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Health News

गोभी की तरह दिखने वाली ब्रोकली मानव समाज के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. मौजूदा समय में मनुष्य की सेहत में सुधार के लिए ब्रोकली का सेवन काफी बढ़ गया है. यह दिखने में गोभी की तरह होती है, जिसका रंग हरा होता है. ब्रोकली में विटामिन ए, सी, प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, और कई दूसरे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं.

आमतौर पर ब्रोकली को सलाद के रूप में, सूप में या फिर सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. कुछ देशों में इसे भाप से पकाकर भी खाया जाता है, जिससे विटामिन और प्रोटीन की मात्रा बनी रहती है. ब्रोकली को नियमित रूप से अपनी डाईट में शामिल करने से स्वास्थ्य में कई तरह के सुधार देखने को मिले हैं.

ब्रोकली में पाया जाने वाला फिटाकेमिकल शरीर में मौजूद जहरीले पदार्थों को खत्म करने में सहायक होती है. जिसके कारण ब्रोकली के नियमित सेवन से कैंसर जैसी घातक बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. इसके साथ ही ब्रोकली में कैरेटेनॉयड्स ल्यूटिन तत्व पाया जाता है. इसके कारण दिल की धमनियों को स्वस्थ रखने में काफी मदद मिलती है. इसके नियमित सेवन से दिल का दौरा पड़ने और अन्य बीमारियों के होने की आशंका कम हो जाती है.

अगर आपको किसी पार्टी में शामिल होने जाना है या फिर आप अपनी स्किन को लेकर काफी सेंसटिव हैं तो आप खुद से अपनी स्किन का ध्यान रख सकती हैं. बर्तमान समय में स्किन को हाइड्रेट रखना बेदह जरूरी है. ऐसे समय में स्किन को ग्लोइंग और हाइड्रेट रखने के लिए हम सभी फलों का इस्तेमाल कर सकते हैं. फलों से अच्छी सेहत के साथ ही स्किन को पैंपर भी किया जा सकता है.

वर्तमान समय में बाजारों में कई प्रकार के फ्रीट मास्क उपलब्ध हैं, लेकिन प्राकृतिक तौर पर आप घर पर ही फ्रूट मास्क को बना सकती हैं. इससे बहुत ही आसान तरीके से नैचुरल फ्रूट ग्लो पाया जा सकता है. फलों से मास्क बनाने के लिए स्ट्रॉबेरी मास्क सबसे आम है. इसके लिए सबसे पहले स्ट्रॉबेरी को एक बर्तन में अच्छे से मैश करना होता है, जिसके बाद इसमें एक चम्मच चीनी मिला कर अच्छे से मिला लें. इसके बाद इसे चेहरे पर अच्छे से लगा लें.

घर पर बने फ्रूट मास्क आपके चेहरे के डेड स्किन सेल्स को निकालने में काफी मदद मिलेगी. इसके साथ ही आपके चेहरे के पोर्स खुल जाएंगे. स्ट्रॉबेरी में विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट्स मौजूद होते हैं, जो त्वचा को साफ करते हैं. वहीं इसके बीज त्वचा को एक्सफोलिएट करने का काम करते हैं. इस विधि के बाद स्किन को स्टीम देना सबसे जरूरी है.

चेहरे पर फ्रूट मास्क के इस्तेमाल के बाद फ्रूट मास्क का इस्तेमाल त्वचा की इंप्योरिटी को दूर करने के साथ ही पोर्स को भी खोलता है. जिसके कारण जब फेस मास्क लगाया जाता है तो उससे त्वचा इसकी सारी विटामिन को एब्जॉर्ब कर पाती है. चेहरे को स्टीम करने के लिए एक बर्तन में पानी को गर्म कर लें और इसमें 2-3 टीस्पून नींबू का रस मिला लें. इसके बाद एक तोलिए की मदद से अपना सिर ढकें और 10 मिनट के लिए स्टीम लें. अंत में अपने चेहरे को ठंडे पानी से अच्छी तरह से धो लें.

अपनी ओरल हेल्थ को बनाएं  रखने के लिए दिन में कम से कम दो बार अपने दांतों को ब्रश करना और जीभ की सफाई (tongue cleaning) करना चाहिए। वहीं, आयुर्वेद में भी मुंह को साफ रखने के लिए हर रोज दांतों की सफाई करने के महत्व भी बताया गया है, जिससे कि दांत सफेद और चमकदार बने रहें। प्राचीन समय में, लोग अपने दांतों को साफ करने के लिए विशिष्ट पौधों की टहनियों का इस्तेमाल करते थे और आज भी कई जगहों पर आयुर्वेदिक तरीकों से दांतों की सफाई की जाती है। आयुर्वेदिक तरीकों और ब्रश करने की आधुनिक तरीकों का उपयोग करने वाले लोगों की ओरल हेल्थ के बीच एक बड़ा अंतर है। जैसे, आयुर्वेदिक पद्धति का उपयोग करने वाले लोगों में दांतों की सड़न की समस्या से पीड़ित होने की सम्भावना कम होती है।

आयुर्वेदिक तरीके से रखें दांतों को स्वस्थ 
प्राचीन समय में लोग अपने दांतों को साफ करने के लिए कड़वे पौधों की टहनियों का इस्तेमाल करते थे, जिसे दातून के नाम से जाना जाता है। कड़वे पौधों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। साथ ही तीखे स्वाद वाली जड़ी-बूटियाँ मुंह से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती हैं और सांसों की बदबू से भी लड़ती हैं। नीम, आम, और पीपल के पेड़ की टहनियाँ मुंह को साफ रखने में कारगर है।आजकल बाजार में विभिन्न प्रकार के टूथपेस्ट उपलब्ध हैं, जो आयुर्वेद के अनुसार इस्तेमाल किए गए पौधों के समान हैं। आप हर्बल टूथपेस्ट का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि वे हर्बल पौधों से बने होते हैं और रासायन-मुक्त होते हैं। वे रासायनिक रूप से भरी हुई फैंसी टूथपेस्ट से कहीं बेहतर हैं।

 

हम सभी अपने 20s में अपनी खूबसूरत त्वचा को फ्लॉन्ट करते हैं। बस एक अच्छा क्लींजर और मॉइस्चराइजर- और चेहरा चमकने लगता है।

लेकिन हमारी आंखें तब खुलती हैं जब चेहरे पर सबसे पहली झुर्रियां नजर आने लगती हैं। चेहरे पर फाइन लाइन्स नजर आने के बाद ही हम अपने स्किन केयर रूटीन को लेकर गंभीर होते हैं। ये लाइन्स संकेत हैं कि आपकी त्वचा की एजिंग शुरू हो गयी है। अब हम एन्टी एजिंग क्रीमों का प्रयोग करते हैं और अपनी स्किन की एजिंग को टालने की कोशिश करते हैं। लेकिन जो झुर्रियां पहले ही हमारे चेहरे पर आ चुकी हैं, वह तो नहीं जाने वाली ना!

यह प्रश्न महिलाओं में बहुत आम है ‘कब हमें एन्टी एजिंग क्रीमों का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए?’ और इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमने बात की फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम की सलाहकार डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ सोनल बंसल से।

डॉ बंसल कहती हैं, “हमें यह जानना जरूरी है कि एजिंग दो प्रकार की होती है- अंदरूनी और बाहरी। पहले आपकी उम्र अंदर से बढ़ती है और फिर चेहरे पर झलकती है। इसलिए आपको बाहरी एजिंग होने से पहले ही एन्टी एजिंग उत्पादों का प्रयोग शुरू कर देना चाहिए।”

अक्सर नए कपड़े बाजार से खरीदने के बाद लोग उन्हें तुरंत बिना धोएं ही पहन लेते हैं। पर क्या आप जानते हैं आपकी यह आदत आपकी सेहत को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है? जी हां कपड़ों को शॉपिंग बैग से सीधे निकालकर पहन लेने से आपकी सेहत बिगड़ सकती है। आइए जानते हैं नए कपड़ों को पहनने से पहले हमें क्यों उन्हें धोकर पहनना चाहिए।

नए कपड़े लाते हैं कीटाणुओं को साथ- विशेषज्ञों की मानें तो जो कपड़े आप बड़े शौक से शॉपिंग करके अपने घर लाते हैं, उनके साथ ढेरों कीटाणु भी कपड़े में चिपककर आपके घर तक पहुंच जाते हैं। शॉपिंग के समय कपड़ों को ट्रायल के दौरान हजारों बार पहना जाता है, जिससे लोगों के पसीने के साथ कीटाणु भी उन कपड़ों के साथ चिपक जाते हैं।  

कपड़े पर लगे रसायन से दाद-खाज खुजली- कपड़ों को पैक करते समय रसायन से कवर करके रखा जाता है, जो आपकी त्वचा के संपर्क में आकर बुरा असर डाल सकते हैं। कपड़ों की प्रोसेसिंग करते समय कई तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है, जिसे बिना धोए पहनने पर व्यक्ति को दाद, खाज और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डाई कलर्स से एलर्जी - प्राकृतिक धागों का अपना कोई रंग नहीं होता, इसलिए उन्हें सुंदर रंगों में रंगा जाता है। कपड़ों की रंगाई, छपाई और डाई जैसी प्रक्रियाओं में उसपर विभिन्न प्रकार के केमिकल्स लगाए जाते हैं। ज़्यादातर रंगीन कपड़ों में ऐजो डाईस का इस्तेमाल किया जाता है। कपड़ा जितना रंगीन और चटक होगा उसमें उतनी अधिक डाई का इस्तेमाल किया जाएगा। ऐजो डाई के सीधे त्वचा के संपर्क में आने से त्वचा में बहुत अधिक जलन और परेशानी होती है, जिसकी वजह से एलर्जी हो सकती है।

त्वचा रोग को न्योता- बाजार से कोई भी कपड़ा सीधा घर लाकर पहनने से पहले उस कपड़े को कई लोग पहले ही ट्राई करते समय पहन चुके होते हैं। ऐसे में उनके शरीर का पसीना, धूल-मिट्टी या कोई स्किन इंफेक्शन आपके लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है। 

अक्सर आपने सुना होगा कि स्ट्रेस लेने से व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है, उसका किसी से बात करने का मन नहीं करता, यहां तक कि वो अपने परिवार और दोस्तों से भी ढंग से बात नहीं करना चाहता। बावजूद इसके अगर हम कहें कि लाइफ में थोड़ा स्ट्रेस बेहद जरूरी है तो? सुनकर आप भी सोच में पड़ गए होंगे कि भला ये क्या बात हुई, पर ये सच हैं। आइए जानते हैं कैसे कुछ चीजों के लिए स्ट्रेस लेने से लाइफ बन सकती है कूल। 

सुबह जल्दी उठना-
आमतौर पर लोगों को सुबह जल्दी उठना बेहद तनावपूर्ण लगता है। अगर आप भी इस लिस्ट में शामिल हैं तो ये तनाव लेने की आदत डाल लें। जरा सोचिए, सुबह जल्दी उठने से आप अपने पूरे दिन को अच्छे से व्यवस्थित कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके सभी जरूरी काम टाइम से पूरे होंगे और आप बिना बात का तनाव लेने से बच जाएंगे।   

एक्सरसाइज करना न भूलें-
अगर आप सुबह जल्दी उठकर एक्सरससाइज या मेडिटेशन करते हैं तो आपका शरीरिक स्वास्थ्य तो ठीक रहता ही है बल्कि आप मानसिक रूप से भी अच्छा महसूस करते हैं। खुद को पॉजिटिव बनाए रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें। 

चिंता और तनाव, ये देानों ऐसी चीजे हैं, जो आज के समय में लगभग हर किसी के जीवन का एक हिस्सा बन चुकी हैं। तनाव या चिंता होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिसमें पारिवारिक समस्‍याएं और काम का दबाव मुख्य रूप से शामिल हैं। हालांकि कुछ हद तक चिंता करना अच्छा है लेकिन जब इस चिंता और तनाव का स्‍तर बढ़ जाता है तो यह खतरनाक हो सकता है। 

इस चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करने के लिए स्थिति से बाहर निकलने के लिए आप अपने शरीर के कुछ हिस्‍सों की मसाज कर या उन्‍हें दबा सकते हैं। इसके अलावा कुछ देर आराम करने से भी आपको राहत मिलेगी। एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। 

कोनस्टोन विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में यह खुलासा हुआ कि मालिश करने के महज दस मिनट बाद तनाव से ग्रस्त लोगों ने खुद को बहुत आरामदायक स्थिति में पाया। उन्होंने काफी शांति और राहत महसूस की। यहां तक कि साधारण विश्राम के दस मिनट बाद भी काफी हद तक बेहतर महसूस किया।

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में 8 सितंबर 2020 को सामने आए इन निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि यह अल्पकालिक उपचार शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम के लिए मददगार साबित होता है। यह इंसान के मनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्तर पर तनाव को कम कर सकते हैं। तनाव हमारे सेहत को नुकसान पहुंचाता है और कई बीमारियों को जन्म देता है। 

ऐसे में कुछ देर आराम करके और मालिश के जरिए इससे निजात पाया जा सकता है। न्यूरोसाइकोलॉजी लैब के प्रमुख और कोन्स्टैंज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेन्स प्रुसेनर ने कहा कि तनाव के नकारात्मक प्रभावों पर काबू पाने के लिए विश्राम सबसे महत्वपूर्ण है। हमें इसकी अहमियत को समझना होगा।

शोधकर्ताओं ने ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करने के लिए शहद की मक्खी का जहर तलाश किया है. ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने परीक्षण के दौरान ब्रेस्ट कैंसर के शिकार मादा चूहों का कीमोथेरेपी दवाइयों के साथ इलाज किया. उन्होंने बताया कि शहद की मक्खी का जहर और इसका सक्रिय तत्व मेलिट्टिन ट्यूमर की विस्तृत श्रंखला के लिए घातक है. उनका कहना है कि शहद की मक्खी का जहर आक्रामक ब्रेस्ट कैंसर की कोशिकाओं को मार सकता है.

शहद की मक्खी का जहर कैंसर को मारेगा?: शोधकर्ताओं ने पहली बार ब्रेस्ट कैंसर पर मेलिट्टीन और शहद की मक्खी के जहर के प्रभाव की जांच की. जांच के बाद उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर के खिलाफ शहद की मक्खी के जहर में पाया जानेवाला मेलिट्टीन का खुलासा किया. मेलिट्टीन एक अणु है जो मधुमक्खी के डंक मारने पर पैदा होता है. हालांकि वैज्ञानिक अभी पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं कि कैसे ये कैंसर की कोशिकाओं को मारता है.

शोध टीम की प्रमुख डॉक्टर कियारा डोफी ने बताया, "हमने शहद की मक्खी का जहर और मेलिट्टीन पर विचार किया कि कैसे कैंसर का पता बतानेवाले रास्तों को प्रभावित करता है. इसका रासायनिक संदेश ये है कि कैंसर की कोशिका के बढ़ने और दोबारा पैदा होने के लिए आधारभूत है. हमने पाया कि बहुत तीजे से रास्ता बतानेवाले संकेत बंद हो गए." शोधकर्ताओं का कहना है कि जहर से स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.

शोधकर्ताओं ने किया चौंकानेवाला खुलासा: ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में हैरी पर्किन्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने शोध को अंजाम दिया. उन्होंने अपने शोध में पाया कि मेलिट्टीन और शहद की मक्खी का जहर तेजी से कैंसर का खात्मा कर सकता है. उन्होंने बताया कि जिन मादा चूहों को किमोथेरेपी दवा के साथ कंपाउंड दिया जाता रहा उनमें ठीक होने का प्रतिशत कई गुना बढ़ गया.

यहां तक कि ट्यूमर के आकार में भी तेजी से कमी आई. कियारा डोफी ने कहा, "जहर प्रभावकारी साबित हुआ है. शोध के दौरान हमने पाया कि मिलेट्टिन पूरी तरह से कैंसर की कोशिका झिल्ली को 60 मिनट के अंदर मार सकता है."

कद लंबा होने से इंसान का आत्मविश्वास मजबूत होता है. नाटा कद हिम्मत को पस्त करता है. छोटे कद को आसान उपाय के जरिए बढ़ाया जा सकता है. बाजार में आजकल कद बढ़ानेवाले जूते, दवा, टॉनिक मौजूद हैं. दावा है कि उनके इस्तेमाल से मनपसंद नतीजे हासिल किए जा सकते हैं. प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से कद बढ़ने की गारंटी तो नहीं दी जा सकती मगर कुछ कसरत और दिनचर्या की रूटीन में बदलाव लाकर कद बढ़ाया जा सकता है.

कद बढ़ाना मुमकिन है या नामुमकिन?
विशेषज्ञों के मुताबिक नींद के दौरान कद बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है. शोध से पता चला है कि कमर के बल दस मिनट लेटने से कद में पांच मिलीमीटर का इजाफा होता है. दिन भर में रीढ़ की हड्डी सिकुड़ती है और लेटने के बाद फिर वापस अपनी शक्ल में आ जाती है. कद को बढ़ाने के लिए कुछ खास कसरत किसी हद तक फायदेमंद साबित हो सकता है. जबकि 25 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में कद बढ़ने की संभावना बहुत कम हो जाती है. लंबे कद के इच्छुक लोग कुछ टिप्स की मदद से अपना कद बढ़ा सकते हैं.

खुराक और शांत दिमाग
कद बढ़ाना चाहते हैं तो रोजमर्रा के आहार में कैल्शियम, आयरन, विटामिन डी समेत अन्य विटामिन और खनिज जरूर शामिल करें. खुद को दिमागी तौर पर शांत रखें और कम से कम आठ घंटे नींद पूरी करें.

साइकिल चलाएं: कद लंबा करने के इच्छुक लोगों को साइकिल चलाना रूटीन में शामिल कर लेना चाहिए. साइकिल चलाने के दौरान साइकिल की सीट को अच्छी तरह फिक्स करें जिससे पांव को पैंडल तक पहुंचने के लिए ज्यादा खींचना न पड़े. साइकिल की सीट को इतना भी ऊपर न रखें जिससे जोड़ों से संबंधित कोई मुश्किल पेश आए.

रॉड की मदद से लटकें: कद बढ़ाने के लिए ये एक आसान और सस्ता टिप्स है. किसी भी लोहे की रॉड को पकड़ें और ऊपर तक लटक जाएं. जितनी देर हो सके खुद को लटकाकर रखें. हर दिन लटकने के समय को बढ़ाएं. लटकने से कद लंबा, रीढ़ की हड्डी और पेट के पुट्ठे मजबूत होते हैं.

चेहरे से दाग-धब्बे दूर करने में सब्जियों की भी मदद ली जा सकती है.

साधारण और आसान तरीके से रंगत को घर बैठे निखारा जा सकता है.

गोरा रंग किसे पसंद नहीं? क्या पुरुष और क्या महिला सभी की इच्छा चेहरा के सुंदर होने की होती है. इसके लिए बाजार से क्रीम, फेस वाश इस्तेमाल कर चेहरा को खूबसूरत बनाने के बजाए और भी ज्यादा खराब कर लेते हैं क्योंकि हर शख्स की त्वचा अलग-अलग होती है. इसलिए हर किसी के लिए एक ही फॉर्मूला मुफीद साबित नहीं होता.

चेहरे पर किसी प्रोडक्ट्स के लगाने से पहले त्वचा विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी होता है. जिससे बाद में आपको परेशानी का सामना न करना पड़े. इस सिलसिले में घर के दैनिक उपयोग की सब्जी आपके लिए कारगर साबित हो सकती है.

रंगत निखारने के घरेलू तरीके

किसी बर्तन में आलू का रस निकाल लें और उसको अपने चेहरे पर ऐसे लगाएं जैसे आप ब्लीच लगाती हैं. पंद्रह मिनट से आधा घंटा तक आलू के रस को लगा रहने दें. फिर मुंह धो लें. ये नुस्खा रोजाना आजमाएं. चंद दिनों में इसका असर आपके चेहरे पर दिखाई देने लगेगा.

आप चाहें तो टमाटर का लेप भी इस्तेमाल कर सकती हैं. टमाटर का गुदा लेकर अपने चेहरे पर लेप करें. इसकी मदद से भी चेहरे की रंगत को निखारा जा सकता है.

नींबू का रस और शहद बराबर मात्रा में लेकर मिक्स कर लें और उसे अपने चेहरे पर इस्तेमाल करें. इससे भी रंग गोरा होने में मदद मिलेगी.

अगर आपकी त्वचा चिकनी है तो फिर खीरे का रस लें और उसमें नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लेप करें. इसके अलावा नींबू के रस में हल्दी मिलाकर पेस्ट बना लें और उसे चेहरे पर लगाएं. उससे न सिर्फ रंगत संवरेगी बल्कि दाग-धब्बों में भी बड़ा फर्क देखा जा सकेगा.

एक और सरल उपाय घर पर किया जा सकता है. पुदीने की पत्तियां पानी में उबाल कर सुबह उठने के बाद उसे पी लें. इससे भी रंगत निखारने में मदद मिलेगी.

खूबसूरती के लिए बाजार में महंगे प्रोडक्ट्स की कमी नहीं है.

मगर इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उससे फायदे मिले.

हालांकि देसी तरीके से तैयार गई ब्लीचिंग मदद कर सकती है.

जब घरेलू नुस्खों से चेहरे को आकर्षक और खूबसूरत बनाया जा सकता है तो फिर महंगे क्रीम की जरूरत क्यों? त्वचा की सुरक्षा के लिए मास्क रंग निखारने में मददगार साबित हो सकता है. ये मास्क धूप की तपिश और रंगत को साफ करेगा.

गाजर का मास्क: चिकनी त्वचा पर निखार लाने के लिए गाजर का जूस निकालें. फिर उसे अच्छी तरह ठंडा करने के बाद रूई की मदद से चेहरे पर लगाएं. रोजाना दिन में तीन बार तरकीब को आजमाएं.

अंडे का मास्क: शुष्क त्वचा को मुलायम बनाने के लिए एक अंडे की सफेदी में एक नींबू का रस अच्छी तरह मिक्स कर लें. इस तरह पेस्ट तैयार कर 15 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें. उसके बाद चेहरे को ताजा पानी से धो लें.

कैल्सीफेडियोल दवा कोविड-19 के मरीजों में गंभीर संक्रमण के खतरे को कम कर सकती है. स्पेन के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इसके सेवन से कोविड-19 से होनेवाली मौत को भी रोका जा सकता है.

कोविड-19 का इलाज कैल्सीफेडियोल से? कैल्सीफेडियोल विटामिन डी एनालॉग्स नामक दवाओं का एक वर्ग है. ये दवा विटामिन डी सपलीमेंट की एक्टिवेटेड शक्ल है. एंटी वायरल सस्ती दवा की तलाश के बीच वैज्ञानिकों ने अब कैल्सीफेडियोल पर नजरें टिका दी हैं. स्पेनिश शोध को साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित किया गया. दवा का परीक्षण अस्पताल में भर्ती कोविड-19 के 50-60 मरीजों पर किया गया. परीक्षण के दौरान सिर्फ एक मरीज को ICU में भर्ती होना पड़ा. बाकी अन्य मरीजों को बिना किसी पेचीदगी के अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. जिन मरीजों को दवा नहीं दिया गया उनमें से कुछ को ICU में जाना पड़ा जबकि दो मरीजों की मौत हो गई.

स्पेन के शोधकर्ताओं ने किया खुलासा: कोरडोबा में रेनासोफिया यूनिवर्सिटी अस्पताल के मुख्य शोधकर्ता मार्टा एंट्रीयन्स कासटीलो ने कहा, "हमारे पायलट अध्ययन से पता चला है कि कैल्सीफेडियोल की उच्च डोज के सेवन या 25-हाइड्रोक्सी विटामिन-डी से स्पष्ट तौर पर मरीजों को ICU तक जाने की जरूरत नहीं पड़ी." जब शरीर विटामिन डी को रसायन से बदलता है तो उसे 25-हाइड्रोक्सी विटामिन-डी के अलावा कैल्सीडियोल भी कहा जाता है.

25-हाइड्रोक्सी विटामिन-डी टेस्ट विटामिन डी लेवल मॉनिटर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है. खून में 25-हाइड्रोक्सी विटामिन-डी की मात्रा इस बात का संकेत होता है कि कितनी ज्यादा आपके शरीर में विटामिन डी है. टेस्ट से पता चलता है कि आपका विटामिन डे लेवल बहुत ज्यादा है या बहुत ज्यादा कम. हालांकि नए शोध के बारे में विशेषज्ञों का एकमत नहीं है. पुणे में भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च के वैज्ञानिक सत्यजीत रथ कहते हैं, "शोध काफी दिलचस्प है मगर नतीजे पुख्ता नहीं हैं."

अभिनेता शाहिद कपूर की पत्नी मीरा राजपूत के पास पोस्ट प्रिग्नेंसी स्कीन केयर के टिप्स हैं. उनका कहना है कि मां बननेवाली महिलाओं को उनका नुस्खा आजमाना चाहिए. सबसे पहले त्वचा की देखभाल उनके लिए जरूरी है. इससे तरोताजा और खुद को फ्रेश महसूस करने में मदद मिलेगी.

मीरा ने बताया पोस्ट प्रेग्नेंसी हेल्थ केयर टिप्स : महिलाओं को उनकी सलाह है कि बच्चों की देखभाल के साथ अपनी त्वचा पर भी ध्यान देना चाहिए. उन्होंने बच्चे के जन्म के 40 दिनों बाद मां के लिए डाइट प्लान भी सुझाया है. उन्होंने  खुलासा करते हुए कहा कि घी और दूध के सेवन से मां को ताकत मिलती है. घी और दूध को खुद भी और बच्चे के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे मां की त्वचा सुंदर बनती है और उसकी चमक में इजाफा होता है. जन्म के बाद स्वस्थ त्वचा के लिए सही और संतुलित खानपान जरूरी है.

करोना (Corona Virus) संकटाच्या या काळात एक दिलासादायक गोष्ट आपल्याला कळली आहे की ज्यांची रोगप्रतिकारक शक्ती (Immunity power) चांगली असते त्यांचे करोना विषाणू काही बिघडवू शकत नाही. करोना हा असाच विषाणू आहे जो शरीरात गेल्यावर थेट आपल्या रोगप्रतिकारक शक्तीवर परिणाम करतो. ज्या व्यक्तींची रोगप्रतिकारक शक्ती आधीपासूनच कमी असते त्यांचे शरीर करोना विषाणूशी लढा देऊ शकत नाही आणि म्हणून कधी कधी रोगप्रतिकारक शक्ती पूर्णपणे निष्क्रिय झाल्याने रुग्णाचा मृत्यू सुद्धा होत असतो.

त्यामुळे जरी लस नसली तरी करोनापासून बचाव करण्याचा आपल्याकडे एक मार्ग आहे तो म्हणजे रोगप्रतिकारक शक्ती वाढवणे! रोगप्रतिकारक शक्ती वाढवण्याचे तसे अनेक मार्ग आहे. सुरुवातीपासून तज्ञ सुद्धा सांगत आले आहेत की जर तुमच्या शरीरात व्हिटामीन-ए, व्हिटामीन-सी आणि व्हिटामीन-डी यांची मात्रा जास्त प्रमाणात असले तर तुम्हाला करोना पासून धोका नाही. पण अनेकांनी याच गोष्टीचा वेगळा अर्थ घेऊन गोळ्या वगैरे खात व्हिटामिन्सचे सेवन सुरु केले. मुळात हे चुकीचे आहे. जाणकारांच्या सल्ल्याशिवाय व्हिटामीनचे अति सेवन धोकादायक ठरू शकते.

रोग प्रतिरोधक क्षमता का अर्थ होता है शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता. यह आपके शरीर एक खास प्रक्रिया होती है, जिसमें आपका शरीर बाहर से आने किसी भी वायरस और बैक्टीरिया से लड़कर आपको बचाने में सहायक होता है. इस प्रक्रिया को ही इम्यून सिस्टम कहते हैं. आज की जीवनशैली और खानपान की वजह से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले के मुकाबले काफी कमजोर हो गयी है.

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में एक खास तरीके के दूध के बारे में बताया गया है. जिसका सेवन सुबह के वक्त करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आप सभी तरह के वायरस और रोगों से खुद को बचा सकता है, तो आइए हम आपको इस दूध को पीने के फायदे और इसे बनाने का आसान तरीके के बारे में बताते हैं.

ये आयुर्वेदिक दूध बढ़ाता है ओजस्  
'ओजस्' का अंग्रेजी में इसका मतलब होता है रेडियंस यानी कि चमक. किसी भी इंसान के चेहरे पर चमक दिखाना इस बात की ओर इशारा करता है कि व्यक्ति स्वस्थ और प्रसन्न है. किसी भी इंसान के चेहरे पर चमक तभी आती है, जब व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होता है. ये खास दूध पेय यही काम करता है. ये खास दूध-

यकृत हा आपल्या शरीरातील महत्त्वपूर्ण अवयवांपैकी एक होय. शरीराचे कार्य सुरळीत सुरु राहावे यासाठी यकृताचे योगदान मोठे असते आणि म्हणून यकृत सक्षम ठेवणे, त्याची काळजी घेणे हि आपली जबाबदारी असते. यकृतामध्ये थोडी जरी समस्या आली तर त्याचा परिणाम हा थेट पूर्ण शरीराला भोगावा लागतो. वेगवेगळे घातक आजार शरीराला विळखा घालतात. चुकीच्या खाद्यपदार्थांच्या सेवनाने यकृताला सामान्यत: त्रास भोगावा लागतो. त्यामुळे आपल्या खाण्या पिण्याकडे विशेष लक्ष प्रत्येक व्यक्तीने देणे गरजेचे आहे जेणेकरून यकृतामध्ये कोणती गंभीर समस्या उद्भवणार नाही. यकृताला सक्षम आणि मजबूत ठेवण्यासाठीच आम्ही तुम्हाला काही अशा खाद्यपदार्थांबद्दल सांगत आहोत ज्यांचे तुम्ही नियमित रुपाने सेवन करायला हवे. चला तर जाणून घेऊया त्या पदार्थांबद्दल!

मिलावटी खाना और बिजी शेड्यूल के चलते हम अपनी सेहत पर कम फोकस कर पाते हैं यही वजह है कि हम तरह- तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. आज कल तो बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को जकड़ सकती है. डायबिटीज जैसी बीमारी 40 प्लस ही नहीं 10 साल के बच्चे में भी देखने को मिल रही है. डायबिटीज गंभीर तब हो जाती है जब इसे नजरअंदाज कर दिया जाए लेकिन इस बीमारी से लड़कर इसे कमजोर किया जा सकता है.डायबिटीज से लड़ने के लिए स्वस्थ ब्लड शुगर लेवल का होना बेहद जरूरी है. डायबिटीज ऐसी स्थिति है जो ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करती है. ब्लड शुगर लेवल शरीर में बिगड़ता है तो उससे डायबिटीज पर असर पड़ता है. डायबिटीज के चलते, किडनी, हृदय और आंखे प्रभावित होती है ऐसे में डायबिटीज रोगियों को स्वस्थ ब्लड शुगर लेवल को बनाए रखने की काफी जरूरत होती है. डायबिटीज से लड़ने के लिए आपको अपने जीवन शैली और खानपान में कुछ बदलाव करने की जरूरत होती है.

वजन पर नियंत्रण - बढ़ता वजन कई बीमारी को जन्म देता है. मोटापा भी डायबिटीज की एक बड़ी वजह है. स्वस्थ ब्लड शुगर लेवल को बनाए रखने के लिए बढ़ते वजन को रोकना काफी आवश्यक है. तेजी से बढ़ रहा वजह डायबिटीज और ब्लड शुगर के खतरे की खंटी है. वजन को कम करने के लिए डेली मॉर्निंग वॉक करें इसके अलावा एक्सरसाइज भी अपने वजन को कम करने में काफी मददगार साबित होगी.

आधुनिक व्यस्त दिनचर्या के चलते आज एक परिवार के लिए अपने बच्चों के स्वास्थ्य का खयाल रखना आसान नहीं होता हैं. लोगों को अब अपने बच्चों और खुद का ख्याल रखने का बहुत कम समय होता है. जिससे बच्चों में मोटापा और ओवर वेट जैसी समस्या का होना आज आम बात है. हालांकि एक स्वस्थ और सक्रिय जीवन शैली को अपना कर इन बीमारियो से  बचावा किया जा सकता है. इसके साथ ही डायबिटीज, अस्थमा, हाईप्रेसर जैसे कई बीमारियों को भी रोका जा सकता है.

एक स्वस्थ और निरोग जीवन के लिए बहुत जल्द ही स्वस्थ आदतों को अपनाना जरूरी हो जाता है.  ये आदतें लोगों को उनके परिवारों के लिए एक स्मार्ट विकल्प बनाने में मदद कर सकती हैं. ऐसा देखा गया है कि बच्चे अपने माता-पिता की आदतों की नकल करते हैं. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि गार्जियंस अपनी आदतों में अच्छे विकल्पों को अपनाएं.

वेलेंटाइन डे मनाने से पहले जान लीजिए कैसी है आपकी वेलेंटाइन, गुस्सा कितना आता है उनको। 12 राशियां न केवल भविष्य की सूचनाएं देती हैं बल्कि व्यक्तित्व का आईना भी होती हैं। तो देखिए क्या कहती है आपकी गर्लफ्रैंड की राशि। कितनी गुस्सा करती हैं, आपकी वेलेंटाइन? मेष:- यह राशि प्रतीक है- मेमने की। लिहाजा अगर आपकी गर्लफ्रैंड की राशि यह है तो आप हैं सुपर लकी। इस राशि वाली लड़कियाँ मेमने की तरह सीधी होती हैं। आम तौर पर इन्हें गुस्सा नहीं आता हैं।
वृषभः- इस राशि का प्रतीक चिन्ह है- बैल। इस राशि की युवतियाँ जितनी मेहनती होती है, उतनी ही गुस्सैल भी होती है। लेकिन डोंट वरी, इन्हें अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना भी आता है।
मिथुनः- एक्साइटमेंट और एंग्रीवुमन इस राशि वाली लड़कियों की खासियत है। बात-बात पर गुस्सा करना इनकी आदत में शुमार है। इनके प्रेमी को इनके गुस्से का अक्सर शिकार बनना पड़ता है। सो, बी केयरफुल!

कर्कः- इस राशि की बंदियों को आप गुस्सैल नहीं कह सकते क्योंकि गुस्सा आने पर अपनी चतुराई से यह दबा लेती हैं। इन्हें गुस्सा तो आता है लेकिन वह ज्वालामुखी की तरह अन्दर ही अन्दर धधकता रहता है।
सिंहः- इनका गुस्सा? तौबा-तौबा! जिसका प्रतीक ही लॉयन हो वह निश्चित ही गुस्सैल होगी। लेकिन इनका गुस्सा व्यर्थ नहीं होता। अन्याय देखकर यदि यह गुस्से से तमतमा जाती हैं तो गलत क्या है? इनसे बेवफाई की सोचिएगा भी मत।
कन्याः- इस राशि की कन्याएँ गुस्सैल नहीं, नासमझ होती है। ज्यादा सोचती रहती हैं लेकिन गुस्सा नहीं करती। दूसरों का गुस्सा अपने आप पर उतारकर परेशान होती रहती हैं। इनका जरा ख्याल रखें।
तुलाः- गुस्से को किस तरह, कहाँ पर एडजस्ट किया जाता है, कोई इनसे सीखे। यह गुस्सैल होती भी हैं और नहीं भी। तराजू की पलड़ों की तरह इनका गुस्सा भी घटता-बढ़ता रहता है। इन्हें आप कभी गरम, कभी नरम वेलेंटाइन मान सकते हैं।
वृश्चिकः- गुस्सा इनकी नाक पर रखा होता है। बिच्छू का डंक जितना तेज होता है इनका गुस्सा। हो भी क्यों नहीं आखिरकार बिच्छू ही तो है इस राशि का प्रतीक। मगर जरा सावधान, ये बेवफा भी होती हैं।
धनुः- यह गुस्सा तो करती हैं, लेकिन देखभाल कर। अव्वल तो यह बिना बात गुस्सा नहीं करती लेकिन जब गुस्सा करती हैं तो सीधे तीर क

ऑटोग्राफ हमारे व्यवहार और पूरे जीवन का दर्पण है। अगर आप अपने वेलेंटाइन को जानना चाहते हैं तो उससे ऑटोग्राफ लीजिए। साथी के ऑटोग्राफ को देखकर लाइफ के प्रति उसकी thinking और दूसरों के प्रति उसके attitude का अनुमान लगाया जा सकता है। ऑटोग्राफ हमारे व्यवहार और पूरे जीवन का दर्पण है। अगर आप अपने वेलेंटाइन को जानना चाहते हैं तो उससे ऑटोग्राफ लीजिए। साथी के ऑटोग्राफ को देखकर लाइफ के प्रति उसकी thinking और दूसरों के प्रति उसके attitude का अनुमान लगाया जा सकता है।ऑटोग्राफ अगर सीधी लाइन से ऊपर किया हो तो ऐसा साथी सतही होता है। इनमें डेप्थ नहीं होती। पेन को खूब गड़ा कर लिखने वाला शक्की होता है। ऑटोग्राफ अगर बाएँ से नीचे और दाहिनी तरफ उठा हुआ हो तो आपका वेलेंटाइन प्रोग्रेसिव होगा। लेकिन ऑटोग्राफ के दाहिनी तरफ झुकाव हो तो वह निराशावादी होगा। ऑटोग्राफ हमेशा नीचे से ऊपर की तरफ होना चाहिए। अपने नाम का पहला अक्षर घेरना अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसा साथी आपकी उन्नति नहीं चाहेगा, बस, खुद ही आगे बढ़ना पसंद करेगा।ऑटोग्राफ के अंत में एक या दो बिंदू लगाना भी सफलता का प्रतीक है। कार्टून या डूडल्स बनाने वाला दिल का साफ और बेहद प्यार करने वाला होता है। तो इस वेलेंटाइन डे पर कहें अपने वेलेंटाइन से ऑटोग्राफ, प्लीज!

40 की उम्र तक आते आते हड्डियां कमजोर होने लगती हैं. लेकिन अगर सही देखभाल और लाइफ स्टाइल को ठीक रखा जाए तो इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. 40 के बाद अगर इन उपायों के अपनाते हैं तो हड्डियों से संबंधित दिक्कत कम हो सकती हैं. आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में - आधुनिक जीवन शैली का सबसे ज्यादा असर व्यक्ति की सेहत पर पड़ता है. अधिक वर्क लोड के चलते तनाव जैसी दिक्कतें आम हो रही हैं. तनाव कई बीमारियों की जड़ है. वर्तमान में होने वाली अधिकतर बीमारियों के पीछे तनाव मुख्य वजह है.

इन उपायों को अपनाएं - 40 की उम्र में आते ही व्यक्ति को सेहत पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए. बीमारियों से बचना है तो लाइफ स्टाइल को तुरंत बदल दें. सुबह जल्दी उठकर टहलना शुरू कर दें. सुबह टहलने से हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं. टहलने के साथ अगर व्यायाम करते हैं तो ये बहुत ही अच्छा है.

खानपान का रखें ध्यान - इस उम्र में खानपान पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है. उम्र की इस अवस्था में आने के बाद भोजन में तेल की मात्रा कम कर दें. हरी पत्तेदार सब्जियों की मात्रा भोजन में बढ़ाएं. जंक फूड से परहेज करें. दूध जरूर लें. इससे विटामिन डी की पूर्ति होगी जो हड्डियों के लिए बहुत ही जरूरी होता है. खानपान के समय का भी ध्यान रखें. अधिक देर तक खाली पेट न रहें. जिन फलों में विटामिन डी की मात्रा अधिक पाई जाती है उन फलों का सेवन अधिक करें. वहीं खाने में प्रोटीन की मात्रा का भी ख्याल रखें.

कुछ देर धूप में जरूर बैठें - इन दिनों अच्छी धूप निकल रही है. धूप कई तरह की बीमारियों से बचाती है. सूरज की रोशनी विटामिन डी का सबसे अच्छा श्रोत है. इसलिए प्रतिदिन व्यक्ति को कुछ देरतक धूप में जरूर बैठना चाहिए. इससे हड्डियां मजबूत होती हैं. सुबह के समय धूप लेना सबसे अच्छा रहता है. बेहतर होगा कि धूप में पैरों और जोड़ों की मालिश करें. इससे हड्डियों की कई समस्या दूर होंगी और दर्द में भी आराम मिलेगा.

Poco X2 को भारत में 4 फरवरी को लॉन्च किया जा रहा है. साथ ही ये कंपनी ने ये भी पुष्टि कर दी है कि ये स्मार्टफोन 120Hz डिस्प्ले के साथ आएगा. फ्लिपकार्ट पर कंपनी ने ये भी कंफर्म किया है कि इस स्मार्टफोन में 27W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा. अब एक नई रिपोर्ट से इस स्मार्टफोन के मेजर स्पेसिफिकेशन्स और कीमत सामने आ गई है.फिलहाल लॉन्च से पहले ही हम जानते हैं कि Poco X2 को लॉन्च के बाद फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध कराया जाएगा. जब 2018 में Poco F1 को लॉन्च किया गया था. तब ये स्मार्टफोन कम कीमत में फ्लैगशिप प्रोसेसर देने के लिए काफी मशहूर हुआ था. अब चूंकि इसका अपग्रेड आने जा रहा है, हमें इस बार भी फोन से काफी बेहतरीन होने की उम्मीद है. फिलहाल हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में एक टिप्स्टर के हवाले से दावा किया है कि Poco X2 को भारत में 18,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया जाएगा. ये कीमत 6GB रैम और 64GB स्टोरेज वेरिएंट की होगी.

          मोटापा बढ़ने की समस्या से अगर परेशान हैं तो सबसे पहले बैठने के तरीकों को बदल दें. अधिक देर तक एक ही मुद्रा में बैठने से मोटापा बढ़ने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है. इसलिए जरूरी है कि तत्काल इस आदत को बदल लें नहीं तो परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. मोटापा वैसे तो अपने आप में ही एक बीमारी है. लेकिन ये कई अन्य और बीमारियों को भी जन्म देती है. यही वजह है कि ऐसे लोगों में सबसे अधिक बीमारियां पाई जाती है. वजन का बढ़ना कोई समस्या नहीं है. दरअसल ये गलत दिनचर्या और सेहत की अनदेखी का परिणाम है. समय रहते इस समस्या को दूर भी किया जा सकता है. लाइफ स्टाइल और खानपान के तौर तरीकों में बदलाव कर इस समस्या को दूर कर सकते हैं.

आफिस जॉब करने वालों में वजन बढ़ने की समस्या भी अब दिखाई देने लगी है. वहीं वे लोग जो एक जगह पर कई कई घंटों तक बैठे रहते हैं ऐसे लोगों में यह समस्या अधिक पाई जाती है. अधिक देर तक एक जगह पर घंटों बैठने से रक्त संचार बाधित होता है वहीं ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसे दिक्कते भी शुरू हो सकती है. इसलिए सबसे बेहतर यही है कि अधिकतर देर तक लगातार बैठने की बजाए थोड़ी थोड़ी देर पर ब्रेक जरूर लें. ब्रेक लेने के बाद कम से कम 100 कदम जरूर चलें. वहीं एक बार में भरपेट खाने की आदत को तत्काल बदल दें. एक बार खाने की आदत के कारण भी पेट निकलता है और वजन बढ़ता है. इसलिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि थोड़ी थोड़ी देर पर कुछ न कुछ खाते रहें. खाने में फाइबर युक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ा दें. ऑयली चीजों से तौबा करें. पौष्ठिक और शुद्ध पदार्थों का ही सेवन करें. जंक फूड से परहेज करें. ओवर डायट किसी भी सूरत में न लें. सुबह उठने के बाद फिजिकल वर्क जरूर करें. स्पोर्टस एक्टिविटी में भी सक्रिय हो सकते हैं. ऐसा करने से शरीर से निकलने वाला पसीना कई रोगों से मुक्ति दिलाएगा.

 सर्दियों में सिर्फ त्वचा ही नहीं बाल भी खराब होते हैं. सर्दियों में बालों में रूखापन, खुजली, बालों का गिरना और बालों का उलझना आम बात है. सर्दियों में सिर्फ महिलाओं के ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी बालों की देखभाल करना जरूरी है. आज हम आपको कुछ ऐसे असरदार नुस्खों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप सर्दियां के दौरान अपने बालों को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं.

  • अच्छे शैंपू का करें इस्तेमाल - आप किस शैम्पू का इस्तेमाल कर रहे हैं उससे भी बालों को नुकसान पहुंचता है. यदि आपको डैंड्रफ है तो एंटी डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल करना चाहिए. हमेशा माइल्‍ड शैंपू का इस्तेमाल करना चाहिए. ऐसा करने से बालों को कम नुकसान पहुंचता है.

  • ऑयल जरूर लगाएं - सर्दियों में बालों की अच्छी देखभाल के लिए तेल लगाएं. आप बाल धोने से एक घंटा पहले सिर में तेल लगाएं. आप चाहे तो अपने तेल में आवश्यक तेलों की कुछ बूंदें भी डाल सकते हैं. तेल लगाने से सर्दियों के समय बालों का रूखापन दूर होता है और नमी बरकरार रहती है. स्वस्थ बालों को बनाए रखने के लिए तेल से पोषण और नमी दोनों मिलते हैं. आप स्काल्प पर नारियल, जैतून या बादाम के तेल से मालिश करें, इसे लगभग एक या दो घंटे के लिए छोड़ दें और बाद में इसे धो लें.

  • ड्रायर करने सें बचें- बेशक सर्दियों में बाल देर से सूखते हैं लेकिन पुरुषों को बाल सुखाने में अधिक समय नहीं लगता क्‍योंकि उनके बाल छोटे होते हैं. ऐसे में आप बाल जल्दी सुखाने के लिए हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करते हैं तो ऐसा ना करें. इससे बाल बहुत जल्दी खराब होते हैं. ये ना सिर्फ बालों में खुजली का कारण बनता है बल्कि ये आपके बालों की जड़ों को कमजोर कर सकता है और इस प्रकार बालों के झड़ने का कारण बन सकता है.

  • बालों के लिए कंडीशनिंग - अच्छे और स्वस्थ बालों के लिए कंडीशनिंग भी बहुत जरूरी है. आप अपने बालों के मुताबिक, शैंपू के बाद बालों को कंडीशनिंग करें. लेकिन सप्ताह में एक या दो बार से ज्यादा कंडीशनिंग नहीं करनी चाहिए.

कुछ पुराने फोन पर व्हाट्सएप काम नहीं करेगा. एक फरवरी 2020 से 2.3.7 वर्जन वाले एंड्रायड फोन पर व्हाट्सएप काम नहीं करेगा. इसके अलावा आईओएस 8 और इसके नीचे के फोन पर भी व्हाट्सएप नहीं चलेगा. एक जनवरी से विंडोज फोन पर भी व्हाट्सएप सपोर्ट बंद हो चुका है. एंड्रॉयड जिंजरब्रेड वाले फोन में व्हाट्सएप काम नहीं करेगा वहीं विंडोज के लूमिया फोन्स में भी व्हाट्सएप बंद हो गया है. माइक्रोसॉफ्ट स्टोर से भी व्हाट्सएप को हटा दिया गया है. इससे पहले सिंबियन फोन्स में भी व्हाट्सएप बंद हो चुका है. ऐसा नहीं है कि केवल व्हाट्सएप ने ही इन डिवाइसेस से सपोर्ट खत्म किया है. कई अन्य सर्विस भी इन फोन्स पर बंद हो चुकी हैं. गूगल ने 2017 में जिंजरबोर्ड पर सपोर्ट खत्म कर दिया था वहीं एपल ने भी आईफोन 4 से 2015 में सपोर्ट बंद कर दिया था. इसका मतलब ये भी है कि इन फोन को हैक करना काफी आसान है. पिछले कुछ वक्त में व्हाट्सएप को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं और ऐसे में इसका अपडेट वर्जन चलाना ही यूजर्स के लिए अधिक सेफ होगा.

      आप जानते ही हैं कि व्हाटसएप दुनिया का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप है और भारत में भी करोड़ों लोग इस एप को यूज करते हैं. इसमें टेक्स्ट मैसेज के अलावा वॉयस कॉल और वीडियो कॉल की भी सुविधा मिलती है. इसकी लोकप्रियता का कारण इसका काफी सिंपल और यूजर फ्रेंडली होना बताया जाता है. बताया जा रहा है कि पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर नए फीचर्स सपोर्ट नहीं करते हैं. व्हाट्सएप जितने नए फीचर उतार रहा है और लगभग रोजाना नए अपडेट जारी कर रहा है ऐसे में पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम उन्हें सपोर्ट नहीं कर पा रहे हैं. अगर आपको पता है कि आप कोई महत्वपूर्ण मैसेज डिलीट कर चुके हैं तो अपने फोन को ऑपरेट ना करें साथ ही उसे अपडेट भी ना करें. व्हाट्सएप मैसेज फिर से पाने का पहला तरीका है अपना व्हाट्सएप अनइंस्टाल कर फिर से इंस्टाल करें. अपने पुराने नंबर से ही वॉट्सऐप सेटअप करें. लास्ट में आपको बैकअप रीस्टोर करने का ऑप्शन मिलेगा. यहां रीस्टोर पर टैप करें और मेसेज रीस्टोर होने का इंतजार करें. आपके डिलीट हो चुके मेसेज और चैट वापस आ जाएंगे.

स्ट्रीट फूड्स काफी लोगों को पसंद होते हैं. वह नमकीन, मसालेदार होते हैं. लेकिन ये स्ट्रीट फूड आपके पेट, कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं. साथ ही यह आपके स्वास्थ्य के लिए एक जोखिम भरा मामला साबित हो सकते हैं. तो चलिए जानते हैं वह कौन से स्ट्रीट फूड हैं, जिन्हें आपको खाते समय सावधानी बरतनी चाहिए.

गोल गप्पा/पानी पुरी
स्ट्रीट फूड में लोगों की खास पसंद होती है गोल गप्पा. दिल्ली में गोल गप्पा, महाराष्ट्र में पानी पुरी के नाम से पुकारा जाता है. यह देश के हर हिस्से में आपको मिल जाएगा. गोलगप्पे का पानी दूषित हो सकता है, क्योंकि इसे खुले में छोड़ दिया जाता है. गोल गप्पों को भरने में उपयोग किए जाने वाले हाथ हमेशा साफ नहीं होते हैं. जिस कारण आप दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का शिकार हो सकते हैं

छोले भटूरे
छोले भटूरे का नाम आते ही आपको लोग दिल्ली में अपनी फेमस दुकान बता देंगे. यह स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड आपको हर जगह आसानी से मिल जाएगा. भटूरे को तेल में लथपथ, घंटों तक खुला छोड़ दिया जाता है, ये भटुरों को परेशान पेट की समस्या पैदा कर सकते हैं, इसलिए इसे खाते समय सावधानी बरतनी चाहिए.

कचौड़ी
छोले भटूरे की तरह ही, सड़क के किनारे की कचौड़ी का भी अधिक सेवन आपके पेट और कोलेस्ट्रॉल के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है. इसका एक अन्य जोखिम कारक भी है, जो कि इसके भरने के रूप में उपयोग की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता. कचौड़ी को तलने के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला तेल भी कई बार खराब होता है जो आपकी सेहत को बिगाड़ सकता है.

सर्दियों में जोड़ों में दर्द की समस्या लोगों को परेशान करनी लगती है. जिन लोगों की उम्र 40 से ऊपर होती है उनमें ये समस्या अधिक पाई जाती है. इस समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए. महिलाओं में यह समस्या सबसे अधिक पाई जाती है. जोड़ों में दर्द विटामिन की कमी से होता है. शरीर में जब विटामिन डी की कमी होने लगती है तो ये दर्द शुरू हो जाता है. जो लोग ऑफिस वर्क अधिक करते हैं उनमें यह समस्या अधिक पाई जाती है. क्योंकि जो लोग अधिक समय तक बैठकर काम करते हैं उन्हें यह शिकायत जल्दी होने लगती है. वहीं ऐसे लोगों का खानपान भी अनुशासित नहीं होता है इसलिए यह समस्या बढ़ने लगती है. इस समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि खानपान सही हो. भोजन में विटामिन डी का ध्यान रखने की जरूरत है. विटामिन डी का सबसे अच्छा श्रोत दूध है, जो आसानी से उपलब्ध हो जाता है. प्रतिदिन दूध का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर में विटामिन डी की कमी दूर होती है और शरीर को सही रखने के जरूरी तत्वों की भी पूर्ति होती है. इसके साथ ही सर्दियों में धूप में कुछ देर जरूर बैठना चाहिए. सूरज की रोशनी विटामिन डी का सबसे अच्छा श्रोत है. अगर ऐसी सुविधा है तो इससे बेहतर कुछ भी नहीं होता है. वहीं एक ही मुद्रा में अधिक देर तक नहीं बैठना चाहिए. इससे भी जोड़ो की समस्या पैदा होती है. दर्द शुरू हो जाता है. बेहतर है कि थोड़ी-थोड़ी देर में टहलते रहे. इससे नसों में रक्त का संचार भी ठीक बना रहेगा. मछली, दूध, पनीर, अंडे इन सब में विटामिन डी पाया जाता है.

सर्दी के मौसम में जोड़ों के दर्द की समस्या से बड़ी संख्या में लोग परेशान रहते हैं| जोड़ों के दर्द को नजर अंदाज नही करना चाहिए| कभी कभी अधिक देर तक बैठने से भी जोड़ों में दर्द की दिक्कत होने लगती है| ऑफिस वर्क जिन लोगों का रहता है उनमें ये समस्या अक्सर पाई जाती है| जोड़ों के दर्द को बिना दवा के भी दूर किया जा सकता है| घरेलू उपाय अपनाकर भी इस समस्या से बचे रह सकते हैं|
समय पर अगर जोड़ों के दर्द का इलाज न किया जाए तो ये अर्थराइटिस का भी रूप ले सकता है| इससे बचने के लिए शरीर में यूरिया की मात्रा को नियंत्रित रखने की जरूरत है| क्योंकि शरीर में यूरिया की मात्रा बढ़ने से जोड़ों में निकिल जैसे टुकड़े जमा होने लगते हैं जो ब्लड में यूरिक एसिड की अधिकता से खतरनाक स्थिति बना सकती है| जो लोग अधिक तनाव में रहते हैं मानसिक रूप से परेशान रहते हैं उन्हें यह रोग जल्दी होता है| इसलिए तनाव आदि से बचना चाहिए| देर रात जो लोग जागते हैं उन्हें भी इसकी दिक्कत होती है| सही डायट न लेने से हड्डियों पर सबसे ज्यादा असर होता है| जंकफूड से हड्डियों को नुकसान पहुंचता है इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए|

हल्दी का करें सेवन
भारतीय रसाई में हल्दी जरूर होती है. हल्दी मसाला होने के साथ साथ औषधि भी होती है| हल्दी में करक्यूमिन तत्व एक एन्टी ऑक्सीडेंट है जो शरीर को कैल्शियम तो देता है| इससे शरीर से यूरिक एसिड जैसे तत्वों को भी बाहर निकलने में मदद मिलती है| इसलिए हल्दी का सेवन जरूर करना चाहिए| इसे दूध के साथ भी ले सकते हैं|

नारियल खाएं
सूखा नारियल जोड़ों के दर्द को रोकने में मदद करता है| जो लोग नारियल का 10 से 20 ग्राम रोज सेवन करते है उनकी हड्डियों में मजबूती होती हैं| नारियल का पानी पीने से भी हड्डियों को ऊर्जा मिलती है और ये रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है|

अरंड के तेल से करें मालिश
अरंड के तेल की मालिश करने से दर्द में आराम मिलता है| प्रतिदिन इसके तेल से मालिश करनी चाहिए| बाजार में आसानी से इसका तेल मिल जाता है|

सेहत बनाने के लिए जो बादाम खाते हैं वे इसके फायदे भी जानते हैं| लेकिन बादाम खाने का तरीका शायद कम लोग ही जानते हैं| इस वजह से बादाम खाने का जो लाभ मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता है| पहलवान और अभिनेता दारा सिंह का नाम तो सभी जानते हैं| दारा सिंह की मां उन्हें रोज 100 बादाम खाने के लिए देती थीं| दारा सिंह का मानना था कि मां की इस आदत की वजह से ही उनकी सेहत बनी और कुश्ती की तरफ उनका रुझान हुआ| बाद में उन्होंने कुश्ती के क्षेत्र में भारत को पूरी दुनिया में एक नई पहचान दी|
बादाम अपने आप में एक संपूर्ण आहार होता है जो स्वास्थ्य के लिए कई मायने में बहुत लाभदायक है| बादाम खाने से व्यक्ति का पाचनतंत्र अच्छा रहता है| दिमाग को मजबूत बनाने में बादाम अहम भूमिका निभाता है| इसके साथ ही बालों के लिए भी इसे अच्छा माना जाता है| स्कीन को सुंदर बनाने में बादाम का कोई मुकाबला नहीं है| लेकिन बादाम का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसको सही तरह से खाया जाए| सर्दी के मौसम में बादाम खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसकी तासीर गरम होती है| बादाम एनर्जी से भी भरपूर होता है| इसके सेवन से थकान की समस्या दूर होती है|


बादाम के छिलके में पाया जाता है टैनिन
बादाम को हमेशा छीलकर ही खाना चाहिए| बादाम में टैनिन नाम का एक एंजाइम पाया जाता है जो इसके पौषक तत्वों को शरीर में पहुंचने से रोकता है| यह इसके छिलके में पाया जाता है|


छिलका उतार खाएं बादाम
बादाम को रात में भिगो देना चाहिए इसके बाद सुबह बादाम के छिलके उतार कर बादाम को अच्छे ढंग से धोकर खाना चाहिए| सबसे बेहतर होता है इसे बारीक पीस कर खाना| पीसकर खाने से बादाम के गुण में बढ़ोत्तर हो जाती है|


शरीर के दूषित पदार्थों को करता है बाहर
भीगे बादाम में एंटीऑक्सीडेंट,कॉपर और राइबोफ्लेविन होता है जो कई रोगों को दूर रखने में मदद करता है| सुबह के समय बादाम खाने से शरीर में मौजूद जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है| 

पूरा देश नए साल का जश्न मना रहा है| लोग दिल खोलकर 2020 का स्वागत कर रहे हैं| पर इस जश्न के बीच एक बात बार बार सुनाई देती है औऱ वो है ''न्यू ईयर रिजोल्यूशन''| हर कोई अपनी बेहतरी के लिए रिजोल्यूशन लेता है| अगर आपने अब तक ये रिजोल्यूशन नहीं लिया है तो आज हम आपको कुछ ऐसी हेल्दी आदतों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आप अपने जीवन में अपना सकते हैं|

रोज करें एक्सरसाइज-
अपने आप से वादा करें कि आप प्रत्येक दिन कम से कम 40 मिनट व्यायाम करेंगे| आपको एक ही दिनचर्या का पालन करने की आवश्यकता नहीं है, बस सुनिश्चित करें कि आप हर दिन काम करें|योग या मौज-मस्ती से भरा डांस जैसे कि साल्सा, जुंबा करना नए साल के संकल्प को पूरा करने का एक शानदार तरीका हो सकता है| कसरत करना रोमांचक होना चाहिए और कुछ ऐसा जिसे आप नियमित रूप से करने के लिए तत्पर हों|

भरपूर नींद लें-
भरपूर नींद आपके हृदय और रक्त वाहिकाओं को ठीक करने और उन्हें सुधारने के लिए आवश्यक है| निरंतर सोने की कमी के कारण विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आती हैं जो हार्ट और किडनी को प्रभावित करती है, साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ाती है|

आयुर्वेद अपनाएं-
इस साल स्वास्थय संबंधी समस्या से परेशान होने की बजाय आयुर्वेद का सहारा लें| यह इम्यून सिस्टम भी बढ़ाता है| ये सांस से संबंधी समस्याओं से लड़ने में सहायक है| साथ ही यह स्वस्थ रहने में आपकी मदद करता है|

ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं-
यदि आप डॉक्टर से दूर रहना चाहते हैं, तो एक दिन में आठ गिलास पानी पीना ऐसा करने का तरीका है| आपके शरीर को अच्छी तरह से कार्य करने के लिए आवश्यक है साथ ही वजन घटाने, पाचन, सुंदर त्वचा और बालों को सुंदर बनाने में मदद करता है|

 खानपान और तौर-तरीकों में कुछ चीजों का जोड़-घटाव आपको सर्दी की बीमारियों से बचाए रखता है। हल्की ठंड शुरू हो चुकी है और ठंड आपको बीमार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। 

1 गर्म पेय - गर्म दूध हो, चाय हो या कॉफी, सर्दी से आपकी रक्षा करने में सहायक होती है। इसके अलावा गर्म पानी, ग्रीन टी या किसी भी प्रकार का गर्म पेय पदार्थ आपके शरीर में गर्माहट पैदा करता है। अदरक या तुलसी वाली चाय इन दिनों में बहुत लाभदायक होती है।

2 हरी सब्जियां - इस मौसम में हरी सब्जियां खाना स्वास्थ्य लाभ देने के साथ ही सर्दी के दुष्प्रभाव से बचने के लिए शरीर को पोषण भी देता है। इनमें मौजूद पोषक तत्व प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर बीमारियों से बचाते हैं।

3 सूप - सूप भी सर्दी में स्वस्थ रहने का बेहतरीन विकल्प है। यह शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है, साथ ही शरीर में गर्माहट पैदा करता है, जो सर्दी से बचाने में सहायक होती है।

4 सरसों - सरसों का साग हो या सरसों का तेल, गर्म प्रकृति होने के कारण यह सर्दी में आपके शरीर को गर्माहट देने में बेहद लाभदायक है। इससे आप सर्दी में आसानी से बीमार नहीं होते।

5 धूप - ठंडे मौसम में प्राकृतिक रूप से गर्मी देने का काम करती है धूप। प्रति‍दिन पर्याप्त मात्रा में धूप लेना सर्दी के दिनों में आपको स्वस्थ्य रखने में मदद करता है और आप संक्रमण व सर्दी से बच सकते हैं।

  ठंड के मौसम में आम तौर पर प्यास कम लगती है, और यही कारण है कि कई लोग पानी कम ही पीते हैं। लेकिन ये गलती आप पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि पानी की कमी से हो सकती हैं ये 5 बीमारियां 

  •  ऊर्जा की कमी - शरीर के ऊतकों में पानी की कमी होने से आपको शरीर में स्फूर्ति महसूस नहीं होती और थकान भी जल्दी होती है।
  •  कब्ज - पानी की कमी से होने वाली सबसे आम समस्या है कब्ज, जो कई लोगों को होती है। इसके बढ़ने पर गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं।
  •  पेट के अल्सर - पानी की कमी से अम्ल बनने की गति बढ़ जाती है और पेट में छाले हो जाते हैं। इस समस्या के बढ़ने पर यह घातक साबित हो सकती है।
  •  त्वचा संबंधी रोग - पानी की कमी से त्वचा नमी खोती जाती है, जिससे त्वचा संबंधी रोग होने लगते हैं। नमी की कमी से त्वचा में खारिश-खुजली होने लगती है।
  •  यूरिन इंफेक्शन - पानी की कमी से शरीर के टॉक्‍सिन्स बाहर नहीं निकल पाते, जिससे शरीर के अंदर और मूत्र मार्ग में संक्रमण हो सकता है, जो बढ़ने पर कैंसर का रूप भी ले सकता है।

आमतौर पर लोग अस्वस्थ होने पर सूप का सेवन अधिक सेवन करते हैं, लेकिन सूप को अनिवार्य तौर पर अपनी दिनचर्या में शामिल करने के कई लाभ हैं। आइए बात करते हैं, सूप के 10 लाभप्रद गुणों की, आप भी जानिए...

सर्दी जुकाम - सर्दी व ठंड से बचने के लिए गर्मागर्म सूप बेहद कारगर उपाय है। इसके अलावा जुकाम होने या गला खराब होने की स्थिति में भी कालीमिर्च मिला हुआ सूप पीने से बहुत जल्दी आराम होता है।

कमजोरी करे दूर - शरीर में कमजोरी महसूस होने पर सूप का सेवन करना बहुत लाभदायक होता है। यह कमजोरी तो दूर करता ही है, साथ ही प्रतिरक्षा तंत्र को भी और अधिक मजबूत करने में मदद करता है। यह बुखार, शारीरिक दर्द, सर्दी-जुकाम जैसी परेशानियों से लड़ने में मदद भी करता है। इसके अलावा तबियत खराब होने पर सूप के सेवन से किसी प्रकार की कोई परेशानी भी नहीं होती।

पचने में आसान - सूप का सेवन बीमारियों में इसलिए भी किया जाता है, क्योंकि यह आसानी से पच जाता है और किसी प्रकार की परेशानी पैदा नहीं करता। इससे बीमारी के बाद सुस्त पड़ा पाचन तंत्र भी सुव्यवस्थित तरीके से काम करने लगता है।

स्वाद बढ़ाए - अगर आपके मुंह का स्वाद बदल रहा है, और आपको हर चीज बेस्वाद लगने लगी है, तो सूप पिएं। इसे आपको अपना स्वाद वापस लाने में मदद मिलेगी, क्योंकि यह स्वाद बढ़ाने में मदद करता है।

ऊर्जा के लिए - शारीरिक कमजोरी में सूप का सेवन आपको ऊर्जा देता है और आप पहले से स्वस्थ महसूस करते हैं। धीरे-धीरे आपकी ऊर्जा का स्तर भी बढ़ने लगता है और आप स्वस्थ व सेहतमंद बनते हैं, सो अलग। हुआ ना सोने पर सुहागा।

हाइड्रेशन - जब आप अस्वस्थ होते हैं या फीवर के दौरान शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है। इसलिए ऐसे समय में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए सूप का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में पानी की मात्रा और पोषक तत्व दोनों प्रवेश करते हैं।

म्यूकस पतला करें - कमजोरी होने पर म्यूकस मोटा हो जाता है, जिसके कारण बैक्टीरिया और वायरस का खतरा बढ़ जाता है। सूप का प्रतिदिन प्रयोग करने पर म्यूकस पतला हो जाता है जिससे संक्रमण नहीं होता।

वजन कम - अगर आप कम कैलोरी लेना पसंद करते हैं और जल्दी वजन कम करना चाहते हैं, तो सूप से बेहतर क्या हो सकता है। इसमें आपको फाइबर्स और पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मिलते है

  नारियल तेल भी त्वचा पर नहाने के बाद लगा सकते है।सर्द मौसम में नहाने के बाद नारियल तेल लगाना कही ज्यादा फायदेमंद होता है। आइए, जानते हैं सर्द मौसम में नहाने के तुरंत बाद नारियल तेल लगाने के कई फायदे

  • नहाने के बाद अगर आपको महंगे मॉइश्चराइजर, बॉडी क्रीम या बॉडी लोशन प्रयोग करने की आदत है, तो आपके लिए यह काम नारियल तेल भी कर सकता है, वह भी कम दामों पर। नारियल तेल आपकी त्वचा को चि‍कनाई प्रदान करेगा।
  • अगर आपको शरीर के किसी अंग में इंफेक्शन या खुजली की समस्या है, तो नारियल तेल के साथ कपूर मिलाकर अपने बाथरूम में जरूर रखें। हर दिन नहाने के बाद संबंधि‍त स्थान पर इसे लगाना आपको त्वचा की समस्याओं से निजात दिलाएगा।
  • यदि आप अंर्तवस्त्रों के कारण होने वाले निशान, जलन, सूजन फिर खुजली से परेशान हैं, तब भी नारियल तेल और कपूर का यह मिश्रण आपके लिए बेहद फायदेमंद चीज है।
  • चेहरे की सफाई, खास तौर से मेकअप साफ करने के लिए नारियल का तेल किसी भी क्लिंजिंग मिल्क से ज्यादा बेहतर है। रुई के फाहे में थोड़ा नारियल तेल लेकर चेहरे की सफाई करें या फिर पहले चेहरे पर तेल लगा लें फिर रुई से साफ कर लें।
  • हेयर रिमूविंग के लिए नारियल का तेल एक बढ़ि‍या विकल्प है। हेयर रिमूव करने से पहले नारियल तेल से मसाज करने पर आपकी त्वचा नर्म, मुलायम और चिकनी हो सकती है। लेकिन वैक्स‍िंग पर यह प्रयोग कारगर नहीं होगा।

   आंखों को साफ किए बगैर बिलकुल भी न सोएं। लंबी व घनी पलकों के लिए अपनाएं ये टिप्ससुंदरता की जब भी बात होती है तो आंखों का जिक्र जरूर होता है, क्योंकि खूबसूरत आंखें आपकी सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। लेकिन इन आंखों की खूबसूरती में घनी पलकें इसे और ज्यादा सुंदर बना देती हैं। 

जैतून के तेल का करें इस्तेमाल : आप अपनी पलकों को घना करने के लिए जैतून के तेल का रात में सोने से पहले इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए आंखों को अच्छे से साफ करके इसे अपनी आंखों की पलकों पर लगाएं। 

पेट्रोलियम जैली का करें इस्तेमाल : सुनने में आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन ये टिप्स आपके बहुत काम आ सकती है। पेट्रोलियम जैली आपकी पलकों को घना करने में बहुत फायदेमंद है। इसका भी इस्तेमाल आपको रात में सोने से पहले ही करना है।

नारियल का तेल : नारियल का तेल भी आपकी पलकों को घना व लंबा करने में फायदेमंद है। इसके लिए आप थोड़ा-सा नारियल का तेल लें। अब इससे आप हल्के हाथों से अपनी आंखों की मसाज करें और सो जाएं। इसी के साथ ही आप आंखों के मेकअप को रिमूव करने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकती हैं।

बादाम का तेल : बादाम के तेल और विटामिन-ई कैप्सूल के ऑइल को मिला लीजिए। अब इन्हें अपनी पलकों पर लगाएं। यकीनन आपको फायदा होगा लेकिन आपको इसे रेगुलर इस्तेमाल करना है।
 

आज हम आपको बता रहे हैं कि पोस्ट वर्कआउट चुकंदर का जूस पीने के क्या फायदे हो सकते हैं| चुकंदर के जूस को एक सूपरफूड या 'सुपरजूस' माना जाता है क्योंकि यह एथलेटिक प्रदर्शन में सुधार कर सकता है, रक्तचाप को नियंत्रित कर सकता है और रक्त के प्रवाह को बढ़ा सकता है| आयरन, मैग्नीशियम, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर चुकंदर का जूस एक बेहतरीन पोस्ट वर्कआउट ड्रिंक है| बीटरूट का जूस पीने से मांसपेशियों को किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ की तुलना में तेजी से ठीक होने में मदद मिल सकती है| रिसर्च बीस लोगों पर आयोजित किया गया था, जिन्हें तीन ग्रुप्स में बांटा गया| एक ग्रुप ने 250 मिलीलीटर चुकंदर के जूस का सेवन किया, दूसरे ने 125 मिलीलीटर और तीसरे को ने एक प्लेसबो प्रदान किया गया| प्रतिभागियों ने 100 बार जंप करने के 24 से 48 घंटे बाद यह जूस लिया| जिस ग्रुप में चुकंदर के जूस की सबसे अधिक खुराक ली थी, वह तेजी से ठीक हो गया| रिसर्च में पाया गया कि चुकंदर के जूस में नाइट्रिक ऑक्साइड होता है जो तेजी से मांसपेशियों को ठीक करने में मदद करता है और यहां तक कि सूजन को कम करता है|

हमने आमतौर पर देखा है कि लोग कुछ खाकर योग करने के बारे में सोचते हैं, जो कि गलत है। जब भी आप योग करने के लिए जाएं तो उसके लिए खाली पेट होना जरूरी होता है। नहीं तो अपको उलटी भी आ सकती है, जी मिचला सकता है और सांस लेने में भी परेशानी का अनुभव हो सकता है। यदि आपके शरीर में कोई चोट लगी हो और किसी भी आसन को करने में आपको तकलीफ हो रही हो तो आपको योग उस समय नहीं करना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो परेशानी में आ सकते हैं। योग के तुरंत बाद स्नान नहीं करना चाहिए, क्योंकि व्यायाम के बाद शरीर गर्म रहता है और यदि आप एकदम नहाएंगे तो आपको शारीरिक तकलीफ हो सकती है इसलिए योग के 1 घंटे बाद नहाना उचित होता है। सबसे जरूरी बात यह कि यदि आप किसी आसन के बारे में अच्छे से नहीं जानते तो उसे न ही करें। किसी एक्सपर्ट के मार्गदर्शन के बाद ही आसन करें, नहीं तो गलत आसन कोई दूसरी शारीरिक तकलीफ दे सकता है। जब आप योग कर रहे हैं तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि योग करते समय आपको ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। यह आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि योग करते समय हमारे शरीर से पसीना निकलता है और हमारा शरीर गर्म रहता है और ऐसे में हम ठंडा पानी पीते हैं तो सर्द-गर्म की शिकायत हो सकती है और आपको जुकाम व कफ जैसी परेशानी हो सकती है।ऐसे लोग जो योग में नए हैं और योग के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते और उन्हें लगता है कि योग को किसी भी समय किया जा सकता है, पर ऐसा बिलकुल भी नहीं है। योग को दिन के समय नहीं करना चाहिए बल्कि सुबह-सुबह योग करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। वहीं अगर आप बीमार हैं या आपको कोई गंभीर समस्या है, तो उस समय भी योग न करें।

पालक की सब्जी जितनी आसानी से बन जाती है, इसके सेवन से उतनी ही आसानी से आपको सेहत और सौन्दर्य दोनों लाभ मिल सकते है। पालक के रस का सेवन करें या सब्जी खाएं, दोनों ही सेहत और सौन्दर्य के लिए बेहतर हैंजब हरी पत्तेदार सब्जियों की बात करें तो पालक का नाम सबसे पहले आता है। इसका पौधा लगभग एक से डेढ़ फुट ऊंचा होता है। आइए, जानते हैं पालक के पत्तों का किसी भी रूप में सेवन करने से होने वाले फायदे - पालक में कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, लोहा, खनिज लवण, प्रोटीन, श्वेतसार, विटामिन 'ए' और 'सी' भरपूर मात्रा में होते है। जिनकी आपके शरीर को फिट रहने के लिए जरूरत होती है। पालक के पत्ते शरीर में कई प्रकार के विकारों को दूर करने में मदद करते है, जैसे कफ को बढ़ने से रोकते है, श्वास संबंधी समस्या, पित्त, रक्त विकार और बुखार को आने से रोकते है। पालक के पत्तों की सब्जी या भाजी के रूप में सेवन करने से सीने और फेफड़े की जलन जैसे समस्या होने पर राहत मिलती है। पालक शरीर में रक्त को शुद्ध करता है इसलिए यदि महिलाएं अपने चेहरे का सौंदर्य एवं चमक बढ़ाना चाहती हैं, तो उन्हें नियमित रूप से पालक के रस का सेवन करना चाहिए।

हरा प्याज खाने से इम्युनिटी पॉवर बढ़ता है। हरा प्याज चेहरे की झुर्रियों को दूर करता है। इसे खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। हरा प्याज मैक्रोन्यूट्रिशयन को बनाए रखता है। हरा प्याज खाने के कई फायदे हैं। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम बनाए रखता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। एंटी-बैक्टीरियल गुण के कारण ही इसे खाने से पाचन में भी सुधार होता है। हरे प्याज में क्रोमियम होता है। बाल गिरने की समस्या से निजात पाने के लिए प्याज बहुत ही असरकारी है। बालों पर प्याज के रस की मालिश करने से बाल गिरना बंद हो जाते हैं। इसके अलावा, प्याज का लेप लगाने पर कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर से काले होने लगते हैं। सर्दी या जुकाम होने पर प्याज खाने से राहत मिलती है। गठिया में प्याज बहुत ही फायदेमंद होता है। सरसों का तेल व प्याज का रस मिलाकर मालिश करें, फायदा होगा। प्याज कई अन्य सामान्य शारीरिक समस्याओं जैसे मोतियाबिंद, सिर दर्द, कान दर्द और सांप के काटने में भी औषधि का काम करता है। प्याज का पेस्ट लगाने से फटी एड़ियों में फायदा होता है। हिस्टीरिया का रोगी अगर बेहोश हो जाए तो उसे प्याज कूटकर सुंघाएं। इससे रोगी तुरंत होश में आ जाता है। हरे प्याज में एंटी-इन्फ्लामेटरी और एंटी-हिस्टामाइन गुण भी होते हैं इसीलिए यह गठिया और अस्थमा के रोगियों के लिए लाभदायक रहता है। पेशाब होना बंद हो जाए तो दो चम्मच प्याज का रस और गेहूं का आटा लेकर हलवा बना लें। हलवा गर्म करके पेट पर लेप लगाने से पेशाब आना शुरू हो जाता है। प्याज पानी में उबालकर वह पानी पीने से भी पेशाब संबंधी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।

अगर आप भी ऐसे लोगों में से हैं जिन्हें बार-बार भूख लग जाती है, तो हम आपको बता रहे हैं ऐसी 10 चीजों के बारे में जिन्हें आप वजन बढ़ने की चिंता किए बिना खा सकते हैं क्योंकि इन्हें खा कर आपको बहुत देर तक भुख नहीं लगेगी- वजन बढ़ने के कई कारण हो सकते है लेकिन कई बार लोग ज्यादा खाकर भी बेमतलब अपना वजन बढ़ा लेते है। सेब - यह ज्यादा समय तक पेट भरा रखने के लिए एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसमें जल की मात्रा और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। सेब के छिलके में पेक्टिन पाया जाता है, जो भूख को कम करने में मदद करता है। फलि‍यां - बीन्स या फलियों में प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इन्हें पचने में समय अधिक लगता है, और पेट ज्यादा समय तक भरा रहता है। ओटमील या जौ - ओटमील कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होता है, जिसे पचाने में ज्यादा समय लगता है। यह शरीर में उर्जा के स्तर को बनाए रखता है। इसके अलावा यह ब्लड शुगर और इंसुलिन के स्तर को भी मेंटेन करता है, जिससे फैट जमा नहीं होता। सूखे मेवे - बगैर नमक या मसले के सूखे मेवे, खासकर बादाम और अखरोट शरीर में प्रोटीन, फैट्स, फाइबर, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्वों की आवश्यक मात्रा की पूर्ति करते हैं। इससे देर तक पेट भरा रहता है। साबुत अनाज - ज्वार, बाजरा, रागी जैसे साबुत अनाज कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्त्रोत हैं। यह पाचन क्रिया के दौरान धीमी गति से ग्लूकोज रिलीज कर ब्लड शुगर को नियंत्रित करते हैं और इनमें इनमें पाए जाने वाले फाइबर व विटामिन मेटाबॉलिक रेट को नियंत्रित करते हैं। डेयरी प्रोडक्ट - लो फैट डेयरी प्रोडक्ट जैसे- दही, स्किम्ड मिल्क में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है, जो फैट सेल्स को ब्रेक करने में मदद करता है। कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा फैट के लिए जिम्मेदार हार्मोन को स्त्रावित होने से रोकती है। हरी सब्जियां - हरी व पत्तेदार सब्ज‍ियों में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है, और यह वसा के रूप में जमा नहीं होती। इसके अलावा इन सब्जियों में विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह देर तक पेट भरा रखने में सहायक है। पॉपकॉर्न - पॉपकॉर्न में कैलोरी कम और फाइबर अधि‍क मात्रा में पाया जाता है। इसे खाने में समय अधिक लगता है, और संतुष्ट

सूखे मेवों में किशमिश खाना सभी के लिए फायदेमंद है लेकिन खासतौर से महिलाओं के लिए इसे खाना किसी वरदान से कम नहीं है। आइए, आपको बताएं किशमिश खाने से मिलने वाले 7 अनमोल लाभ - महिलाओं के लिए किशमिश है बेहद फायदेमंद, इन 7 सेहत समस्याओं से दिलाएगी निजातवैसे तो 1 आयरन की मात्रा से भरपूर किशमिश महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद है। खास तौर से महिलाओं में अक्सर आयरन की कमी पाई जाती है। ऐसे में किशमिश का सेवन शरीर में आयरन की आपूर्ति के लिए बेहतरीन विकल्प है। 2 अत्यधि‍क मात्रा में फाइबर से भरपूर किशमिश, पाचन संबंधी समस्याओं का समाधान भी है। अगर आपको कब्जियत की समस्या है, तो किशमिश का प्रयोग आपके लिए बेहद फायदेमंद है। 3 किशमिश का सेवन कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने में सहायक है। यह फ्री रेडिकल से बचाकर कैंसर की कोशि‍काओं की वृद्धि‍ को रोकने में सक्षम है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। 4 आंखों की समस्याएं आजकल आम बात है, लेकिन किशमिश के पास इसका इलाज है। इसमें मौजूद विटामि‍न ए, बीटा कैरोटीन, ए-कैरोटीनॉइड और एंटीऑक्सीडेंट आंखों की मांशपेशि‍यों को कमजोर होने से बचाते हैं, साथ ही आंखों की सभी समस्याओं से निजात दिलाते हैं। 5 किशमिश में प्राकृतिक शर्करा भरपूर मात्रा में पाई जाती है जो आपके शरीर में ऊर्जा का संचार करने के साथ ही वजन बढ़ाने में भी मददगार है। कमजोर लोगों के लिए किशमिश का सेवन फायदेमंद है। 6 किशमिश का ही एक प्रकार है मुनक्का, जिसका प्रयोग भूख न लगने पर बेहद फायदेमंद है। अगर आपको भूख नहीं लगती, तो आप मुनक्का को भूनकर उसमें काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर खाएं। ऐसा करने से आपकी भूख बढ़ जाएगी। 7 किशमिश का नियमित सेवन बच्चों का दिमाग तेज करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका नि‍भाता है। इसमें भरपूर मात्रा में बोरान पाया जाता है जो दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

शरीर के विषैले तत्वों को निकालने, खून साफ करने, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने आदि में सहायक होता है हल्दी। आप चाहे तो हल्दी का जूस बनाकर भी पी सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं हल्दी का जूस बनाने कि विधि और इसके सेवन से मिलने वाले 10 बेजोड़ सेहत लाभ। हल्दी का इस्तेमाल सदियों से औषधि के रूप में किया जा रहा है। आइए, पहले जानते हैं हल्दी का जूस बनाने की विधि -सामग्री : (1) कच्ची हल्दी का टुकड़ा या हल्दी पाउडर (2) नींबू और नमक * इसे तैयार करने के लिए पहले आधा नींबू निचोड़ लें और इसमें हल्दी और नमक मिक्स करके मिक्सर या ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें। * अब इस मिश्रण में आवश्यकता के अनुसार पानी मिलाइये और इसका सेवन कीजिए।ठंडी तासीर के लोगों के लिए ये काफी फायदेमंद साबित होगा, जो सेहत के साथ-साथ ब्यूटी से जुड़े फायदे भी देगा। यह खून साफ करने में भी सहायक है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी बढ़िया उपाय है।अब जानते है हल्दी के इस जूस को पीने के फायदे - 1 कच्ची हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं। 2 खासतौर पर पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के सेल्स को बढ़ने से रोकने में सहायक है। 3 हानिकारक रेडिएशन के संपर्क में आने से होने वाले ट्यूमर से भी बचाव करती है। 4 इसका उपयोग सूजन, गठिया, फ्री रेडिकल्स और जोडों के दर्द में लाभदायक है। 5 इंसुलिन के स्तर को संतुलित करने और मधुमेह में फायदेमंद है। 6 एंटीबैक्टीरियल और एंटी सेप्टिक गुण होते हैं। 7 इसमें सोराइसिस जैसे त्वचा संबंधी रोगों से बचाव के गुण होते हैं। 8 इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। 9 हल्दी में वजन कम करने का गुण पाया जाता है। 10 शोध से साबित होता है कि हल्दी लीवर को भी स्वस्थ रखती है।

इस दिन हर लड़की चाहती है कि वो सबसे खूबसूरत नजर आए ताकि सबकी निगाहें सिर्फ उस पर टिकी रह जाए। लेकिन इसके लिए उन्हें क्या करना चाहिए, यही चिंता हर दुल्हनिया को होती है कि ऐसी क्या देखभाल करें जिससे कि उनका निखार शादी के बाद भी बना रहे। यह आपकी त्वचा पर टेम्परेरी असर तो डाल ही देते हैं। लेकिन इन सबका टेम्परेरी असर होता है। यदि आप चाहती हैं कि आपके चेहरे पर ग्लो बना रहे और आप शादी के बाद भी इतनी ही खूबसूरत लगें, तो इस खास उबटन को आपको जरुर अपने ब्यूटी केयर में शामिल करना चाहिए।उड़द की दाल और बादाम का फैस मास्क- उड़द की दाल और बादाम से तैयार ये खास उबटन आपके चेहरे पर ग्लो तो लाएगा ही, साथ ही इसके इस्तेमाल से आपकी त्वचा सॉफ्ट भी नजर आएगी। सबसे पहले रातभर उड़द की दाल को आप पानी में डालकर रखें जिससे कि यह अच्छी तरह से गल जाए, साथ ही 4 बादाम लें और इसे भी रातभर गलाकर रखें। अब इन दोनों को साथ में अच्छी तरह से पीस लें और तैयार पेस्ट को अपने पूरे चेहरे पर लगाएं। 10 मिनट रखने के बाद इसे धो लें। जब आप अपना चेहरा साफ करेंगे तब यह पेस्ट आपके चेहरे पर चिपकेगा, इसलिए इसे बहुत ज्यादा सूखने न दें और हल्का गीला रहने पर ही आप अपने चेहरे को साफ कर लें। चेहरे को धोने के बाद अच्छी तरह से साफ कपड़े से पोंछ लें और मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें। प्री ब्राइडल का असर कुछ समय तक ही नजर आता है और वैसे भी शादी के बाद बार-बार तो पार्लर जाना संभव हो नहीं पाता। वैसे ऐसे बहुत सारे ब्यूटी पैकेजेस होते हैं, जो होने वाली दुल्हनें शादी से पहले लेती हैं।

सर्दी के मौसम में हमें सेहत के साथ-साथ त्वचा का भी खास ख्याल रखने की जरुरत होती है। इसके लिए ऐसी चीजों को चुनना हमेशा फायदेमंद होता है, जो नैचुरल हो। इन्हीं नैचुरल खजाने में से एक है केसर और दूसरा तुलसी। ये दोनों सेहत के साथ-साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। ये दोनों ही त्वचा को नैचुरली ग्लो करने में सहायक होते हैं। केसर रंग को गोरा करके त्वचा में चमक लाता है और तुलसी त्वचा को अंदर से साफ कर, दाग धब्बों को दूर करती है। शरीर में होने वाले त्रिदोषों को संतुलित करने और रोग प्रतिरोधकता बढ़ाने के लिए भी केसर और तुलसी का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद साबित होता है। महिलाओं में होने वाले रोगों में तुलसी और केसर फायदेमंद होते हैं। लेकिन इनकी मात्रा सीमित हो इसका ख्याल जरूर रखना चाहिए। ये दोनों ही बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर हैं जो शारीरिक, मानसिक एवं त्वचा संबंधी समस्याओं को जड़ से मिटा देते हैं। जानिए लाभ - केसर और तुलसी की प्रकृति गर्म है, इसलिए ठंड के दिनों में गर्म दूध के साथ इसका इस्तेमाल आपकी सेहत को बेहतर बनाता है और सर्दी-जुकाम जैसे रोगों को दूर करता है।

दिनचर्या में किए गए कुछ बदलाव आपको सेहतमंद जिंदगी दे सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि किन बातों को आप अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं ताकि आप रहें स्वस्थ। भागदौड़भरी जिंदगी में हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि हम खुद की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं जिसके कारण आज की हूई लापरवाही हमें कई तरह की सेहत से जुड़ी समस्याएं दे जाती हैं। अच्छी नींद सबसे जरूरी होती है। यदि हम अच्छी नींद नहीं ले पा रहे हैं, तो इसका असर हमारी सेहत पर तो पड़ता ही है, साथ ही हमारे मूड पर भी इसका असर देखा जाता है। आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी हम अच्छे से सो नहीं पाते हैं, तो हमारा पूरा दिन आलस में गुजर जाता है और हम काम में मन भी नहीं लगा पाते। इसलिए अच्छे स्वास्थ्य और अच्छे मन के लिए अच्छी नींद का होना जरूरी होता है। व्यायाम हमारे लिए बहुत जरूरी होता है। एक्सरसाइज के जरिए आप फिट तो रहते हैं ही, साथ ही आपको स्फूर्ति भी महसूस होगी इसलिए अपने दैनिक जीवन में व्यायाम को जरूर शामिल करें| रोज खूब पानी पिएं। यह आपके शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है, साथ ही आपके चेहरे पर भी ग्लो आएगा। इसलिए पानी पीने में कंजूसी न करें। कोशिश करें कि अपनी डाइट में प्रोटीन को जरूर शामिल करें।रात का भोजन जल्दी कर लें, साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि रात में ज्यादा हैवी खाना खाने से बचें।मसालेदार खाने का कम से कम सेवन करें| बैलेंस डाइट पर ज्यादा ध्यान दें, साथ ही इसमें पोषक तत्वों को शामिल करें। किसी-किसी की जल्दी-जल्दी खाना खाने की आदत होती है। अगर आप भी इसमें शुमार हैं तो इस आदत को जल्द से जल्द सुधार लें और धीरे-धीरे खाना खाने की आदत डालें। फ्रूट्स को करें अपनी डाइट में शामिल। मौसमी फलों का सेवन जरूर करें। डिनर के बाद कुछ न खाएं। इस मामले में ईमानदार रहें और कोशिश करें कि रात के खाने के बाद फिर कुछ न खाएं। जंक फूड खाने से बचें। यदि आप बाहर के खाने के शौकीन हैं, तो इस आदत में सुधार लाने की जरूरत है। कोशिश करें कि बाहर के जंक फूड से परहेज रखें।

विंटर की शुरुआत से ही आप अपने बाल और ब्यूटी की देखभाल शुरू कर दें तो यह समस्या आपके पास भी नहीं फटकेगी।सर्दियों में बालों में रूसी या डैंड्रफ की समस्या होना बहुत ही कॉमन है। पूरे विंटर सीजन में ज्यादातर लोग कभी ना कभी इस समस्या को जरूर फेस करते हैं। जल्द मिलेगा रूसी से छुटकारा अगर आप रूसी की समस्या से तुरंत आराम चाहते हैं तो दही में अंडे की सफेदी और शहद मिलाकर बालों में लगाएं। फिर 30 मिनट बाद धो लें। आपको एक वॉश में फर्क नजर आएगा। सप्ताह में एक बार ही इस तरीके को अपनाकर आप पूरी सर्दियों खूबसूरत बाल पा सकते हैं। हम सभी जानते हैं कि सिर में ऑइल से मसाज करना बालों और ब्रेन दोनों के लिए अच्छा होता है। क्योंकि स्कैल्प में हेयर मसाज के बाद ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और बालों की ग्रोथ अच्छी होती है। वहीं, ब्रेन रिलैक्स होता है। सर्दियों में सरसों ऑइल को हल्का गर्म करके इससे मसाज करनी चाहिए। आप चाहें तो नारियल का तेल भी यूज कर सकते हैं। अगर आपके बाल काफी रूखे या हार्ड हैं तो सर्दियों में डैंड्रफ से बचने के लिए आप ऑलिव ऑइल यानी जैतून के तेल से बालों में मसाज कर सकते हैं। इससे बाल चिपचिपे भी नहीं होते हैं और डैंड्रफ भी होता है। आप इसे शहद के साथ मिक्स करके हेयर मास्क बनाकर भी यूज कर सकते हैं। यह मास्क लगाने के 30 मिनट बाद शैंपू कर लें। सप्ताह में दो बार ऐसा करने पर डैंड्रफ साफ हो जाएगा। नींबू और शहद को मिक्स करके बालों में लगाने से बालों में रूसी की समस्या खत्म होती है। नींबू में साइट्रिक अम्ल होता है, जो किसी भी तरह के फंगस को पनपने नहीं देता और शहद सिर की त्वचा में नमी बनाए रखता है। इनका मिश्रण आप सप्ताह में 2 से 3 बार बालों में 25 मिनट लगाकर शैंपू कर लें। रूसी की समस्या नहीं होगी। साथ ही आपके बाल शाइनी और स्मूद बनेंगे।

ब्लीच करना जितना आसान है उतना ही असरकारक भी। इसलिए अक्सर गर्ल्स पार्लर जाने की वजाय घर पर ही ब्लीच करना पसंद करती हैं। अगर आप भी ऐसा करती हैं तो ब्लीचिंग के दौरान कुछ सावधानियां जरूर बरतें... अगर आपके चेहरे पर दानें या पिंपल्स हो रहे हैं तो भूलकर भी ब्लीच का उपयोग ना करें। ऐसा करने से आपको इंफेक्शन हो सकता है या आपकी समस्या बढ़ सकती है। साथ ही थ्रेडिंग, फॉरहेड और अपरलिप करान के बाद कभी भी ब्लीच का उपयोग ना करें।चेहरे के अनचाहे बालों को छुपाने और तुंरत ग्लोइंग स्किन पाने का सबसे आसान तरीका है ब्लीच। ब्लीच अलग-अलग कंपनी, ब्रैंड्स और स्किन टोन के लिए आती हैं। आप अपनी स्किन के लिए सही ब्लीच का चुनाव करते समय थोड़ी सी ब्लीच उंगली पर लेकर कान के पीछे लगाएं। यदि आपको जलन या इचिंग का अहसास हो तो आप इस ब्लीच का उपयोग ना करें। इस टेस्ट को वो गर्ल्स जरूर करें, जिनकी स्किन सेंसेटिव है। ब्लीच करते समय कभी भी ब्लीच को उंगलियों की मदद से चेहरे पर ना लगाएं। इसकी जगह स्मूद ब्रश से चेहरे पर ब्लीच लगाएं। इससे आपके नाखून और हाथ भी साफ रहेंगे साथ ही ब्रश से ब्लीच सही तरीके से स्प्रेड होगी। ब्लीच को केवल चेहरे पर ही नहीं बल्कि गले और गर्दन पर भी लगाएं। ताकि स्किन टोन सेम नजर आए। ब्लीच करने से पहले ऐसा करें|ब्लीच करने से पहले चेहरे को फेसवॉश करें। फिर प्री-ब्लीच क्रीम लगाकर हल्के हाथों से 10 मिनट तक मसाज करें। जब स्किन स्मूद और क्लीन हो जाए तो छोटी कटोरी या फेस पैक बोल में 1 से 2 छोटी चम्मच ब्लीचिंग क्रीम निकालें और फिर इसमें 1 से 2 बूंद ऐक्टिवेटर मिलाएं। ध्यान रखें कि मात्रा अधिक ना हो, नहीं तो ऐक्टिवेटर नुकसान पहुंचा सकता है। मात्र 10 से 15 मिनट बाद चेहरे से ब्लीच को ताजे पानी से धो दें। चेहरे को मुलायम कॉटन के कपड़े या टिश्यू पेपर से साफ करें। इसके बाद पोस्ट ब्लीच क्रीम हाथ में लेकर चेहरे, गले और गर्दन पर मसाज करें। आप पार्टी मेकअप के लिए रेडी हैं|अगर आपके चेहरे पर दानें या पिंपल्स हो रहे हैं तो भूलकर भी ब्लीच का उपयोग ना करें। ऐसा करने से आपको इंफेक्शन हो सकता है या आपकी समस्या बढ़ सकती है। साथ ही थ्रेडिंग, फॉरहेड और अपरलिप करान के बाद कभी भी ब्लीच का उपयोग ना करें। इससे जलन या दाने निकलने की समस्या हो सकती है।

मेथी सिर्फ स्‍वाद में ही नहीं, बल्कि स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी फायदेमंद होती है। मेथी को कई बीमारियों के इलाज के लिए अच्‍छा माना जाता है। मेथी के पत्ते हों या फिर बीज दोनों ही अलग-अलग फायदों की वजह से जाने जाते हैं। वैसे तो मेथी के दानों को आप किसी भी सीजन में खा सकते हैं लेकिन मेथी का साग सिर्फ सर्दियों के मौसम में आता है। लिहाजा इस दौरान मेथी का सेवन कितना फायदेमंद है, यहां जानें।मेथी हृदय को स्वस्थ बनाने में मदद करती है। इसमें पोटैशियम और सेलेनियम की अच्‍छी मात्रा होती है। इसलिए आप सर्दियों में जितना हो सके मेथी का सेवन करें। मेथी शरीर में बैड कलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार है। इसमें मौजूद लिपोप्रोटीन कलेस्ट्रॉल के स्‍तर कम करने में मदद करता है और आपको दिल संबंधी बीमारियों से दूर रखता है। इसके अलावा हरी मेथी में गैलेक्टोमनैन होता है, जो हेल्‍दी हार्ट हेल्‍थ के लिए अच्‍छा होता है। मेथी ब्‍लड सर्कुलेशन को भी बेहतर रखने में मदद करती है, जिससे आर्टरी ब्लॉकेज का खतरा भी कम होता है।डायबीटीज के रोगियों के लिए मेथी के बीज हों या मेथी की सब्जी, दोनों ही फायदेमंद है। इसके लिए आप मेथी के बीज रात को पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसी पानी की चाय बनाकर रोजाना 1 कप पिएं। इससे आपको ब्‍लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलेगी और वजन भी नियंत्रित रहेगा। इसमें मौजूद अमिनो ऐसिड इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा। हरी सब्जियां कई पोषक तत्‍वों से भरपूर होती हैं, जो हमारी कई बीमारियों से लड़ने और उन्‍हें काटने में मदद करती हैं। ठीक इसी तरह मेथी भी है। यह आपके जोड़ों के दर्द और हड्डियों के दर्द यानि गठिया या ऑस्टियोपोरोसिस के रोगियों के लिए फायदेमंद होती है। मेथी कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और फॉस्‍फॉरस से भरपूर होती है।मेथी पाचन ठीक करने में भी सहायक मानी जाती है। यह कब्‍ज, अपच और पेट में दर्द की समस्‍या को दूर करती है। रोजाना मेथी के बीज की चाय या मेथी की सब्‍जी का सेवन करते हैं तो आपकी पाचन प्रक्रिया दुरुस्‍त रहेगी और पेट भी साफ रहेगा।आयुर्वेदाचार्य ए के मिश्र कहते हैं मेथी, हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यूनिटी यानी रोगों से लड़ने की क्षमता को मजबूत करने में भी सहायक होती है। मेथी में कई विटमिन्स और मिन

आज पूरा देश प्रदूषण के बढ़ते असर को कम करने के लिए कोई ठोस उपाय ढूंढ रहा है। ऐसे में प्रदूषण के असर को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने लोगों को अपने घर में कुछ खास तरह के पौधे लगाने की सलाह दी है। वो पौधे जिन्हें घर पर लगाने से न सिर्फ आपके घर की खूबसूरती बढ़ेगी बल्कि आप प्रदूषण के असर से भी बचे रहेंगे।
बैम्बू पॉम - वैज्ञानिकों की मानें तो यह पौधा घर में फॉर्मेल्डिहाईड जैसी जहरीली गैस को सोख लेता है। इसके साथ ही यह पौधा प्राकृतिक रूप से नमी के अवशोषक के रूप में भी कार्य करता है। जो कि घरों में मौजूद नमी को दूर करता है।
अरेका पॉम - यह पौधा वायु को शुद्ध करने वाला सर्वोत्तम पौधों की श्रेणी में आता है। इसको घर के अंदर व आसपास लगाने से कमरों के अंदर की वायु शुद्ध होती रहती है।
स्पाइडर पॉम - यह पौधा वायु में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य विषाक्त पदार्थों या अशुद्धियों को दूर करता है। घरों के अंदर की आबोहवा को शुद्ध रखने में अग्रणी पौधा है। यहीं नहीं यह पौधा हवा से फॉर्मेल्डिहाइड जैसी जहरीली गैस को हटाने में सबसे उपयुक्त है।
पीस लिली - हरे रंग की पत्तियों वाले पीस लिली पौधे को को ‘क्लीन-ऑल भी कहा जा सकता है। इसमें सफेद फूल भी खिलते हैं। इन्हें अक्सर बाथरूम या कपड़े धोने के कमरे में रखा जाता है। यह पौधा फॉर्मेल्डिहाइड व ट्राईकोरोथिलीन जैसी जहरीली गैसों को हटाने के लिए जाना जाता है।

इंसोमनिया यानी अनिद्रा रोग एक तरह की बीमारी है। इससे तुरंत तो परेशानी नहीं होती है लेकिन धीरे धीरे यह शरीर के लिए घातक बनती जाती है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को रात के समय नींद नहीं आती है। लोग ऐसा मानते हैं कि इसे बिना दवा के ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं है। नींद न आने की बीमारी को मेडिकल भाषा में इंसोमनिया कहते हैं। इस बीमारी से पीडि़त लोगों को रात में नींद नहीं आती है। ऐसे में उन्हें दूसरी शारीरिक परेशानियां शुरू हो जाती हैं। अनिद्रा रोग यानी इंसोमनिया से ठीक होने के लिए यदि आप ये घरेलू उपाय कर लें तो बिना दवाई के ठीक हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि समस्‍या से छुटकारा पाने का आसान तरीका कोई दवा नहीं बल्कि जीवनशैली में कुछ बदलाव हैं। अगर आप नींद न आने की समस्‍या से जूझ रहे हैं तो आपको लैवेंडर ऑइल का छिड़काव सोने से पहले बिस्‍तर और तकिये पर करना चाहिए। इसकी खुशबू मन को शांत करती है और नींद आने में आसानी हो जाती है। जानकार बताते हैं कि यह कोई बीमारी नहीं है। यह कई तरह के कारणों जैसे तनाव, शरीर में हार्मोंस का बदलाव, जीवनशैली, खराब भोजन और उल्‍टी पुल्‍टी दिनचर्या की वजह से यह समस्‍या हो जाती है। कई मामलों में यह समस्‍या लापरवाही के चलते शुरू होती है और बाद में हैबिट बन जाती है। सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना सबसे पहला और प्रथम उपाय है। होटल के बेड पर अक्‍सर जाते ही नींद और सुकून मिल जाताा है। क्‍योंकि वहां सफाई अच्‍छे से होती है। लिहाजा आप अपने बेडरूप की ठीक से सफाई करें और बेड शीट तकिए का कवर साफ रखें। इसके अलावा पैरदान भी साफ होना बेहद जरूरी है क्‍योंकि इससे पैरों में जर्म्‍स आने से खुजली आदि हो सकती है जो नींद को रोक सकती है।विशेषज्ञ इंसोमनिया को खत्‍म करने के जीवन शैली में बदलाव की बात करते हैं। ऐसे लोग सुबह सूरज की किरणों के सामने कम से कम आधे घंटे तक जरूर बैठें। इससे शरीर को मिलने वाली विटामिन से शरीर ऊर्जावान बनता है। भोजन में वसा की मात्रा बेहद कम हो और ज्‍यादा प्रोटीनयुक्‍त भोजन न करें। खासकर शाम के वक्‍त हल्‍का भोजन उचित है।

कपड़ों से जूलरी तक पहुंचने का सफरपहले सिर्फ गोटा या गोटा पट्टी का काम सिर्फ साड़ियों, दुपट्टे और लहंगे जैसे आउटफिट्स में ही नजर आता था| यंग गर्ल्स और युवतियों की यह ख्वाहिश भी स्वाभाविक है कि उनकी अदा इतनी मनमोहक हो कि बस सभी उन्हें देखते रह जाएं। चूंकि आकर्षण को पूरा करती है हमारी जूलरी और एक्सेसरीज, इसलिए उनका चुनाव भी बहुत जरूरी है। फैशन एक्सपर्ट्स की मानें तो इन दिनों ट्रेंडी है गोटा जूलरी। मेहमानों का भाएगी ये सौगात आजकल ऐसा देखा जाता है कि शादी-ब्याह के समारोहों में गोटा पट्टी की यह जूलरी बास्केट में सजाकर खास मेहमानों के लिए रखी दी जाती है। आप भी ऐसा ही कुछ प्लान कर सकती है। मनुहार के साथ उनसे आग्रह किया जा सकता है कि वे अपनी पसंद से अपने लिए कोई जूलरी पीस चुनें। इससे न सिर्फ मेहमानों का चेहरा खिल उठेगा, बल्कि गोटा की खूबसूरत जूलरी का यह तोहफा उन्हें हमेशा आपके मनुहार भरे सत्कार की याद भी दिलाएगा। लेकिन आजकल जूलरी में सिमट आया है इसका आकर्षण। कुछ समय पहले तक शादी में हल्दी और मेहंदी जैसी रस्मों के फंक्शन में होने वाली दुल्हन के साज श्रृंगार में फ्लोरल जूलरी को प्राथमिकता दी जाती थी, पर अब उसकी जगह गोटा पट्टी की जूलरी पसंद की जा रही है। इसमें बैंगल्स से लेकर ईयररिंग्स, नेकलेस, मांग टीका सभी कुछ बेहतरीन डिजाइन्स में अवेलेबल हैं। रेड, पिंक, ग्रीन, ब्लू जैसे चटख रंगों में गोटा की यह जूलरी बहुत ही खूबसूरत लगती है। कंदन स्टाइल स्टोन्स, मोती, मिरर और रेशमी धागों से मिलकर बनी गोटा या गोटा पट्टी की जूलरी ट्रेंडी होने के साथ ही रिच लुक भी देती है। थोड़ी सी सूझबूझ के साथ इस जूलरी में ताजे खूबसूरत फूलों को भी पिरो सकती हैं। गोटा जूलरी की सबसे अच्छी बात है कि इनकी कीमत भी वाजिब होती है।

इस बदलते मौसम में बीमारियों आसानी से शिकार बना लेती हैं, इसलिए आपको कुछ एहतियात बरतने होते हैं। शरीर के अलावा त्वचा भी इसके चपेट में सबसे पहले आती है। क्योंकि शरीर का सबसे नाज़ुक हिस्सा त्वचा होती है इसलिए इसका ध्यान रखना भी ज़रूरी है। सर्दी का मौसम रूखापन भी लाता है इसलिए अगर आप आप स्किन का ख्याल नहीं करेंगे, तो खाज-खुजली, इंफेक्शन जैसी कई बीमारियों से जूझना पड़ेगा। इसलिए हम आपके लिए ऐसे प्राकृतिक उपाय जिनकी मदद से आपको हर दम मिलेगी दमकती त्वचा।खूबसूरत त्वचा के लिए 4 अचूक उपाय 1. इस मौसम में स्किन इंफेक्शन का ख़तरा भी रहता है, ऐसे में ऐलोवेरा से बेहतर और क्या होगा। ऐलोवेरा त्वचा को नर्म बनाने के साथ ही इंफेक्शन से भी दूर रखता है। नहाने के बाद ताज़ा ऐलोवेरा या फिर ऐलोवेरा वाला मॉइश्चराइज़र का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे लगाते ही ये आपकी त्वचा को फ्रेश बनाती है। अगर आपके शरीर में कहीं भी खुजली या इंफेक्शन गो गया है तो उस हिस्से पर ऐलोवेरा जेल लगा सकते हैं। 2. दशकों से नीम को खूबसूरत त्वचा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। नीम एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल होता है, इसलिए बैकटीरियल या वायरल बीमारियों के लिए रामबाण उपाय है। अगर आप नीम बेज़्ड फेसवॉश यूज़ करेंगे तो पिंपल और रैशेज़ की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। नीम आपकी त्वचा पर नमी भी बनाए रखता है। इसके अलावा आप नहाने के पानी में नीम के पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, यहा तक कि शरीर पर नीम के तेल और खाने में नीम की पत्तियों के इस्तेमाल से आप अपनी स्किन को नैचुरल तरीके से हेल्दी बना सकते हैं। 3. आयुर्वेद में हल्दी किसी वर्दान से कम नहीं है। यह शरीर को अन्दर और बाहर से स्वस्थ रखने का काम करती है। चेहरे पर हल्दी युक्त फेसपैक के इस्तेमाल से आप मुहांसे, झुर्रियों आदि की समस्याओं से दूर रहते हैं। दूध में हल्दी मिलाकर पीने या खाने में इसके इस्तेमाल से यह आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। साथ ही यह शरीर में नैचुरल क्लींजर का काम करती है। 4. हर्बल चाय भी ऐसे मौसम में शरीर पर अच्छा असर डालती है। ग्रीन टी, अदरक-शहद, नींबू, तुलसी, कैमोमाइल टी शरीर में क्लींजर का काम करती हैं। आयुर्वेदिक हर्बल टी पीने से कई तरह की स्किन प्रॉब्लम ख़त्म हो जाती हैं।

हेयरकट जो देंगे आपको खूबसूरती के साथ जवां लुक एक हेयर स्टाइल जहां आपके लुक में नयापन लाता है तो वहीं आप हेयर कट के महत्व को समझ सकती हैं। सही हेयर कट आपके पूरे लुक को बदलने का काम करता है। अलग-अलग हेयर कट्स केवल आपके बालों या चेहरे में ही बदलाव नहीं लाते, बल्कि वो आपका पूरा लुक अट्रैक्टिव बना देते हैं। मेसी स्टाइल इस स्टाइल को अपनाने में जरा भी न घबराएं। यह हेयर स्टाइल हर उम्र की लेडीज पर खूबसूरत लगता है। ऐसा लुक पाने के लिए अपने बालों को एक साइड करके बांधे, मेसी लुक पाने के लिए चोटी को हल्के हाथों से खींचकर थोड़ा सा खोलें। यह हेयर स्टाइल आपके फीचर्स को उभारता है और उम्र को भी कम दिखाने में मदद करता है। डेनिम और साड़ी पर यह हेयर स्टाइल स्टेटमेंट बन गया है। शॉर्ट कट यह कट हमेशा चलन में रहा है। बाल चाहे पतले हों या मोटे, यह हर टेक्सचर पर जंचता है। इससे आप युवा नजर आएंगी। ऐसे बालों को सेट करन में टाइम भी लगता है, बिजी गर्ल्स इसे ट्राई करें। फ्रिंज कट फ्रिंज हेयर कट इन दिनों ट्रेंड में है। एक बेहतरीन फ्रिंज स्टाइल कट आपके चेहरे की रौनक को चार गुना बढ़ा देता है। जिससे आपको जवां दिखने में मदद मिलती है। यह एक ऐसा हेयर कट है, जो सभी फेस कट पर अट्रैक्टिव दिखता है। यह कट आपकी उम्र दस साल तक घटा देता है। इस कट के साथ कई तरह के हेयर स्टाइल बनाए जा सकते हैं। कोशिश करें कि बन न बनाएं, इससे उम्र ज्यादा लगती है। जरूरी टिप्स रूखे-सूखे बाल आपके चेहरे की रौनक छीन लेते हैं। बालों को हेल्दी बनाने के लिए आप एक अच्छे शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल करें। बालों की चमक के लिए बीच से लेकर सिरों तक, सीरम या कंडीशनर के साथ थोड़ा सीरम एड करके बालों को मुलायम व शाइनी बनाया जा सकता है। यंगर लुक के लिए डैमेज और दो-मुंहे बालों को महीने में एक बार जरूर ट्रिम करवाएं।

चेहरे पर निकलने वाले दाने महज खूबसूरती ही नहीं छीनते, बल्कि टेंशन भी बढ़ा देते हैं। न चाहते हुए भी बार-बार ध्यान चेहरे पर और हाथ मुहांसों पर जाते रहते हैं। लेकिन आप जानती हैं इनकी वजह क्या है? क्यों किसी के चेहरे पर हमेशा इनका कब्जा रहता है? दरअसल, स्किन को बैलेंस रखने के लिए त्वचा अपने-आप तेल निकालती है। जो न सिर्फ उसे मुलायम रखता है, बल्कि उसे कीटाणुओं से भी बचाता है। टीनएज में बहुत ज्यादा ऑयल निकलने की वजह से तेल ग्रंथियों का मुंह बंद हो जाता है और त्वचा के नीचे तेल एकत्रित होने लगता है। इस वजह से कीटाणु हमारी त्वचा पर हमला कर तेल ग्रंथियों के मुंह के पास दर्दनाक दानों मुंहासे को जन्म देते हैं। तो आइए जानते हैं इनसे छुटकारा पाने के आसान उपाय। बदलें अपना फेसवॉश: मुहांसों के निकलने की वजह चेहरे से निकलने वाला एक्स्ट्रा ऑयल निकलने और बैक्टीरिया होते हैं। तो सबसे पहले अपना फेसवॉश बदलें। हमेशा ऑयल फ्री फेसवॉश जिसमें सैलिसाइलिक एसिड वाले हो, इस्तेमाल करें। सैलिसाइलिक एसिड एंटी बैक्टीरियल होती है जिससे डेड स्किन की प्रॉब्लम दूर होती है। डेड स्किन पोर्स को बंद कर देती है जो एक्ने की वजह है। कारगर है फेशियल ब्रश: मुहांसे वाली जगह पर फेशियल ब्रश को गोलाई में कुछ देर घुमाएं। यह बंद पोर्स को ढीला करके एक्ने को हटाने में मदद करेगा। बेहतर होता है ऑयल फ्री एसपीएफ: ऑयल से जहां पोर्स बंद होते हैं वहीं फ्रेग्नेंस त्वचा में जलन और लाली पैदा करती हैं। कोशिश करें आपका एसपीएफ ऑयल और फ्रैंगरेंस फ्री हो। चुनें सही फाउंडेशन: वैसे तो फाउंडेशन हमेशा अपने स्किन टोन के हिसाब से लेना चाहिए। लेकिन, इसके साथ ही वो सैलिसाइलिक एसिड युक्त और ऑयल फ्री भी होना चाहिए। ध्यान दें: एक्ने निकलने पर उस पर बेंजॉयल पैरॉक्साइड लगाकर हटा दें। इसका इस्तेमाल हफ्ते में एक बार से ज्यादा न करें। फिर भी कोई फायदा न हो तो थोडा सा कपूर हाथ में मसलकर उस जगह पर लगाएं। फिर ठंडे पानी से धो लें। अपनाएं ये घरेलू उपचार: दिन में चेहरे को कम से कम 5-6 बार ठंडे पानी से धोएं। त्वचा के बंद छिद्रों को खोलने के लिए कैलामाइन का इस्तेमाल करें। नीम, हल्दी और काली मिर्च का पेस्ट लगाना रहेगा कारगर। मुलतानी मिट्टी में नीबू और पुदीने के पत्तों का रस मिलाकर चेहरे पर लग

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