्याचा दावा ऑक्सफर्ड विद्यापीठातील संशोधकांनी केला आहे. प्राथमिक टप्प्यात दुहेरी संरक्षण देणाऱ्या लशीची मानवी चाचणी यशस्वी झाल्याचे या संशोधकांचे म्हणणे आहे.

इंग्लंडमधील नागरिकांच्या एका गटावर ही चाचणी करण्यात आली होती. त्यानंतर त्यांच्या रक्ताचे नमुने घेतले असता, त्यांच्या शरीरात अॅण्टीबॉडीज आणि विषाणूंना मारणाऱ्या पेशीची (टी-सेल) निर्मिती झालेली आढळून आल्याचे एका वरिष्ठ संशोधकाने 'द टेलिग्राफ' या वृत्तपत्राला सांगितले. अॅण्टीबॉडीज महिनाभरात निघून जात असल्या, तरी टी-सेल अनेक वर्षे रक्ताभिसरणात राहू शकतात, असे वेगवेगळ्या अभ्यासांतून स्पष्ट झाले असल्याने हे संशोधन महत्त्वाचे मानले जात आहे. ऑक्सफर्ड विद्यापीठाचे हे संशोधन आशादायी असे असले, तरी ही लस जीवघेण्या कोविड-१९ विषाणूचा सामना करण्यासाठी दीर्घवेळ रोगप्रतिकार शक्ती पुरवू शकते का, हे स्पष्ट झाले नसल्याने याबाबत प्रश्न उपस्थित केला जात आहे.

'ऑक्सफर्डची लस दोन पातळ्यांवर यशस्वी झाली आहे. याद्वारे अॅण्टीबॉडीज आणि टी-सेलची निर्मिती करण्यात यश आले आहे. या दोहोंच्या माध्यमातून आपण नागरिकांना सुरक्षित ठेवू शकू, अशी आशा आहे. आत्तापर्यंतचे हे सर्वोत्तम यश आहे. परंतु, अद्याप बराच पल्ला गाठायचा आहे', असे यातील एका संशोधकाने सांगितले.

वॉशिंग्टन: आपल्या सूर्यमालेतील केंद्र स्थानी असणारा आणि पृथ्वीवरील जीवसृष्टीत आणि मानवी संस्कृती महत्त्वाची भूमिका असणाऱ्या सूर्याबद्दलची माहिती जाणून घेण्यासाठी अनेकजण उत्सुक आहे. सूर्याबद्दल अंतराळ शास्त्रज्ञांचा अभ्यास सुरू आहे. युरोपीयन अंतराळ संस्था आणि नासाने आतापर्यंतचे सूर्याच्या जवळून घेतलेले छायाचित्र जाहीर केले आहेत. सूर्यावरील प्रत्येक भाग एखाद्या असंख्य 'कॅम्पफायर' प्रमाणे दिसत आहे.

सूर्याचा अभ्यास करण्यासाठी युरोपीयन अंतराळ संस्था आणि अमेरिकेची अंतराळ संस्था नासाने फेब्रुवारी एक सोलर ऑर्बिटर प्रक्षेपित केले होते. सोलर ऑर्बिटरने घेतलेले छायाचित्र गुरुवारी प्रसिद्ध करण्यात आली. ही छायाचित्रे मागील महिन्यात काढण्यात आली होती. त्यावेळी सोलर ऑर्बिटर हा सूर्यापासून जवळपास ४८ दशलक्ष मैल दूर होता. हे अंतर पृ्थ्वी आणि सूर्या दरम्यान असणाऱ्या अंतराचे निम्मे अंतर आहे.

मॉस्को: काही प्रेमप्रकरणांची जगभरात चर्चा होते असते. त्याला वेगवेगळी कारणे असतात. सध्या असंच एक प्रेमप्रकरण चर्चेत आहे मात्र, त्याच कारण चक्रावणारे आहे. रशियात धक्कादायक प्रकार समोर आला. एका आईचा आपल्याच मुलावर जीव जडला. मुलापासून दिवस गेल्यानंतर दोघेही विवाह बंधनात अडकले आहेत.

सध्या या दोघांच्या प्रेम प्रकरणाची आणि लग्नाची सोशल मीडियावर जोरदार चर्चा सुरू आहे. मुलाचे व्लामदिमीर असून त्याचे वय २० वर्ष आहे. तर, ३५ वर्षीय मरिना ही सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर आहे. मरिनाचे लग्न व्लामदिमीरचे वडील अलेक्स यांच्यासोबत झाला होता. त्यावेळेस अलेक्स यांचा मुलगा व्लादिमीर हा सात वर्षांचा होता. त्यावेळेस मरिनाचे वय २२ वर्ष होते. काही वर्षांपूर्वी अलेक्स आणि मरिना यांचा घटस्फोट झाला होता. आता मरिना ही ३५ वर्षांची असून व्लादिमीर हा २० वर्षांचा असून सध्या तो शिक्षण घेत आहे. मरिना ही मीडिया इन्फ्लूएन्सर म्हणून प्रसिद्ध आहे.

अलेक्सी आणि मरिना यांच्यातील घटस्फोटाचे कारण व्लादिमीर असल्याचे वृत्त स्थानिक माध्यमांनी दिले आहे. मरिना आणि व्लादिमीर यांच्यात प्रेमसंबंध सुरू असल्याची कुणकुण अलेक्सीला लागली होती. त्यानंतर त्यांना एकांतात पाहिल्यानंतर अलेक्सीने मरिनाला काही वर्षापूर्वी घटस्फोट दिला. मरिना सध्या गरोदर असून काही महिन्यातच व्लादिमीर आणि मरिना बाळाचे पालक होणार आहेत. मरिनाने नोंदणीकृत लग्न केल्यानंतर व्हिडिओ सोशल मीडियावर शेअर केला आहे.

दुबई: करोनाच्या आजारामुळे जगभरात चिंतेचे वातावरण आहे. त्यातच खासगी रुग्णालयात दाखल केल्यानंतर येणाऱ्या अव्वाच्या सव्वा खर्चाची अनेकांना धास्ती असते. दुबईत एका भारतीयाला करोनाची बाधा झाली. त्याला उपचारासाठी रुग्णालयातही दाखल केले. मात्र, रुग्णालयाने तब्बल एक कोटींचे बिल त्याच्या कुटुंबीयांकडे सोपवले. पुढे जे झाले त्याचा विचार सध्याच्या परिस्थितीत कोणीच करू शकत नाही. या रुग्णालयाने या भारतीय रुग्णाचे सर्व बिल माफ केले.

तेलंगणामधील जगतियाल जिल्ह्यातील ४२ वर्षीय ओडनाला राजेश यांना २३ एप्रिल रोजी प्रकृती बिघडली. करोना चाचणी केल्यानंतर त्यांना करोना झाला असल्याचे समोर आले. त्यानंतर राजेश यांना एका रुग्णालयात दाखल करण्यात आले. जवळपास ८० दिवस रुग्णालयात त्यांच्यावर उपचार करण्यात आले. या ८० दिवसांच्या उपचाराचे बिल समोर आले तेव्हा राजेश हादरून गेले. या ८० दिवसांचे बिल ७ लाख ६२ हजार ५५५ दिरम (स्थानिक चलन) म्हणजेच जवळपास एक कोटी ५२ लाख रुपये आले होते.

वॉशिंग्टन: एका बाजूला करोनाचे थैमान सुरू असताना दुसरीकडे मोठा दिलासा देणारी बातमी समोर आली आहे. अमेरिकेतील अमेरिकेतील मॉडर्ना इंक (Moderna Inc)कंपनीने विकसित केलेली लस आता अंतिम टप्प्याची चाचणी सुरू करणार आहे. काही दिवसांपूर्वीच रशियाने करोनावरील लशीची चाचणी यशस्वी झाली असल्याचा दावा केला होता. आता अमेरिकेने हा दावा केला आहे. यामुळे करोनाशी दोन हात करणाऱ्यांना आता मोठा दिलासा मिळणार आहे. तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी यशस्वी झाल्यानंतर कंपनी मोठी घोषणा करणार असल्याची शक्यता वर्तवण्यात येत आहे.

अमेरिकेतील मॉडर्ना इंक (Moderna Inc)कंपनीच्या तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणीची सुरुवात २७ जुलैपासून सुरू होणार आहे. अमेरिकेतील ८७ ठिकाणी या लशीची चाचणी घेण्यात येणार आहे. यामध्ये जवळपास ३० हजारजणांना ही लस टोचण्यात येणार आहे. करोनाच्या बचावापासून ही लस किती प्रभावी आहे, याचाही शोध घेण्यात येणार आहे. अमेरिकन सरकारचे संसर्गजन्य रोग तज्ञ डॉ. अॅथोनी फाऊसी यांनी ही चांगली बातमी असून सकारात्मक बातमी मिळेल असा विश्वास व्यक्त केला.

नगर: गावी परतत असताना अचानक पाऊस आल्याने झाडाखाली थांबलेल्या व्यक्तीकडील तीन लाख रुपये दोन अज्ञात व्यक्तींनी चोरून नेले आहेत. कर्जत तालुक्यातील चांदा शिवारात ही घटना घडली असून, या प्रकरणी कर्जत पोलीस ठाण्यात दोन अज्ञात व्यक्तींविरोधात गुन्हा दाखल करण्यात आला आहे. प्रल्हाद अश्रुबा वणवे (रा. पाटण सांगवी, ता. आष्टी, जि. बीड) यांनी या प्रकरणी पोलिसांत तक्रार दिली आहे.

प्रल्हाद वणवे हे ऊस तोडणी मुकादम म्हणून काम करतात. १३ जुलैला ते श्रीगोंदा फॅक्टरी येथून तीन लाख रुपये घेऊन त्यांनी ते आपल्या दुचाकीच्या डिकीत ठेवले आणि ते दुचाकीवरून आपल्या गावी निघाले होते. मात्र चांदा (ता. कर्जत) गावाच्या शिवारातून जात असताना अचानक जोराचा पाऊस सुरू झाला. त्यामुळे प्रल्हाद वणवे यांनी रस्त्याच्या कडेला दुचाकी उभी करून ते झाडाखाली थांबले. त्यावेळी दोन अज्ञात व्यक्ती एका नंबरप्लेट नसलेल्या दुचाकीवरून तेथे आले व त्यांनी प्रल्हाद वणवे यांच्या दुचाकी शेजारी आपली दुचाकी लावली. वणवे यांचे दुचाकीकडे लक्ष नसल्याची संधी साधत त्यांच्या दुचाकीच्या डिकीमध्ये ठेवलेले तीन लाख रुपये, वेगवेगळ्या बँकेचे पासबुक , चेकबुक चोरून नेले.

वॉशिंग्टन: गलवान खोऱ्यातील संघर्षाला एक महिना पूर्ण होत आला, तरी त्या ठिकाणी जीवितहानी झाल्याचे मान्य करण्यास चीनचे लष्कर तयार नाही. किंबहुना, या संघर्षात जीव गमावलेल्या सैनिकांचा अंत्यविधी पारंपरिक पद्धतीने न करण्यासाठी सैनिकांच्या कुटुंबीयांवर सरकार दबाव आणत आहे, असे अमेरिकेच्या गुप्तचर संस्थेच्या माहितीत समोर येत आहे. चीनने मात्र सैनिकांवरील अंत्यसंस्कारांचे वृत्त फेटाळले आहे.

चीनकडून प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवरील परिस्थिती बदलण्याचा प्रयत्न करण्यात आल्यानंतर, १५ जूनच्या रात्री भारत व चीन यांच्या लष्करामध्ये संघर्ष झाला. या घटनेमध्ये भारतीय लष्करातील कर्नल संतोष बाबू यांच्यासह २० जवान हुतात्मा झाले होते. तर, चीनच्या सैन्याचीही मोठी हानी झाली होती. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी 'मन की बात'मध्येही या संघर्षाचा उल्लेख करत, हुतात्मा सैनिकांच्या कुटुंबीयांविषयी सहवेदना व्यक्त केली होती. याउलट चीनने काही सैनिक मारले गेल्याचे मोघम उत्तर देत, कोणतीही माहिती उघड केली नाही. भारतीय लष्कराच्या अंदाजानुसार, चीनचे ४३ सैनिक मारले गेले किंवा गंभीर जखमी झाले आहेत. तर, अमेरिकेच्या गुप्तचर अहवालानुसार, ३५ चिनी सैनिकांना या संघर्षात प्राण गमवावा लागला आहे. या सैनिकांचा मृत्यू नाकारतानाच, त्यांच्यावर अंत्यविधी करण्यापासूनही रोखण्यासाठी चिनी सरकार कुटुंबीयांवर दबाव आणत आहे. प्रत्यक्ष सीमा रेषेवर झालेल्या चुकीला झाकण्यासाठी चीनकडून हा प्रयत्न करण्यात येत असल्याचे मानण्यात येते.

चीनच्या नागरी व्यवहार मंत्रालयाकडून मृत सैनिकांच्या कुटुंबीयांशी संपर्क साधण्यात येत आहे. कुटुंबीयांनी पारंपरिक अंत्यविधी करायचा नाही. या सैनिकांवर पार्थिवावर दूर ठिकाणी अंत्यसंस्कार करण्याची सूचना करण्यात येत असल्याची माहिती सूत्रांनी दिली. या सूचनांना करोनाचा प्रादुर्भाव रोखण्यासाठीचा मुलामाही चढविण्यात आला आहे. करोना रोखण्यासाठीची जागृती करण्याचा प्रयत्न दाखवितानाच, नागरिकांनी हा संघर्ष विसरून जावा, यासाठीचा हा प्रयत्न असल्याचे मानण्यात येत आहेत.

लंडन: करोनाचा संसर्ग आणि आक्रमक विस्तारवादी धोरणाच्या विरोधात अमेरिका आणि इतर देशांनी चीनची कोंडी करण्यास सुरुवात केली आहे. भारताने चिनी कंपन्यांच्या अॅप्सवर बंदी घातल्यानंतर अमेरिकेने चीनच्या दोन टेलिकॉम कंपन्यावर बंदी घातली. आता ब्रिटनने ही चीनला धक्का देत 'हुवैई' कंपनीच्या ५ जी नेटवर्कवर बंदी घातली आहे.

ब्रिटनचे पंतप्रधान बॉरिस जॉनसन यांच्या अध्यक्षतेखाली झालेल्या एनसीएससीच्या बैठकीत हा निर्णय घेण्यात आला. अमेरिकेच्या दबावाखाली हा निर्णय घेण्यात आला असल्याची चर्चा सुरू आहे. ब्रिटीश टेलिकॉम कंपन्यांनी २०२७ पर्यंत ५ जी नेटवर्कमधील हुवैई कंपन्यांचे उपकरण हटवण्याचे आदेश सरकारने दिले आहेत. या निर्णयामुळे हुवैईचे मोठे नुकसान होणार आहे. ब्रिटनचे डिजीटल, सांस्कृतिक, माध्यम विभागाचे सचिव ऑलिव्हर डाउडेन यांनी सांगितले की, ५ जी तंत्रज्ञान हे देशाला बदलणारे तंत्रज्ञान असणार आहे. मात्र, त्यासाठी पायाभूत सुविधांवर विश्वास आणि सुरक्षेच्या मुद्यावर आम्ही आश्वस्त असल्यावरच हे होऊ शकते, असेही त्यांनी सांगतिले. जानेवारी २०२१ नंतर ब्रिटनमध्ये कोणतेही हुवैईचे ५ जी किट वापरण्यात येणार नाही.

डाउडेन यांनी सांगितले की, आगामी सार्वत्रिक निवडणुकीच्या ( वर्ष २०२४) आधी सरकार या बंदीला कायदेशीर स्वरूप देणार आहे. जेणेकरून ब्रिटनमधील टेलिकॉम क्षेत्रातून हुवैई मुक्त करता येऊ शकते. ब्रिटनने हुवैईवर घातलेल्या ही बंदी अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांचा विजय समजला जातो.

सुरिनाम: दक्षिण अमेरिकेच्या ईशान्य किनारपट्टीवर असलेल्या सुरिनाम देशाच्या अध्यक्षपदी भारतीय वंशाचे चंद्रिकाप्रसाद तथा 'चन' संतोखी यांची निवड झाली आहे. सार्वत्रिक निवडणुकीत संतोखी यांनी देशाचा हुकूमशहा देसी बुटर्स याची राजवट उलथवून टाकली. येत्या गुरुवारी (१६ जुलै) त्यांचा शपथविधी होणार आहे.

संतोखी (वय ६१) पूर्वी देशाचे पोलिस प्रमुख होते. त्यांच्या प्रोग्रेसिव्ह रिफॉर्म पक्षाने निवडणुकीत एकतर्फी विजय मिळवला. सध्या विरोधी पक्षनेते असणारे संतोखी आता बुटर्स यांची जागा घेतील. बुटर्स यांच्यावर खून आणि अमली पदार्थांच्या तस्करीचे आरोप आहेत.

दिवाळखोरीच्या उंबरठ्यावर पोहोचलेली देशाची अर्थव्यवस्था, सर्वत्र बोकाळलेला भ्रष्टाचार आणि करोना साथ ही संतोखी यांच्यासमोरील प्रमुख आव्हाने असतील. सुरिनाम पूर्वी डचांच्या ताब्यात होता. त्यामुळे देशाचा प्रमुख व्यापार नेदरलँड्सबरोबर चालायचा. मात्र, बुटर्स यांच्या राजवटीत हा व्यापार रसातळाला गेला. बुटर्स यांनी चीन आणि व्हेनेझुएला यांच्याशी अधिक जवळीक केली. त्यांच्या आर्थिक आणि राजकीय धोरणांचे अनुकरण केले. आपलं सरकार सत्तेत आल्यानंतर देशाची आर्थिक परिस्थिती चांगली करण्याचे आव्हान असल्याचे चंद्रिकाप्रसाद तथा 'चन' संतोखी यांनी सांगितले.

जेरुसलेम: करोनाच्या संसर्गामुळे जगभरात चिंता व्यक्त केली जात आहे. जवळपास २०० देशांमध्ये थैमान घालणाऱ्या करोनाच्या अटकावासाठी अनेक देशांमध्ये प्रयत्न सुरू आहेत. एका बाजूला लस, औषध विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू असताना दुसरीकडे करोनाच्या विषाणूवरही संशोधन सुरू आहे. करोनाच्या आजाराचा धोका कमी ठेवण्यासाठी कोलेस्ट्रॉलचे औषध प्रभावी ठरू शकते असा दावा इस्रायलच्या संशोधकाने केले आहे.

इस्रायलमधील हिब्रू विद्यापीठाच्या ग्रास सेंटर ऑफ बायोइंजिनियरिंग विभागाचे संचालक प्रा. याकोव नाहमियास यांनी न्यूयॉर्कच्या माउंट सिनाई मेडिकल सेंटरमधील बेंजामिन टेनोएवर यांच्यासोबत केलेल्या संयु्क्त संशोधनात हा दावा केला आहे. कोलेस्ट्रॉलविरोधी औषध 'फेनोफायब्रेट' या औषधामुळे करोना आजाराचा धोका कमी करता येऊ शकतो असे त्यांनी सांगितले. करोनाचा विषाणू फुफ्फुसामध्ये जमा होतात. त्यांना दूर करण्यासाठी 'फेनोफायब्रेट' औषध प्रभावी ठरू शकतो असा दावा त्यांनी केला.

नाहमियास यांनी सांगितले की, आम्ही ज्या निष्कर्षावर आलो आहोत, त्याची पुष्टी उपचारांशी निगडीत संशोधनात झाल्यास कोविड-१९ आजाराची जोखीम कमी करता येऊ शकते आणि हा आजार साध्या एखाद्या सर्दीसारखा राहिल असेही त्यांनी म्हटले. संशोधनात, सार्स-सीओवी-२ च्या संसर्गानंतर फुफ्फुसात कशा प्रकारे बदल होतात याचाही अभ्यास करण्यात आला आहे. विषाणू कार्बोहायड्रेट जाळण्यापासून थांबवतो. त्याच्या परिणामी फुफ्फुसांच्या पेशींवर मेद वाढतो. ही परिस्थिती विषाणूच्या वाढीसाठी अनुकूल असल्याचे त्यांनी सांगितले.

तेहरान: सामरिकदृष्ट्या महत्त्वाचा देश असणाऱ्या इराणने भारताला मोठा धक्का दिला आहे. इराणमधील चाबहार रेल्वे प्रकल्पातून भारताला इराणने हटवले आहे. या रेल्वे प्रकल्पासाठी भारताकडून निधी येणार होता. मात्र, कराराच्या चार वर्षानंतरही हा निधी न आल्यामुळे हा निर्णय घेतला असून हा प्रकल्प स्वत: पूर्ण करणार असल्याचे इराणने म्हटले आहे. इराणच्या या निर्णयामुळे भारताला मोठा कूटनीतिक धक्का बसला असल्याचे बोलले जात आहे.

चाबहार रेल्वे प्रकल्पानुसार, चाबहार बंदरापासून जहेदानपर्यंत रेल्वे मार्ग सुरू करण्यात येणार होता. मागील आठवड्यात इराणचे परिवहन आणि शहर विकास मंत्री मोहम्मद इस्लामी यांनी ६२८ किमी लांबीच्या रेल्वे मार्गाचे उद्घाटन केले होते. या रेल्वे मार्ग अफगाणिस्तानच्या सीमेपर्यंत जाणार आहे. 'द हिंदू'ने दिलेल्या वृत्तानुसार, हा प्रकल्प २०२२ पर्यंत पूर्ण होणे अपेक्षित आहे.

इराणच्या रेल्वे विभागाने म्हटले की, भारताच्या मदतीशिवायच हा प्रकल्प पूर्ण करणार आहोत. त्यासाठी इराणच्या राष्ट्रीय विकास निधीतील ४० कोटी डॉलरच्या निधीचा वापर करण्यात येणार आहे. याआधी हा प्रकल्प भारतीय रेल्वेच्या अखत्यारीतील कंपनी पूर्ण करणार होती. हा प्रकल्पामुळे भारताला अफगाणिस्तान आणि अन्य मध्य आशियाई देशांसाठी एक पर्यायी मार्ग देता येणार होता. या प्रकल्पासाठी भारत, इराण आणि अफगाणिस्तानमध्ये करार झाला होता.

पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी २०१६ मध्ये इराणचा दौरा केला होता. त्यावेळी या चाबहार करारावर स्वाक्षरी करण्यात आली. या संपूर्ण प्रकल्पासाठी १.६ अब्ज डॉलरची गुंतवणूक अपेक्षित होती. या रेल्वे मार्गाच्या प्रकल्पासाठी भारतीय अभियंते इराणलाही गेले होते. मात्र, अमेरिकेच्या निर्बंधाच्या भीतीमुळे या प्रकल्पाचे काम सुरू झाले नसल्याची चर्चा आहे. भारताने याआधीच इराणकडून तेल आयात कमी केली आहे.

बीजिंग: अमेरिका आणि चीनमधील तणाव आता वाढत असल्याची चिन्ह दिसत आहेत. तिबेट मुद्यावरून दोन्ही देशांनी एकमेकांच्या अधिकाऱ्यांना व इतर संबंधितांना व्हिसा बंदी केल्यानंतर आता उइगर मुस्लिमांच्या प्रश्नांवरून दोन्ही देशांमध्ये आता तणाव निर्माण झाला आहे. चिनी अधिकाऱ्यांविरोधात कथित मानवाधिकार उल्लंघनांविरोधात घातलेल्या निर्बंधानंतर चीनने काही अमेरिकन सिनेटरला चीनमध्ये प्रवेश बंदी जाहीर केली आहे.

अमेरिकी सिनेटर मार्को रुबिओ, टेड क्रुझ, प्रतिनिधी ख्रिस स्मिथ आणि धार्मिक स्वातंत्र्यासंदर्भातील दूत सॅम ब्राउनबॅक यांना सत्ताधारी कम्युनिस्ट पक्षाच्या धोरणांवर टीका केल्यामुळे चीनने देशात प्रवेश करण्यावर सोमवारी बंदी घातली. अल्पसंख्य गट आणि लोकांची धार्मिक श्रद्धा या संदर्भात ही टीका होती.

'अमेरिकेच्या या कृतीमुळे चीन आणि अमेरिकेदरम्याच्या संबंधांना हानी पोहोचली आहे. हा चीनच्या राष्ट्रीय एकात्मतेचा प्रश्न असून अमेरिकेची ही कृती म्हणजे चीनच्या अंतर्गत बाबींमध्ये ढवळढवळ केल्यासारखे आहे. चीन परिस्थितीनुसार याबाबत आणखी कृती करेल,' अशी प्रतिक्रिया चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाचे प्रवक्ता झाओ लिजिअॅन यांनी दिली आहे. चीन सरकार आपल्या सार्वभौमत्वाचे रक्षण करण्यासाठी तसेच दहशतवाद, फुटीरतावाद आणि अतिरेकी धार्मिक शक्तींविरूद्ध कारवाई करण्यास कटीबद्ध असल्याचे त्यांनी सांगितले. शिनजियांग, तिबेट आणि अलीकडेच हाँगकाँगशी संबंधित नवीन राष्ट्रीय सुरक्षा कायद्यावर अमेरिकेकडून चीनवर निर्बंध घालण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. त्याविरोधात आता चीनही आक्रमक झाला आहे. अमेरिकेच्या कारवाईला प्रत्युत्तर देताना चीनने प्रथमच अमेरिकन राजकारण्यांवर बंदी घातली आहे.

सिडनी: मागील काही महिन्यांपासून चीन आणि ऑस्ट्रेलिया दरम्यान वाद सुरू आहे. दोन्ही देशांमधील तणाव आता आणखी वाढणार असल्याची चिन्हे आहेत. ऑस्ट्रेलिया चीनला धक्का देण्यासाठी मोठा निर्णय घेतला आहे. ऑस्ट्रेलिया सरकार हाँगकाँगमधील जवळपास १० हजार नागरिकांना नागरिकत्व देणार आहे. ऑस्ट्रेलिया या निर्णयामुळे चीनचा आता आणखी जळफळाट होणार असल्याची चर्चा आहे.

चीनने हाँगकाँगमध्ये नवीन सुरक्षा कायद्याची अंमलबजावणी सुरू केल्यानंतर स्थानिका हाँगकाँगवासियांनी जोरदार विरोध सुरू केला आहे. चीनकडून या आंदोलकांना अटक करण्यात येत आहे. त्या पार्श्वभूमीवर अमेरिका, ब्रिटनसह २७ देशांनी संयुक्त राष्ट्र संघाच्या मानवाधिकार आयोगाकडे चीनविरोधात धाव घेतली आहे. तर, दुसरीकडे ब्रिटननेही हाँगकाँगमधील निर्वासित नागरिकांना नागरिकत्व देण्याची घोषणा केल्यानंतर चीनने नाराजी व्यक्त केली होती. आता ऑस्ट्रेलियानेही यात उडी घेतली आहे.

ऑस्ट्रेलियन सरकारने म्हटले की, ऑस्ट्रेलियात सध्या वास्तव्य करत असलेल्या हाँगकाँगचे १० हजार नागरिकांना सध्याचा व्हिसा संपल्यानंतर स्थायी नागरिकत्वासाठी अर्ज करू शकतात. हाँगकाँगमध्ये सुरक्षा कायद्यामुळे लोकशाहीवादी नागरिकांचा छळ होणार असल्याची भीती ऑस्ट्रेलिया सरकारमधील मंत्री एलन टुडगे यांनी सांगितले. हाँगकाँगचे नागरीक तेथील परिस्थितीमुळे अन्यत्र जाण्याचा विचार करू शकतात. त्यांच्यासाठी आम्ही अतिरिक्त व्हिसाचा पर्याय समोर ठेवला आहे. नागरिकत्वासाठी काही प्रक्रियांमधून जावे लागणार असल्याचे त्यांनी स्पष्ट केले.

लॉस एंजलिस: कॅलिफोर्नियातील अमेरिकन नौदल तळ सॅन डिएगोमध्ये अमेरिकेच्या एका युद्धनौकेला आग लागल्याची घटना घडली. या आगीत १७ नाविकांसह २१ जण जखमी झाले असल्याची माहिती अधिकाऱ्यांनी दिली. जवळच्या रुग्णालयात जखमींवर उपचार करण्यात येत आहे.

'युएसएस बोनोम्मे रिचर्ड'वरील खलाशांना आगीमुळे किरकोळ जखमा झाल्या असून त्यांना उपचारासाठी रुग्णालयात नेण्यात आले असल्याचे वृत्त सीएनएनने दिले आहे. पूर्ण क्रू जहाजातून बाहेर काढण्यात आला असून सर्वजण सुखरूप असल्याची माहिती नेव्हल सर्फेस फोर्सने ट्विट करून दिली आहे. ही आग स्थानिक वेळेनुसार, सकाळी ८.३० वाजण्याच्या सुमारास लागली असल्याची माहिती समोर आली आहे. आग लागली तेव्हा जहाजावर १६० जणा होती. आगीचे नेमके कारण अद्याप समोर आले नाही. स्थानिकांनी काही स्फोटांचे आवाज ऐकले असल्याचे स्थानिक वृत्तमाध्यामांनी म्हटले आहे.

आग लागल्याची घटना समजताच तातडीने घटनास्थळी मदत आणि बचावकार्य सुरू करण्यात आले. जहाजावरील आगीवर नियंत्रण मिळण्याचे प्रयत्न करण्यात आले. सुदैवाने या आगीत कोणतीही जीवितहानी झाल्याचे वृत्त नाही. आग लागल्यानंतर इतर जहाजांना इतरत्र नेण्यात आले.

बीजिंग: भारत आणि चीन दरम्यान वाढलेल्या तणावाला घेऊन मोठा माहिती समोर आली आहे. चीनच्या सैन्याने प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषा ओलांडून भारताच्या हद्दीत प्रवेश केला. चिनी सैन्याच्या या कृतीला राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग यांनीच होकार दिला असल्याचे समोर आले आहे. चीनमधील वृत्तसंस्था शिन्हुआनेदेखील आपल्या वृत्तात शी जिनपिंग यांनी वर्षाच्या सुरुवातीला आपल्या आदेशात 'सैन्य प्रशिक्षणा'साठी सैनिक तैनात करण्याचे आदेश दिले असल्याचे म्हटले आहे.

'द हिंदू'ने दिलेल्या वृत्तानुसार, भारताच्या हद्दीतील गलवान खोरे, पँगोग सरोवर आणि लडाखमधील इतर प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषा ओलांडून चीनच्या सैन्याने केलेली घुसखोरी ही काही महिन्यांच्या तयारीनंतर केली आहे. शी जिनपिंग यांनी आदेश दिल्यानंतर घुसखोरीची तयारी झाली असल्याचे म्हटले आहे. चीनने एकाच वेळी अनेक ठिकाणी सैन्याची संख्या वाढवली, ही कृती एका नियोजनाचा भाग होता. यामुळेच भारत आणि चीनच्या सैन्यामध्ये संघर्ष झाला आणि त्यात २० भारतीय जवान शहीद झाले.

वरिष्ठ पातळीवर नियोजन आणि समन्वय, भारताला धक्का?
भारतीय अधिकाऱ्यांनी सांगितले की, गलवान खोरे व प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर झालेल्या हालचाली आणि घटनाक्रम पाहता या घुसखोरीचे
वरिष्ठ पातळीवर नियोजन आणि समन्वय ठेवण्यात आला असल्याची शक्यता आहे. गलवान खोरे आणि पँगोग सरोवर परिसरातून भारतीय सैन्याला अधिक मागे ढकलल्यास चीनला अधिकाधिक भागावर दावा सांगता येऊ शकतो. भारत आणि चीन दरम्यान गलवान खोऱ्यात अल्प काळासाठी बनवण्यात आलेला बफर झोन हा चीनच्या नव्या प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेच्या दाव्यासह तयार करण्यात आला. त्यामुळे प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेचा एक भाग पश्चिमेकडे गेला आहे.

वॉशिंग्टन: भारत आणि चीन दरम्यान तणाव वाढत असताना अमेरिकेकडून भारताला मदत देण्याचे आश्वासन राष्ट्रध्यक्ष ट्रम्प यांनी दिले आहे. चीनविरोधात आणि भारताच्या समर्थनात अमेरिकेने अनेक वक्तव्ये केले. असे असले तरी अमेरिकेकडून भारताला मदत मिळेल याची काहीही ठोस खात्री देता येणार नसल्याचे अमेरिकेचे माजी राष्ट्रीय सुरक्षा सल्लागार जॉन बोल्टन यांनी सांगितले. त्यांच्या वक्तव्यामुळे पुन्हा एकदा चर्चा सुरू झाल्या आहेत.

अमेरिकेचे माजी राष्ट्रीय सुरक्षा सल्लागार जॉन बोल्टन यांनी एका वृत्तवाहिनीला सांगितले की, चीन आपल्या सीमेलगत असलेल्या देशांसोबत सीमा प्रश्नावर आक्रमक भूमिका घेत आहे. चीनचे भारत, जपान आणि अन्य देशांसोबत त्यांचे संबंध खराब झाले असल्याचे निश्चित आहे. ट्रम्प हे चीनसोबतच्या संबंधांना व्यापार संबंधाच्यादृष्टीने पाहत असल्याचेही त्यांनी सांगितले.

ट्रम्प हे भारताला कितपत पाठिंबा देतील, या प्रश्नाला उत्तर देताना जॉन बोल्टन यांनी ट्र्म्प यांच्याबाबत खात्री देता येणार नसल्याचे सांगितले. ट्रम्प हे नोव्हेंबरमधील निवडणुकीनंतर काय करतील, हे सांगता येणार नाही. कदाचित चीनसोबतच्या व्यापार करारावर भर देण्याची शक्यता असल्याचे त्यांनी सांगितले. भारत आणि चीन दरम्यान तणाव वाढल्यास ट्रम्प चीनविरोधात भारताला पाठिंबा देतील यांची खात्री देता येणार नसल्याचे त्यांनी सांगितले.
 

बीजिंग: जगभरात करोना संसर्गाचा हाहाकार सुरू आहे. करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी प्रयत्न सुरू असताना करोनामुळे होणारे मृत्यू रोखण्यासाठी प्रयत्न केले जात आहेत. त्या अनुषंगाने संशोधनही करण्यात येत आहेत. एका संशोधनानुसार, रक्तात मधुमेहाचे प्रमाण अधिक असणाऱ्या रुग्णांचा करोना आजारामुळे मृत्यू होण्याचा अधिक धोका असल्याचे समोर आले आहे. त्याशिवाय या रुग्णांमध्ये इतर आजाराचाही धोका बळावतो.

'डायबिटोलॉजिया' या नियताकालिकेत प्रकाशित झालेल्या वृत्तानुसार, संशोधनकर्त्यांनी रुग्णालयात दाखल केल्यानंतर फास्टींग ब्लड ग्लुकोज (एफबीजी) स्तर आणि आधीपासून मधुमेहाचे निदान न करता कोविड-१९ बाधित रुग्णांच्या २८ दिवसांच्या मृत्यू दराच्या संबंधांचा अभ्यास केला. दोन रुग्णालयातील रुग्णांच्या अभ्यासानंतर या संशोधनात करोनाबाधितांच्या रक्तातील साखरेचे प्रमाण तपासण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. रुग्णांना मधुमेहाचा आजार नसतानाही ही चाचणी करण्यात यावी असे संशोधनात म्हटले आहे. करोनाबाधित रुग्णांमध्ये ग्लुकोज मेटाबोलिक संबंधी आजार अधिक असण्याची शक्यता आहे.

वॉशिंग्टन: अमेरिकेत करोनाचे थैमान सुरू झाल्यानंतर खबरदारीचा उपाय म्हणून तज्ञांनी मास्क घालण्याचे आवाहन केले होते. मात्र, या आवाहनाला धुडकावून लावणारे अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांना मास्क वापरावाच लागला. जवळपास चार महिन्यानंतर ट्रम्प यांनी मास्क वापरला.

शनिवारी डोनाल्ड ट्रम्प यांनी लष्करी रुग्णालयाला भेट दिली. या दौऱ्याच्या वेळी त्यांनी मास्क वापरला होता. ट्रम्प यांनी यावेळी उपचारासाठी दाखल असलेले आणि करोनाबाधित सैनिकांची भेट घेऊन विचारपूस केली. वॉशिंग्टन येथील एका उपनगरीय भागात हे रुग्णालय आहे. व्हाइट हाउसमधून निघताना ट्रम्प यांनी मास्क वापरला नव्हता. मात्र, वॉल्टर रीड हॉलवेमध्ये आल्यानंतर ट्रम्प यांनी मास्क घातला. रुग्णालयात असताना मास्क घालायला हवा, असे ट्रम्प यांनी पत्रकारांशी बोलताना सांगितले.

 

लाहोर: जगभरात करोनाच्या संसर्गासाठी अमेरिका चीनला जबाबदार ठरवत आरोप करत आहे. तर, आता दुसरीकडे अमेरिकेमुळे करोनाचा संसर्ग जगभरात फैलावला असल्याचा दावा करत अमेरिकेविरोधात कोर्टात याचिका दाखल करण्यात आली आहे. अमेरिकेने नुकसान भरपाई म्हणून २० अब्ज डॉलर देण्याची मागणी पाकिस्तानमधील एका नागरिकाने याचिकेद्वारे केली आहे. ही याचिका दाखल करून घेताना लाहोरच्या कोर्टाने अमेरिकेच्या वाणिज्य दूतावास आणि परराष्ट्र मंत्रालयाला नोटीस बजावली आहे.

लाहोर येथील नागरीक रझा अली यांनी ही याचिका इस्लामाबादमधील कनिष्ठ कोर्टात दाखल केली आहे. करोनाच्या संसर्गामुळे याचिकाकर्त्याला आणि पाकिस्तानला झालेल्या नुकसानीसाठी अमेरिका जबाबदार असल्याचा आरोप या याचिकेत करण्यात आला. आपले कुटुंबीय करोनाच्या संसर्गामुळे बाधित असून त्यांची प्रकृती बिघडली असल्याचा दावा याचिकेत करण्यात आला आहे.

अमेरिकेने करोनाचा संसर्ग वेगाने फैलावला. अमेरिकेत करोनाच्या संसर्गामुळे पाकिस्तानसह संपूर्ण जगात करोनाचा हाहाकार अधिक प्रमाणात सुरू झाला असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. त्याशिवाय सध्याचे अमेरिकेतील सरकार हे करोनाला अटकाव करणाऱ्या जागतिक पातळीवरील प्रयत्नांमध्ये अडथळे आणत असल्याचा आरोप करण्यात आला आहे. अमेरिकेकडून २० अब्ज डॉलरची नुकसान भरपाई घेण्याची मागणी या याचिकेत करण्यात आली आहे. कोर्टाने ही याचिका दाखल करून घेतली आहे. न्या. कामरान करामात यांनी अमेरिकन दूतावास, अमेरिकन महावाणिज्यदूत, अमेरिकन संरक्षण मंत्री ( वाणिज्य दूतावासामार्फत) आणि परराष्ट्र मंत्रालयाला नोटीस दिली आहे. कोर्टाने सात ऑगस्टपर्यंत उत्तर मागितले आहे.

बीजिंग: करोना विषाणूची निर्मिती चीनमध्ये झाली का, चीनमधूनच याचा प्रसार झाला का, आदी मुद्यांबाबत चौकशी करण्यासाठी आता जागतिक आरोग्य संघटनेचे एक पथक चीनमध्ये दाखल झाले आहे. दोन सदस्यीय पथक दोन दिवस चीनमध्ये असणार असून आगामी व्यापक चौकशीसाठीची पूर्वतयारी करणार आहे.

मागील सहा महिन्यांपासून जगभरात हाहाकार माजवणाऱ्या करोनाच्या संसर्गासाठी चीन जबाबदार असल्याचा आरोप अमेरिकेने सातत्याने केला आहे. जागतिक आरोग्य संघटनेने चीनला पाठिशी घातल्याचा आरोप करण्यात येत होता. जागतिक आरोग्य संघटनेच्या या पथकात दोन तज्ञांचा समावेश आहे. यामध्ये प्राणी तज्ञ आणि दुसरे साथरोग तज्ञ आहेत. भविष्यकालीन योजनांसाठी प्राण्यांमधून माणसांमध्ये विषाणूंचा संसर्ग कसा होतो, याबाबतही हे पथक माहिती करून घेणार आहे. करोनाचा विषाणू वटवाघळांच्या माध्यमातून माणसांमध्ये फैलावला असल्याचा शास्त्रज्ञांचा दावा आहे. त्यानंतर खवले मांजर अथवा इतर सस्तन प्राण्यांच्या माध्यमातून विषाणूचा संसर्ग झाला असण्याची शक्यता आहे.

सिडनी: जवळपास मागील सहा महिन्यांपासून करोनाच्या संसर्गाने जगभरात धुमाकूळ घातला आहे. जगभरातील २०० देशांमध्ये करोनाचा संसर्ग पसरला आहे. करोनाच्या संसर्गामुळे जगाच्या अर्थचक्रावर परिणाम झाले असून मोठे नुकसान सहन करावे लागले आहे. करोनाचा संसर्ग रोखण्यासाठी आतापर्यंत जवळपास ३.८ ट्रिलियन डॉलर खर्च करण्यात आला असल्याचे समोर आले आहे. जर्मनीच्या जीडीपी एवढे नुकसान करोनामुळे झाले आहे. हा आकडा आणखी वाढणार असल्याचाही भीती व्यक्त करण्यात येत आहे.

नुकसान झाले, याबाबत संशोधन करण्यात आले. करोना संसर्गाच्या महासाथीच्या आजारामुळे सर्वाधिक नुकसान पर्यटन क्षेत्राचे झाले आहे. करोनाच्या वाढत्या संसर्गाच्या नियंत्रणासाठी अनेक देशांनी विमान वाहतुकीवर बंदी घातली. त्याशिवाय आशिया, युरोप आणि अमेरिकेने पर्यटकांना आपल्या देशात येण्यास मज्जाव केला होता. जगभरात विमान उड्डाण रद्द केल्यामुळे आर्थिक संकट निर्माण झाले असल्याचा दावा संशोधकांनी केला आहे. विमान वाहतूक बंदीमुळे पर्यटन, व्यापार, ऊर्जा आणि आर्थिक क्षेत्राला मोठा फटका बसला असल्याचे समोर आले आहे.
 

बर्लिन: प्रदूषण चाचण्यांमध्ये फसवणूक करण्यासाठी फोक्सवॅगन कंपनीने त्यांच्या गाड्यांमध्ये बसवलेल्या सॉफ्टवेअरविरोधात ग्राहकाला आता युरोपीयन समुदायातील ज्या देशात ही गाडी खरेदी केली, तिथेच दाद मागता येणार आहे. त्यासाठी आता जर्मनीमध्ये धाव घेण्याची गरज नाही, असा महत्त्वपूर्ण निकाल गुरुवारी युरोपीय महासंघाच्या सर्वोच्च न्यायालयाने दिला.

सन २०१५मध्ये अमेरिकेत फोक्सवॅगनने प्रदूषण चाचण्यांमधून पास होण्यासाठी आपल्या हजारो गाड्यांमध्ये फेरफार केल्याचे समोर आले होते. त्यानंतर कंपनीला अब्जावधी युरोंचा दंड आणि नुकसानभरपाई द्यावी लागली होती. ऑस्ट्रियातील ५७४ ग्राहकांच्या वतीने त्या देशातील ग्राहक संरक्षण गटातर्फे क्लागेनफर्टच्या न्यायालयाकडून युरोपीयन समुदायाच्या सर्वोच्च न्यायालयाला या संदर्भात सुनावणीबाबत विनंती करण्यात आली होती. जर्मनीस्थित फोक्सवॅगन कंपनीने ऑस्ट्रियामधील आंतरराष्ट्रीय कायद्यांचा भंग केला असल्याचे युरोपीयन समुदायाच्या न्यायालयाने स्पष्ट केले.

वॉशिंग्टन: अमेरिकेतील अध्यक्षपदाच्या निवडणुकीत पुन्हा विजय मिळवण्यासाठी अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी पुन्हा वर्णवादी अस्मितेला फुंकर घालणे सुरू केले आहे. गेले काही दिवस ते सातत्याने गौरवर्णीयांच्या असंतोषाला चिथावणी देत असून, त्याद्वारे समर्थकांना प्रचारात उतरवण्याचा त्यांचा उद्देश आहे. ट्रम्प यांच्या विखारी प्रचाराने त्यांच्या पक्षातही अस्वस्थता असून या प्रचारतंत्रामुळे तटस्थ मतदारही दूर जात असल्याची त्यांची भावना आहे. ट्रम्प यांनी २०१६च्या निवडणुकीतही ध्रुवीकरणाचा मार्ग अवलंबला होता. तसाच आता सांस्कृतिक विभाजनाचा त्यांचा प्रयत्न आहे.

'आगीत कोण तेल ओतत आहे हे महत्त्वाचे नाही; तर गौरवर्णीयांमध्ये असंतोष आणि भीती निर्माण होईल असे केले जाणारे आवाहन समजून घेण्याची गरज आहे,' असे मत प्रिन्स्टन विद्यापीठातील आफ्रिकन अमेरिकन अभ्यास विभागाचे प्रमुख एडी ग्लॉड यांनी व्यक्त केले आहे. नव्या अमेरिकेत गौरवर्णीयांचे स्थान काय, हा खरा मुद्दा असल्याचेही ते म्हणतात.

ट्रम्प हे गेले अनेक दिवस सातत्याने विखारी भाषा प्रचारात वापरत आहेत. ते विशिष्ट तक्रारीही करत आहेत. देशात वांशिक अन्यायाविरुद्ध वातावरण तापलेले असताना ट्रम्प यांनी चालवलेली मोहीम अधिक टोकदार होत आहे. ट्रम्प यांनी नुकताच एका समर्थकाने पाठविलेला 'व्हाइट पॉवर' व्हिडिओ शेअर केला होता, पण तो लगेचच डिलीटही केला. 'ब्लॅक लाइव्हज‌‌् मॅटर' चळवळीचीही त्यांनी 'द्वेषाचे प्रतीक' म्हणून खिल्ली उडवली. कार रेसिंग कंपनी 'नॅसकार'ने त्यांच्या गाड्यांवरील संघराज्याचा ध्वज उतरवल्याबद्दल त्यांनी जोरदार टीका केली आणि कंपनीच्या कृष्णवर्णीय चालकांवर आरोपही केले. चालक लबाड असल्याचे ते म्हणाले.

न्यूयॉर्क: करोनाबाधितांच्या वाढत्या संख्येमुळे भारतात चिंता व्यक्त केली जात आहे. सर्वाधिक करोनाबाधितांच्या संख्येत भारत आता तिसऱ्या स्थानी असून वाढत्या मृत्यूदरामुळे चिंता व्यक्त केली जात आहे. करोना संसर्गाला अटकाव न केल्यास फेब्रुवारी २०२१ पासून भारतात सुमारे पावणे तीन लाख नवीन करोनाबाधित आढळणार असल्याचा इशारा देण्यात आला आहे.

जगभरात करोनाच्या संसर्गाचे थैमान सुरू आहे. करोनाबाधितांची संख्या एक कोटीहून अधिक झाली असून पाच लाखांहून अधिकजणांचा बळी गेला आहे. जगभरातील ८४ देशांमध्ये होणाऱ्या चाचण्या आणि करोनाबाधितांचा अभ्यास करून Massachusetts Institute of Technology (MIT)ने आपला अहवाल तयार केला आहे. या अहवालानुसार, करोनावर औषध न सापडल्यास, करोनावर नियंत्रण न मिळवल्यास भारतात फेब्रुवारी २०२१पासून दररोज पावणे तीन लाख नवीन करोनाबाधित रुग्ण आढळण्याचा धोका आहे. ही भीती खरी ठरल्यास भारत हा सर्वाधिक करोनाबाधितांचा देश होऊ शकतो, असा इशाराही देण्यात आला आहे. तर, दुसरीकडे मार्च ते मे २०२१ पर्यंतच्या कालावधीत जगभरात २० ते ६० कोटी रुग्ण संख्या होण्याचा धोका असून सुमारे १७ लाखांहून अधिकजणांचा मृत्यू होण्याची भीती व्यक्त करण्यात आली आहे. एका गृहीतकाच्या आधारे हा अंदाज व्यक्त करण्यात आला असल्याचेही संस्थेने स्पष्ट केले आहे.

वॉशिंग्टन: अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प आणि ट्विटरचा वाद झाल्यानंतर ट्रम्प यांनी सोशल मीडिया कंपन्यांवर जोरदार टीका केली होती. त्यानंतर आता ट्रम्प आणि फेसबुकमध्येही वाद होण्याची चिन्हं आहेत. मागील महिन्यात ट्रम्प यांच्या जाहिराती हटवल्यानंतर आता फेसबुकने डोनाल्ड ट्रम्प यांच्या जवळच्या चार सहकाऱ्यांचे अकांउट बंद केले आहे.

अमेरिकेच्या राष्ट्राध्यक्षपदाच्या निवडणुकीसाठी प्रचार सुरू झाला असून सोशल मीडियाचाही मोठ्या प्रमाणावर वापर करण्यात येत आहे. खोट्या बातम्यांचेही प्रमाण वाढले असून ट्रम्प फेक न्यूजचा आधार घेत असल्याचा आरोप करण्यात येतो. मागील महिन्यात ट्रम्प यांच्या एका जाहिरातीवर आक्षेप घेत फेसबुकने ती जाहिरात हटवली होती. त्यानंतर आता ट्रम्प यांचे सहकारी रॉजर स्टोन यांच्यासह चारजणांचे फेसबुक अकाउंट बंद करण्यात आले आहे. फेसबुकने सांगितले की, खोटे अकाउंट असणे, परदेशी हस्तक्षेप आणि खोट्या बातम्या, साहित्य प्रसारीत करण्याविरोधातील धोरणांतर्गत ही कारवाई करण्यात आली आहे. आमच्या चौकशीनुसार, रॉजर स्टोन आणि इतर सहकाऱ्यांचे फेसबुक अकाउंट परदेशातून संचलित करण्यात येत होते. त्याशिवाय या अकांउटवरील मजकूराबाबत साशंकता निर्माण झालेली. त्यामुळे फेसबुकच्या धोरणानुसार, स्वयंचलित प्रणालीने या अकाउंटवर कारवाई केली. त्याशिवाय फेसबुकने इतरही फेक अकाउंटवर कारवाई केली. फेक न्यूज आणि द्वेष पसरवणाऱ्या पोस्टच्या मुद्यावर फेसबुकवर टीका सुरू आहे. फेसबुकच्या माध्यमातून निवडणुकीदरम्यान, जनमतावर प्रभाव टाकण्यात येत असल्याचा आरोप सातत्याने करण्यात येत आहे.

बीजिंग: आक्रमक विस्तारवादी भूमिका घेणाऱ्या चीनने आता आपले लक्ष अरुणाचलकडे वळवले आहे. पूर्व लडाखमध्ये प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेजवळ रस्ते बांधण्यास भारताला रोखणारा चीन आता अरुणाचल प्रदेशच्या सीमेवर रस्ते तयार करत असल्याचे समोर आले आहे. यासाठी चीन सर्व प्रकारच्या भागात काम करण्यास सक्षम असलेल्या साधनांचा वापर करीत आहे. या यंत्रांना 'स्पायडर एक्स्ववेटर' असेही म्हटले जाते.

ब्रम्हपुत्र नदीजवळ हा रस्ता बनवला जात असून या मार्गातून भारतात प्रवेश केला जातो. 'साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट'च्या वृत्तानुसार, पीएलएच्या तिबेट मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट व्हिडिओ प्रसिद्ध केला आहे. या व्हिडिओनुसार, ब्रम्हपुत्र नदीजवळ चिनी सैनिक अतिशय वेगाने रस्तेबांधणीचे काम करत आहेत. या कामात 'स्पायडर एक्स्ववेटर' वापरण्यात येत असून त्याच्या वापराने डोंगराळ भागात रस्ते सहजपणे तयार करता येतात. चीनमध्ये ब्रह्मपुत्र नदीला यार्लंग नदी म्हणतात.

चीनी सैन्य भारताला लागून असलेल्या प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर पायाभूत सुविधा जलदगतीने उभारत आहे. भारतही चीनच्या या कृतीला प्रत्युत्तर म्हणून या भागात रस्ते आणि पायाभूत सुविधासुद्धा विकसित करत आहे. त्यामुळे अनेकदा दोन्ही देशांमध्ये वाद होत असतात. लडाखमधील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेजवळ भारताने बांधकाम करण्यास सुरुवात केल्यानंतर चीनने त्यावर आक्षेप घेतला. लडाखच्या आधी डोकलाममध्ये ही असाच वाद झाला होता.

तवांगसह अरुणाचल प्रदेशवर आपला दावा करत आलेला आहे. हा प्रदेश तिबेटचाच एक भाग असल्यामुळे आमचा दावा असल्याचा दावा चीनकडून सातत्याने करण्यात आलेला आहे. अरुणाचल प्रदेशमधील सीमा भाग हा अतिशय संवेदनशील समजला जातो. गलवानमध्ये चिनी सैन्याने घुसखोरी केल्यानंतर चीन अरुणाचल प्रदेशमध्येही घुसखोरी करू शकतो असा अंदाज वर्तवण्यात आला होता. चीनच्या बाजूने अरुणाचलमध्ये हालचाल वाढवली असल्याचे वृत्त होते.

बीजिंग: करोनाच्या संकटावर काही प्रमाणात मात केल्यानंतर आता चीनमध्ये आणखी एक संकट उभे ठाकले आहे. उत्तर चीनमधील बयन्नुर शहरातील ब्यूबोनिक प्लेगचा फैलाव झाल्याने खळबळ उडाली आहे. मंगोलियाच्या स्वायत्त क्षेत्रातील बयन्नूर शहरातील ब्युबोनिक प्लेगचे दोन प्रकरणे समोर आली आहेत. संपूर्ण शहरात प्लेगच्या बचावासाठी तीन स्तरीय अलर्ट जारी करण्यात आला आहे.

चीन सरकारचे वृत्तपत्र पीपल्स डेलीच्या ऑनलाइन वृत्तानुसार, हा अलर्ट २०२० वर्षअखेरपर्यंत असू शकतो. प्लेगची बाधा झालेल्या व्यक्तींना वेगळे ठेवण्यात आले आहे. सध्या त्यांच्यावर उपचार सुरू असून प्रकृती स्थिर आहे. ब्यूबोनिक प्लेग विषाणू संसर्गाचे मुख्य कारण असून यामुळे प्राण गमावण्याची शक्यता असते. मात्र, यावर मात करण्यासाठी अॅण्टीबायोटीक उपलब्ध आहे.

प्लेगची बाधा कशी झाली, हे अद्याप स्पष्ट झाले नाही. तीन स्तरीय अलर्ट जारी करण्यात आल्यानंतर आता प्लेग पसरवणाऱ्या प्राण्यांचे मांस खाण्यास बंदी आणली जाऊ शकते. प्लेगची लक्षणे आढळल्यास तात्काळ संपर्क साधण्याचे प्रशासनाने आवाहन केले आहे. जगभरात ब्यूबोनिक प्लेगचे रुग्ण आढळत असतात. मादागास्करमध्ये २०१७ मध्ये ब्यूबोनिक प्लेगचे ३०० हून अधिक रुग्ण आढळले होते.

ब्यूबोनिक प्लेगची लक्षणे
मागील वर्षी मंगोलियात ब्यूबोनिक प्लेगमुळे दोघांचा मृत्यू झाला होता. या बाधितांनी कच्चे मांस खाल्ले असल्याचे समोर आले होते. उंदीर आणि खारीच्या माध्यमातून विषाणू मानवाच्या शरीरात पसरतात. ब्यूबोनिक प्लेग झाल्यामुळे अचानक ताप येणे, डोके दुखी, थंडी, थकवा जाणवणे आदी लक्षणे जाणवतात. अंगावर एका ठिकाणी अथवा अनेक ठिकाणी सूज येते.

काठमांडू: भारताशी पंगा घेणाऱ्या नेपाळचे पंतप्रधान केपी शर्मा ओली यांच्यासमोरील राजकीय संकट अधिकच गडद होत असून पंतप्रधानपदाच्या राजीनाम्यासाठी पक्षातंर्गत दबाव वाढू लागला आहे. नेपाळ कम्युनिस्ट पक्षाचे दिग्गज नेते पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' यांनी ओलींच्या राजीनाम्याची मागणी केली आहे. तर, दुसऱ्या बाजूला ओलींच्या बचावासाठी चीनने हालचाली सुरू केल्या असल्याचे वृत्त आहे. चीनच्या राजदूतांनी नेपाळच्या राष्ट्रपती विद्या देवी भंडारी यांची भेट चर्चा केली असल्याचे वृत्त आहे.

नेपाळने भारताच्या भूभागावर दावा करणारे घटनादुरुस्ती विधेयक मंजूर केल्यानंतर नेपाळमधील राजकारण ढवळून निघाले आहे. सत्ताधारी नेपाळच्या कम्युनिस्ट पक्षात दोन गट निर्माण झाले असून भारतविरोधी भूमिका घेतल्यामुळे कम्युनिस्ट पक्षाचे दिग्गज नेते पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' नाराज असल्याचे समोर आले. पक्षाच्या बैठकीत ओली यांच्यावर अनेकांनी प्रश्नांची सरबती करत राजीनाम्याची मागणी केली. मात्र, ओली यांनी ही मागणी फेटाळून लावली. त्यानंतर नेपाळमध्ये राजकीय घडामोडींना वेग आला. रविवारी प्रचंड आणि ओली यांच्यात बैठक पार पडली. मात्र, त्यातून काही निष्पन्न झाले नाही. चीनच्या राजदूत हाओ यांकी यांनी कम्युनिस्ट पक्षाचे नेते माधव नेपाळ यांची रविवारी रात्री भेट घेतल्याचे वृत्त असून ओली यांना पाठिंबा देण्याची मागणी केले असल्याचे वृत्त स्थानिक माध्यमांनी दिले आहे. माधव नेपाळ हे प्रचंड यांच्या गटाचे समजले जातात.

जिनिव्हा: जागतिक आरोग्य संघटनेने करोनाबाधितांवर उपचारासाठी वापरण्यात येणाऱ्या हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, लोपिनवीर आणि रिपोटनवीर या औषधांचे एकत्रित डोस देण्यास बंदी घातली आहे. या औषधांच्या वापरामुळे मृत्यूदरात घट होत नसल्यामुळे हा निर्णय घेण्यात आला असल्याचे जागतिक आरोग्य संघटनेने म्हटले आहे.

या औषधांच्या चाचणीवर देखरेख ठेवणाऱ्या आंतरराष्ट्रीय संस्थेच्या शिफारसीनंतर औषधांच्या वापरावर बंदी आणण्याचा निर्णय झाला असल्याची वृत्त रॉयटर्स या वृत्तसंस्थेने दिले आहे. अमेरिकेच्या नॅशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ हेल्थने करोनाबाधितांच्या उपचारासाठी मलेरियाचे औषध हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन किती प्रभाव पाडू शकतो, याचा अभ्यास करण्यासाठी सुरू असलेल्या चाचणीवर बंदी घालण्यात आली होती. रुग्णालयात दाखल असलेल्या करोनाबाधितांच्या उपचारासाठी हे औषध फार उपयोद अमेरिकेच्या नॅशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ हेल्थच्यावतीने सांगण्यात आले. काही दिवसांपूर्वीच ब्रिटनच्या चिकित्सा नियामक संस्थेने करोनाबाधितांच्या उपचारासाठी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीनची चाचणी करण्यास मंजुरी दिली होती. करोनापासून आरोग्य कर्मचाऱ्यांचा बचाव होतो का, हेदेखील चाचणीत पाहिले जाणार आहे.

अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन औषध करोनाबाधितांवर उपचारासाठी योग्य असल्याचा दावा केला होता. त्यानंतर या औषधाची चर्चा सुरू झाली. हृदयरोग असलेल्या करोनाबाधितांना हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन औषधामुळे धोका निर्माण होऊ शकतो, असा इशारा अमेरिकेतील हृदयरोग तज्ञांनी दिला होता. मागील काही महिन्यांपासून हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन औषधाच्या परिणामाबाबत बऱ्याच चर्चा सुरू आहेत.

काठमांडू : भारताविरोधात वक्तव्य करुन नेपाळचे पंतप्रधान केपी शर्मा ओली स्वतः अडचणीत आले आहेत. नेपाळ कम्युनिस्ट पक्षातूनच वाढता विरोध पाहता ते आज ४ वाजता देशाला संबोधित करुन राजीनामा देण्याची शक्यता आहे. गेल्या काही दिवसांपासून नेपाळच्या सत्ताधारी कम्युनिस्ट पक्षानेच ओलींच्या राजीनाम्याची सातत्याने मागणी केली आहे. आता कम्युनिस्ट पक्षाच्या स्थायी समितीच्या बैठकीत राजीनामा मागणीचा प्रस्ताव पारित केला जाऊ शकतो. स्थायी समितीमध्ये ४५ पैकी ३२ सदस्यांनी ओलींच्या राजीनाम्याची मागणी केल्याची माहिती आहे.

स्थानिक नेत्यांच्या मदतीने भारताने माझं सरकार पाडण्याचा डाव रचला आहे, असं वक्तव्य ओली यांनी २८ जून रोजी केलं होतं. त्यानंतर स्वतःच्याच पक्षातील नेत्यांनी भारताविरोधात बेजबाबदार वक्तव्य केल्यामुळे ओलींवर मोठ्या प्रमाणात टीका केली. या वक्तव्याचा आधार म्हणून पुरावे सादर करावे, अन्यथा राजीनामा द्यावा, असं त्यांना कम्युनिस्ट पक्षाच्या नेत्यांनी सांगितलं होतं.

खरं तर गेल्या काही महिन्यांपासून ओली हे स्वतःच्या पक्षातील नेत्यांच्या निशाण्यावर होते. पण त्यांनी राजकीय फायद्यासाठी लिपुलेख, कालापानी आणि लिम्पियाधुरा या भारतीय भूभागांचा नेपाळच्या नव्या राजकीय नकाशात समावेश केला. या निर्णयामुळे देशाचा पाठिंबा मिळेल, असं त्यांचं गणित होतं. पण या निर्णयाचा त्यांना काहीही फायदा झाला नाही. उलट भारताविरोधात वक्तव्य केल्यामुळे नेपाळमधील नेते नाराज झाले.

 

 

वॉशिंग्टन: जगभरात करोनाबाधितांच्या संख्येत वाढ सातत्याने वाढ होत आहे. अमेरिका आणि ब्राझीलमध्ये करोनाबाधितांची संख्या लक्षणीयरीत्या वाढली आहे. करोनाबाधितांच्या वाढत्या संख्येमुळे अनेकजण चक्रावले असून वैज्ञानिकांनी यामागील सांगितलेले कारण धक्कादायक आहे. करोनाच्या विषाणूने आपले रुप बदलले असून त्यामुळेच बाधितांच्या संख्येत वाढ होत असल्याचा दावा करण्यात आला आहे.

आंतरराष्ट्रीय विज्ञानविषयक नियतकालिक सेल मध्ये हे संशोधन प्रकाशित झाले आहे. करोनाने आपले रुप बदलल्यामुळे अमेरिका, युरोपसह जगभरात बाधितांच्या संख्येत वाढ झाली असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. मात्र, पूर्वीच्या तुलनेत करोना विषाणूमुळे मृत्यू होण्याचा धोका कमी झाला असल्याचे संशोधकांनी म्हटले आहे.

अमेरिकेतील लॉस अलामॉस नॅशनल लॅबोरेटरीने केलेल्या संशोधनाचे प्रमुख बेट कोर्बर यांनी सांगितले की, कोविड-१९ च्या विषाणूमध्ये रुप बदलण्याची (म्युटेशन) क्षमता आहे. एप्रिलच्या सुरुवातीला विषाणूमध्ये बदल होत असल्याचे समोर आले होते. विषाणू्च्या 'डी६१४'मध्ये आश्चर्यपणे बदल होत असल्याचे समोर आले असल्याचे त्यांनी सांगितले. त्या आधारे वैज्ञानिकांनी विषाणूंच्या अनुवांशिक क्रमांची तपासणी केली.

कॅलिफोर्नियातील ला जोला इंस्टिट्युट फॉर इम्युनोलॉजी आणि एरोनोव्हायरस इम्युनोथेरेपी कंसोर्टियच्या एरिका ओल्मन सेफायर यांनी सांगितले की, सध्या जगात बहुतांशी करोनाबाधित हे जी६१४ या विषाणूशी बाधित आहे. करोनाचे हे स्वरूप डी६१४ च्या तुलनेत तीन ते नऊ पटीने अधिक वेगाने संसर्ग पसरवतो. मार्च महिन्याच्या सुरुवातीला युरोपमध्ये हा विषाणू होता आणि मार्च महिना अखेरीसपर्यंत अमेरिकेत दाखल झाला.

कोलंबो: चीन, नेपाळ, पाकिस्तानकडून भारतविरोधी कारवाया सुरू असताना आता श्रीलंकेकडूनही भारतविरोधी पावले उचलले जात असल्याची चर्चा सुरू आहे. श्रीलंका सरकारने कोलंबो येथील जया कंटनेर आणि इस्टर्न कंटेनर टर्मिनल प्रकल्पाची (ईसीटी) चौकशी करण्याचे आदेश दिले आहेत. इस्टर्न कंटनेर टर्मिनल प्रकल्प श्रीलंका, भारत आणि जपान संयुक्तपणे राबवणार होते. सिरीसेना यांच्या सरकारने या प्रकल्पाला मंजुरी दिली होती. हा प्रकल्प भारताच्या दबावात राबवण्यात येत असल्याचा आरोप करण्यात येत होता.

या प्रकल्पाच्या सामंजस्य करारावर मागील वर्षीच स्वाक्षऱ्या करण्यात आल्या होत्या. औपचारीक करारावर स्वाक्षरी होणे अद्याप बाकी आहे. या प्रकल्पाच्या करारावर स्वाक्षरी केल्यास बंदरावरील कामगारांनी संपावर जाण्याचा इशारा दिला होता. मागील काही दिवसांपासून त्यांनी आंदोलन पुकारले होते. श्रीलंकेचे पंतप्रधान महिंदा राजपक्षे यांनी कामगार संघटनांशी चर्चा केल्यानंतर या प्रकल्पाची चौकशी करण्याचा निर्णय घेतला आहे. हा प्रकल्प रखडल्यास भारताला नुकसान होण्याची भीती आहे.

जेसीटीच्या विकासाशी संबंधित खरेदी प्रक्रिया आणि त्याच्याशी संबंधित प्रकरणाची चौकशी करण्यात येणार आहे. टर्मिनलच्या बांधकामाशी निगडीत सर्व बाबींचीही चौकशी करण्यात येणार आहे. भारताच्या दृष्टीने हा प्रकल्प महत्त्वाचा आहे. चीनचा श्रीलंकेमध्ये हस्तक्षेप वाढला आहे. श्रीलंकेतील एक बंदर चीनने ९९ वर्षांसाठी भाडेतत्वावर घेतला आहे. हे बंदर सामरीकदृष्ट्या अतिशय महत्त्वाचे आहे. चीनला शह देण्यासाठी भारतानेदेखील श्रीलंकेतील बंदराच्या विकासासाठी पुढाकार घेतला असल्याची चर्चा आहे. श्रीलंकेचे तत्कालीन राष्ट्रपती सिरीसेना यांनी चीनपेक्षा भारताला प्राधान्य दिले होते. त्यांच्याच कार्यकाळात श्रीलंका, भारत आणि जपान यांच्या भागिदारीत इस्टर्न कंटनेर टर्मिनल प्रकल्प सामंजस्य करारावर स्वाक्षरी करण्यात आली होती.

बीजिंग: भारताचे पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी अचानक लडाखमध्ये भेट दिल्याने चीनचा जळफळाट सुरू झाला आहे. चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने या भेटीवर नाराजीचा सूर लावला असून दोन्ही देशांतील वातावरण अधिक बिघडेल असे कोणतेही कृत्य करता कामा नये. परराष्ट्र मंत्रालयाच्या या वक्तव्यानंतर चीनचा जळफळाट झाला असल्याची चर्चा सुरू आहे.

मागील दोन महिन्यांपासून लडाखमधील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर भारत आणि चीनच्या सैन्यामध्ये तणाव निर्माण झाला आहे. त्यातच जूनमध्ये चीनच्या हल्ल्यात भारताचे २० जवान शहीद झाल्यानंतर परिस्थिती आणखी तणावग्रस्त झाली. या पार्श्वभूमीवर पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी लडाखमध्ये अचानक भेट देत जवानांशी संवाद साधला. चीनने पंतप्रधान मोदींच्या भेटीवर नाराजी व्यक्त केली आहे. चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाचे प्रवक्ते झाओ लिजिन यांनी सांगितले की, दोन्ही देशांमधील तणाव कमी करण्यासाठी प्रयत्न सुरू आहेत. तणावात आणखी भर पडेल आणि वातावरण अधिक चिंताजनक होईल असे कृ्त्य दोन्ही देशांनी टाळायला हवे. भारत आणि चीन एकमेकांच्या संपर्कात असल्याचे त्यांनी सांगितले.

सोल: काही दिवसांपूर्वी दक्षिण कोरिया आणि उत्तर कोरियामध्ये वाढलेल्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर दोन्ही देशांमध्ये युद्ध छेडले जाईल अशी भीती व्यक्त केली जात होती. उत्तर कोरियाने सीमेवरील दक्षिण कोरियाच्या संपर्क कार्यालयावर बॉम्ब टाकून ते उडवून दिले. उत्तर कोरियाने केलेल्या या कारवाईचे कारण समोर आलें असून किम यांच्या पत्नीचे आक्षेपार्ह फोटो प्रसारीत केल्यामुळे या दोन देशांमध्ये तणाव निर्माण झाला असल्याची चर्चा आहे.

मागील काही महिन्यांपासून दक्षिण कोरियाच्या हद्दीतून उत्तर कोरियाविरोधात संदेश देणारे फुगे व पत्रके सोडण्यात येत होती. उत्तर कोरियातून पळून आलेल्या नागरिकांकडून हे कृत्य केले जात असल्याचे म्हटले जाते. फुगे सोडणाऱ्यांवर कारवाई करण्याची मागणी किम जोंग यांची बहीण किम यो जोंगने दक्षिण कोरियाकडे केली होती. मात्र, दक्षिण कोरियाने याकडे दुर्लक्ष केले होते. त्यानंतर किम यो यांनी दक्षिण कोरियाविरोधात लष्करी कारवाई करण्याची धमकी दिली होती. काही विरोधकांच्या फुगे व पत्रक सोडण्यावरून नव्हे तर त्यातील मजकूर आणि छायाचित्रावरून उत्तर कोरियाचे सर्वेसर्वा आणि राष्ट्राध्यक्ष किम जोंग आणि त्यांची बहीण किम यो यांनी संताप व्यक्त केला होता.

दक्षिण कोरियातून येणाऱ्या किमविरोधी पत्रकात किम यांच्या पत्नीवर आक्षेपार्ह टिप्पणी केली होती. त्याशिवाय त्यांचे आक्षेापार्ह छायाचित्रही प्रसारीत करण्यात आले होते. त्यामुळे किम यो यांनी दक्षिण कोरियाकडे या बंडखोरांवर कारवाई करण्याची मागणी केली होती. किम यांच्या पत्नीबद्दल खालच्या पातळीवर टीका करण्यात येत असल्याच्या वृत्ताला उत्तर कोरियातील रशियन दूतावासाने दुजोरा दिला असल्याचे 'डेली मेल'ने म्हटले आहे. उत्तर कोरियात सोडण्यात येणाऱ्या फुग्यांवर, पत्रकांमध्ये किम यांची पत्नी री सोल जू यांच्याबद्दल आक्षेपार्ह भाषा आणि छायाचित्राचा वापर केला असल्याचे त्यांनी सांगितले.

 

काठमांडू: भारताच्या भूभागावर दावा ठोकणारे नेपाळचे पंतप्रधान केपी शर्मा ओली आता राजकीय संकटात सापडले असल्याचे स्पष्ट झाले आहे. सत्ताधारी नेपाळ कम्युनिस्ट पक्षातून त्यांच्याविरोधात सूर उमटल्यानंतर राजकीय हालचालींना वेग आला आहे. पंतप्रधान ओली यांनी सकाळी राष्ट्रपती विद्या देवी भंडारी यांची भेट घेतली.

राष्ट्रपती विद्या देवी भंडारी यांची भेट घेतल्यानंतर आपात्कालीन परिस्थितीमध्ये बोलवण्यात आलेल्या कॅबिनेट बैठकीत अर्थसंकल्पीय अधिवेशन रद्द करण्यात आले आहे. पंतप्रधान केपी शर्मा ओली देशासा उद्देशून भाषण करण्याची शक्यता आहे. नेपाळमध्ये मागील काही दिवसांपासून राजकीय घडामोडींनी वेग घेतला आहे. सत्ताधारी नेपाळ कम्युनिस्ट पक्षाची बैठक झाल्यानंतर या घडामोडींना वेग आला आहे. दरम्यान, बुधवारी, सायंकाळी छातीत दुखत असल्याच्या कारणास्तव पंतप्रधान केपी शर्मा ओली यांना रुग्णालयात दाखल करण्यात आले होते. उपचारानंतर त्यांच्या प्रकृतीत सुधारणा झाली असल्याचे वृ्त्त होते. त्यानंतर आज सकाळी त्यांनी राष्ट्रपतींची भेट घेतली.

भारत आणि नेपाळचे चांगले संबंध असताना लिपुलेखा मार्गाच्या बांधकामावरून नेपाळ सरकारने भारतविरोधी भूमिका घेतली. त्यानंतर संविधान दुरुस्ती करत नेपाळने भारताच्या भूभागावरही दावा ठोकला. त्यामुळे दोन्ही देशांमध्ये कधी नव्हे तो तणाव निर्माण झाला. भारत-नेपाळ वाद आणि चीनने नेपाळचा काही भूभाग ताब्यात घेतले असल्याचे समोर आल्यानंतर पंतप्रधान ओली यांच्याविरोधात वातावरण निर्माण होण्यास सुरुवात झाली.

 

रंगून: म्यानमारमधील कचिन प्रांतात काळाने कामगारांवर घाला घातला आहे. मुसळधार पावसामुळे जमीन खचल्यामुळे ११३ कामगारांचा मृ्त्यू झाला आहे. ढिगाऱ्यात अजूनही काही कामगार अडकले असल्याची माहिती अग्निशमन दलाने दिली आहे. त्यामुळे मृतांचा आकडा वाढण्याची भीती व्यक्त केली जात आहे.

स्थानिक अधिकारी टार लिन माउंग यांनी सांगितले की, आतापर्यंत १०० हून अधिकजणांचे मृतदेह आढळले आहे. अनेक मृतदेह चिखलात अडकले आहेत. त्यामुळे मृतांची संख्या वाढण्याची शक्यता असल्याचेही त्यांनी सांगितले. मागील एक आठवड्यापासून या भागत मुसळधार पाऊस सुरू असल्यामुळे बचावकार्यात अडथळे येत आहेत. हे कामगार जेडच्या खाणीत काम करत होते. मागील काही दिवसांपासून सुरू असलेल्या पावसामुळे भूस्खलन झाले असल्याचे म्हटले जात आहे.

 

जोहान्सबर्ग: घरात घुसून काही जणांनी ७१ वर्षांच्या आजीसमोरच तीन नातींवर बलात्कार केल्याची घटना दक्षिण आफ्रिकेतील क्वाजुलू-नताल प्रांतात घडली. नातींवरील अत्याचाराची घटना डोळ्यांदेखत पाहणाऱ्या आजीला धक्का सहन न झाल्याने तिचा जागीच मृत्यू झाला. या घटनेने देशभरात संताप व्यक्त करण्यात येत आहे.

क्वाजुलू - नताल प्रांतात घडलेल्या या बलात्काराच्या घटनेने देशभरात खळबळ माजली आहे. काही लोक ७१ वर्षीय महिलेच्या घरात घुसले. त्यांनी तिच्या तीन नातींवर बलात्कार केला. धक्कादायक म्हणजे नातींवर बलात्कार होत असताना या वृद्धेला जबरदस्तीने समोर बसवले होते. डोळ्यांदेखत नातींवर बलात्कार होत असल्याचा वृद्धेला मोठा धक्का बसला. तो सहन न झाल्याने हृदयविकाराच्या तीव्र झटक्याने तिचा मृत्यू झाला.

डेली मेलच्या वृत्तानुसार, घरात किती लोक घुसले होते याची माहिती मिळू शकली नाही. तर पीडित मुलींच्या म्हणण्यानुसार, बलात्कार करणारी एकच व्यक्ती होती. त्यांनी अनुक्रमे १९, २२ आणि २५ वर्षाच्या तीन मुलींना एका खोलीत बंद केले. त्यानंतर ७१ वर्षीय महिलेला या खोलीत फरफटत घेऊन आले. तिला एका खुर्चीला बांधले. त्यानंतर एका आरोपीने बंदुकीचा धाक दाखवून आळीपाळीने तिन्ही मुलींवर बलात्कार केला. पोलिसांच्या माहितीनुसार, डोळ्यांदेखत नातींवर बलात्कार होत असल्याचे पाहून आजीला धक्का बसला. ती बेशुद्ध पडली. यानंतर तिचा मृत्यू झाला.

कॅनबरा: आक्रमक विस्तारवादी धोरणामुळे चीनने आपल्या शेजारी देशांसोबत वाद ओढावून घेतला आहे. तर, दुसरीकडे जागतिक आरोग्य संघटनेत चीनविरोधी भूमिका घेतल्यामुळे ऑस्ट्रेलियाविरोधातही चीनने भूमिका घेण्यास सुरुवात केली आहे. चीन आणि ऑस्ट्रेलियातील वाद आणखी वाढण्याची शक्यता आहे. चीनच्या दादागिरीला उत्तर देण्याची तयारी ऑस्ट्रेलियाने केली. इंडो-पॅसिफिक समुद्र भागात ऑस्ट्रेलियन सरकार सैन्याची कुमक वाढवणार आहे.

करोनाच्या मुद्यावर ऑस्ट्रेलियाने उपस्थित केलेल्या प्रश्नांमुळे चीन नाराज झाला आहे. त्याचे पडसाद दोन्ही देशांमध्ये होणाऱ्या व्यापारात उमटत आहे. नुकतंच चीन सरकारने आपल्या नागरिकांनी ऑस्ट्रेलियात न जाण्याचा सल्ला दिला होता. इतकंच नव्हे तर चीनने ऑस्ट्रेलियातून आयात करण्यात येणाऱ्या काही मालांवर बंदी आणली आहे. त्याशिवाय काही दिवसांपूर्वी चिनी हॅकर्संनी ऑस्ट्रेलियावर सायबर हल्ला केला होता. ऑस्ट्रेलियन सैन्याचे सशक्तीकरण करण्याचा निर्णय पंतप्रधान स्कॉट मॉरिसन यांनी केली आहे. त्यांनी नवीन शस्त्र खरेदीसह आशियाई-पॅसिफिक भागात ऑस्ट्रेलियन सैन्याची कुमक वाढवण्याचा निर्णय घेतला आहे.

इस्लामाबाद: लडाखमध्ये भारत आणि चीनमध्ये सुरू असलेल्या तणावाच्या पार्श्वभूमीवर पाकिस्तानने पाकव्याप्त काश्मीरमधील गिलगिट-बाल्टिस्तानमधील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर जवळपास २० हजार सैन्य तैनात केले असल्याचे वृत्त आहे. भारतावर दवाब टाकण्याचा प्रयत्न असल्याची चर्चा आहे. चीनच्या इशाऱ्यावरून पाकिस्तान लष्कराने ही कृती केली असल्याचे म्हटले जात आहे.

'इकॉनॉमिक्स टाइम्स'च्या वृत्तानुसार, लडाखमध्ये घुसखोरी केल्यानंतर भारतावर दबाव टाकण्यासाठी चीनच्या अधिकाऱ्यांची काश्मीर खोऱ्यात हिंसाचार करण्यासाठी अल बदर या कट्टरतावादी संघटनेशी चर्चा सुरू आहे. त्यामुळे प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेच्या वादावर पाकिस्तान आणि चीन एकत्र आले असल्याची चर्चा आहे. त्यातूनच पाकिस्तानने काश्मीरच्या पश्चिम भागात २० हजार सैनिकांना तैनात केले आहे. त्याशिवाय, पाकव्याप्त काश्मीरमधील रुग्णालयात जवानांवर उपचार करण्यासाठी काही खाटा राखीव ठेवण्याचे आदेश लष्कराने दिले होते.

सूत्रांनी दिलेल्या माहितीनुसार, बालाकोट एअर स्ट्राइकनंतर दोन्ही देशांमध्ये तणाव निर्माण झाल्यानंतर जेवढे सैन्य पाकिस्तानने प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर तैनात केलेल्या सैन्यांपेक्षा अधिक सैन्य तैनात करण्यात आले आहे. त्याशिवाय, पाकिस्तानच्या एअर डिफेन्सनेही या भागावर २४ तास देखरेख ठेवण्यास सुरुवात केली आहे. काश्मीरमधील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर सैन्य तैनाती करून पाकिस्तान आणि चीनकडून भारतावर दवाब बनवण्याचा प्रयत्न सुरू असल्याची चर्चा आहे.

वॉशिंग्टन: करोनाच्या संसर्गाने जगभरात थैमान घातले आहे. करोनाला अटकाव करण्यासाठी जगभरातून प्रयत्न विविध पातळीवर प्रयत्न सुरू आहेत. करोना प्रतिबंधक लसीवरही संशोधन सुरू आहे. आता आणखी एका लसीची मानवी चाचणी यशस्वी झाला असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. अमेरिकेतील बायोटेक फर्म इनोव्हिओने हा दावा केला असून लस ९४ टक्के यशस्वी झाली असल्याचा दावा करण्यात आला आहे.

इनोव्हिओ कंपनीने आयएनओ-४८०० नावाची लस विकसित केली आहे. या लसीची चाचणी ४० जणांवर करण्यात आली आहे. ही चाचणी ९४ टक्के यशस्वी झाली असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. क्लिनिकल चाचणी दरम्यान अमेरिकेत १८ ते ५० या वयोगटातील ४० लोकांना लस देण्यात आली होती. या ४० जणांना चार आठवड्यात दोनदा लशीचे इंजेक्शन देण्यात आले. त्यानंतर आयएनओ-४८०० लशीमुळे सर्वांच्याच शरीरातील रोगप्रतिकारक क्षमता वाढली असल्याचा दावा कंपनीने केला आहे. या चाचणी दरम्यान, लस टोचल्यामुळे कोणताही प्रतिकूल परिणाम दिसून आला नसल्याचेही कंपनीने म्हटले आहे.

इनोव्हिओ कंपनीचे वरिष्ठ उपाध्यक्ष केट ब्रॉडरीक यांनी म्हटले की, १० जानेवारी रोजी चीनच्या संशोधकांनी करोना विषाणूचा जेनेटिक कोड प्रसिद्ध केला होता. त्याआधारे एक सूत्र तयार करण्यात आले. ही डीएनए लस करोना विषाणूच्या स्पाइक प्रोटीनची ओळख पटवून तशाच प्रकारच्या प्रोटीनची निर्मिती करणार असून करोनाच्या विषाणूला निष्क्रिय करणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. स्पाइक प्रोटीनमुळे मानवाच्या शरीरातील रोगप्रतिकारक क्षमतेत वाढ होईल. लसीमुळे स्पाइक प्रोटीनची निर्मिती झाल्यास शरीर त्यालाच विषाणू समजून आणखी अॅण्टीबॉडी तयार करणार. मात्र, या प्रोटीनमुळे शरीराला कोणतेही नुकसान होणार नाही मात्र, करोना विषाणूचा खात्मा होणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. या लशीची दुसऱ्या व तिसऱ्या टप्प्यातील चाचणी लवकरच सुरू होणार आहे.

तेहरान: जानेवारी महिन्यात अमेरिकेच्या ड्रोन हल्ल्यात इराणच्या रिवोल्यूशनरी गार्डचे कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी ठार झाले होते. त्यांच्यावर झालेल्या हल्ल्यानंतर इराण आणि अमेरिकेतील संबंध आणखीच ताणले गेले असून आता इराण सरकारने अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांच्याविरोधात अटक वॉरंट काढले आहे. ट्रम्प यांच्याशिवाय इतरही अमेरिकन अधिकाऱ्यांविरोधात वॉरंट काढण्यात आले आहे. इराणने ट्रम्प यांना अटक करण्यासाठी इंटरपोलची मदत मागितली आहे.

तेहरान सरकारी वकील अली अलकसिमेर यांनी सांगितले की, ट्रम्प आणि अन्य ३० हून अधिकजणांनी ३ जानेवारी रोजी सुलेमानी यांच्यावर ड्रोन हल्ला केला. या प्रकरणातील त्यांचा सहभाग असल्याचा इराण सरकारचा आरोप आहे. ट्रम्प यांच्यासह इतरांवर हत्या करणे आणि दहशतवादाचा आरोप ठेवण्यात आला आहे. ट्रम्प यांच्याशिवाय अन्य आरोपींबाबत कोणाचेही नाव सरकारी वकील अली यांनी जाहीर केले नाही. ट्रम्प यांचा राष्ट्राध्यक्षपदाचा कार्यकाळ संपल्यानंतरही त्यांना शिक्षा देण्यासाठी प्रयत्न करण्यात येणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. ट्रम्प यांच्याविरोधात अटक वॉरंट काढण्यात आल्यामुळे इराण-अमेरिकेतील तणाव वाढवण्याची शक्यता आहे. याआधीच ट्रम्प यांनी इराणला धमकी दिली होती.

थिंफू: दक्षिण चीन समुद्रापासून ते लडाखपर्यंत आक्रमक विस्तारवादी भूमिका घेणाऱ्या चीनने आता आणखी एका देशाच्या भूभागावर दावा ठोकला आहे. चीनने भूतानच्या अभयारण्याच्या वनजमिनीवर दावा केला असून हा भूभागावर चीन-भूतानमध्ये वाद सुरू असल्याचे म्हटले आहे. मात्र, भूतानने हा दावा फेटाळून लावला आहे.

चीनने Global Environment Facility Council च्या ५८ व्या बैठकीत हा दावा केला. भूतानची सकतेंग वन्यजीव अभयारण्याची जमिन ही वादग्रस्त असल्याचा दावा चीनने केला. त्याशिवाय अभयारण्याला मिळणाऱ्या निधीत आडकाठी करण्याचा प्रयत्न चीनने केला. मात्र, भूतानने हा दावा फेटाळून लावला आहे. मागील काही वर्षांत या जमिनीच्या मुद्यावर चीनने कधीच दावा केला नाही. सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य हा आमच्या देशाचा अविभाज्य भाग असल्याचे भूतानने चीनला ठणकावले.

इंडिया टुडेने दिलेल्या वृत्तानुसार, या अभयारण्याला जागतिक पातळीवरून निधी देण्यात आला नव्हता. पहिल्यांदाच या अभयारण्याला निधी देण्याची वेळ तेव्हा चीनने आपला दावा ठोकला. चीनच्या विरोधानंतरही कौन्सिलने या प्रकल्पाला मंजुरी दिली. कौन्सिलमध्ये चीनचा प्रतिनिधी आहे. मात्र, भूतानचा थेट प्रतिनिधी नाही. भूतानच्यावतीने भारताचे वरिष्ठ आयएएस अधिकारी अपर्णा सुब्रमणि यांनी प्रतिनिधीत्व केले. जागतिक बँकेत त्या भारतासह बांगलादेश, भूतान, मालदीव, नेपाळ आणि श्रीलंकेच्या प्रभारी आहेत.

 

बीजिंग: लडाखमधील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर भारत-चीनमध्ये तणाव निर्माण झाला आहे. भारताच्या हद्दीत घुसखोरी करणाऱ्या चीनवर दबाव वाढवण्यासाठी भारत सरकारने टिकटॉकसह ५९ चिनी अॅपवर बंदी घातली आहे. केंद्र सरकारच्या या निर्णयाचे पडसाद चीनमध्येही उमटले आहेत. चीनच्या सरकारी माध्यमांनी भारत सरकारच्या या निर्णयाविरोधात थयथयाट सुरू केला आहे. भारताचा हा निर्णय म्हणजे अमेरिकन सरकारची नक्कल करण्याचा प्रयत्न असल्याचे त्यांनी म्हटले आहे.

बंदी घातलेल्या अॅप्सविरोधात अनेक तक्ररी येत होत्या. हे अॅप्स देशाचे सार्वभौमत्व, सुरक्ष आणि अखंडतेसाठी घातक बनत चालले होते. चीन या अॅप्सद्वारे भारतीयांच्या डेटाशी छेडछाड करू शकत होता, त्यामुळे केंद्र सरकारने या अॅप्सवर बंदी घातली आहे. त्यानंतर चीनमधील माध्यमांमध्ये या निर्णयाचे पडसाद उमटले आहे. चीनचे सरकारी वृत्तपत्र ग्लोबल टाइम्सने म्हटले की, भारताने घेतलेला हा निर्णय म्हणजे अमेरिकेच्याजवळ जाण्याचा प्रयत्न असल्याचे ग्लोबल टाइम्सने म्हटले आहे. अमेरिकेनेदेखील राष्ट्रवादाच्या आडून चिनी वस्तूंवर बंदी आणण्यासाठी प्रयत्न सुरू केले. या निर्णयामुळे भारताच्या अर्थव्यवस्थेवर परिणाम होणार असल्याचे ग्लोबल टाइम्सने म्हटले आहे.

जिनिव्हा: जगभरातील अनेक देशांमध्ये करोना संसर्गाचा कहर सुरू आहे. काही मोजक्या देशांना करोनाच्या संसर्गावर नियंत्रण मिळवण्यास यश आले असले तरी अनेक देशांमध्ये करोनाचा संसर्ग फैलावला आहे. करोनाचा जोर ओसरणे तर दूर अद्याप संसर्गाने उच्चांक गाठला नसल्याचा इशारा जागतिक आरोग्य संघटनेने दिला आहे. जगभरातील देशांनी निर्देशांचे योग्य पालन न केल्यास करोनाचे संकट अधिकच गडद होणार असल्याचा इशारा जागतिक आरोग्य संघटनेचे प्रमुख टेड्रोस घेब्रेयेसस यांनी दिला आहे.

करोनाचा संसर्ग लवकरात लवकर संपावा अशी आमची इच्छा असल्याचे टेड्रोस घेब्रेयेसस यांनी एका व्हर्चु्अल बैठकी दरम्यान सांगितले. करोनावर मात करून पूर्वी सारखं आयुष्य जगण्याची सर्वांचीच इच्छा आहे. मात्र, करोनाची महासाथ आटोक्यात आणण्याच्या दृष्टीने आपण खूप दूर असल्याचे त्यांनी सांगितले. जागतिक पातळीवर करोनाचा संसर्ग वेगाने पसरत असल्याचे त्यांनी सांगितले. जागतिक पातळीवर अनेक देशांमध्ये परस्पर अविश्वास, एकजूट नसणे अशा अनेक कारणांमुळे करोना संसर्गाचा वेग वाढत आहे. अशीच परिस्थिती राहिल्यास करोनाचा जोर आणखी वाढणार असून महासंकटाची टांगती तलवार असल्याचे त्यांनी सांगितले. टेड्रोस घेब्रेयेसस यांनी करोना नियंत्रणासाठी जर्मनी, दक्षिण कोरिया आणि जपान सरकारचे कौतुक केले.

बीजिंग: लडाखमधील गलवान खोऱ्यात १५ जून रोजी भारतीय जवानांवर हल्ला झाला होता. या हल्ल्यात २० भारतीय जवान शहीद झाले होते. या घटनेनंतर भारत आणि चीन दरम्यान दोन्ही देशातील तणाव वाढला आहे. या घटनेच्या काही दिवस आधी चीनने माउंटन डिव्हिजन आणि मार्शल आर्टमध्ये माहीर असलेल्या खास सैनिकांना तैनात केले असल्याचे समोर आले आहे. त्यामुळे भारतीय जवानांवर हल्ला पूर्वनियोजित असल्याची चर्चा सुरू झाली आहे.

चीन सरकारच्या नॅशनल डिफेन्स न्यूजने दिलेल्या वृत्तानुसार, १५ जून आधी तिबेटची राजधानी ल्हासामध्ये चिनी सैन्याने पाच नवीन मिलिशीया डिव्हिजनला तैनात केले होते. यामध्ये चीनच्या माउट एव्हरेस्ट ऑलिम्पिक टॉर्च रिले संघाच्या माजी सदस्यांसह मार्शल आर्ट क्लबच्या सदस्यांचा सहभाग होता. त्यांच्यामुळेच सीमेवर हिंसाचार झाला असल्याचे समोर आले आहे. चिनी सैन्यात माउंट एव्हरेस्ट ऑलिम्पिक टॉर्च रिले टीमचे सदस्य डोंगरावर चढाई करण्यास माहीर आहेत. तर, मार्शल आर्ट क्लबचे सदस्य हे घातपात करणारे असतात. प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर गोळीबार न करण्याचा नियम आहे. त्यामुळे चीनने या घातपात करणाऱ्यांची नेमणूक केली असल्याची चर्चा आहे.

टोकियो: चीनच्या आक्रमक विस्तारवादी धोरणामुळे आशिया खंडात तणाव निर्माण होत आहे. लडाखमध्ये भारताच्या हद्दीत घुसखोरी केल्यानंतर चीनने जपानचे नियंत्रण असलेल्या बेटावर दावा केला. चीनच्या या दाव्यावरून जपान आणि चीनमध्ये तणाव निर्माण झाला आहे. अशातच आता जपानच्या हवाई दलाने चीनच्या बॉम्बर विमानाला आपल्या हवाई हद्दीतून पिटाळून लावले असल्याचे समोर आले आहे.

चीन आणि जपानमध्ये मागील काही दिवसांत तणाव वाढला आहे. पूर्व चीन समुद्रात जपानचे नियंत्रण असलेल्या ओकिनावा आणि मियाको या बेटादरम्यान, चीनच्या एच-६ स्ट्रेटेजिक बॉम्बर आढळले. त्यानंतर जपानच्या एफ-१६ फायटर जेट्सने या बॉम्बरला पिटाळून लावले असल्याची माहिती जपानच्या संरक्षण मंत्रालयाने दिली आहे. काही दिवसआधी चीनच्या पाणबुडीने जपानच्या हद्दीत प्रवेश केला होता. त्यानंतर जपानी नौदलाने पाणबुडीला हुसकावून लावले होते.

चीनच्या एच-६ बॉम्बरमध्ये दूर अंतरावरील लक्ष्याचा भेद करण्याची क्षमता आहे. त्याशिवाय अणवस्त्र हल्ल्याची क्षमता या बॉम्बरमध्ये आहे. अमेरिकेच्या तळावर हल्ला करण्यासाठी चीनने आपल्या ताफ्यात याचा समावेश केला असल्याचे म्हटले जाते. याआधी या बॉम्बरमध्ये फक्त क्षेपणास्त्रद्वारे हल्ला करण्याची क्षमता होती. मात्र, त्यानंतर त्याला अद्यावत करण्यात आले.

बेटाच्या दाव्यावरून चीन-जपानमध्ये वाद
चीनने पूर्व चीन समुद्रातील बेटावर आपला दावा सांगितला आहे. सध्या हे बेट जपानच्या ताब्यात असून सेनकाकू आणि चीनमध्ये डियाओस या नावाने ओळखले जाते. या बेटांचा ताबा १९७२ पासून जपानकडे आहे. हे बेट आपल्या हद्दीत येत असल्याचा दावा चीन करत असून जपानने या बेटावरील दावा सोडण्याची मागणी केली आहे. या बेटासाठी जपानवर सैनिकी कारवाई करण्याची धमकी चीनने दिली आहे.

काठमांडू : भारताकडून माझं सरकार पाडण्याचा डाव असून यासाठी दिल्लीत बैठका होत आहेत, असा सनसनाटी आरोप नेपाळचे पंतप्रधान केपी शर्मा ओली यांनी रविवारी केला. नेपाळमधील दिवंगत कम्युनिस्ट नेते मदन भंडारी यांच्या जयंतीच्या कार्यक्रमात बोलताना त्यांनी हा आरोप केला. नेपाळ सरकारकडे संसदेत पूर्ण बहुमत आहे. त्यामुळे कुणी काहीही नियोजन केलं तरी ते यशस्वी होणार नाही, असंही ओली म्हणाले.

'दिल्लीतून याबाबत एक बातमी येत आहे. नेपाळने सुधारित नकाशासाठी जी घटनात्मक दुरुस्ती केली त्याबाबत चर्चा करण्यासाठी दिल्लीत बैठका होत आहेत,' असं म्हणत हा माझा सरकार पाडण्याचा डाव असल्याचा आरोप ओलींनी केला. नेपाळने आपल्या सुधारित नकाशात भारताचे भाग असलेले लिम्पियाधुरा, कालापानी आणि लिपुलेख यांचाही समावेश केला आहे, ज्याला घटनात्मक दुरुस्तीद्वारे नेपाळच्या संसदेने मंजुरी दिली. या विधेयकावर नेपाळच्या राष्ट्रपती बिद्या देवी भंडारी यांनी १८ जूनला स्वाक्षरी केली.

नेपाळने प्रादेशिक रचना ठामपणे सांगितल्यामुळे भारताला राग आहे, असंही ओली म्हणाले. 'नेपाळचा राष्ट्रवाद एवढा कमकुवत नाही. आम्ही आमचा नकाशा बदलला आहे आणि देशाच्या पंतप्रधानालाच काढून टाकण्याचा प्रयत्न केला, तर ते नेपाळसाठी अकल्पनीय असेल', असं ते म्हणाले. काही लोकांच्या मते नेपाळचा नवा नकाशा हा गुन्हा आहे, असं म्हणत त्यांनी भारताकडे बोट केलं. '२०१६ मध्येही मी चीनच्या जवळ गेल्यामुळे बाहेरुन माझं सरकार पाडण्याचा प्रयत्न झाला होता. चीनसोबत वाहतूक करार केला, ज्यामुळे भारतावरील अवलंबत्व कमी झालं आहे', असं ते म्हणाले.

वॉशिंग्टन: जगभरात करोनाबाधितांची संख्या वाढत असून एक कोटींहून अधिकजणांना करोनाची लागण झाली आहे. करोना विषाणूची लागण झाल्यानंतर रुग्णांमध्ये लक्षणे दिसत नसल्यामुळे आरोग्य विभागासमोर आव्हाने वाढत आहेत. त्यातच आता अमेरिकेच्या 'सेंट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल अॅण्ड प्रीव्हेंशन'ने करोनाची तीन लक्षणे सांगितले.

याआधी सुका खोकला, ताप, थकवा येणे, श्वास घेण्यास त्रास होणे आधी लक्षणे करोनाबाधितांची असल्याचे समोर आले होते. त्यानंतर आता 'सेंट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल अॅण्ड प्रीव्हेंशन'ने करोनाची आणखी तीन लक्षणे सांगितली आहेत. यामध्ये नाक सतत वाहणे, अतिसार आणि उलटी ही लक्षणे करोनाच्या आजाराची असू शकतात. या आजारांना सामान्य आजार न समजण्याचा सल्ला 'सेंट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल अॅण्ड प्रीव्हेंशन'ने (सीडीसी) दिला आहे.

'सीडीसी' नुसार, नाक सतत वाहणे हे करोनाच्या लक्षणात आढळले नव्हते. त्याशिवाय सतत नाक वाहत असेल आणि अस्वस्थ वाटत असेल तर त्या व्यक्तीला करोनाची बाधा असण्याची शक्यता आहे. काही करोनाबााधित रुग्णांमध्ये ही लक्षणे आढळली असल्याचे समोर आले असल्याचे 'सीडीसी'ने म्हटले आहे. करोनाबाधित रुग्णांमध्ये अतिसाराची लक्षणे दिसत असल्याचे 'सीडीसी'ने म्हटले आहे. कोणत्याही व्यक्तीला अतिसाराचा त्रास होत असल्यास त्याला करोनाचा संसर्ग असण्याची शक्यता आहे. अशा व्यक्तीची तातडीने करोना चाचणी करण्याची आवश्यकता असल्याचे 'सीडीसी'ने म्हटले आहे. त्याशिवाय सतत मळमळल्यासारखे वाटणे हे लक्षणंदेखील करोनाचे लक्षण असल्याचे सीडीसीने म्हटले आहे. सतत मळमळल्यासारखे वाटणे हे सामान्य लक्षण नसल्याचे 'सीडीसी'ने म्हटले आहे. ही लक्षणे आढळल्यास संबंधित व्यक्तीने तातडीने आयसोलेशनमध्ये जाण्याची आवश्यकता असल्याचे 'सीडीसी'ने म्हटले.

बीजिंग: भारत आणि चीन यांच्यातील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवरील तणावाचे पडसाद आता व्यापारावरही उमटू लागले आहेत. भारतात चीनमधून येणाऱ्या वस्तूंची कडक तपासणी सुरू असल्याचे वृत्त समोर आल्यानंतर चीनमध्येही भारतातून येणाऱ्या वस्तू बंदरात अडकून ठेवल्याच्या तक्रारी समोर आल्या आहेत. चीनसह हाँगकाँगमधील बंदरावर भारतीय वस्तू कस्टम विभागाने अडवून ठेवल्याचा आरोप भारतीय निर्यातदारांनी केला आहे.

या प्रकरणी भारतातील निर्यातदारांनी वाणिज्य मंत्रालयाला पत्र लिहून मार्ग काढण्याची विनंती केली आहे. भारतातून येणाऱ्या माल चीन आणि हाँगकाँग कस्टमचे अधिकारी अडवून ठेवत आहेत. कंटेनरमधील सर्वच वस्तूंचे परीक्षण करण्यात येत आहे. त्यामुळे कंटेनरमधील वस्तू बाजारात जाण्यामध्ये अडचणी निर्माण होत असल्याचे निर्यातदारांनी म्हटले आहे. तपासणीबाबतचे कोणतेही अधिकृत आदेश आम्हाला मिळाले नाहीत. मात्र, तरीदेखील सर्वच वस्तू तपासण्यात येत असल्यामुळे बंदरावर भारतीय माल असलेल्या कंटेनरची संख्या वाढतच आहे. चीन आणि हाँगकाँगमधील प्रकार हा भारतीय कस्टम विभागाने सुरू केलेल्या कारवाईला प्रत्युत्तर असल्याची चर्चा आहे. मात्र, याबाबत भारत किंवा चीन हे दोन्ही देशांच्यावतीने कोणतीही अधिकृत प्रतिक्रिया आलेली नाही.

थिंफू: भारताच्या दिशेने येणारे पाणी भूतानने अडवले असल्याचे वृत्त समोर आल्यानंतर गोंधळ उडाला होता. मात्र, भूतानने सरकारने जाणिवपूर्वक पाणी अडवले नसल्याचे समोर आले आहे. चीन, नेपाळनंतर भूताननेदेखील भारताविरोधात पाऊल उचलले असल्याची चर्चा सुरू झाली होती. पाणी अडवल्यामुळे आसाममधील शेतकऱ्यांनी आंदोलनही केले होते. मात्र, आता परिस्थिती सामान्य असल्याचे भूतानने सांगितले आहे.

भारत आणि भूतान या दोन्ही देशांचे संबंध अधिक चांगले राहिले आहेत. मात्र, भूतानने मागील काही दिवसांमध्ये आसाममधील बक्सा जिल्ह्यात येणारे पाणी अडवले आहे. त्यामुळे भारतीय शेतकऱ्यांना नुकसान सहन करावे लागत आहे. बक्सा जिल्ह्यातील २६ हून अधिक गावातील जवळपास सहा हजार शेतकरी सिंचनासाठी डोंग योजनेवर अवलंबून आहेत. स्थानिक शेतकरी आपल्या शेतीसाठी १९५३ पासून भूतानमधून येणाऱ्या नदीच्या पाण्यावर अवलंबून आहेत. भूतानने पाणी अडवल्यानंतर शेतकऱ्यांनी आंदोलन केले असून सरकारकडे ही समस्या सोडवण्याची मागणी केली होती. आसाममधील शेतकऱ्यांनी केलेल्या आंदोलनामुळे या प्रश्नाची चर्चा झाल्यानंतर भूतानने याचे स्पष्टीकरण दिले आहे.

थिंफू: चीनने प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषा ओलांडून भारताच्या हद्दीत घुसखोरी केल्यानंतर भारत आणि चीनमध्ये तणाव निर्माण झाला आहे. त्यातच नेपाळने नवीन नकाशा प्रसिद्ध करून भारताच्या महत्त्वाच्या भूभागावर दावा ठोकल्याने नेपाळनेही भारतविरोधी भूमिका घेतली असल्याचे समोर आले. आता, आणखी एका शेजारी देशाने भारताविरोधी पाऊल उचलले आहे. भूतानने भारताकडे जाणारे पाणी अडवले आहे.

भारत आणि भूतान या दोन्ही देशांचे संबंध अधिक चांगले राहिले आहेत. मात्र, भूतानने मागील काही दिवसांमध्ये आसाममधील बक्सा जिल्ह्यात येणारे पाणी अडवले आहे. त्यामुळे भारतीय शेतकऱ्यांना नुकसान सहन करावे लागत आहे. बक्सा जिल्ह्यातील २६ हून अधिक गावातील जवळपास सहा हजार शेतकरी सिंचनासाठी डोंग योजनेवर अवलंबून आहेत. स्थानिक शेतकरी आपल्या शेतीसाठी १९५३ पासून भूतानमधून येणाऱ्या नदीच्या पाण्यावर अवलंबून आहेत. भूतानने पाणी अडवल्यानंतर शेतकऱ्यांनी आंदोलन केले असून सरकारकडे ही समस्या सोडवण्याची मागणी केली आहे.

इस्लामाबाद: जगभरात दहशतवादी कारवाया करणारा आणि अल कायदा या दहशतवादी संघटनेचा प्रमुख ओसामा बिन लादेन हा शहीद झाला असल्याची मुक्ताफळे पाकिस्तानचे पंतप्रधान इम्रान खान यांनी उधळली आहेत. ओसामाबाबतचे हे वक्तव्य त्यांनी पाकिस्तानच्या संसदेत केल्यामुळे इम्रान यांच्यावर टीका करण्यात येत आहे.

पाकिस्तानच्या संसदेत दहशतवादाच्या अनुषंगाने चर्चा सुरू होती. त्यावेळी इम्रान खान यांनी अमेरिकेच्या भूमिकेवर प्रश्न उपस्थित केले. पाकिस्तानने दहशतवादविरोधी लढाईत अमेरिकेला साथ देता कामा नये. पाकिस्तानने अमेरिकेला प्रामाणिकपणे साथ दिली. मात्र, अमेरिकेमुळे पाकिस्तानला बदनाम व्हावे लागले. अफगाणिस्तानमध्ये अमेरिकेला अपयश आले तर खापरही पाकिस्तानवर फोडले असल्याचे इम्रान यांनी म्हटले. अमेरिकन लष्कराने पाकिस्तानमध्ये घुसून ओसामा बिन लादेनला शहीद केले आणि पाकिस्तानला याची कल्पना दिली. जगभरात यामुळे पाकिस्तानची नाचक्की झाली असल्याचे इम्रान खान यांनी म्हटले.

 

इस्लामाबाद: लडाखमधील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर चीनकडून भारतविरोधी कारवाई सुरू आहे. त्यातच आता चीनने भारताविरोधात पाकिस्तानची मदत घेत असल्याचे समोर आले आहे. पाकिस्तानच्या भुमीवर चीनचे सैन्य असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. चीनने काश्मीर ते गुजरातपर्यंतच्या सीमेवर आपले सैन्य दाखल केले असल्याची चर्चा आहे.

मागील काही वर्षांत चिनी कंपन्यांनी पाकिस्तानमध्ये मोठ्या प्रमाणावर गुंतवणूक केली आहे. त्याशिवाय चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडोरचेही काम सुरू आहे. या कंपन्यांच्या आडून चीन पाकिस्तानचा भारताविरोधात वापर करण्याची शक्यता आहे. राजस्थानमधील जैसलमेरच्या घोटारू सीमेजवळ २५ किमीच्या अंतरावर खरेपूर येथे हवाई तळ निर्माण करण्यात आला आहे. मागील काही दिवसात चिनी सैन्यांची संख्या या ठिकाणी वाढली आहे. या हवाई तळावर मिग-२१ च्या समकक्ष असणाऱ्या चेनगुड जे-७, जेएफ-१७ लढाऊ विमाने, वाई-८ रडार आणि इतर अत्याधुनिक उपकरणे असल्याचा दावा एका वृत्तवाहिनीने केला आहे. त्याशिवाय बाडमेरमध्ये मुनाबावसमोर थारपारकरमध्ये चीनचे सैन्य विमानतळ बनवत असल्याची चर्चा आहे. हे विमानतळ भारतीय सीमेपासून २५ किमी अंतरावर आहे. त्याशिवाय, गुजरातला लागून असलेल्या सीमेवरदेखील मिठी भागात विमानतळ बांधकाम सुरू आहे.

वॉशिंग्टन: सगळ्या जगाचे लक्ष करोनाला रोखणाऱ्या लसीवर लागले आहे. अनेक देशांमध्ये करोनाच्या विषाणूला अटकाव करणाऱ्या लसीवर संशोधन सुरू असून काही लस चाचणीच्या निर्णायक टप्प्यावर आली आहे. मात्र, लस विकसित झाली तरी करोनाची बाधा होणारच नाही, याची खात्री देता येणार नसल्याचे मायक्रोसॉफ्टचे संस्थापक बिल गेट्स यांनी म्हटले आहे.

अमेरिकेतील सीएनएन या वृत्तवाहिनीसोबत बोलताना बिल गेट्स यांनी आपली प्रतिक्रिया व्यक्त केली. बिल गेट्स यांनी सांगितले की, या वर्षाखेर अथवा वर्षाच्या सुरुवातीला करोनाची लस उपलब्ध होईल. या लसीचे दोन फायदे होणार आहेत. एक तर करोनाच्या आजारापासून बचाव करेल आणि दुसरं म्हणजे

करोनाचा संसर्ग रोखला जाणार आहे. मात्र, लसीमुळे तुम्हाला करोनाची बाधा होणारच नाही, अशी खात्री देता येणार नसल्याचेही त्यांनी स्पष्ट केले. बिल यांनी सांगितले की, सध्या करोना प्रतिबंधक लसीची आवश्यकता आहे. अशावेळी वेगवेगळ्या वयोगटातील व्यक्ती, गरोदर महिलांवर चाचणी करण्यासाठी वेळ नाही. अशा परिस्थितीत योग्य, अचूक माहिती संकलित करणे हे कठीण काम आहे.

नैरोबी: आफ्रिकेतील गरिब देशांना मदत, कर्जाच्या जाळ्यात ओढण्याचा प्रयत्न करणाऱ्या चीनला मोठा झटका बसला आहे. केनियाने चीनसोबत झालेला अब्जावधी किंमतीचा रेल्वे प्रकल्प रद्द केला आहे. या रेल्वे प्रकल्पाशी निगडीत काही मुद्यांवर कोर्टात याचिका दाखल करण्यात आली होती. त्यानंतर कोर्टाने हा प्रकल्प रद्द करण्याचा आदेश दिला आहे.

जगभरातील अनेक देशांना चीनने कर्ज दिले आहे. त्याशिवाय अनेक देशातील महत्त्वांच्या प्रकल्पातही मोठ्या प्रमाणावर गुंतवणूक केली आहे. त्याशिवाय महत्त्वकांक्षी असणाऱ्या 'बेल्ट अॅण्ड रोड' प्रकल्पाच्या माध्यमातून चीन केनियापर्यंत एक स्टॅण्डर्ड गेज रेल्वे मार्ग सुरू करणार होता. या प्रकल्पाच्या अनुषंगाने काही दिवसांपूर्वी चीनचे राष्ट्रपती शी जिनपिंग यांनी केनियाचे राष्ट्रपती उहुरू केन्याटा यांचे अभिनंदन ही केले होते.

केनियासोबत चीनने रेल्वे मार्गाच्या प्रकल्पासाठी वर्ष २०१७ मध्ये करार केला होता. त्यानुसार, 'चायना रोड अॅण्ड ब्रिज कॉर्पोरेशनने केनियामध्ये अब्जो डॉलरच्या गुंतवणुकीतून बेल्ट अॅण्ड रोड इनिशिएटीव प्रकल्पातंर्गत रेल्वे मार्गांचा विस्तार करण्यात येणार होता. त्यासाठी केनियाने अॅक्सिस बँक ऑफ चायनाकडून ३.२ अब्ज डॉलरचे कर्ज घेतले होते.

 

वॉशिंग्टन: अमेरिकेत 'न्यू मेक्सिको'मधील सांते फे सिटी येथील भारतीय रेस्टॉरंटची तोडफोड करण्यात आली. शीख समाजाच्या व्यक्तीचे हे रेस्टॉरंट फोडण्यात आले. या वेळी भितींवर द्वेषपूर्ण वक्तव्ये लिहिण्यात आली होती, असे वृत्त स्थानिक माध्यमांनी दिले आहे.

'इंडिया पॅलेस रेस्टॉरंट'चे या घटनेत एक लाख अमेरिकी डॉलरचे नुकसान झाले आहे. बलजितसिंग या रेस्टॉरंटचे मालक आहेत. रेस्टॉरंटच्या भिंतीवर 'व्हाइट पॉवर', 'ट्रम्प २०२०', 'गो होम' आणि इतर अपशब्द रेस्टॉरंटच्या भिंती, दरवाजे, काउंटर आदी ठिकाणी स्प्रे पेटने लिहिण्यात आले होते. काही वाक्ये वर्णद्वेषी, तसेच धमकी देणारी होती, असे 'सांता फे रिपोर्टर' या स्थानिक वृत्तपत्राने म्हटले आहे.

या प्रकरणी स्थानिक पोलिस आणि एफबीआय तपास करत आहेत. 'द शीख अमेरिकन लीगल डिफेन्स अँड एज्युकेशन फंड' (एसएएलडीईएफ) या नागरी हक्क संघटनेने या घटनेचा निषेध केला आहे. सांते फे हे शांत शहर असून, शीख समाज येथे १९६०पासून एकात्मतेने राहत आहे, असे या संघटनेचे सदस्य सिमरनसिंग यांनी सांगितले. तोडफोड झालेल्या रेस्टॉरंटपासून ते मिनिटभराच्या अंतरावर राहायला आहेत. बलजितसिंग यांच्या कुटुंबीयांकडून परिसरातील बेघर आणि गरिबांना मोफत अन्न वाटप आणि सॅनिटरी उत्पादने देण्यात येत होते. हल्लेखोरांनी रेस्टोरंटवर हल्ला केल्यानंतर अन्न पाकिटे आणि वस्तू चोरल्या नेल्या आहेत. बलजित सिंग यांच्यासाठी काहीजणांनी निधी संकलनसाठी ऑनलाइन मोहीम सुरू केली आहे.

बीजिंग: लडाखमधील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर झालेल्या हिंसाचारानंतर भारत आणि चीनमध्ये तणाव वाढला होता. हा तणाव निवळण्यासाठी सैन्य मागे घेणार असल्याचे चीनने म्हटले होते. मात्र, चीनच्या बोलण्यात आणि वागण्यात फरक असल्याचे याआधीही दिसून आले आहे. आता पु्न्हा एकदा हीच परिस्थिती असल्याचे दिसून आले आहे. पँगोंग त्सो तलावाजवळ चीनने आपली कुमक वाढवली असल्याचे समोर आले आहे.

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस अॅनालिस्ट Detresfa ने नवीन सॅटेलाइट इमेज जारी केले आहेत. या सॅटेलाइट इमेजनुसार, चीनची पीपल्स लीबरेशन आर्मीने पँगोंग त्सो तलाव परिसरात अजून ठाण मांडले आहे. इतकेच नव्हे तर हळूहळू चीनची सैन्य लहान गटांद्वारे वाढत आहे. पँगोंग त्सो तलावापासून दक्षिणेकडील भागात १९ किमी अंतरावर चीनची सैन्याची जमवाजमव दिसून आली आहे. एकदाच मोठ्या संख्येने येण्याऐवजी चिनी सैन्य लहान गट करून जमा होत आहेत. ही सैन्य वाढ जाणीवपूर्वक करण्यात आली असल्याचा दावा करण्यात आला आहे.

भारत आणि चीनच्या लष्करी अधिकाऱ्यांच्या चर्चेनंतर चीनने दोन्ही देशांमध्ये तणाव कमी करून शांतता प्रस्थापित करण्यासाठी सहमती झाली असल्याचे म्हटले होते. मंगळवारी झालेल्या चर्चेत लडाखमध्ये तणाव कमी झाला असल्याचे चित्र होते.
 

बीजिंग: लडाखमधील गलवान खोऱ्यात १५ जून रोजी चिनी सैन्यासोबत झालेल्या हिंसाचारात २० भारतीय जवान शहीद झाले होते. त्यानंतर दोन्ही देशांमध्ये प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर तणाव निर्माण झाला आहे. तणाव निवळण्यासाठी दोन्ही देशांमध्ये लष्करी अधिकाऱ्यांमध्ये चर्चा झाल्यानंतर दोन्ही देशांनी सैन्य मागे घेण्याबाबत सहमती दर्शवली. मात्र, गलवान खोऱ्यात चीनने बंकर तयार केले असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. या दाव्यानंतर खळबळ उडाली आहे.

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस अॅनालिस्ट Detresfa ने गलवान खोऱ्यातील सॅटेलाइट इमेज जारी केली आहे. या छायाचित्राच्या आधारे चीन गलवान खोऱ्यात बंकर बनवत असल्याचा दावा करण्यात येत आहे. या ठिकाणी भारतीय जवान आणि चिनी सैन्यात संघर्ष झाला होता. या ठिकाणी चीनने छोट्या भिंती उभारल्या आहेत. या नवीन छायाचित्रामधून चीनच्या मनसुब्यांवरच प्रश्न उपस्थित करण्यात येत आहे. एका बाजूला चीन भारतासोबत चर्चा करत असून दुसऱ्या बाजूला आपली लष्करी ताकद या ठिकाणी वाढवत आहे.

सोऊल: मागील दिवसांपासून उत्तर कोरिया आणि दक्षिण कोरियातील तणाव वाढत आहे. उत्तर कोरियातील बंडखोरांना आश्रय दिलेल्या दक्षिण कोरियाविरोधात लष्करी कारवाई करण्याची धमकी उत्तर कोरियाने दिली होती. मात्र, उत्तर कोरियाचे राष्ट्राध्यक्ष किम जोंग उन यांनी या कारवाईला स्थगिती दिली आहे. उत्तर कोरियातील अधिकृत वृत्त संस्था 'कोरियन सेंट्रल न्यूज एजन्सी'ने याबाबतचे वृत्त दिले आहे.

किम जोंग उन यांनी मंगळवारी व्हिडिओ कॉन्फरन्सद्वारे सत्ताधारी वर्कर्स पार्टीच्या केंद्रीय सैन्य आयोगाच्या बैठकीत हजेरी लावली. या बैठकीत दक्षिण कोरियाविरोधातील लष्करी कारवाई स्थगित करण्याचा निर्णय घेण्यात आला. मात्र, हा निर्णय का घेण्यात आला याबाबतचे नेमके कारण समोर आले नाही. दक्षिण कोरियन सरकारने अधिकारी योह संग की यांनी सांगितले की, उत्तर कोरियाच्या हालचालींवर आमचे लक्ष असल्याचे सांगत अधिक माहिती देण्यास नकार दिला.

'फार ईस्टर्न स्टडीज्'चे तज्ञ किम डोंग युब यांनी सांगितले की , उत्तर कोरिया दक्षिण कोरियाकडून काही कारवाई होईल याची प्रतिक्षा करत असेल. उत्तर कोरिया स्वत:ला अधिक मजबूत करण्याचा प्रयत्न करत असेल त्यांनी सांगितले. किम डोंग युब हे दक्षिण कोरियाचे माजी सैन्य अधिकारी आहेत. दोन्ही देशातील लष्करी चर्चेत त्यांनी सहभाग घेतला होता. उत्तर कोरियाने दक्षिण कोरियाविरोधातील कारवाईला स्थगिती दिली आहे. ही कारवाई रद्द केली नाही, याकडेही त्यांनी लक्ष वेधले.
 

मॉस्को: दुसऱ्या महायुद्धात मित्र राष्ट्रांनी मिळवलेल्या विजयाला ७५ वर्ष पूर्ण झाल्याच्या निमित्ताने रशियाची राजधानीत मॉस्कोमध्ये शानदार सोहळा आयोजित करण्यात आला आहे. मॉस्कोमध्ये लष्कराच्या संचलनाचे आयोजन करण्यात आले असून भारतीय लष्करानेही यामध्ये सहभाग घेतला आहे. परदेशी भूमीवर भारतीय जवानांनी तिरंगा झेंड्यासह संचलनात सहभाग घेतला.

या विजय दिवसाच्या संचलनात रशियाने आपले लष्करी सामर्थ्य दाखवले. राष्ट्राध्यक्ष व्लामदिर पुतिन यांच्यासह अनेक देशांचे प्रमुख नेते यावेळी उपस्थित होते. दरम्यान, भारताचे संरक्षण मंत्री राजनाथ सिंहदेखील रशियात उपस्थित आहेत. त्यांनी रशियाचे उपपंतप्रधान युरी बोरिसोव यांच्यासोबत द्विपक्षीय संरक्षण संबंधांवर चर्चा केली. रशियन उपपंतप्रधान बोरिसोव यांनी राजनाथ सिंह यांची हॉटेलमध्ये भेट घेतली. दोन्ही देशांमध्ये सकारात्मक चर्चा झाली असल्याचे राजनाथ सिंह यांनी सांगितले. दोन्ही देशांमध्ये असणारे मैत्रीपूर्ण संबंध आणखी घट्ट होतील असा विश्वासही त्यांनी व्यक्त केला. भारताच्या सगळ्याच प्रस्तावांवर रशियाकडून सकारात्मक प्रतिसाद मिळाला असल्याचे त्यांनी म्हटले.

दुबई: मुस्लिम धर्मीयांसाठी पवित्र असणाऱ्या हज यात्रेबाबत अखेर सौदी सरकारने मोठी घोषणा केली आहे. हज यात्रेसाठी मर्यादित प्रमाणात यात्रा करण्यास परवानगी देण्यात आली असून हे सर्व यात्रेकरू सौदी अरेबियातीलच असणार आहेत. सौदी अरेबियाबाहेरील यात्रेकरूंना परवानगी नाकारण्यात आली आहे. हज यात्रेसाठी दरवर्षी जवळपास २० लाख लोक सहभागी होत असतात.

सौदी अरेबियाचे हज आणि उमरा विषयक मंत्रालयाने याबाबत एक पत्रक जारी केले आहे. त्यानुसार, करोना संकटाच्या पार्श्वभूमीवर मर्यादित लोकांनाच हज यात्रा करण्याची परवानगी देण्यात येणार असल्याचे सांगण्यात आले आहे. सौदी अरेबियाची स्थापना झाल्यानंतर ९० वर्षांमध्येही कधीही हज यात्रा रद्द करण्यात आली नव्हती. सौदी अरेबियातील राजघराणे मागील अनेक पिढ्यांपासून हज यात्रेचे संरक्षक आहेत.

सौदी अरेबिया सरकारने सांगितले की, लोकांच्या आरोग्याच्यादृष्टीने हा निर्णय घेण्यात आला आहे. फक्त सौदी अरेबियात सध्या वास्तव्यास असलेल्या नागरिकांना हज यात्रेची परवानगी देण्यात येणार आहे. पुढील महिन्यात हज यात्रेला सुरुवात होणार आहे. मात्र, हज यात्रेसाठी कितीजणांना परवानगी देण्यात येणार, याबाबत काहीही माहिती देण्यात आली नाही. 'रॉयटर्स' या वृत्तसंस्थेने दिलेल्या वृत्तानुसार, वयस्कर व्यक्तींना यात्रा करण्यास मनाई करण्यात येणार आहे. त्याशिवाय आरोग्य सुरक्षितेच्यादृष्टीने निर्णय घेण्यात येणार आहे. सौदी अरेबियाच्या अर्थव्यवस्थेत हज आणि उमराह यात्रेकरूंची महत्त्वाची भूमिका आहे. सौदी अरेबियाबाहेरील हज यात्रेकरूंना मनाई करण्यात आल्यामुळे सौदी सरकारला आर्थिक नुकसान सहन करावे लागणार आहे.
 

वॉशिंग्टन: करोनाचा संसर्ग, ढासळत असलेली अर्थव्यवस्था आणि वाढत्या बेरोजगारीच्या मुद्यावर टीकेचे धनी होत असलेले अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी मोठा निर्णय घेतला आहे. ट्रम्प यांनी एच१बी, एच-४ व्हिसा निलंबित करण्याचा निर्णय घेतला आहे. त्यामुळे नव्याने अमेरिकेत नोकरी इच्छिणाऱ्यांना याचा फटका बसणार आहे. हे निलंबन वर्षखेरपर्यंत असणार आहे.

'एच१बी' व्हिसा निलंबन आदेशाचा फटका नव्याने अमेरिकेत नोकरी करण्यासाठी जाणाऱ्या भारतीयांना बसणार आहे. अमेरिकेतील माहिती तंत्रज्ञान कंपन्यांमध्ये भारत आणि चीनमधून हजारो कर्मचाऱ्यांना नोकरी मिळते. विशेषत: भारतीय कर्मचाऱ्यांना अधिक मागणी असते. त्यामुळे ट्रम्प प्रशासनाच्या निर्णयामुळे भारतीयांना मोठा धक्का बसणार आहे. करोनाच्या संकटामुळे याआधीच एच१बी व्हिसाधारकांना नोकरी गमवावी लागली आहे. अनेक भारतीय अमेरिकेतून मायदेशी परतले आहेत. नवीन व्हिसा जारी न झाल्यामुळे हजारो भारतीय युवकांना रोजगार गमावण्याची वेळ येऊ शकते. भारतातही करोनाच्या संसर्गामुळे अर्थव्यवस्था संकटात सापडली आहे. त्याचाही परिणाम रोजगारावर होत आहे.

 

जेरुसलेम: करोनाच्या वाढत्या संसर्गामुळे जगभरातील अनेक देश चिंतेत आहेत. तर, दुसरीकडे करोनाच्या विषाणूला अटकाव करण्यासाठी संशोधकांचे विविध प्रयत्न सुरू आहेत. करोनाच्या संसर्गापासून बचाव करण्यासाठी मास्क, फेसशिल्डचा वापर करण्याचा सल्ला देण्यात येत आहे. मात्र, एका कंपनीने मास्कमुळे करोना विषाणूचा ९९ टक्के खात्मा होत असल्याचा दावा केला आहे. इस्रायलमधील Sonovia या कंपनीने हा खास मास्क बनवला आहे.

इस्त्रायलच्या या कंपनीने खास झिंक ऑक्साइड नॅनो पार्टिकलचं कोटिंग या मास्कवर केले आहे. त्यामुळे ९९ बॅक्टेरिया आणि व्हायरस निष्क्रिय होत असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. शांघायमधील मायक्रोस्पेक्ट्रम लॅबमध्ये या मास्क चाचणी घेण्यात आली आहे. त्या चाचणीतही व्हायरस ९० टक्क्याहून अधिक प्रमाणात निष्क्रिय होत असल्याचे समोर आले आहे.

कंपनीचे मुख्य तंत्रज्ञान अधिकारी लीट गोल्डहॅम्मर यांनी सांगितले की, येत्या काही आठवड्यात या रुग्णालयात वापरण्यात येणारे कपडे, संरक्षक उपकरण, कपडे आदींमध्ये फॅब्रिकचा वापर करण्यात येणार आहे. जर्मनी आणि अमेरिकेतील काही कंपनी आणि रुग्णालयांकडून मागणी करण्यात आली असल्याचे कंपनीने म्हटले आहे. या खास झिंक ऑक्साइडच्या मास्कची ऑस्ट्रियातही चाचणी घेण्यात आली होती. या चाचणीत सार्स-कोविड व्हायरसशी साधर्म्य असणाऱ्या विषाणूंचा वापर करण्यात आला होता. या चाचणीतही मास्कचा परिणामकारक असल्याचे समोर आले.

दुबई: करोनाच्या वाढत्या संसर्गामुळे जगभरात चिंता व्यक्त केली जात आहे. जवळपास ८१ देशांमध्ये करोनाची दुसरी लाट निर्माण झाल्याची परिस्थिती आहे. जगभरात करोनामुळे गंभीर परिस्थिती असताना जागतिक आरोग्य संघटनेने संसर्गाच्या मुद्यावर नेत्यांनी राजकारण न करण्याचे आवाहन जागतिक आरोग्य संघटनेने केले आहे. करोनापेक्षा जागतिक पातळीवरील एकजुटी अभाव हाच मोठा धोका असल्याचे जागतिक आरोग्य संघटनेचे अध्यक्ष टेड्रोस घेब्रेयेसस यांनी सांगितले.

ट्रेडोस यांनी दुबईत आयोजित केलेल्या जागतिक सरकार संमेलनास व्हिडिओ कॉन्फरन्सद्वारे संबोधित केले. त्यावेळी त्यांनी म्हटले की,करोनाचा संसर्ग फैलावत आहे. करोनाचा आपण सामना करत असलो तरी सगळ्यात मोठा धोका जागतिक एकजूट नसणे आणि जागतिक पातळीवर नेतृत्वाची कमतरता असणे हे दोन मोठे संकट सध्या आहे. दुभंगलेल्या जगासह आपण करोना महासाथीच्या आजारावर मात करू शकत नसल्याचे त्यांनी सांगितले. करोना संसर्गाच्या मुद्यावर चीन आणि अमेरिकेत आरोप प्रत्यारोप सुरू आहेत. अमेरिकेने जागतिक आरोग्य संघटनेवर गंभीर आरोप करताना चीनला झुकतं माप दिले असल्याचा आरोप केला होता. त्यानंतर अमेरिकेने जागतिक आरोग्य संघटनेचे सदस्यत्वही सोडले. अमेरिका-चीनच्या वादामुळे जगात दोन गट निर्माण झाले असल्याचे चित्र तयार झाले आहे.

बीजिंग: चिनी संशोधकांनी करोना विषाणूवरील लशीची दुसऱ्या टप्प्यातील मानवी चाचणी सुरू केली आहे. 'चायनिज अॅकेडमी ऑफ मेडिकल सायन्सेस'मधील इन्स्टिट्यूट ऑफ मेडिकल बायोलॉजीने रविवारी ही माहिती दिली. या चाचणीदरम्यान लशीचे प्रभावीपण आणि सुरक्षितता तपासली जाणार आहे.

करोना विषाणूची साथ वेगाने फैलावत असून, जग नव्या व धोकादायक टप्प्यात असल्याचे जागतिक आरोग्य संघटनेने म्हटले आहे. त्याच वेळी जगभरात विविध ठिकाणी करोना विषाणूवरील लशीच्या मानवी चाचण्या विविध टप्प्यांवर होत आहेत. मात्र, लशीची कोणतीही चाचणी व्यापक प्रमाणापर्यंत पोहोचलेली नाही.

चीनमधील संशोधकांनी शनिवारी लशीची दुसऱ्या टप्प्यातील मानवी चाचणी सुरू केली. सहा संभाव्य लशींची चाचणी चिनी संशोधक मानवावर घेत आहेत. यापूर्वी मेपासून पहिल्या टप्प्यात २०० जणांवर चाचणी घेण्यात आली आहे, असे इन्स्टिट्यूट ऑफ मेडिकल बायोलॉजीने रविवारी सोशल मीडियाच्या माध्यमातून सांगितले. दुसऱ्या टप्प्यातील चाचणीमध्ये लशीचा डोस निश्चित केला जाईल, तसेच संभाव्य लस निरोगी व्यक्तीच्या शरीरात सुरक्षितपणे प्रतिकारशक्ती वाढवते का, हे पाहिले जाईल.

 

बीजिंग: भारत-चीन दरम्यान प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर तणाव वाढल्यानंतर दोन्ही देशांनी आपले सैन्य अधिक सज्ज ठेवण्यावर भर दिला आहे. भारतीय हवाई दलाने मिग-२९ आणि अपाचे लढाऊ हेलिकॉप्टर सज्ज ठेवल्यानंतर आता चीनने लडाख ते अरुणाचल प्रदेशपर्यंतच्या सीमेवर लढाऊ विमाने सज्ज ठेवली असल्याचे समोर आले आहे. इतकंच नव्हे तर भारतीय सैनिकांची गस्त थांबवण्यासाठी पेंगाँग सो सरोवराजवल चीनने आक्रमकपणे देखरेख वाढवली आहे.

'दि ट्रिब्युन'ने दिलेल्या वृत्तानुसार, चीनने भारताच्या सीमेलगत असलेल्या होटाना, नग्यारी, शिगात्से आणि नयिंगची या ठिकाणच्या हवाई तळावर अतिरिक्त लढाऊ विमाने, बॉम्बर आणि लढाऊ हेलिकॉप्टर तैनात केले आहेत. त्याशिवाय चीनच्या पीपल्स लिबरेशन आर्मीने अरुणाचल प्रदेशच्या सीमेवर आपल्या हालचाली वाढवल्या आहेत. पेगाँग सो सरोवराजवळ चीन प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषा बदलण्याचा प्रयत्न करत आहे. त्याशिवाय चीनने गोगरा हॉट स्प्रिंगमध्ये मोठ्या प्रमाणावर सैन्य तैनात केले आहेत. चीनच्या या हालचालींमुळे भारताच्या देपसांग, मुर्गो, गलवान, हॉट स्प्रिंग, कोयूल, फुकचे आणि देमचोक या भागांमध्ये धोका वाढला आहे. त्याशिवाय दोन्ही देशांच्या वरिष्ठ लष्करी अधिकाऱ्यांमध्ये आज बैठक पार पडणार आहे. त्याआधी ६ जूनला देखील अशीच बैठक पार पडली होती.

काठमांडू: भारताच्या कालापानी, लिपुलेखा भागावर दावा ठोकणाऱ्या नेपाळला चीनने जोरदार झटका दिला आहे. भारताविरोधात आगळीक करणाऱ्या नेपाळच्या एका गावाचा चीनने ताबा घेतला असल्याचे समोर आले आहे. चीनच्या या कृत्यावर नेपाळ सरकारने मौन धारण केले आहे.

मागील ६० वर्षांपासून नेपाळ सरकारच्या ताब्यात असणारे रुई गाव चीनच्या ताब्यात गेले असल्याचे स्थानिक माध्यमांनी म्हटले आहे. नेपाळी वृत्तपत्र अन्नपूर्णा पोस्टनुसार तीन वर्षांपूर्वी रुई गाव हे तिबेटच्या स्वायत्त क्षेत्राचा भाग झाला आहे. या गावात ७२ जणांची घरे आहेत. त्याशिवाय नेपाळच्या नकाशातही या गावाचा समावेश आहे. मात्र, या गावावर चीनने नियंत्रण आले आहे. या गावात सीमा दर्शवणारे खांबही चीनकडून हटवण्यात आले असल्याचे वृत्त आहे.

नेपाळच्या गोरखा महसूल कार्यालयानुसार, या गावातून महसूल जमा केला असल्याची नोंद आहे. त्याशिवाय गावाबाबत अन्य नोंदीदेखील कार्यालयात उपलब्ध असल्याचे अधिकाऱ्यांनी सांगितले. नेपाळचे इतिहास तज्ञ रमेश धुंगल यांनी सांगितले की, वर्ष २०१७ पर्यंत रुई आणि तेईगा गाव हे गोरखा जिल्ह्यातील उत्तरी भागात आहेत. रुई गाव हे नेपाळचा भाग आहे. या गावाला आम्ही युद्धात कधी गमावले नाही. त्याशिवाय, तिबेटसोबत कोणत्याही करारातही हे गाव नव्हते. नेपाळने सीमा भाग दर्शवताना केलेल्या चुकीमुळे रुई आणि तेघा गावावरील ताबा गमावला असल्याचे त्यांनी सांगितले.
 

टुल्सा: अमेरिकेचे अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी अनेक महिन्यांच्या खंडानंतर शनिवारी घेतलेल्या पहिल्या प्रचारसभेला समर्थक आणि कृष्णवर्णीय आंदोलकांच्या झटापटीचे गालबोट लागले. करोनाचा प्रादुर्भाव आणि जॉर्ज फ्लॉइडच्या मृत्यूनंतर सुरू झालेल्या 'ब्लॅक लाइव्ज मॅटर' आंदोलनाच्या पार्श्वभूमीवर ही सभा होत होती.

अमेरिकेतील करोनाचा प्रादुर्भाव रोखण्यात अपयश आल्याचा ठपका ट्रम्प यांच्यावर आहे. त्यातच, जॉर्ज फ्लॉइडच्या मृत्यूनंतर सुरू झालेल्या आंदोलनामुळे ट्रम्प आरोपांच्या फेऱ्यात अडकले आहेत. लॉकडाउनच्या काळामध्ये अध्यक्षपदाच्या निवडणुकीचा प्रचारही थंडावला होता. ट्रम्प यांनी ओकलाहोमा राज्यातील टुल्सा येथे शनिवारी पहिली सभा आयोजित केली होती. सध्याच्या तणावामुळे प्रचारसभेवेळी हिंसाचार होण्याची भीती व्यक्त करण्यात येत होती. त्या अंदाजानुसार शनिवारी सकाळपासूनच शहराच्या सर्वच भागांमध्ये आंदोलक जमले होते. अनेक ठिकाणी वाहतुकीची कोंडी झाली होती. काही ठिकाणी आंदोलक आणि ट्रम्प यांचे समर्थक आमनेसामने येत होते आणि घोषणाबाजी करत होते. सायंकाळनंतर एका सशस्त्र गटाने आंदोलकांचा पाठलाग केला. आंदोलकांनी त्यांना घेरले असता, त्यातील एकाने 'पेपर स्प्रे' फवारला. पोलिसांनीही अश्रुधूर फवारून जमाव पांगवला.

ही सभा आधी केंद्राबाहेरील मोकळ्या मैदानात होणार होती. मात्र, ती रद्द करण्यात आली. रद्द करण्यामागील कारण सांगण्यात आले नाही. या सभेला फक्त ट्रम्प आणि उपाध्यक्ष माइक पेन्स उपस्थित होते. परिसरातील गर्दी कमी करताना, अडथळे आणल्यामुळे पोलिसांनी एका महिलेला अटक केली.

पेइचिंगः लडाखमध्ये विश्वासघात करून भारतीय जवानांवर हल्ला करणाऱ्या चीनचा चिनी वस्तुंवरील बहिष्काराने मिर्ची झोंबली आहे. अर्थव्यवस्थेवर नकारात्म परिणाम होण्याच्या आशंकेतून जळफळाट झालेल्या चीनने आता भारताला जीडीपीची धमकी दिली आहे. भारताच्या तुलनेत चीनची जीडीपी पाच पट अधिक आहे, असं 'ग्लोबल टाइम्स' या आपल्या मुखपत्रातून चीनने म्हटलंय. भारत ज्या वस्तू चीनमधून आयात करतो त्या वस्तुंचे उत्पादन करू शकत नाही, असे आव्हानही चीनने दिले आहे.

क्रिकेटपटू हरभजन सिंग आणि लष्कराचे निवृत्त अधिकारी मेजर रणजीत सिंग यांनी चिनी मालावर बहिष्काराचे आवाहन केलं आहे. याची दखल 'ग्लोबल टाइम्स'ने घेतलीय. चीनमधील आयातीवर भारताकडून अनेक प्रकारचे निर्बंध लावले जाणार आहेत. यात चीनच्या ३०० उत्पादनांवरील आयात शुल्कात मोठी वाढ करण्यात येणार आहे. भारताची ही दीर्घकालन योजना असू शकते. पण काही माध्यमांकडून या योजनांचा उपयोग हा भारतात चीन विरोधी भावना भडकवण्यासाठी केला जातोय, असं चीनने म्हटलंय.

बहिष्कारानंतरही चीनसोबतचा व्यापार वाढला
भारतातील राष्ट्रवादी संघटनांनी आणि शक्तींनी चीनच्या उत्पादनांवर बहिष्कार घालण्याचे आवाहन करत आहेत. पण वास्तवर हा शक्ती दरवर्षी चिनी मालावर बहिष्काराचे आवाहन करत असतात. तरीही चीन-भारत दरम्यानचा व्यापार हा सतत वाढत आहे. भारत चीनमधून अधिकाधिक वस्तुंची आयात करत आहे. यामुळे दरवर्षी भारताला चीनसोबतच्या व्यापारातून अब्जावधी रुपयांच्या तोट्याचा सामना करावा लागतोय.

कॅनबेरा : चीनच्या कुरापतींचा सामना करत असलेला भारत एकमेव देश नाही. ऑस्ट्रेलियन पंतप्रधान स्कॉट मॉरिसन यांनीही शुक्रवारी एक महत्त्वाचं वक्तव्य केलं. आपलं सरकार आणि देशातील काही खाजगी संस्थाही चीनच्या सायबर अटॅकच्या रडारवर होत्या, असं ते म्हणाले. त्यांनी थेट नाव न घेता या हल्ल्यांसाठी चीनकडे बोट केलं. गेल्या आठवड्यात व्हिएतनामच्या परराष्ट्र मंत्रालयानेही चीनवर आरोप केला होता. व्हिएतनामच्या मासेमारी बोटीवर चीनच्या दोन जहाजांकडून दक्षिण चीन समुद्रात हल्ला करण्यात आला होता.

व्हिएतनाम सरकारच्या माहितीनुसार, ही घटना पार्सल बेटाजवळ घडली. हे बेट आपलं असल्याचा दावा चीनचा आहे. या बेटाजवळ चीनने बोट जप्त केल्यानंतर एप्रिलमध्ये व्हिएतनामने तीव्र शब्दात नाराजी व्यक्त केली होती. गुरुवारी जपाननेही चीनविरोधात राग व्यक्त केला. चीनने पूर्व चीन समुद्रातील सेनकाकू बेटाजवळ चीनला त्रास देण्यासाटी ६६ दिवस जहाज तैनात केलं होतं, असं जपानने म्हटलं आहे. तर दुसरीकडे इंडोनेशियाकडूनही असाच आरोप चीनवर केला जात आहे.

ऑस्ट्रेलियन सायबर तज्ञांकडून मिळालेल्या माहितीच्या आधारावर मी आज तुम्हाला एक सल्ला देत आहे. ऑस्ट्रेलियन संस्था सध्या एका प्रभावी देशातील सायबर तज्ञांकडून लक्ष्य केल्या जात आहेत, असं स्कॉट मॉरिसन म्हणाले. कॅनबेरामध्ये वार्ताहरांशी बातचीत करताना त्यांनी हा इशारा दिला. सायबर हल्ल्यांचं प्रमाण वाढत असल्याची माहिती ऑस्ट्रेलियाच्या संरक्षण मंत्र्यांनीही दिली.

करोनावर लस शोधण्याच्या शर्यतीत गरीब देश मागे पडण्याची भीती कल्याणकारी संघटनांना वाटते आहे. लस उपलब्ध झाल्यानंतर आधी आपल्या नागरिकांना देण्याची ग्वाही श्रीमंत देशांनी दिली आहे. करोनाची साथ संपेपर्यंत गरीब देशांतील लोकांना ही लस मिळेल का, अशी साधार भीती या संघटनांनी व्यक्त केली आहे.

जूनच्या सुरुवातीच्या दिवसांत संयुक्त राष्ट्रे, आंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस आणि रेड क्रेसेंट या संघटनांनी लशीच्या उपलब्धतेबाबत काळजी व्यक्त केली होती. लोकांसाठीची लस सर्वांना उपलब्ध होणे, है नैतिक कर्तव्य आहे, असे या संघटनांनी म्हटले आहे. ही आदर्शवादी विधाने प्रत्यक्षात येत नाहीत, असा अनुभव आहे. धोरण आखून लशींचे वितरण न झाल्यास गोंधळ माजेल, अशी भीती या संघटनांना वाटते आहे. 'पूर्वी कंपन्यांनी लस उत्पादनाच्या प्रत्येक टप्प्याचे पेटंट घेतल्याची उदाहरणे आहेत. लोकांसाठीच्या लशीला अशी खासगी मालकी परवडणारी नाही,' असे जीनिव्हातील मेडसिन्स सॅन्स फ्रंटियर्स या स्वयंसेवी संस्थेतील धोरण आणि विधी सल्लागार युआन क्विऑंग हू यांनी म्हटले आहे. घानाचे अध्यक्ष नाना अकुफो-अड्डो यांनीही लस परिषदेत याच मुद्द्यावर चिंता व्यक्त केली होती. सध्या सुमारे डझनभर लशी चाचणीच्या टप्प्यात आहेत. या लशींच्या उत्पादनावरच अमेरिका, ब्रिटनसारख्या श्रीमंत देशांनी कोट्यवधी डॉलर खर्ची घातले आहेत. सर्वांत आघाडीवर असलेल्या अॅस्ट्राझेन्का या अँग्लो-स्वीडिश कंपनीने तर अमेरिकेशी ३० कोटी लशी उपलब्ध करून देण्याचा करारच केला आहे. जर्मनी, फ्रान्स, इटली आणि नेदरलँड हेही ४० कोटी लशींची मागणी नोंदविण्याच्या बेतात आहेत. या स्थितीत गरीब देशांचे काय होणार, ही काळजी कल्याणकारी संघटनांना भेडसावत आहे.

 

वॉशिंग्टन: अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांच्या टुल्सा येथील निवडणूक प्रचार सभेत गोंधळ होणार असल्याची शक्यता वर्तवण्यात आली होती. कृष्णवर्णीय जॉर्ज फ्लॉइडच्या मृत्यूनंतर अमेरिकेत वर्णद्वेषी आंदोलन सुरू असून त्याच पार्श्वभूमीवर सभेत गोंधळ होण्याची शक्यता वर्तवण्यात आली. यानिमित्ताने अमेरिकेतील जूनटिंथ आणि टुल्सा येथील दंगलीची पुन्हा चर्चा सुरू झाली.

जॉर्ज फ्लाइडच्या मृत्यूनंतर अमेरिकेत वर्णद्वेषाविरोधाती आंदोलन तीव्र झाले. या आंदोलनाच्या निमित्ताने अमेरिकेतील वर्णद्वेषीविरोधातील लढा पु्न्हा एकदा चर्चेच्या केंद्रस्थानी आला. अमेरिकेत श्वेतवर्णीयांकडून कृष्णवर्णीयांचे झालेले शोषण, अत्याचाराच्या घटनांची आजही उजळणी करण्यात येते. अमेरिकेतील वर्णद्वेषी लढ्यासाठी १९ जून हा दिवस खास आहे. १९ जूनचा दिवस 'जूनटिंथ' म्हणून ओळखला जातो. टेक्सास राज्यात १९ जून १८६५ रोजी गुलामगिरी रद्द होत असल्याची घोषणा करण्यात आली होती. त्यामुळे हा दिवस अमेरिकेतील कृष्णवर्णीयांच्या लढ्यातील महत्वाचा दिवस समजला जातो.

अमेरिकेत १९ जून ही राष्ट्रीय सुट्टी नसली तरी, ४५ राज्यांमध्ये या दिवशी सुट्टी करण्यात येते. अमेरिकेतील गुलामिरी संपुष्टात आणली गेली, त्याच्या स्मरणार्थ हा दिवस साजरा केला जातो. अमेरिकेत या दिवसाला मुक्ती दिवस अथवा जूनटिंथ स्वातंत्र्य दिवस असे म्हटले जाते. अमेरिकेचे तत्कालीन राष्ट्राध्यक्ष अब्राहम लिंकन यांनी एक जानेवारी १८६३ रोजी यांनी अमेरिकेत गुलाम म्हणून असलेले नागरीक गुलामगिरीतून मुक्त असल्याचे जाहीर केले होते. मात्र, लिंकन यांच्या घोषणेनंतरही जवळपास दोन-अडीच वर्ष गुलामगिरी सुरू होती. अनेकांनी आपल्याकडील गुलामांची माहिती लपवून ठेवली होती. गुलामगिरीचे धंदे लपून सुरू होते. या गुलामांचा वापर शेतीसह इतर कामांसाठी करण्यात येत होता.

वॉशिंग्टन: अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प आणि ट्विटरचा वाद झाल्यानंतर ट्रम्प यांनी सोशल मीडिया कंपन्यांवर जोरदार टीका केली होती. त्यानंतर आता ट्रम्प आणि फेसबुकमध्येही वाद होण्याची चिन्हं आहेत. ट्रम्प यांना फेसबुकने मोठा झटका दिला आहे. फेसबुकने डोनाल्ड ट्रम्प आणि अमेरिकेचे उपराष्ट्रपती माइक पेन्स यांच्या जाहिराती हटवल्या आहेत.

ट्रम्प यांच्या जाहिरातीमध्ये लाल रंगाचा उलटा त्रिकोण दर्शवला होता. या चिन्हाचा वापर नाझींनी राजकीय कैदी, कम्युनिस्ट आणि छळछावणीत कैद असलेल्या नागरिकांसाठी केला होता. फेसबुकचे नॅथेनियल ग्लीचर यांनी ट्रम्प यांची जाहिरात हटवण्यात आली असल्याचे मान्य केले आहे. द्वेष पसरवणाऱ्या कोणत्याही विचारधारांशी निगडीत चिन्हांना दाखवण्यास मनाई करण्यात आली आहे. फक्त एखादा संदर्भासह द्वेष पसरवणाऱ्या कृतीचा निषेध करण्यासाठी संबंधित चिन्हाचा वापर करण्यास परवानगी असल्याचे त्यांनी सांगितले.

ग्लीचर यांनी सांगितले की, कोणत्याही योग्य कारणांशिवाय ते चिन्ह दिसत असल्यामुळे जाहिरात काढण्यात आली. फेसबुकच्या नियमांचे पालन न झाल्यास जाहिराती हटवण्यात येणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. तर, त्या चिन्हाचा वापर 'एन्टीफा'विरोधात करण्यात आला असल्याची माहिती ट्रम्प यांचे प्रचार मोहिमेचे संपर्क संचालक टिम मुर्तो यांनी सांगितले.

बीजिंग: लडाखमधील प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर भारत आणि चीनमध्ये तणाव निर्माण झाला आहे. दोन्ही देशांमधील वाद चर्चेच्या माध्यमातून सोडवण्यात येणार असल्याचे चीन म्हणत असला तरी दुसरीकडे भारताला धमकी देण्यात येत आहे. चीन सरकारचे वृत्तपत्र 'ग्लोबल टाइम्स'मधून पुन्हा एकदा भारताला धमकी देण्यात आली आहे. भारताचे पाकिस्तान आणि नेपाळसोबतही वाद सुरू असल्याकडे ग्लोबल टाइम्सने लक्ष वेधले आहे.

सोमवारी रात्री, गलवान खोऱ्यात झालेल्या हिंसाचारामुळे भारत आणि चीनमध्ये तणाव वाढला आहे. त्यानंतर दोन्ही देशांनी सैन्याची जमवाजमव सुरू केली आहे. तर, दुसरीकडे चीन सरकारचे वृत्तपत्र असलेल्या ग्लोबल टाइम्समधून भारतावर दबाव टाकण्याचा प्रयत्न सुरू असून अप्रत्यक्षपणे धमकीही दिली जात आहे. ग्लोबल टाइम्समध्ये प्रकाशित झालेल्या वृत्तानुसार, भारताशी संघर्ष करण्यास चीन पुर्णपणे सज्ज असल्याचे विश्लेषकांनी म्हटले. भारताने आपल्या सैन्याला आवर घालावा. अन्यथा करोनाच्या संकटात मोठी किंमत मोजावी लागणार असल्याचे चिनी विश्लेषकांनी म्हटले आहे.

पेईचिंग : लडाखमधील गलवान खोऱ्यात चीनसोबत झालेल्या हिंसक झटापटीमध्ये भारताचे २० जवान शहीद झाले. यात चीनच्या बाजूनेही मोठ्या प्रमाणात जीवितहानी झाल्याची माहिती आहे. पण चीनने अजूनही मृतांचा आकडा जाहीर केलेला नाही. तणाव वाढवायचा नसल्यामुळे आकडा जाहीर करणार नसल्याचं चीनने म्हटलं आहे. पण याबाबतीत एक मोठा खुलासा झाला आहे. अमेरिकेच्या भीतीमुळे चीनने मृत सैनिकांचा आकडा लपवला असल्याची माहिती आहे.

साऊथ चायना मॉर्निंग पोस्टच्या वृत्तानुसार, चीन आणि अमेरिका यांच्यात एक महत्त्वाची बैठक होणार होती. या बैठकीच्या पार्श्वभूमीवर चीनने भारतासोबत घडलेली घटना किरकोळ आहे हे दाखवण्याचा प्रयत्न केला. या धोरणांतर्गत चीनने मृत सैनिकांचा आकडाही जाहीर केला नाही आणि भारतावर आरोप केला. या हिंसक झटापटीत दोन्ही बाजूंनी जीवितहानी झाली आहे, असं सांगतानाच चीन सैन्याच्या प्रवक्त्यांनी मृतांचा आकडा सांगण्यास नकार दिला.

'सैनिकांच्या मृत्यूबद्दल चीन संवेदनशील'
चीनच्या पिपल्स लिबरेशन आर्मीतील सूत्रांच्या मते, चीन आपल्या सैनिकांच्या मृत्यूबद्दल अत्यंत संवेदनशील आहे. सैनिकांच्या मृत्यूचे आकडे चीनचे राष्ट्रपती शी जिनपिंग यांच्या मंजुरीनंतरच समोर येतील. कारण, शी जिनपिंग हेच सैन्याचे अध्यक्ष आहेत आणि सैन्यासाठी त्यांच्याकडूनच प्रत्येक आदेश दिला जातो. चीनचे वरिष्ठ डिप्लोमॅट यांग जिची यांची अमेरिकन परराष्ट्र मंत्री माईक पॉम्पियो यांच्यासोबत बैठक होणार होती. भारता-चीन सीमा वादावर अनेक टप्प्यातील बैठकीतही यांग यांचा समावेश होता.

वॉशिंग्टन: करोनाच्या संसर्गाच्या मुद्यावर चीनविरोधात रान उठवणारे अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प आता अडचणीत आले आहेत. डोनाल्ड ट्रम्प यांनी आगामी २०२० ची निवडणूक जिंकण्यासाठी चीनकडे मदत मागितली असल्याचा खळबळजनक दावा अमेरिकेचे माजी राष्ट्रीय सुरक्षा सल्लागार जॉन बोल्टन यांनी केला आहे. तर, बोल्ट यांचा दावा हा खोटा असल्याचे ट्रम्प यांनी स्पष्ट केले आहे.

माजी राष्ट्रीय सुरक्षा सल्लागार जॉन बोल्टन यांनी आपल्या आगामी पुस्तकात अमेरिका आणि चीनच्या संबंधावर भाष्य केले आहे. बोल्टन यांच्या पुस्तकातील काही भाग द वॉल स्ट्रीट जर्नल, द वॉशिंग्टन पोस्ट आणि द न्यूयॉर्क टाइम्समध्ये प्रकाशित करण्यात आला आहे. मागील वर्षी जून महिन्यात जपानमधील ओसोकामध्ये जी-२० राष्ट्रांची बैठक पार पडली होती. या बैठकी दरम्यान ट्रम्प आणि चीनचे राष्ट्रपती शी जिनपिंग यांची बैठक झाली होती. या बैठकीत ट्रम्प यांनी राष्ट्राध्यक्षपदाच्या निवडणुकीत मदत करण्यासाठी गळ घातली. चीन आपल्या आर्थिक ताकदीच्या बळावर अमेरिकेतील निवडणूक प्रचारावर परिणाम करू शकतो असे ट्रम्प यांना वाटत असल्याचे बोल्ट यांनी सांगितले.

सोल: गेल्या काही वर्षांपासून शांत असलेल्या उत्तर आणि दक्षिण कोरिया या दोन्ही देशांमधील वाद मंगळवारी पुन्हा विकोपाला गेले. उत्तर कोरियाचे अध्यक्ष किम जोंग उन यांची बहीण किम यो जोंगने दक्षिण कोरियाला थेट युद्धाची धमकी दिल्यानंतर काही तासांतच उत्तर कोरियाने सीमेवरील दक्षिण कोरियाच्या संपर्क कार्यालयावर बॉम्ब टाकून ते उडवून दिले आहे. कराराद्वारे लष्करविहीन केलेल्या क्षेत्रात पुन्हा प्रवेश करण्याची धमकीही उत्तर कोरियाने केल्यामुळे दक्षिण आणि उत्तर कोरिया या शेजारील देशांमधील संबंध पुन्हा एकदा विकोपाला गेले आहेत.

सोलमधील सरकारी सूत्रांनी दिलेल्या माहितीनुसार, सीमेवरील केसाँग भागातील दक्षिण कोरियाची इमारत दुपारी अडीच वाजता नष्ट करण्यात आली असून, या इमारतीतून मोठ्या प्रमाणावर धूर येत असल्याचे वृत्तही स्थानिक माध्यमांनी दिले आहे. गेल्या काही दिवसांपासून उत्तर आणि दक्षिण कोरिया यांच्यामध्ये सातत्याने वाद झडत असून, कारवाईची धमकी उत्तर कोरियाकडून वारंवार देण्यात येत होती. सीमेच्या परिसरात सामरिक हालचाली आणि कथित दुष्प्रचार करणे दक्षिण कोरियाने थांबविलेले नाही, असा उत्तर कोरियाचा आरोप आहे.

लंडन: करोनाच्या आजारावर परिणामकारक ठरणाऱ्या औषधाचा शोध लागला असल्याचा दावा ब्रिटीश वैज्ञानिकांनी केला आहे. या औषधामुळे करोनाच्या आजारामुळे मृत्यूशी झुंज देत असलेल्या रुग्णांवर उपचार करता येणे शक्य असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. डेक्सामेथासोन या स्टेराइडमुळे करोनामुळे चिंताजनक प्रकृती असलेल्या रुग्णांच्या मृत्यू दरात एक तृतीयांश घट झाली असल्याचे वैज्ञानिकांनी म्हटले आहे.

डेक्सामेथासोनचा वापर २१०४ रुग्णांवर करण्यात आला. या रुग्णांची तुलना इतर सामान्य उपचार घेणाऱ्या ४३२१ रुग्णांशी करण्यात आली. या औषधाच्या वापरानंतर व्हेंटिलेटरवर असलेल्या रुग्णांच्या मृत्यू दरात तब्बल ३५ टक्के घट झाली असल्याचे समोर आले. तर, ज्या रुग्णांना ऑक्सिजन देण्यात येत होते. त्या रुग्णांचा मृत्यू दरही २० टक्के घटला असल्याचे संशोधनात आढळून आले.

डेक्सामेथासोन परवडणारे
ऑक्सफोर्ड विद्यापीठाचे संशोधक पीटर होर्बी यांनी सांगितले की, संशोधनातून समोर आलेलेल निष्कर्ष हे आशादायी आहेत. या औषधामुळे मृत्यू दर कमी करणे आणि ऑक्सिजनच्या मदतीने उपचार घेणाऱ्या रुग्णांना याचा फायदा झाला. त्यामुळे गंभीर आजारी असणाऱ्या रुग्णांवर डेक्सामेथासोनचा वापर करायला हवा असं त्यांनी म्हटले. डेक्सामेथासोन औषध प्रचंड महाग नसून जगभरातील करोनाबाधितांचे प्राण वाचवण्यासाठी याचा वापर करता येणे शक्य असल्याचेही त्यांनी म्हटले. करोनाबाधितांच्या उपचारासाठी डेक्सामेथासोनचा वापर करण्यात येणार असल्याचे आरोग्य मंत्री मॅट हॅनकॉक यांनी सांगितले.

इस्लामाबाद: भारत आणि चीनमधील सैन्यांमध्ये हिंसाचार झाल्याचे समोर आल्यानंतर पाकिस्ताननेही हालचाली सुरू केल्या आहेत. पाकिस्तानची गुप्तचर संस्था आयएसआयच्या मु्ख्यालयात पाकिस्तानच्या तिन्ही दलाच्या प्रमुखांची बैठक पार पडली. जवळपास दोन वर्षानंतर ही बैठक पार पडली आहे.

पाकिस्तानी लष्कराने दिलेल्या माहितीनुसार, या बैठकीत तिन्ही दलाच्या प्रमुखांमध्ये झालेल्या बैठकीनुसार नियंत्रण रेषा आणि काश्मीरमधील परिस्थितीवर चर्चा करण्यात आली. या बैठकीत पाकिस्तानचे लष्करप्रमुख कमर जावेद बाजवा, नौदल प्रमुख जफर मेहमूद अब्बासी आणि हवाई दल प्रमुख मार्शल मुजाहिद अन्वर खान सहभागी झाले होते. त्याशिवाय पाकिस्तानचे लष्करी अधिकारी आणि आयएसआयचे अधिकारीदेखील सहभागी झाले होते.

लंडन: करोनाच्या संसर्गापासून वाचण्यासाठी जगभरात मास्क आणि फेसशिल्डचा वापर करण्याबाबतचा आग्रह केला जात आहे. मात्र, मास्कचा वापर आणि तीन फूटांचे सोशल डिस्टेंसिंगचा पर्याय अंमलात आणल्यानंतरदेखील करोनाचा संसर्ग होण्याचा धोका असल्याचा इशारा संशोधकांनी दिला आहे.

सायप्रसमधील युनिर्व्हसिटी ऑफ निकोसियाच्या वैज्ञानिकांनी केलेला दावा धक्कादायक आहे. मास्क घातल्यानंतरही किमान ६ फूटांचे अंतर ठेवणे आवश्यक असल्याचे संशोधकांनी सांगितले. संशोधक दिमित्रस डिकाकिस यांनी सांगितले की, मास्कच्या वापरामुळे करोनाचा संसर्ग रोखता येणार नाही. काही ड्रॉपलेट मास्क शील्डच्या आतमध्ये शिरू शकतात. इतकंच नव्हे तर रुग्णाचे ड्रॉपलेट ४ फूटापर्यंत उडू शकतात, असेही त्यांनी सांगितले. करोनाबाधित जर सातत्याने खोकत असेल तर मास्कच्या वापराचा काहीही उपयोग होणार नसल्याचेही त्यांनी सांगितले.

बीजिंग: भारत आणि चीनच्या दरम्यान लडाख सीमेवरील तणाव आणखीच वाढला आहे. सोमवारी रात्री झालेल्या संघर्षात भारतीय लष्काराचा एक अधिकारी आणि दोन जवान शहीद झाले. तर, चीनचेही काही सैन्य ठार झाले आहे. चीनच्या सैनिकांनी भारतीय जवानांवर खिळे असलेल्या काठ्यांनी हल्ला केला असल्याची माहिती सूत्रांनी दिली आहे.

एक वृत्तवाहिनीने दिलेल्या माहितीनुसार, लडाख सीमेवरील तणाव निवळण्यासाठी भारत आणि चीनमध्ये चर्चा सुरू आहेत. लष्करी पातळीवर या चर्चा सुरू आहे. पीपी१४-१५-१७ वरून चीन पुन्हा माघारी फिरणार असल्याचे ठरले. मात्र, चिनी फौजांनी माघार घेण्यास नकार दिला. भारतीय जवानांनी देखील चीनच्या सैन्याला समजवण्याचा प्रयत्न केला. या दरम्यान दोन्ही सैन्यांमध्ये वाद वाढला आणि चिनी फौजांनी हल्ला केला असल्याची माहिती समोर आली आहे.

वेलिंग्टन: करोनाच्या संसर्गातून मुक्त झालेल्या न्यूझीलंडमध्ये करोनाबाधित रुग्ण आढळल्यामुळे खळबळ उडाली आहे. दोन जणांना करोनाची बाधा झाली असून दोघेही जण नुकतेच ब्रिटनमध्ये परतले आहेत. मागील २४ दिवसांपासून न्यूझीलंडमध्ये एकही करोनाबाधित रुग्ण आढळला नव्हता. रुग्ण आढळल्यानंतर न्यूझीलंड सरकारने नागरिकांना इशारा दिला आहे.

न्यूझीलंडमध्ये करोनाबाधित रुग्ण न आढळल्यामुळे मागील आठवड्यात सर्वच निर्बंध मागे घेण्यात आले होते. करोनाबाधित रुग्ण आढळल्यानंतर पंतप्रधान जेसिंडा आर्डर्न यांनी नागरिकांना काळजी घेण्याचे आवाहन केले आहे. आगामी काळात आणखी करोनाबाधित रुग्ण आढळण्याची शक्यता असून परदेशात अडकलेले अनेक नागरिक मायदेशी परतत असल्याचे त्यांनी सांगितले.

आरोग्य मंत्रालयाने दिलेल्या माहितीनुसार, दोन्ही करोनाबाधित रुग्ण ब्रिटनमधून परतले असून दोघांचाही परस्परांशी संबंध आहे. न्यूझीलंडमध्ये परदेशातून येणाऱ्या नागरिकांमार्फत करोनाचा संसर्ग फैलावण्याचा धोका असल्याचे त्यांनी सांगितले. न्यूझीलंडमध्ये शेवटचा करोनाबाधित रुग्ण बरा झाल्यानंतर परदेशातून देशात येणाऱ्या नागरिकांमुळे करोना फैलावणार असल्याचा इशारा आरोग्य मंत्रालयाने दिला होता.

 

लंडन/बीजिंग/वॉशिंग्टन: जगभरात सुरू असलेल्या करोनाच्या थैमानाला अटकाव करण्यासाठी अनेक प्रयत्न सुरू आहेत. करोनाच्या आजारावर मात करण्यासाठी अनेक देशांमध्ये लसींवर, औषधांवर संशोधन सुरू असून या प्रयत्नांना यश मिळत असल्याचे चित्र आहे. ब्रिटनमध्ये सर्वात स्वस्त असलेल्या लसीची चाचणी करण्यात येणार आहे. तर, अमेरिका आणि चीनमधूनही चांगली बातमी समोर आली आहे.

द टाइम्सने दिलेल्या वृत्तानुसार, ब्रिटनच्या इंपिरिअल कॉलेजने लस विकसित केली आहे. बुधवारपासून या लसीची चाचणी सुरू होण्याची दाट शक्यता आहे. या लसीची चाचणी यशस्वी झाल्यास अवघ्या ३०० रुपयांमध्ये ही लस उपलब्ध होणार आहे. चाचणीच्या पहिल्या टप्प्यात १२० जणांना ही लस देण्यात येणार आहे. या लस संशोधनाचे प्रभारी प्रा. रॉबिन शटॉक यांनी सांगितले की, या लसीची किंमत अतिशय कमी ठेवण्यासाठी आमचे प्रयत्न सुरू आहेत. ही लस स्वस्त दरात उपलब्ध झाल्यास ब्रिटनमधील सर्वच नागरिकांना याचा लाभ होईल.

बीजिंग : लडाख सीमेवर झालेल्या झटापटीत एक भारतीय सैन्य अधिकारी आणि दोन जवान शहीद झाले. भारताच्या प्रत्युत्तरातही चीनचे ५ जवान शहीद झाले असून ११ जण जखमी झाल्याची माहिती चीनच्या माध्यमांनी दिली आहे. चीनचं वृत्तपत्र ग्लोबल टाइम्सच्या रिपोर्टर वँग वेनवेन यांनी दिलेल्या वृत्तानुसार, पिपल्स लिबरेशन आर्मीचे ५ जवान मारले गेले असून ११ जण जखमी झाले आहेत. दुसरीकडे भारतीय सैन्यानेही या घटनेची गांभीर्याने दखल घेतली आहे. लष्कर प्रमुख मनोज नरवणे यांनी पठाणकोट दौरा रद्द केला आहे.

भारतीय बाजूकडूनच चीनच्या हद्दीत घुसखोरी करण्यात आली होती, असा आरोप चीनकडून करण्यात आला आहे. तर भारतीय सैन्याने दिलेल्या माहितीनुसार, सोमवारी रात्री ही झटापट झाली. या झटापटीत गोळीबार झाला नसून दगडफेक झाल्याची माहिती आहे. गलवान खोऱ्यात तणाव निवळण्याची प्रक्रिया सुरू असतानाच चीन आणि भारतीय सैन्यात हिंसक झटापट झाली. यात भारतीय सैन्याचा एक अधिकारी आणि दोन जवान शहीद झाले, असं अधिकृत वक्तव्य भारतीय सैन्याकडून जारी करण्यात आलं आहे.

बीजिंग: भारतीय जवानांचे प्राण घेणाऱ्या चीनने भारताविरोधात बोंबा मारण्यास सुरुवात केली आहे. भारतीय सैन्यानेच चीनच्या सैनिकांवर हल्ला केला. त्याच्या प्रत्युत्तरात भारतीय जवानांना प्राण गमवावे लागले असल्याचे चीनने म्हटले आहे. सीमावाद हा चर्चेतूनच सोडवण्यात येणार असल्याची भूमिका चीनने मांडली आहे.

मागील महिन्यापासून लडाखमध्ये भारत आणि चीनमध्ये तणाव निर्माण झाला आहे. चिनी सैन्याने भारताच्या हद्दीत घुसखोरी केल्यानंतर दोन्ही देशांचे सैन्य आमनेसामने उभे ठाकले होते. तणाव निवळण्यासाठी दोन्ही देशांतील लष्करी अधिकाऱ्यांमध्ये चर्चा सुरू होती. मात्र, सोमवारी दोन्ही बाजूने सैन्यांमध्ये चकमक घडली असल्याचे चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने म्हटले आहे. भारताने पहिला हल्ला केल्यानंतर चीनने त्याला प्रत्युत्तर दिले आहे. या चकमकीत दोन्ही बाजूंचे जवान जखमी झाले असल्याचे चीनने म्हटले आहे.

चीनच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने म्हटले की, भारतीय सैनिकांनी दोन वेळेस सीमा ओलांडून चिनी सैनिकांना उकसवण्याचा प्रयत्न केला. भारतीय जवानांची ही कृती दोन्ही देशांमध्ये झालेल्या सहमतीविरोधात आहे. दोन्ही देशांच्या सैनिकांमध्ये शारिरीक संघर्ष झाला. भारताने आपल्या जवानांवर नियंत्रण ठेवणे आवश्यक असून त्यांच्या या कृतीमुळे सीमा प्रश्न आणखी जटील होऊ शकतो असेही चीनने म्हटले आहे. चीनचे किती सैन्य मारले गेले याबाबत चीनकडून अधिकृत माहिती समोर आली नाही. सीमेवर झालेल्या या चकमकीनंतर परिस्थिती हाताळण्यासाठी चीनच्या वरिष्ठ अधिकाऱ्यांच्या बैठकी सुरू झाले असल्याचे समजते.

स्टॉकहोम: जगात महासत्ता बनण्याचे स्वप्न पाहणाऱ्या चीनकडून आणखी एक मोठे पाऊल उचलले जात आहे. चीन अतिशय वेगाने आपल्याकडील अणवस्त्राचा साठा वाढवत असल्याचे समोर आले आहे. विशेष म्हणजे चीन आता पहिल्यांदा जमीन, हवा आणि समुद्रातून डागण्यात येणाऱ्या अणवस्त्रांची निर्मिती करत आहे. तर, दुसरीकडे भारतानेही पाकिस्तान आणि चीनच्या दुहेरी आव्हानांचा सामना करण्यासाठी कंबर कसली असून अणवस्त्रांची संख्या वाढवत आहे.

जगभरातील अणवस्त्रांबाबतच्या घडामोडींवर लक्ष ठेवणारी आंतरराष्ट्रीय पातळीवरील संस्था सिप्रीच्या या ताज्या अहवालात ही बाब नमूद करण्यात आली आहे. भारत आणि चीनने मागील वर्षीच आपल्या अणवस्त्रांच्या साठ्यात वाढ केली असल्याचे या अहवालात म्हटले आहे. भारताकडील अणवस्त्रांची संख्या ही चीनच्या तुलनेत निम्मी आहे. सिप्रीच्या अहवालानुसार, भारताकडे १५० आणि चीनकडे ३२० पाकिस्तानकडेही भारताच्या तुलनेत अधिक अणूबॉम्ब असल्याचे समोर आले आहे. पाकिस्तानकडे १६० अणूबॉम्ब आहेत. पाकिस्तानकडे भारताच्या तुलनेत अधिक अणवस्त्र असली तरी भारतीय अधिकाऱ्यांना आपल्या अणवस्त्रविरोधी क्षमतेवर विश्वास आहे. भारत आणि चीनदरम्यान सीमाप्रश्नी तणाव वाढल्यानंतर सिप्रीचा हा अहवाल समोर आला आहे.
 

सेऊल: मागील काही वर्षांपासून दक्षिण कोरिया आणि उत्तर कोरियामध्ये तणाव निवळलेला होता. दोन्ही देशांमध्ये संबंध सुधारत असल्याचे आशादायी चित्र निर्माण होत असताना या संबंधात कटुता निर्माण होण्याची स्थिती निर्माण झाली आहे. उत्तर कोरियाचे राष्ट्राध्यक्ष आणि सर्वेसर्वा किम जोंग उन यांची बहीण किम यो जोंगने दक्षिण कोरियाला थेट युद्धाची धमकी दिली आहे.

मागील काही महिन्यांपासून दक्षिण कोरियाच्या हद्दीतून उत्तर कोरियाविरोधात संदेश देणारे फुगे सोडण्यात येत आहेत. उत्तर कोरियातून पळून आलेल्या नागरिकांकडून हे कृत्य केले जात असल्याचे म्हटले जाते. फुगे सोडणाऱ्यांवर कारवाई करण्याची मागणी किम जोंग यांची बहीण किम यो जोंगने दक्षिण कोरियाकडे केली होती. मात्र, त्याकडे दक्षिण कोरियाने दुर्लक्ष केले. त्यामुळे संतापलेल्या किम यो यांनी थेट युद्धाचीच धमकी दिली आहे. किम यो यांनी म्हटले की, आम्ही आता थेट कारवाईच करणार आहोत. आमचे सर्वोच्च नेते, आमचा पक्ष, देश आणि मिळालेल्या अधिकाराचा वापर करत मी सैन्याला शत्रूंवर कारवाईचा आदेश देत असल्याचे किम यो यांनी म्हटले आहे. या कारवाईबाबतचा अंतिम निर्णय आता लष्करप्रमुख घेणार असल्याचे त्यांनी सांगितले. दक्षिण कोरियाबाबतच्या संबंधाचे निर्णय घेण्याबाबत किम यो यांची भूमिका निर्णायक असते. त्यामुळे त्यांच्या या इशाऱ्याकडे गांभीर्याने पाहिले जात आहे.

 

बीजिंग: भारत आणि चीन दरम्यान लडाखमधील सीमा प्रश्नावर तणाव निर्माण झाला आहे. दोन्ही देशांमधील तणाव निवळण्यासाठी चर्चा सुरू झाल्या आहेत. तर, दुसरीकडे भारताची चिंता वाढणार असल्याचा इशारा तज्ञांनी दिला आहे. हिंदी महासागरात चिनी नौदलाकडून भारताला घेरण्यासाठी प्रयत्न सुरू असल्याचा दावा करण्यात आला आहे. त्यामुळे भारताला लडाखपेक्षाही मोठ्या संकटाचा सामना करावा लागू शकतो.

'थिंक टँक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन'च्या रिपोर्टनुसार, भारतासाठी फक्त लडाख हा चिंतेचा विषय नाही. हिंदी महासागरात चीन वेगाने आपले हातपाय पसरवत आहे. या वर्षी मे महिन्यात घेतलेल्या सॅटेलाइट फोटोवरून चीनच्या हालचाली स्पष्ट झाल्या आहेत. आफ्रिकेतील जिबूती येथील आपला नौदल तळाचा चीनने विकास केला असून त्याला अत्याधुनिक केला आहे. याआधी फक्त लॉजिस्टिक सपोर्टसाठी बनवण्यात आलेल्या ठिकाणाला आता नौदल तळात रुपांतर करण्यात आले आहे. याठिकाणी आता चीनची युद्धवाहू नौकादेखील उभी राहू शकते.

बीजिंग: जवळपास दोन महिन्यानंतर बीजिंगमध्ये करोनाचे रुग्ण आढळल्यानंतर खळबळ उडाली होती. त्यानंतरही काही भागात करोनाचे नवीन रुग्ण आढळत असल्यामुळे अखेर प्रशासनाने बीजिंगमधील काही भागांमध्ये लॉकडाउन जाहीर केला आहे. वुहानंतर आता राजधानी बीजिंगमध्ये पुन्हा एकदा करोनाबाधित आढळल्यामुळे प्रशासनाने खबरदारीचे उपाय आखण्यास सुरुवात केली आहे. चीनमध्ये करोनाची दुसरी लाट आली का, यावरही जोरदार चर्चा झडू लागल्या आहेत.

गुरुवारी, राजधानी बीजिंगमध्ये ५६ दिवसांनंतर करोनाबाधित रुग्ण आढळल्याची नोंद झाली. बीजिंगमधील शिचेंग भागात करोनाबाधित रुग्ण आढळला असल्याची माहिती स्थानिक अधिकाऱ्यांनी दिली होती. परदेशांतून येणारे, तसेच इतर शहरांतून बीजिंगमध्ये येणाऱ्यांना सक्तीने क्वारंटाइन करण्याचे धोरण चिनी अधिकाऱ्यांनी अवलंबिले आहे. राजधानीतील रुग्ण संपल्यामुळे येथे सुरक्षित वावराचे नियम शिथिल करण्यात आले होते. मास्क न वापरण्याचीही सवलत देण्यात आली होती. मात्र, बीजिंगमध्ये पु्न्हा एकदा काही भागांमध्ये लॉकडाउन जाहीर करण्यात आला आहे. नवीन आढळलेले काही रुग्णांचा दक्षिण बीजिंग भागातील एका मांस विक्री बाजाराशीही संबंध आला असल्याची चर्चा आहे.

दरम्यान, वुहानमध्ये मागील महिन्यात आढळलेल्या करोनाबाधितांमध्ये आजाराची कोणतीही लक्षणे आढळली नाहीत. करोनाच्या या 'गुप्त' हल्ल्ल्याने चीनमधील आरोग्य यंत्रणा खडबडून जाग्या झाल्यात. वुहानमध्ये नवीन रुग्ण आढळल्यानंतर सर्वच नागरिकांची करोना चाचणी करण्याचा निर्णय प्रशासनाने घेतला. वुहानची लोकसंख्या एक कोटी १० लाखांच्या घरात आहे. एप्रिलमध्ये वुहानमधील लॉकडाउन ७६ दिवसांनंतर हटवण्यात आला होता.

इस्लामाबाद: करोनामुळे अर्थव्यवस्था संकटात आली असताना दुसरीकडे पाकिस्तान सरकारला दिलासा देणारी बातमी समोर आली आहे. पाकिस्तानमध्ये गाढवांची संख्या वाढली असल्याचे आर्थिक सर्वेक्षणात समोर आले आहे. वर्ष २०१९-२० मध्ये पाकिस्तानमध्ये गाढवांच्या संख्येत एक लाखाने वाढ झाली आहे. गाढवांच्या व्यापारातून पाकिस्तानची कमाई होते. त्यामुळे या वाढलेल्या संख्येमुळे पाकिस्तानच्या अर्थव्यवस्थेला हातभार लागणार आहे.

चीनला पाठवणार ८० हजार गाढवं
पाकिस्तानमध्ये आता गाढवांची संख्या ५५ लाखाच्या घरात गेली आहे. एका करारानुसार, पाकिस्तान चीनला दरवर्षी ८० हजार गाढवं पाठवतो. या गाढवांचा उपयोग मांस आणि इतर उत्पादनासाठी करण्यात येतो. गाढवाच्या चामड्याचा वापर विविध उत्पादनात करण्यात येतो. चामड्यातून काढण्यात येणाऱ्या एका खास जिलेटीनचा वापर अनेक प्रकारच्या औषधात करण्यात येतो. गाढवांच्या व्यापारामध्ये अनेक चिनी कंपन्यांनी लाखो डॉलरची गुंतवणूक केली आहे. पाकिस्तान हा गाढवांची सर्वाधिक संख्या असणारा देश आहे. प्रजातीनुसार गाढवांच्या किंमती ठरवल्या जातात.

गाढवांच्या विक्रीतून नफा
पाकिस्तानमध्ये एका गाढवाच्या चामड्याची किंमत ही १५ ते २० हजारांच्या घरात असते. या चामड्याच्या विक्रीतून पाकिस्तान चांगली कमाई करते. त्याशिवाय गाढवांवर उपचारासाठी खास वेगळे रुग्णालयेदेखील आहेत.

वॉशिंग्टन: करोनाच्या संसर्गाने जगभरात थैमान घातले आहे. सर्वच देश आपल्या परीने करोनाच्या संसर्गावर मात करण्याचे प्रयत्न करत आहेत. करोनाच्या या लढाईत अमेरिकेतील जॉन हॉपकिन्स विद्यापीठातील शास्त्रज्ञ स्टीव हँक यांनी भारतासह सात देशांना सडलेले सफरचंद म्हटले आहे. हँक यांनी भारत सरकारवरही टीका केली आहे.

प्रा. स्टीव हँक यांनी ट्विटरवर भारतासह व्हेनेझुएला, इजिप्त, सीरिया, येमेन, तुर्की आणि चीनवर टीका केली आहे. हे पाचही करोना संसर्गाच्या डेटाबाबत 'सडलेले सफरचंद' असल्याची टीका केली आहे. हे देश करोनाशी संबंधित आकडेवारी माहिती देत नाहीत अथवा संशयित आकडेवारी देत आहेत. त्यांनी आपल्या ट्विटमध्ये विद्यापीठाच्या आकडेवारीचा ग्राफ शेअर केला आहे. त्यामध्ये भारताला सडलेला सफरचंद म्हटले आहे.

भारतात फार कमी प्रमाणावर करोनाची चाचणी होत असून इटलीसारखी परिस्थिती उद्भवणार असल्याचा इशारा त्यांनी दिला. याआधीदेखील हँक यांनी भारत करोनाविरोधात करत असलेल्या उपाययोजनांवरही त्यांनी टीका केली होती.

जगभरात करोनाचा हाहाकार सुरू आहे. ब्राझील सध्या करोना संसर्गाचे मुख्य केंद्र झाले आहे. ब्राझीलच्या आरोग्य मंत्रालयाने दिलेल्या माहितीनुसार, करोनाच्या संसर्गामुळे आतापर्यंत ४१ हजार ८२८ जणांचा मृत्यू झाला आहे. ब्राझीलमधील मृतांची संख्या ही ब्रिटनपेक्षाही अधिक झाली आहे. अमेरिकेत सर्वाधिक करोनाबाधित असून मृतांच्या संख्याही एक लाखाहून अधिक झाली आहे. मृतांच्या संख्येत ब्राझीलचा दुसरा क्रमांक असून मागील २४ तासांमध्ये ९०९ जणांचा मृत्यू झाला आहे. ब्राझीलमध्ये सर्वाधिक रुग्ण असलेल्या साओ पाउलोमध्ये चार तास दुकाने आणि मॉल सुरू करण्यास परवानगी देण्यात आली आहे.
 

वॉशिंग्टन: करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी जगभरातील शास्त्रज्ञ संशोधन करत असून औषध आणि लस विकसित करण्याचा प्रयत्न करत आहेत. तर, विविध आजारांवर असलेल्या उपलब्ध असलेल्या औषधांच्या वापराने करोनाच्या विषाणूवर मात करता येईल का, याबाबतही संशोधन सुरू आहे. करोनाला अटकाव करण्यासाठी क्षयरोग आणि पोलिओ लसीच्या वापरावर संशोधन सुरू आहे.

'द वॉशिंग्टन पोस्ट' दिलेल्या वृत्तानुसार, क्षयरोगावरील लसीमुळे करोनाच्या विषाणूंचा प्रभाव कमी करता येईल का, याबाबत संशोधन सुरू आहे. टेक्सास ए अॅण्ड एम हेल्थ सायन्स सेंटरमधील रोगप्रतिकारक विज्ञानाचे प्राध्यापक जेफ्री डी सिरिलो यांनी सांगितले की, करोनाच्या व्हायरसला अटकाव करण्यासाठी सध्या हीच एकमेव लस असू शकते, त्यामुळे या लसीच्या वापराबाबत संशोधन सुरू असल्याचे त्यांनी सांगितले.

वेस्ट इंडिजचा माजी कर्णधार डॅरेन सॅमीने काही दिवसांपूर्वी भारतीय खेळाडूंवर वर्णद्वेषाचा आरोप केला होता. त्यानंतर सॅमीने भारतीय खेळाडूंना धमकीही दिल्याचे पाहायला मिळाले होते. त्यावेळी भारतीय चाहत्यांनी सॅमीला चांगलेच फटकारले होते. पण आता बॉलीवूड स्टार स्वरा भास्करने या वादात उडी घेतली आहे. सॅमीला फटकारण्याऐवजी स्वरा यावेळी भारतीय खेळाडूंवरच भडकलेली पाहायला मिळत आहे.

आयपीएलमध्ये खेळत असताना मला भारताचे खेळाडू 'कालू' या नावाने हाक मारायचे. मला त्यावेळी या शब्दाचा अर्थ समजला नव्हता. पण आता मला या शब्दाचा अर्थ समजला असून माझ्याबरोबर भारतीय खेळाडूंनी वर्णद्वेष केला आहे. त्यामुळे या खेळाडूंनी जर मला आता प्रतिसाद दिला नाही तर त्यांचे नाव जगापुढे उघड करेन, अशी धमकी सॅमीने भारतीय खेळाडूंना दिली होती. त्यानंतर सॅमीबरोबर आयपीएलमधील सनरायझर्स हैदराबाद या संघात खेळणाऱ्या इरफान पठाणने ही गोष्ट नाकारली होती. सॅमीबाबत अशी कोणतीच गोष्ट घडली नसल्याचे त्याने सांगितले होते. पण सॅमी ही गोष्ट ऐकायला तयार नव्हता.

वॉशिंग्टन: अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकेत नोकरी करू इच्छिणाऱ्या भारतीय व इतर देशांतील नागरिकांना झटका देणारा निर्णय घेणार आहेत. 'एच१बी' व्हिसासहित नोकरी देणारे इतर व्हिसा निलंबित करण्याचा निर्णय ट्रम्प घेणार असल्याचे वृत्त आहे. 'एच१बी' व्हिसाधारकांमध्ये भारतीयांची संख्या मोठी आहे. अमेरिकेत वाढत्या बेरोजगारीच्या पार्श्वभूमीवर ट्रम्प हा निर्णय घेणार आहेत.

'द वॉल स्ट्रीट जर्नल'च्या वृत्तानुसार, अमेरिकन सरकार आगामी आर्थिक वर्षात या प्रस्तावाला मान्यता देऊ शकते. अमेरिकेत आर्थिक वर्ष एक ऑक्टोबरपासून सुरू होते. त्याचवेळी नवीन व्हिसा जारी करण्यात येतात. या निर्णयामुळे कोणत्याही नवीन एच१ बी व्हिसाधारकाला अमेरिकेत नोकरी करण्यास मनाई असणार आहे. व्हिसा निलंबन करण्याचा निर्णय मागे घेतल्यानंतरच व्हिसाधारकांना नोकरी करता येणार असल्याचे एका अधिकाऱ्याने सांगितले. एच१बी व्हिसा हा अमेरिकेतील कंपन्यांना परदेशातील नागरिकांना नोकरी करण्यास मान्यता देतो. यामध्ये माहिती तंत्रज्ञान क्षेत्रातील कंपन्यांचा मोठा वाटा आहे.

अमेरिकेतील माहिती तंत्रज्ञान कंपन्यांमध्ये भारत आणि चीनमधून हजारो कर्मचाऱ्यांना नोकरी मिळते. विशेषत: भारतीय कर्मचाऱ्यांना अधिक मागणी असते. त्यामुळे ट्रम्प प्रशासनाच्या निर्णयामुळे भारतीयांना मोठा धक्का बसणार आहे. करोनाच्या संकटामुळे याआधीच एच१बी व्हिसाधारकांना नोकरी गमवावी लागली आहे. अनेक भारतीय अमेरिकेतून मायदेशी परतले आहेत. अमेरिकेत एच१बी व्हिसावर काम करणाऱ्या भारतीय कर्मचाऱ्यांना कमी वेतन मिळत असल्याचेही एका अहवालात समोर आले होते. नोव्हेंबर महिन्यात अमेरिकेच्या राष्ट्राध्यक्षपदाची निवडणूक आहे. या निवडणुकीत करोनाच्या संकटासह बेरोजगारीचाही प्रमुख मुद्दा होण्याची शक्यता आहे. त्यामुळेच ट्रम्प हा निर्णय घेऊ शकतात, अशी चर्चा आहे.

इस्लामाबाद: पाकिस्तानमधील बलूच प्रांतातील बलूच बंडखोरांच्याविरोधात क्रूर मोहीम आखणाऱ्या पाकिस्तानच्या फौजांना लोकांच्या जोरदार विरोधानंतर पळ काढवा लागला. बलुचिस्तानमधील ब्राबचाह परिसरात बलुच नागरिकांनी पाकिस्तानी लष्कराविरोधात जोरदार आंदोलन करत दगडफेक केली. लोकांच्या या आक्रमक पावित्र्यामुळे पाकिस्तानच्या सुरक्षा दलाच्या जवानांना चेक पोस्ट सोडून पळ काढवा लागला.

स्थानिक वृत्तानुसार, पाकिस्तान लष्कराच्या विरोधात झालेल्या आंदोलनात हजारो नागरिकांनी सहभाग घेतला. बलुच नागरिकांनी जोरदार विरोध सुरू केल्यामुळे पाकिस्तानी सुरक्षा दलाच्या जवानांना आपली पोस्ट सोडून पळ काढवा लागला. हिंसक झालेल्या या आंदोलनात आंदोलकांनी लष्कराची इमारत आणि वाहनांना आग लावली. पाकिस्तानच्या इराण सीमेवर बलुचिस्तानमध्ये बंडखोरांविरोधात मोठी मोहीम सुरू आहे. लष्कराच्या कारवाई काही निष्पाप नागरीक आणि लहान मुलांचाही मृत्यू झाला आहे. त्यामुळे नागरिकांमध्ये रोष निर्माण झाला आहे. त्याशिवाय स्वतंत्र बलुचिस्तानची मागणी या भागात जोर पकडत आहे.

 

मॉस्को : रशिया स्वतःला आंतरराष्ट्रीय शांततेसाठी एक प्रामाणिक मध्यस्थक म्हणून पाहत आहे. त्यामुळे भारत आणि चीन यांच्यातील लष्करी तणावावर रशिया भाष्य करणार नाही, असं रशियाच्या वरिष्ठ सभागृहाचे सदस्य कोन्सँटिन कोसाचेव यांनी सांगितलं. तर रशिया आणि भारताला मिळालेली जी-७ ची ऑफर ही चीनच्या विरोधात आहे. रशियाला कोणत्याही देशाच्या विरोधी समुहात किंवा गटात जायचं नाही, असंही कोसाचेव यांनी स्पष्ट केलं. त्यामुळे आपण चीनविरोधी गटात जाणार नसल्याचं रशियाने स्पष्ट केल्याचं चित्र आहे.

प्रत्यक्ष नियंत्रण रेषेवर असलेल्या वादाविषयी रशियाची भूमिका कोसाचेव यांनी स्पष्ट केली. आपण भारत आणि चीन या दोन्ही देशांच्या सार्वभौमत्वाचा आदर करतो, असं ते म्हणाले. पाश्चिमात्य देशांनी रशियाविरोधी मोहिम चालवल्यामुळे चीनसोबत सध्या सर्वात चांगले संबंध असल्याचंही ते म्हणाले. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांची अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांच्यासोबत फोनवरुन चर्चा झाल्यानंतर परराष्ट्र सचिव हर्ष श्रिंगला यांनी याबाबत रशियाचे राजदूत निकोलाय कुडाशेव यांना या बैठकीबाबतची माहिती दिली होती. भारत कोणत्याही प्रकारच्या मध्यस्थीविरोधात असल्याचं सांगत ट्रम्प यांची मध्यस्थीची ऑफर नाकारण्यात आली होती

यावर रशियन खासदार म्हणाले, 'रशिया अशा कोणत्याही प्रकारच्या वादात हस्तक्षेप बिलकुल करणार नाही. पण जेव्हा विविध परिस्थितीमध्ये गरज असेल, तेव्हा आमचा दुतावास शांततेच्या संवादासाठी एक प्रामाणिक मध्यस्थक असेल. पण जिथे सैन्य बळ संबंधित नसेल तिथेच मध्यस्थी केली जाईल.'

मनिला: लडाखमधील भारताच्या भूभागावर ताबा सांगणाऱ्या चीनने आता दक्षिण चीन समुद्रात आपले वर्चस्व ठेवण्यासाठी कंबर कसली आहे. दक्षिण चीन समुद्रावर वर्चस्व गाजवण्यासाठी चीनने फिलीपाईन्स जवळील स्कारबोरोघ शोअल बेटावर हवाई आणि नौदलासाठी तळ उभारण्याचे प्रयत्न सुरू केले आहेत. सामरीकदृष्ट्या दक्षिण चीन समुद्राचे मोठे महत्त्व आहे. चीनने आणि शेजारील देशांमध्ये यावरून वाद सुरू आहेत.

अमेरिकन वृत्तवाहिनी सीएनएनने न्या. (निवृत्त) अॅण्टोनियो कार्पियो यांच्या हवाल्याने सांगितले की, चीन लवकरच शोअल बेटावर हवाई आणि नौदलासाठी तळ उभारत आहे. चीनने एअर डिफेन्स डिटेक्शन झोन तयार करण्याबाबत संकेत दिले आहेत. त्याचा एकच अर्थ असून चीन लवकरच शोअल बेटावर आपला सैनिकी तळ उभारणार आहे, असे कार्पियो यांनी सांगितले. फिलीपाईन्सनला २०१२ मध्ये या बेटावरील आपला ताबा गमवावा लागला होता. त्यानंतर चीनविरोधात फिलीपाईन्सने आंतरराष्ट्रीय कोर्टात धाव घेतली होती. हे बेट फिलीपाईन्सच्या समु्द्री हद्दीत आहे. कोर्टाने २०० मैल अंतरापर्यंत फिलीपाईन्सचा दावा मान्य केला. मात्र, कोर्टाने या बेटावर कोणत्याही मान्य केला नाही. फिलीपाईन्सशिवाय चीन आणि तैवान यांनीदेखील या बेटावर दावा केला आहे. चीनच्या दक्षिण चीन समुद्रावरील वाढत्या वर्चस्वाला इतर देशांचा विरोध असून तैवानच्या बाजूने अमेरिकन नौदल उभे ठाकले आहे. त्यामुळे चीनच्या या प्रयत्नामुळे अमेरिका आणि चीनमधील संबंध आणखी ताणणार असल्याची चर्चा आहे.

बीजिंग: जगभरात करोनाच्या संसर्गाला अटकाव करण्यासाठी औषधे, लस विकसित करण्यासाठी जगभरातील शास्त्रज्ञ धडपड करत असताना एक मोठी दिलासादायक बातमी समोर आली आहे. मांजरीमधील संसर्गजन्य आजाराविरोधात वापरण्यात येणाऱ्या औषधामुळे करोनाला अटकाव करता येणार आहे. हे औषध तयार करणाऱ्या कंपनीने अमेरिकेतील अन्न व औषध प्रशासनाकडे मानवावर या औषधाची चाचणी करण्याची परवानगी मागितली असताना ही सकारात्मक बातमी समोर आली आहे.

चीनमधील संशोधकांनी हा दावा केला आहे. मांजरीमधील संसर्गजन्य आजारासाठी GC376 हे औषध देण्यात येते. प्रयोगशाळेत झालेल्या चाचणीत अनुकूल परिणाम समोर आले आहेत. या संशोधनाचे नेतृत्व करणारे प्रा. झांग शुयांग यांनी संगणकीय मॉडेल आणि प्रयोगशाळेत करण्यात आलेल्या परीक्षणाच्या आधारे सांगितले की, GC376 या औषधाचा परिणाम चांगला असल्याचे आढळले असून हे सुरक्षित औषध आहे. हे औषध Sars-CoV-2 च्या महत्त्वाच्या एन्झाइमला बांधून ठेवता. या एन्झाइममुळे करोनाचा संसर्ग होतो असे त्यांनी सांगतिले. या एन्झाइमला Mpro असे म्हणतात.

Mpro एन्झाइम प्रोटीनला तोडतात आणि व्हायरस या एमिनो अॅसिडचा वापर ब्लॉक्स तयार करण्यासाठी करतो. Mpro शिवाय, करोनाचा विषाणू आणखी व्हायरस तयार करू शकत नाही. हे औषध करोनाच्या विषाणूने बाधित असलेल्या पेशींपर्यंत सहजपणे पोहचू शकतात, असेही संशोधकांना आढळले आहे. हे औषध माणसांसाठी सुरक्षित असल्याचा दावा करण्यात येत आहे.

मॉस्को: समुद्र किनाऱ्यावर आलेल्या पर्यटकांना फोटो काढण्यासाठी सोयीचे व्हावे यासाठी एका सिंहाच्या छाव्याचे पाय तोडले असल्याचा धक्कादायक प्रकार समोर आला आहे. अमानवीय घटनेची राष्ट्रपती व्लादिमीर पुतीन यांनीदेखील दखल घेतली असून तातडीने चौकशी करण्याचे आदेश दिले आहेत. काही आठवड्यांचाच हा छावा असून त्याचा जन्म झाल्यानंतर त्याला त्याच्या आईपासून दूर करण्यात आले.

डेलीमेलने दिलेल्या वृत्तानुसार, सिंबा नावाच्या या छाव्याची प्रकृती ढासळत चालली होती. दोन्ही पायांना गंभीर इजा झाल्यामुळे त्याला उठता येत नाही. सिंबाच्या मणक्याला गंभीर जखम झाली असून आणि त्याला अनेक दिवस उपाशी ठेवण्यात आले असल्याचे या छाव्याला वाचवण्याचा प्रयत्न करत असलेल्या युलिया अगिवा यांनी दिली. अनेकदा वन्य प्राण्यांची हाडे मोडली जातात. जेणेकरून हे पर्यटकांना पाहून पळून जाता कामा नये. सिंबावर उपचार करण्यात येत असून अजूनही त्याच्या प्रकृतीत मोठी सुधारणा झाली नसल्याची माहिती आहे.

बीजिंग: करोना विषाणू संसर्गाने अनेक देशात थैमान घातले आहे. करोना विषाणूमुळे मानवी आरोग्यावर काय परिणाम होऊ शकतात. याबाबतचे ही संशोधन सुरू आहे. नुकत्याच समोर आलेल्या संशोधनात धक्कादायक बाब समोर आली आहे. पुरुषांच्या प्रजनन क्षमतेवर परिणाम होत असल्याचे संशोधनात समोर आले आहे.

चीनमधील टफ्ट्स युनिर्व्हसिटी आणि गोंगई मेडिकल कॉलेजच्या संशोधकांनी केलेल्या संशोधनातही बाब समोर आली आहे. पुरुषांच्या अंडकोषात विषाणूचा प्रादुर्भाव झाला असल्याचे त्यांना आढळले. करोनाबाधितांच्या अंडकोषात शुक्राणू निर्माण करणाऱ्या पेशींमध्ये बदल होत आहे. त्यामुळे शुक्राणूंच्या गुणवत्तेवर परिणाम होत असल्याची शंका संशोधकांनी व्यक्त केली आहे.

करोनाच्या संसर्गामुळे पुरुषांच्या वीर्याला नुकसान होऊ शकते. त्यामुळेच शुक्राणूंची संख्या कमी होऊ शकते. त्याशिवाय रुग्णाची परिस्थिती अधिक गंभीर झाल्यास शुक्राणूंची निर्मिती थांबू शकते, असा इशाराही संशोधकांनी दिला. करोना विषाणू हा मुख्यत: खोकला, सर्दी, बोलण्यातून हवेत उडणाऱ्या लाळेतील तुषार कणांमुळे फैलावतो. करोनाचा संसर्ग सेक्स केल्यामुळेदेखील फैलावू शकतो का, याबाबतही संशोधनही सुरू आहे. आतापर्यंत केलेल्या संशोधनानुसार शुक्राणूमध्ये करोनाचा विषाणू आढळला नसल्याचे समोर आले आहे.

काही संशोधनानुसार, करोनाचा विषाणू पुरुषांतील अंडकोषात आपले स्थान निर्माण करू शकतात. त्यामुळे सध्या तरी लोकांनी 'स्पर्म डोनेट' न करण्याचा सल्ला संशोधकांनी दिला आहे. संशोधकांनी १२ पुरुषांच्या अंडकोषाच्या पेशीचा बॉयोप्सी केली होती. करोनाच्या संसर्गामुळे या पेशी निष्क्रीय झाल्या असल्याचा दावा करण्यात आला होता.

लंडन: जगभरातील विविध देशांमध्ये करोनाला अटकाव करणारी लस विकसित करण्याचे प्रयत्न सुरू आहेत. ब्रिटनमधील ऑक्सफोर्ड विद्यापीठाने संशोधित केलेल्या लसीची चाचणी सुरू असून एस्ट्राजेनेका कंपनी या लसीचे उत्पादन करणार आहे. या कंपनीकडून डोस उत्पादन सुरू झाले असून भारतातही लसी निर्मिती करण्यात येत आहे.

ऑक्सफोर्ड विद्यापीठाने करोनाच्या विषाणूला अटकाव करण्यासाठी AZD1222 ही लस विकसित केली आहे. ऑक्सफोर्ड विद्यापीठाने विकसित केलेल्या या लसीचे उत्पादन एस्ट्राजेनेका ही औषध निर्मिती करणारी कंपनी करणार आहे. सध्या या लसीची चाचणी सुरू आहे. या लसीच्या पहिल्या टप्प्यात यश मिळाले आहे. सध्या मानवावर या लसीची चाचणी सुरू आहे. ऑगस्ट महिन्यामध्ये मानवी चाचणीचे परिणाम समोर येण्याची शक्यता आहे. त्यानंतर आणखी काही चाचण्या पूर्ण केल्यानंतर ही लस उपचारासाठी उपलब्ध करून देण्यात येणार आहे. एस्ट्राजेनेकाने ब्रिटनबाहेर तीन देशांमध्ये लसीचे उत्पादन करण्यास सुरुवात केली आहे. भारत, नॉर्वे आणि स्विर्त्झलंड या देशांमध्ये सध्या लस निर्मिती करण्यात येत असल्याचे वृत्त 'डेली मेल'ने दिले आहे.

वॉशिंग्टन: आफ्रिकन-अमेरिकन जॉर्ज फ्लॉइड याच्या हत्येनंतर अमेरिकेत उसळलेल्या तीव्र आंदोलनाच्या पार्श्वभूमीवर, वंशभेदाविरोधातील लढ्यासाठी ३७ दशलक्ष अमेरिकन डॉलरचे योगदान देण्याची घोषणा गुगलचे भारतीय वंशाचे सीईओ सुंदर पिचाई यांनी केली.

प्राण गमावलेल्या कृष्णवर्णीयांच्या स्मरणार्थ ८ मिनिटे ४६ सेकंद मौन पाळण्याचे आवाहनही पिचाई यांनी आपल्या कर्मचाऱ्यांना बुधवारी एका ईमेलद्वारे केले आहे. वंशभेदाच्या मुद्द्यावर काम करणाऱ्या संघटनांना १२ दशलक्ष डॉलरचा निधी देण्यात येईल, तसेच वांशिक न्यायासाठी लढणाऱ्या संघटनांच्या मदतीसाठी 'अॅड ग्रांट्स'च्या स्वरूपात २५ दशलक्ष डॉलर देण्यात येतील, अशी घोषणा पिचाई यांनी केली.

'आपला कृष्णवर्णीय समाज वेदनांचा सामना करत आहे. या परिस्थितीत आपल्यापैकी अनेक जण आपल्या तत्त्वांसाठी उभे राहण्यासाठी, एकतेचे दर्शन घडवण्यासाठी योग्य मार्गाचा शोध घेत आहेत. कंपनीकडून नेमके काय योगदान देता येईल, याबाबत काही कृष्णवर्णीय नेत्यांसोबत माझी चर्चा झाली. येत्या काळात नेमके कोठे आपली ऊर्जा आणि स्रोत यांचा वापर करायचा, यावर विचार सुरू आहे,' असे ४७ वर्षीय पिचाई यांनी या ईमेलमध्ये म्हटले आहे.

फ्लॉइड एप्रिलमध्ये पॉझिटिव्ह
जॉर्ज फ्लॉइड याच्या शवविच्छेदनाचा अहवाल बुधवारी जाहीर करण्यात आला. फ्लॉइड हा ३ एप्रिल रोजी कोविड-१९ पॉझिटिव्ह आढळला होता, मात्र त्याला कोणतीही लक्षणे नव्हती, असे यात समोर आले आहे. पोलिसाने मानेवर गुडघा दाबून धरलेला असताना फ्लॉइड याला हृदयविकाराचा धक्का आला, त्याचा मृत्यू ही हत्याच आहे, असे यात स्पष्ट करण्यात आले आहे.

मेक्सिको: करोनाच्या संसर्गामुळे जगभरात भीतीचे वातावरण आहे. काही देशांमध्ये लॉकडाउनचे नियम शिथील करण्यात येत असताना काही नियमही लागू करण्यात आले आहेत. मेक्सिकोमध्ये एका व्यक्तीने सार्वजनिक ठिकाणी मास्क न घातल्यामुळे पोलिसांनी त्याला मारहाण केली. या मारहाणीत त्याचा मृत्यू झाल्याची घटना घडली. या घटनेनंतर लोकांनी आंदोलन करत पोलिसांच्या कारला आग लावली.

मेक्सिकोमधील गुआदालाजारा या शहरात गुरुवारी सायंकाळी ही घटना घडली. मीडिया रिपोर्टसनुसार, याबाबतचा व्हिडिओ व्हायरल झाला. डी लॉस मेमब्रिलोस शहरात नगरपालिकेत पोलिसांनी एका ३० वर्षीय गियोवन्न लोपेझला ताब्यात घेतले होते. एका पिकअप ट्रकमध्ये पोलीस अधिकारी लोपेझला रायफलने मारहाण करत असल्याचे दृश्य दिसत होते. ही मारहाण सुरू असताना त्यावेळी उपस्थित असलेले काहीजणांनी त्याच्या सुटकेसाठी पोलिसांना साद घातली होती. लोपेझने मास्क घातले नव्हते. मास्क घालण्यास विरोध केला म्हणून पोलिसांनी त्याला बेदम मारहाण केली असल्याचा आरोप एका प्रत्यक्षदर्शीने केला आहे. लोपेझच्या नातेवाईकांना त्याचा मृतदेह एका सरकारी रुग्णालयात सापडला. बेदम मारहाणीत त्याच्या डोक्यावर तीव्र आघात झाल्यामुळे मृत्यू झाला असल्याचे शवविच्छेदन अहवालात समोर आले.

इस्लामाबाद: अंडरवर्ल्ड डॉन आणि मुंबई बॉम्बस्फोट प्रकरणातील आरोपी दाऊद इब्राहिम याला करोनाची बाधा झाली आहे. दाऊदला उपचारासाठी रुग्णालयात दाखल करण्यात आले आहे. त्याशिवाय दाऊदची पत्नी महजबीनमध्येही करोना आजाराची लक्षणे आढळून आल्यामुळे तिलाही रुग्णालयात दाखल केले आहे. दाऊदला लष्करी रुग्णालयात दाखल करण्यात आले आहे.

एका वृत्त संकेतस्थळाने हा दावा केला आहे. दाऊद आणि त्याच्या पत्नीला लष्करी रुग्णालयात विलगीकरणात ठेवण्यात आले असल्याची माहिती आहे. या दोघांच्याही उपचारावर पाकिस्तानची गुप्तचर संस्था आयएसआयची देखरेख आहे. त्यामुळे या रुग्णालयात सुरक्षा व्यवस्था कडक करण्यात आली आहे. पाकिस्तानमध्ये करोनाबाधितांची संख्या वेगाने वाढत आहे. मागील २४ तासांत पाकिस्तानमध्ये ४८०० हून बाधित आढळले आहेत. पाकिस्तानमध्ये सध्या ८९ हजारांहून अधिक करोनाबाधित आहेत. पाकिस्तानमध्ये आतापर्यंत १८३८ जणांचा करोनाच्या संसर्गाने मृत्यू झाला आहे.

मुंबई बॉम्बस्फोटप्रकरणी दाऊद इब्राहिम आणि टायगर मेमन हे आरोपी असून दोघेही फरार आहेत. दाऊस पाकिस्तानमध्ये वास्तव्यास असल्याचे अनेक पुरावे भारताने पाकिस्तानला दिले आहेत. मात्र, पाकिस्तानने दाऊद पाकिस्तानमध्ये नसल्याचे सांगितले आहे. भारतातून पळून गेल्यानंतर दाऊदने अनेक वर्षे दुबईत ठाण मांडले होते. भारतीय गुप्तचर संस्थेने त्याच्यविरोधात कारवाईचे पाश आवळण्यास सुरुवात केली होती. त्यानंतर दाऊदने आयएसआयच्या मदतीने पाकिस्तानमध्ये पळ काढला. पाकिस्तानमधील अनेक व्यवसाय दाऊदच्या मालकीचे असल्याची चर्चा आहे. गुन्हेगारी विश्वातून कमावलेला काळा पैसा दाऊदने पाकिस्तानमधील उद्योग व्यवसायात गुंतवला असल्याची चर्चा आहे.

लंडन: ५जी आणि ६ जी तंत्रज्ञानाच्या मदतीने आगामी १० वर्षात डिजीटल जगावर राज्य करण्याचे चीनच्या स्वप्नांना मोठा झटका बसला आहे. आक्रमक विस्तारवादी धोरणांमुळे चीनविरोधात जगभरात रोष निर्माण होत आहे. डिजीटल जगावर अधिराज्य गाजवण्याचे स्वप्न पाहणाऱ्या चीनला अत्याधुनिक सेमीकंडक्टरचा तुटवडा जाणवत आहे. अमेरिका आणि त्याच्या मित्र देशांनी सेमीकंडक्टरच्या कच्चा माल चीनला देण्यास नकार दिला आहे.

चीनने ५ जीच्या तंत्रज्ञानावर पकड मिळवली असली तरी त्यासाठी आवश्यक असणाऱ्या अत्याधुनिक सेमीकंडक्टरसाठी अमेरिकेवर अवलंबून रहावे लागत आहे. मागील काही वर्षांपासून चीन सेमीकंडक्टरची निर्मिती करू इच्छितो. मात्र, अद्याप त्यांना यश मिळाले नाही. 'मेड इन चायना' सेमीकंडक्टरमध्ये अनेक तांत्रिक कमतरता आहेत. त्यामुळे इतर देशांवर चीनला अवलंबून रहावे लागत आहे.

ब्रिटनमधील 'टेलिग्राफ'ने दिलेल्या वृत्तानुसार, या चिपशिवाय आणि त्याच्याशी निगडीत असलेल्या साधनांशिवाय चीन जगात ५ जी तंत्रज्ञानावर वर्चस्व निर्माण करू शकत नाही. इतकंच नव्हे तर दूरसंचार तंत्रज्ञान आणि आर्टिफिशल इंटेलिजेंसच्या क्षेत्रात आघाडी घेऊ शकत नाही. वर्ष २०३० पर्यंत इंटरनेट आणि त्याच्याशी निगडीत बाबींवर नियंत्रण आणण्याचे नियोजन चीनचे राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग यांनी केले होते.

 

बीजिंग: भारताबरोबरील सीमेवरील परिस्थिती स्थिर असून, दोन्ही देशांमध्ये चर्चेच्या दृष्टीने पूर्णवेळ यंत्रणा व संवादाची व्यवस्था आहे. त्यामुळे, सद्यस्थितीवर अन्य कोणाच्या मध्यस्थीची गरज नाही, अशी भूमिका चीनने मांडली आहे.

लडाखमध्ये चीनच्या सैन्याने सीमोलंघ्घन केले असून, भारत आणि चीनचे सैन्य आमनेसामने आल्याच्या घटनाही घडल्या आहेत. अमेरिकेचे अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प यांनी पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्याशी दूरध्वनीवरून झालेल्या चर्चेमध्ये सीमावादावर मध्यस्थी करण्याची तयारी दाखवली होती. दोन्ही नेत्यांमधील या चर्चेवर चीनकडून प्रथमच प्रतिक्रिया देण्यात आली आहे. चीनच्या परराष्ट्र विभागाचे प्रवक्ते झाओ लिजियान यांनी मध्यस्थीची गरज नसल्याचे सांगितले. भारताबरोबरील सीमाप्रश्नावर चीनची भूमिका सातत्यपूर्ण आणि स्पष्ट आहे. दोन्ही देशांच्या प्रमुखांमध्ये एकमत झालेल्या मुद्द्यांवरही दोन्ही देशांकडून अंमलबजावणी होत आहे, याकडे त्यांनी लक्ष वेधले. ट्रम्प यांच्या मध्यस्थीचा प्रस्ताव भारतानेही फेटाळला आहे.

वॉशिंग्टन: अमेरिकेत सुरू असलेल्या वर्णद्वेषाविरोधातील आंदोलनाला आक्रमक वळण लागले आहे. त्यामुळे काही ठिकाणी तोडफोड, जाळपोळीच्या घटना घडत आहेत. राजधानी वॉशिंग्टन डीसीमध्ये असणाऱ्या महात्मा गांधी यांच्या पुतळ्याची विटंबना करण्यात आली आहे. काही अज्ञात लोकांनी हे कृत्य केले असल्याचे पोलिसांनी सांगितले.

भारतीय दूतावासाच्या आवारात हा महात्मा गांधींचा पुतळा आहे. ही घटना घडण्याच्या काही तास आधी जवळच वर्णद्वेषविरोधी आंदोलकांनी आंदोलन केले होते. आंदोलक निघून गेल्यानंतर काही अज्ञात लोकांनी महात्मा गांधी यांच्या पुतळ्याची विटंबना केली. पोलिसांनी या घटनेची चौकशी सुरू केली आहे. विटंबनेचा प्रकार घडल्यानंतर हा पुतळा झाकून ठेवण्यात आला आहे. या घटनेनंतर भारतातील अमेरिकन दूतावासाने भारतीयांची माफी मागितली आहे.

अमेरिकेत विविध ठिकाणी आंदोलने सुरू आहेत. जॉर्ज फ्लॉइडची पत्नी रॉक्सी वॉशिंग्टन मिनिआपोलिसमध्ये आपली सहा वर्षांची मुलगी गियाना हिला घेऊन आंदोलनस्थळी आली होती. पत्रकारांसमोर बोलताना रॉक्सी वॉशिंग्टन म्हणाल्या, 'या लहानगीने आपले प्रेमळ वडील गमावले आहेत, हे साऱ्या जगाला कळू दे. आता तिला पदवीधर झालेली तो कधीच पाहू शकणार नाही. तो खूप चांगला होता, त्यामुळे मला त्याला न्याय मिळवून द्यायचा असल्याचेही त्यांनी सांगितले.